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न शादी हुई…ना बच्चे..मशहूर सिंगर का ऐसा अंत, जिसने सबको रुला दिया,नाम जानकर दंग हो जाएंगे।

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सोचिए जिस औरत की आवाज सुनकर पूरा हिंदुस्तान रोया भी मुस्कुराया भी और प्यार करना भी सीखा उसकी अपनी जिंदगी में आखिर क्या था। जिसने हजारों प्रेम गीत गाए उसकी जिंदगी में खुद का जीवन साथी ही नहीं था। जिसकी आवाज ने मां की ममता को करोड़ों घरों तक पहुंचाया।

उसकी अपनी कोई संतान नहीं थी। जिसके नाम पर करोड़ों की दौलत और मुंबई में आलीशान घर था उसकी आखिरी विरासत आखिर किसके हिस्से में गई? और जिस बहन के साथ बचपन से लेकर जिंदगी के आखिरी दौर तक रिश्ता जुड़ा रहा। क्या सच में दोनों बहनों के बीच कभी ऐसा विवाद हुआ कि रिश्ता टूटने की नौबत आ गई। और फिर वो दिन आया का कमरा। बाहर करोड़ों लोगों की दुआएं और अंदर जिंदगी और लड़ती एक ऐसी आवाज जिसे पूरी दुनिया पहचानती थी। 6 फरवरी 2022 एक खबर आई और पूरा देश सन रह गया। वो आवाज हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थी। लेकिन सवाल यह है कि आखिर पर्दे के पीछे कैसी थी उस महान सिंगर की जिंदगी? क्यों उन्होंने कभी शादी नहीं की? क्यों उनकी कोई संतान नहीं हुई? उनकी करोड़ों की संपत्ति का क्या हुआ? बहन केसाथ रिश्ते की असली कहानी क्या थी और आखिरी दिनों में उनके साथ कौन मौजूद था?

तो यह कहानी है उस मशहूर गायिका की जिसे दुनिया भारत की स्वर्ग कोकिला कहती थी। नाम है लेजेंड्री सिंगर लता मंगेशकर। लता मंगेशकर का जन्म आज ही के दिन 28 सितंबर 1929 को इंदौर में हुआ था। संगीत उनके ब्लड में था। उनके पिता पंडित दीनाना मंगेशकर खुद मशहूर शास्त्रीय गायक थे। लेकिन बचपन में ही जिंदगी ने लता जी से बहुत कुछ छीन लिया था। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। उस वक्त उनकी उम्र इतनी भी नहीं थी कि कोई लड़की जिंदगी की इतनी बड़ी जिम्मेदारी को उठा सके। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने गाना गाना शुरू किया और धीरे-धीरे वही आवाज हिंदी सिनेमा की पहचान बन गई। जिस लड़की ने कभी परिवार चलाने के लिए स्ट्रगल किया था। व आगे चलकर ऐसी आवाज बनी जिसके बिना इंडियन सिनेमा के इतिहास की कल्पना करना मुश्किल है। उन्होंने हजारों गाने गाए और कई दशकों तक फिल्मों में अपनी आवाज दी। इसके लिए उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न भी मिला।

लेकिन जितनी बड़ी उनकी कामयाबी थी उनकी निजी [संगीत] जिंदगी उतनी ही खामोश रही। उनके जीवन में शादी और रिश्तों को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुई जरूर लेकिन उन्होंने पब्लिकली अपनी पर्सनल लाइफ को हमेशा काफी हद तक प्राइवेट ही रखा। उन्होंने ना पति चुना ना ही मां बनने का रास्ता लेकिन इसके बदले उन्होंने अपनी पूरी लाइफ म्यूजिक को दे दी। यानी कि जिस उम्र में लोग अपने घर परिवार का सपना देखते हैं, उस उम्र में लता जी स्टूडियो में घंटों काम करती रही। उनकी जिंदगी में बच्चे नहीं थे। लेकिन उनके गाने करोड़ों लोगों के लिए उनकी आवाज को मां जैसी ममता दे देते थे।

