उज्जैन में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को करने की हर कोशिश नाकाम हो रही है। स्थानीय लोग इसे मान रहे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु खड़े हनुमान जी के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंच रहे हैं। क्या यह वाकई कोई है या प्रशासन के सामने आ रही कोई की जरूरत क्यों पड़ी? मध्य प्रदेश की उज्जैन नगरी में साल 2028 में सिंहस्त होना है। इसी के लिए शहर की सड़कों के चौड़ीकरण का काम चल रहा है। उज्जैन की ऐसी ही एक सड़क को चौड़ा करने का प्रोजेक्ट तब अटक गया जब रास्ते में हनुमान जी का एक मंदिर आ गया। तय हुआ कि मंदिर को जरूरी है। शुरुआत हुई चार दीवारी और मंदिर के ऊपरी ढांचे को से।
नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों ने यह काम आसानी से पूरा भी कर लिया। लेकिन उसके बाद चुनौती थी मंदिर में विराजे खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को प्रस्थापित करने की। बीते चार दिन में हर जुगत आजमा ली गई। से लेकर और दूसरे लगाए गए। लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से तक नहीं। भारी से भी प्रतिमा टस से मस नहीं हो पाई।
सोशल मीडिया के जरिए यह खबर की तरह फैल गई। फिर क्या था? ना सिर्फ उज्जैन बल्कि आसपास के कई शहरों से भक्तों का तांता लग गया। लोग इसे आस्था और देवीय से जोड़कर देख रहे हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। भजन कीर्तन होने लगे। महा आरती में तो जैसे आस्था का उमड़ पड़ा। शिप्रा आरती की तर्ज पर ही हनुमान जी की भव्य आरती की गई। इस दौरान भी की गई और माहौल में जय श्री राम और जय हनुमान का जयघोष सुनाई दिया। महाकाल के दर्शन के लिए देश दुनिया से उज्जैन पहुंचने वाले श्रद्धालु अब खड़े हनुमान जी के दर्शन के लिए भी पहुंच रहे हैं।
दर्शन के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। करीब 150 साल से खड़े हनुमान जी का यह मंदिर उज्जैन की आस्था का प्रतीक है। मंदिर का बाहरी ढांचा टूटने के बाद फिलहाल प्रतिमा के इर्द-गिर्द टेंट लगा दिया गया है। पहले और अब में यह फर्क है कि लोग अब इंस्टा और ये सब देख के पूरा सोशल मीडिया देख के यहां पे आ रहे हैं। पूछ रहे हैं कि ये हनुमान जी कौन से हैं जो खड़े हैं।
से जहां एक तरफ हनुमान जी के लिए भक्ति भाव उमड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर एक्सपर्ट्स इसे बता रहे हैं। जमीन पर खड़े हनुमान जी की प्रतिमा 8 फीट ऊंची है। प्रतिमा को बिना किसी सहारे के खड़ा करने के लिए जिस शिला पर स्थापित किया गया है। वो सका आधार सामान्य प्रतिमाओं की तुलना में ज्यादा मजबूत लगता है। प्रतिमा करीब000 साल पुरानी होने का अंदाजा लगाया जा रहा है। विक्रम यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट प्रोफेसर रमन सोलंकी के मुताबिक हो सकता है कि प्रतिमा का निर्माण के पत्थर से किया गया हो। उनका मानना है कि इसका संबंध परंपरा और राजा भोज के समय से हो सकता है।
हालांकि डॉक्टर सोलंकी ने यह भी साफ किया कि फिलहाल प्रतिमा के असल उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल है। के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है। नगर निगम अब हर एहतियात बरतने के बाद ही प्रतिमा को करेगा।
खड़े हनुमान जी के संदर्भ में माननीय पुजारी महोदय से हमारी चर्चा हुई थी। पुजारी महोदय का ऐसा आग्रह था कि एक बार इस तरीके से भी करा लिया जाए। किसी भी तरीके से कोई असुविधा निर्मित ना हो। अपनी जगह हैं और भक्ति का अपनी जगह। मंदिर परिसर में भजन मंडलियां भी लगातार भजन कीर्तन कर रही हैं। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक प्रतिमा नहीं बल्कि शहर की धार्मिक पहचान का हिस्सा है।
यही वजह है कि लोग चाहते हैं कि जिस तरह से फिल्म में नीम करौली बाबा के अपमान के बाद उन्हें ट्रेन से उतार दिया जाता है और तमाम कोशिशों के बाद भी हिलती नहीं उसी तरह हनुमान जी की प्रतिमा को में प्रशासन नाकाम रहा है। नीमकरली बाबा को लोग हनुमान जी का आंशिक अवतार मानते हैं। यही वजह है कि उनके जीवन पर बनी इस फिल्म का नाम भी हनुमान अंश रखा गया।
वैसे उज्जैन में हनुमान जी की प्रतिमा की यह सारी तैयारी आस्था के एक और महा आयोजन सिंहस्त 2028 के लिए की जा रही है। ताकि सिंहस्त से पहले उज्जैन को करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए बेहतर बनाया जा सके।