अमेरिकी के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर मुस्तबा खामनेई को एक अस्पताल के मलबे से निकाला गया था। यह खुलासा ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य मोहसेन हैदरी ने की है। असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ही ईरान के सुप्रीम लीडर के चुनाव में अहम भूमिका निभाती है।
हैदरी ने क़तर के एक टीवी नेटवर्क से बातचीत में यह खुलासा किया। उन्होंने बताया कि पहले के एक में मुस्तफा घायल थे। जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक हैदरी ने कहा कि इसके बाद राजधानी तेहरान के तीन अस्पतालों पर की गई। तीसरे अस्पताल में मुस्तफा भर्ती थे।
के बाद उन्हें मलबे से बाहर निकाला गया। बता दें कि मुस्तफा खामने की सेहत को लेकर दुनिया भर में तरह-तरह की अटकलें लगती हैं। अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट बताती है कि इस में खामने का चेहरा और वह गंभीर रूप से घायल हुए हैं। कभी-कभी खामने की की अफवाह भी उड़ती है जिसका ईरान ने हमेशा खंडन किया है।
अब यह जान लेते हैं कि मुस्तफा कैसे चुने गए ईरान के सुप्रीम लीडर। 28 फरवरी 2026 से ईरान पर शुरू हुए इजराइल और अमेरिका के में आया अली खामने की हो गई थी। जो मुस्तफा के पिता और देश के तत्कालीन सुप्रीम लीडर थे। उनकी के बाद मुस्तफा को ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया गया। इस चुनाव के पीछे की कहानी भी हैदरी ने बताई। उन्होंने कहा कि जिस असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स को नए सुप्रीम लीडर को चुनना था, वह भी की चपेट में आ गई थी। ईरान के कोम्स शहर में असेंबली के सचिवालय में हुई थी। जिसमें आठ लोग मारे गए थे। साथ ही नए सुप्रीम लीडर के चुनाव से जुड़ी रिपोर्ट और सिफारिशों के कागज भी नष्ट हो गए थे। इसके बाद असेंबली के सदस्यों ने कागज पर अपना वोट दिया। हैदरी ने बताया कि मुस्तफा का नाम प्रस्तावित करने वाले वह पहले सदस्य थे।
असेंबली को जानकारी मिली थी कि खामनी स्वस्थ हैं और उनमें ईरान का सुप्रीम नेता बनने की क्षमता है। वो धार्मिक योग्यता, ईमानदारी और देश चलाने के गुण जानते हैं। हैदरी ने बताया कि मुस्तफा को शुरू में पता नहीं था कि उन्हें नया सुप्रीम लीडर चुन लिया गया है। जब ईरान के सरकारी टीवी पर इसका ऐलान हुआ तब उन्हें यह बात पता चली।
आपको यह बताते चले कि इसी महीने यानी सितंबर 2026 में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिस्कियन ब्रिक्स समिट के दौरान भारत आए थे। इस दौरान उन्होंने इंडिया टुडे के संवाददाता से मुस्तफा खामने के बारे में भी बातचीत की। जब उनसे सवाल पूछा गया कि क्या मुस्तफा खामने जिंदा हैं? उसके जवाब में उन्होंने कहा कि मुस्तफा खाम जिंदा हैं और अपना काम कर रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिका उन्हें ढूंढ नहीं पा रहा है और इसी वजह से उनके बारे में गलत खबरें फैलाई जा रही हैं। आपको यह जानकारी होगी कि फरवरी में ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अली खामई के कार्यालय पर हुए के बाद उनके बेटे मुस्तफा खामई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। इसके बाद से उनके नाम से कुछ बयान और संदेश जरूर सामने आए हैं। लेकिन उनकी कोई ऐसी तस्वीर, वीडियो या ऑडियो सामने नहीं आई है जिसमें स्वतंत्र रूप से यह पुष्टि हो सके कि वह सुरक्षित हैं और जिंदा है।
पर 22 सितंबर को ईरान के सरकारी मीडिया ने मुस्तफा खामन के नाम से एक हाथ से लिखी हुई चिट्ठी जारी की। बताया गया है कि यह चिट्ठी 1 अगस्त की है। इसे ईरान की एयररोस्पेस फोर्स के कमांडर माजिद मौसवी को लिखा गया था। चिट्ठी में मुस्तफा ने मौसवी की रिपोर्ट की तारीफ की और सप्लाई चेन से जुड़े काम को जारी रखने की बात भी कही। साथ ही उन्होंने कमांडर और उनके साथ काम करने वाले सैन्य कर्मियों की सुरक्षा का ध्यान रखने को भी कहा।
इस चिट्ठी की सबसे बड़ी अहमियत इसलिए है क्योंकि अगर यह वास्तव में मुस्तफा खामने ने ही लिखी है तो यह इस बात का संकेत होगा कि 1 अगस्त तक वह जीवित थे और खुद लिखने की स्थिति में थे। हालांकि अभी एक इंपॉर्टेंट बात यह भी है कि इस चिट्ठी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।