करीब 500 फिल्में और कई टीवी शोज करने वाले अभिनेता मुस्ताक खान अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि मुंबई में अमिताभ बच्चन की मदद से उन्हें अपना पहला घर मिला था। दोस्तों वीडियो में आगे बढ़ने से पहले प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन को जरूर प्रेस कर दीजिएगा। तो चलिए दोस्तों वीडियो को शुरू करते हैं। हिंदी सिनेमा में करीब पांच दशकों तक अपने दमदार अभिनय से छाए रहने वाले अभिनेता मुस्ताक खान अब हमारे बीच नहीं रहे। मुंबई में गुरुवार 24 सितंबर को लिवर कैंसर से जंग लड़ते [संगीत] हुए उन्होंने दम तोड़ दिया। मुस्ताक उन कलाकारों में से थे जिन्होंने 80 के दशक में कैरियर शुरू किया और 21वीं सदी के दूसरे दशक तक काम करते रहे। मुस्ताक ने अमिताभ बच्चन के साथ भी कई फिल्में की। उन्होंने 2024 में दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि कैसे अमिताभ बच्चन ने पहला घर लेने में उनकी मदद की थी।
मुस्ताक खान ने 2 साल पहले डिजिटल कमेंट्री को दिए इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन से मिली मदद के बारे में बताया था। वह कहते हैं बच्चन साहब को तो मैं भूल नहीं सकता। क्योंकि बच्चन साहब ने तो मेरे को उन दिनों जब मेरी शादी हुई थी और मेरे पास मकान नहीं था। तो आप लोगों को पता होगा कि हमारे यहां एक अभी पता नहीं है कि नहीं मेरे ख्याल से है। खत्म हो गया है वह। एक स्कीम थी [संगीत] सीएम कोटे की। 10% बोलते हैं उसको जो आर्टिस्ट कोटा होता है जो आपको गवर्नमेंट की तरफ से सीएम की तरफ से आपको 10% में घर मिलता है वह मुस्ताक खान ने बताया था कि बच्चन साहब उस वक्त एमपी थे कांग्रेस से इलाहाबाद से आपको याद होगा और बच्चन साहब के साथ मैं फिल्म की शूटिंग कर रहा था और मैं अपनी बीवी को लेकर गया था शूटिंग पर मैंने उनको बोला था सर ऐसे ऐसे तो वह बोले ओके नो प्रॉब्लम प्रॉब्लम यू जस्ट गिव मी अ लेटर। आई विल गिव यू अ लेटर। यू जस्ट गो टू शरद पवार। मीट हिम एंड हैंड ओवर द लेटर। यानी तुम मुझे एक लेटर दो। मैं तुम्हें एक लेटर दूंगा। तुम बस शरद पवार के पास जाओ और उन्हें लेटर दो। और आपको यकीन नहीं होगा।
मतलब मुझे 3 दिन में उनके दफ्तर से फोन आ गया कि आपका लेटर तैयार है। मुस्ताक खान ने बताया कि बच्चन साहब की मदद से उन्हें एक फ्लैट मिला था जो अभी तक उनके पास है। उन्होंने कहा कि उनका वह फ्लैट काली इलाके में है। मुस्ताक खान ने अपने करियर में अमिताभ बच्चन के साथ कालिया, मैं आजाद हूं, मृत्युदाता और मेजर साहब जैसी फिल्मों में काम किया था। मुस्ताक खान का जन्म मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में हुआ था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। इसीलिए एक्टर बनने बनाने का ख्याल कोसों दूर था। मुस्ताक के माता-पिता चाहते थे कि वह डॉक्टर बने। इस चक्कर में वह मेडिकल की तैयारी करने लगे। साइंस को उन्होंने साल भर समय दिया। परीक्षा में भी बैठे मगर आंसर शीट भरते-भरते उन्हें यह समझ आ गया कि वह इस काम के लिए नहीं बने। फिजिक्स, केमिस्ट्री [संगीत] और मैथ्स में काफी कम नंबर आए।
तंग आकर उन्होंने बीए करने का फैसला किया। इससे उन्हें कॉलेज में एक्टिंग करने के काफी मौके मिले। मुस्ताक शुरुआत से ही एक्टर बनना चाहते थे। स्कूली दिनों में वह अपनी [संगीत] इस कला के कारण काफी पसंद किए जाते थे। सातवीं क्लास तक तो वह खुद नाटक भी लिखने लगे थे। जिसमें वह खुद ही डायरेक्टर और एक्टर हुआ करते थे। कॉलेज में तो वह इतने पॉपुलर हो गए कि प्रोफेसर्स खुद उनसे कहते कि एक्टिंग की तरफ निकल लो। मगर उनके पिता को यह बात जमती नहीं थी। इसकी एक वजह यह भी थी कि उन्होंने मुस्ताक को कभी अभिनय करते नहीं देखा था। मगर उनके भाई को उनके टैलेंट का पता था। इसीलिए घर में सबसे ज्यादा वही मुस्ताक को एक्टर बनने के लिए प्रेरित करते थे। उनकी वजह से मुस्ताक मुंबई तक जा सके।
शुरुआती दिनों में उनके पास रहने और खाने की जगह तक नहीं थी। इस कारण वह अक्सर भूखे पेट सड़क किनारे सो जाते थे। लेकिन जब उन्होंने थिएटर करना शुरू किया तब उनकी स्थिति बेहतर होने लगी। मुंबई आने के कुछ समय बाद मुस्ताक ने नेशनल एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन को ज्वाइन किया। वहां 6 महीने के कोर्स में उन्होंने एक्टिंग की बारीकियां सीखी। फिर उन्होंने इपटा यानी इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन को ज्वाइन किया। वहां एक्टिंग करते हुए उन्हें अपनी पहली मूवी अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है मिली। इसमें नसीरुद्दीन शाह, सबाना आजमी और स्मिता पाटिल लीड रोल में थे। मूवी में मुस्ताक का किरदार स्मिता से फ्लर्ट करता था। कैरेक्टर छोटा था, मगर उनके कैरियर को पुश देने के लिए काफी जरूरी भी। मुस्ताक ने बाप नंबरी बेटा 10 नंबरी हम है राही प्यार के मुझसे शादी करोगी गदर एक प्रेम कथा वेलकम और वांटेड जैसी कई फिल्मों में काम किया है। हालिया वर्षों में वह भाभी जी घर पर हैं फन ऑन द रन जाट स्त्री 2, गदर 2 और बाला जैसी मूवीज में नजर आए। यही नहीं टीवी पर उन्होंने कुछ रंग प्यार के ऐसे भी अदालत भारत एक खोज और वागले की दुनिया जैसे सोच में भी काम किया है। करीब 5 साल पहले उन्हें लीवर कैंसर डिटेक्ट हुआ था। इलाज के बाद वह ठीक हो गए थे। मगर हाल ही में उनकी यह बीमारी दोबारा लौट आई। इस कारण लगभग 15 दिन पहले उन्हें मुंबई के नानावती हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। मगर 24 सितंबर को उनका निधन हो गया। तो दोस्तों, आज का यह वीडियो यहीं समाप्त करते हैं। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए आप सभी को टाटा बाय-ब टेक केयर।