वहीं लता जी की छोटी बहन आशा भोसले भी आगे चलकर दुनिया की महान सिंगर्स में शामिल हुई। दोनों बहनों के बीच तुलना भी खूब होती रही। कभी कहा गया कि दोनों में कंपटीशन है। कभी उनके रिश्ते में दरार की खबरें भी आई लेकिन असली कहानी थोड़ी अलग थी। लता जी ने खुद एक इंटरव्यू में माना था कि दोनों बहनों के बीच पास्ट में मतभेद जरूर हुए थे। उन्होंने आशा की कम उम्र में शादी के फैसले को लेकर अपनी नाराजगी का जिक्र किया था। लेकिन उन्होंने यह भी साफ कहा था कि दोनों बहनें बेहद करीब थी और उनके बीच किसी तरह की प्रोफेशनल दुश्मनी नहीं थी।

दरअसल आशा भोसले जब बहुत कम उम्र में गणपतराव भोसले से शादी करके घर से चली गई थी, तब लता जी इस फैसले से खुश नहीं थी। बाद में आशा की शादी मुश्किल दौर से गुजरी और साल 1960 के आसपास वो अपने बच्चों के साथ मायके लौट आई थी। लता जी ने बाद के सालों में अपनी बहन के साथ रिश्ते को लेकर कई बार साफ किया कि मीडिया में जिस तरह की दुश्मनी दिखाई गई वैसी बात असल में नहीं थे। यानी कि रिश्तों में मतभेद तो थे लेकिन अपनापन भी था। अब बात उस सवाल की जो लता जी के निधन के बाद कई लोगों के मन में आया।आखिर इतनी बड़ी गायिका अपने पीछे क्या छोड़कर गई हैं?

तो लता मंगेशकर मुंबई के पैड रोड स्थित प्रभु कुंज में लंबे समय तक रही। यह सिर्फ एक घर नहीं था। यह उनके परिवार और उनकी जिंदगी की यादों से जुड़ी एक जगह थी। प्रभुकुंज में उनके भाई-बन और परिवार के दूसरे सदस्य भी जुड़े हुए थे। पुराने समय की कई रिपोर्ट्स में इस घर में परिवार के कई सदस्यों के एक साथ रहने का जिक्र भी मिलता है। वहीं उनकी संपत्ति को लेकर निधन के बाद कई मीडिया रिपोर्ट्स में अलग-अलग अनुमान सामने आए क्योंकि लता जी की निजी वसीयत और संपत्ति के बंटवारे को लेकर पब्लिक रूप से मिली जानकारी सीमित ही है। फिर आया जिंदगी का आखिरी अध्याय। जनवरी 2022 92 साल की लता मंगेशकर कोरोना और निमोनिया से जूझ रही थी। उन्हें मुंबई के ब्रिज कैंडली हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। कुछ समय के लिए उनकी हालत में सुधार भी आया लेकिन फिर से उनकी तबीयत बिगड़ गई और 6 फरवरी 2022 को सुबह करीब 8:12 पर उन्होंने आखिरी सांस ली।

डॉक्टर्स के मुताबिक उनकी मौत मल्टी ऑर्गन फेलियर की वजह से हुई। वो करीब 28 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रही थी। लता जी के आखिरी दिनों में उनकी बहन आशा भोसले उनके साथ थी। भाई हृदयनाथ भी अस्पताल में थे। परिवार उनके साथ था और जिन डॉक्टर्स और नर्सेज ने उनके आखिरी दिनों में उनकी देखभाल की उनके लिए भी लता जी सिर्फ एक मरीज नहीं थी बल्कि वो एक ऐसी शख्सियत उनके लिए बन चुकी थी जिससे उनका इमोशनल जुड़ाव हो गया था। फिर आया वो पल जब अस्पताल से उनका पार्थिव शरीर उनके घर प्रभु कुंज लाया गया और वहां से मुंबई के शिवाजी पार्क तक उनका अंतिम सफर शुरू हुआ। जिस आवाज को सुनने के लिए पूरा देश रेडियो के सामने बैठा करता था। उस आवास को आखिरी विदाई देने के लिए हजारों लोग उमड़ पड़े। शाहरुख खान से लेकर आमिर, रणबीर कपूर और बॉलीवुड के तमाम सितारे उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। उनके भाई हृदनाथ मंगेशकर ने लता को दी थी। वहीं लता मंगेशकर की मौत तो हुई लेकिन उनकी आवाज कभी नहीं मरी। जब भी कहीं ना कहीं कोई पुराना गीत बजता है तो उस गीत के साथ उनकी आवाज फिर से लौट आती है। वो आवाज जिसे मौत भी खामोश नहीं कर सकी।

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