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प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौ;त: मां ने बेटे के बारे में दिया चौंकाने वाला बयान,जानकर रो पड़ेंगे

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आपका बेटा क्या ऐसा कदम उठा सकता था? कितना निडर था? क्या कहेंगे? नहीं ऐसे नहीं लगे। ऐसे नहीं लगे कि कदम उठा सकते। हम बेटा में कोई ना रहे हम पढ़ो लिखो सब अच्छा रहो। कोई कब नहीं तो पढ़ाई लिखाई देश रहो कि हम भक्ति करें भक्ति करें। चलो सीधा का तो अभी जाने सो जाने भैया हम तो गए तो अपन से मिली हां नहीं है वो तो का अभी बता थे आप मां हो आपने कैसा था आपका बेटा क्या कहना हम बेटा में कोई ना हम पढ़ो लिखो हम पढ़ो लिखो सब अच्छा रहो कोई कब नहीं गांव बस्ती वाले बैठे उनसे पूछ लो तो पढ़ाई लिखाई को उद्देश्य रहो कि हम भक्ति करें भक्ति करें चलो सीधा हां अब वो तो का तो जाने ईश्वर जाने.

आप क्या कहते हैं आपको क्या लगता है हम ऐसे लगत है कैसे नहीं कर सकेआपको क्या लगता है आपका बेटा क्या ऐसा कदम उठा सकता था? कितना निडर था? क्या कहेंगे? नहीं ऐसे नहीं लगे। ऐसे नहीं लगे कि जी कदम उठा सकते थे। ओके। वहां ऊपर वाला जाने। अपन तो वहां नहीं रहे।

आपकी फोन पर बातचीत होती? नहीं। तभी आप वृंदावन गए वहां कैसे चला गया? क्या कहानी थी वहां? आगे उसने परिक्रमा करी। हां। फिर एक बार वृ गया फिर आ गया। हां। फिर दूसरी बार फिर गया। हां। फिर कही मम्मी हम यही भक्ति कर हैं। हां। फिर कुछ दिन रहा 8 महीना। हां। फिर फोन आया कि गुरु दक्षा आपके बिना नहीं मिलेगी। हम हम गए हैं। हमने समझाया तो कहीं अब नहीं समझेगा कहीं उद्देश्य कर लेने दो कही जब से नहीं मिला बातचीत नहीं.

एक दो बार गए भी तो वहां मिलने नहीं दिए क्या बोलते कि वो यहां नहीं है कहीं यहां है कहीं वहां है सुबह यहां कहीं शाम के यहां एक दिन लगता है तीन दिन गए हम फिर भी नहीं मिला हम हम नहीं जो हो गया तो आपने बोला नहीं महाराज से क्या मिलने नहीं दे रहा कहीं भक्ति में है कहीं है कहीं गुरु जी के साथ में कहीं भीड़ के कारण मिलन नहीं दे रहे हैं अब महाराज से क्या बोल रहे हैं महाराज के लोग अब बोलते हैं कई के पता है कई के नहीं है काउंटर वाले जाने नहीं अब उनके पास खबर गई कि नहीं दीपक के पास अभी बता सकत है अपन ने तो फोटो भेजा सब करें.

हम उनके मम्मी पापा आए मिलने चाहते हैं हम तो मिलने नहीं देते थे क्यों उनको हम नहीं मिल हम क्या क्यों नहीं मिलने देते थे आपको क्या लगता है तो भक्ति कर रहा है बोलते हम हमने कहीं हो सकत है अपना नियम जाने नहीं है और जो ना जाने ऐसे हो कैसा स्वभाव में कैसा था क्या सुबह में जब पढ़ा लिखा सब रहा उसके ठीक सुबह का चुन लिखा इत भी रहा तो घंटो दोद घंटा पूजा पत्री करें पढ़ो लिखो सब है कितनी बार आते थे साल में एक आध बार घर आते नहीं गुरु दक्षा मिली जब नहीं कितने साल दो साल हो गए

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