वैजयंतीमाला सिर्फ खूबसूरत अदाकारा ही नहीं, बल्कि अपने किरदारों को लेकर बेहद स्पष्ट सोच रखने वाली अभिनेत्री थीं। 1955 में बिमल रॉय की फिल्म देवदास में उन्होंने चंद्रमुखी का यादगार किरदार निभाया। उनके अभिनय को खूब सराहा गया और उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस पुरस्कार दिया गया।
लेकिन वैजयंतीमाला ने यह सम्मान स्वीकार करने से इनकार कर दिया।उनकी नाराजगी पुरस्कार की श्रेणी को लेकर थी। उनका मानना था कि चंद्रमुखी फिल्म में महज सहायक किरदार नहीं थी, बल्कि सुचित्रा सेन द्वारा निभाई गई पारो के समान ही महत्वपूर्ण भूमिका थी। इसलिए उन्हें लगा कि उन्हें ‘सपोर्टिंग एक्ट्रेस’ के रूप में सम्मानित करना उनके किरदार के महत्व को कम करना है।
वैजयंतीमाला का यह फैसला उस दौर में बेहद साहसी माना गया। वह फिल्मफेयर पुरस्कार ठुकराने वाली पहली विजेता के रूप में भी जानी जाती हैं।
दिलचस्प बात यह है कि बाद में उन्होंने साधना, गंगा जमुना और संगम के लिए फिल्मफेयर के सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार स्वीकार किए।इस घटना ने साबित कर दिया कि वैजयंतीमाला अपने काम और अपनी पहचान को लेकर समझौता करने वालों में नहीं थीं।