अपने नाम के पीछे ‘अमिताभ’ लगाना पसंद नहीं करतीं जया बच्चन? जानिए संसद में हुए हंगामे का पूरा सच! में संसद के मानसून सत्र के दौरान एक ऐसा वाकया हुआ जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया। समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद और दिग्गज अभिनेत्री जया बच्चन तब भड़क गईं जब सदन के सभापति ने उन्हें “श्रीमती जया अमिताभ बच्चन” कहकर पुकारा।इसके बाद संसद से लेकर सोशल मीडिया तक सिर्फ एक ही सवाल तैरने लगा—
आखिर जया बच्चन अपने नाम के पीछे पति अमिताभ बच्चन का नाम क्यों पसंद नहीं करतीं?आइए जानते हैं इस पूरे विवाद के पीछे की मुख्य वजहें और जया बच्चन की सोच।1. “महिलाओं का अपना भी वजूद होता है”संसद में जब उनका पूरा नाम पुकारा गया, तो जया बच्चन ने तुरंत इस पर ऐतराज जताया। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा:> “यह जो नया चलन शुरू हुआ है कि महिलाएं अपने पति के नाम से जानी जाएंगी… क्या उनका अपना कोई अस्तित्व नहीं है?
क्या उनकी अपनी कोई पहचान या उपलब्धि नहीं है?”> जया बच्चन का मानना है कि एक महिला की पहचान सिर्फ उसके पति के नाम तक सीमित नहीं होनी चाहिए। शादी के बाद भी महिला का अपना स्वतंत्र व्यक्तित्व (Identity) कायम रहना चाहिए।2. खुद की बड़ी पहचान और उपलब्धियांजया बच्चन (पूर्व जया भादुड़ी) अमिताभ बच्चन से शादी करने से पहले ही भारतीय सिनेमा की एक बहुत बड़ी स्टार बन चुकी थीं। ‘गुड्डी’, ‘अभिमान’, ‘कोरा कागज़’, और ‘कोशिश’ जैसी फिल्मों के दम पर उन्होंने खुद का एक बड़ा नाम बनाया था।इतना ही नहीं, राजनीति में भी वह पिछले दो दशकों (2004 से लगातार) से राज्यसभा सांसद हैं।
उनका मानना है कि उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, वह उनकी अपनी मेहनत का नतीजा है, न कि उनके पति के नाम का।3. आधिकारिक रिकॉर्ड का पेंचइस बहस के बाद जब सभापति और उप-सभापति ने रिकॉर्ड देखा, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि जया बच्चन ने खुद ही चुनाव आयोग और संसद के कागजातों में अपना नाम ‘जया अमिताभ बच्चन’ दर्ज कराया हुआ है। नियमों के मुताबिक आसन पर बैठा व्यक्ति वही नाम पुकारता है जो सरकारी दस्तावेजों में लिखा होता है।जया बच्चन का कहना था कि भले ही कागजों में औपचारिक रूप से वह नाम लिखा हो,
लेकिन बातचीत या संबोधन में सिर्फ ‘जया बच्चन’ बोलना ही काफी होना चाहिए।4. स्वाभिमान या गुस्सा?यह पहली बार नहीं है जब जया बच्चन संसद में अपने बयानों या तेवरों को लेकर चर्चा में आई हों। वह हमेशा से अपने कड़े और बेबाक अंदाज के लिए जानी जाती हैं। उनका यह रुख दिखाता है कि वह महिला सशक्तिकरण और व्यक्तिगत पहचान (Self-Identity) के मुद्दे पर किसी भी मंच पर समझौता करने को तैयार नहीं हैं—चाहे सामने पति का नाम ही क्यों न हो!आपकी क्या राय है?क्या शादी के बाद महिलाओं को अपनी पहचान के लिए पति के नाम की जरूरत नहीं होनी चाहिए, या जया बच्चन का यह गुस्सा गैर-जरूरी था? कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं!