अपनी अदाकारी औरकॉमेडी से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले एक्टर राजपाल यादव इन दिनों पर्दे पर नहीं, बल्कि अदालत के चक्कर काट रहे हैं. जीवन के कई उतार-चढ़ाव देख चुके एक्टर के सामने इस समय कानूनी लड़ाई का सबसे मुश्किल दौर खड़ा हो गया है. हालात ऐसे बन चुके हैं कि अगर हाथ से वक्त फिसल गया तो कॉमेडी का यह बादशाह सीधे जेल की सलाखों के पीछे नजर आ सकता है.
बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियनराजपाल यादव की जिंदगी में अगले कुछ घंटे बेहद अहम हैं. पर्दे पर अपनी कॉमेडी से लोगों को हंसाने वाले एक्टर इस वक्त एक कानूनी मामले को लेकर मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं.मामला ऐसा है, जिसमें एक तारीख और एक बड़ी रकम दोनों बेहद मायने रखती हैं. दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद जहां राजपाल यादव के सामने सरेंडर करने की नौबत आ गई थी. वहीं, अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के>बाद तस्वीर थोड़ी बदली है. अदालत ने उन्हें फिलहाल एक मौका दिया है, लेकिन इसके साथ ऐसी शर्त रखी है, जिसे पूरा करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है. अब नजर इस बात पर है कि अगले कुछ घंटों में क्या होता है.
अदालत के गलियारों की गहमागहमी, बार-बार मिलती तारीखें और सरेंडर का लटका हुआ डंडा… यह सब किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है, लेकिन राजपाल यादव के लिए यह कड़वी हकीकत बन चुका है. अगले 48 घंटे और 10 सितंबर की तारीख उनके करियर और निजी जिंदगी के लिए बेहद निर्णायक साबित होने जा रही है.
हालांकि, यह राहत बिना शर्त नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगर एक्टर बुधवार यानी 9 सितंबर तक कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करते हैं तो उन्हें फिलहाल सरेंडर करने से छूट मिलेगी.कोर्ट ने साफ कर दिया कि अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी, लेकिन उससे पहले उन्हें एक बड़ी शर्त पूरी करनी होगी. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यदि राजपाल यादव 10 सितंबर तक सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करवा देते हैं तो उन्हें फिलहाल सरेंडर करने और जेल जाने से छूट मिल जाएगी. आसान शब्दों में कहें तो 5 करोड़ रुपये का ड्राफ्ट ही उनके लिए जेल
सितंबर को सरेंडर करने की जो स्थिति बन रही थी, उससे राजपाल यादव को फिलहाल राहत मिल सकती है, लेकिन इसके लिए 5 करोड़ रुपये जमा करना जरूरी है.हाईकोर्ट ने क्या दिया था निर्देशये केस सालों पुराने चेक बाउंस और लेनदेन विवाद से जुड़ा हुआ है. दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने पिछले आदेश में राजपाल यादव को राहत देने से इनकार करते हुए 10 सितंबर तक हर हाल में सरेंडर करने का निर्देश दिया था. हाईकोर्ट ने उन्हें सजा के खिलाफ आगे कानूनी रास्ता अपनाने के लिए समय दिया था, लेकिन यह समयसीमा अब खत्म होने वाली थी. इसी बीच राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.