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23 साल तक भारत से दूर क्यों रहीं ममता कुलकर्णी? जानिए पूरा सच

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बॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया को पीछे छोड़कर संन्यासिनी और अध्यात्म के मार्ग पर चलने वाली पूर्व अभिनेत्री ममता कुलकर्णी इन दिनों अपने बयानों और महाकुंभ में हुई उनकी उपस्थिति को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में एक बातचीत के दौरान उन्होंने अपने जीवन के सबसे बड़े रहस्यों, 23 साल तक भारत न लौटने के कारणों और अपनी आध्यात्मिक साधना पर खुलकर बात की।

ममता कुलकर्णी पर अतीत में कई गंभीर आरोप लगे थे, जिसके चलते उन्हें देश छोड़ना पड़ा था। इस बारे में बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया:”23 साल तक मैंने अपने भारत की भूमि पर कदम नहीं रखा क्योंकि मैंने संकल्प लिया था कि मुझ पर जो भी आरोप लगाए गए हैं, अदालत द्वारा पहले वे आरोप साफ किए जाने चाहिए। शुरू में कोई मामला था ही नहीं। उन्होंने सिर्फ ममता कुलकर्णी के नाम का इस्तेमाल करके पब्लिसिटी पाने के लिए मेरा नाम शामिल किया था।”उन्होंने आगे बताया कि किस तरह सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने उन मामलों को खारिज कर दिया और उन्हें न्याय मिला।

कुंभ मेला और ‘पूर्ण माता’ होने का भ्रमकुंभ मेले के दौरान उनके प्रति लोगों की श्रद्धा और रथों के रुकने की घटना पर उन्होंने विनम्रता से जवाब दिया। जब लोगों ने उन्हें ‘संपूर्ण माता’ कहा, तो उन्होंने खुद को केवल एक ‘शिष्या’ बताया।फिल्मी दुनिया से जुड़े लोगों के संन्यास और वापस लौटने के उदाहरण (जैसे विनोद खन्ना) पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मार्ग कोई दिखावा या कुछ दिनों का नाटक नहीं है:”दूध को जब आप मथते हैं और वह घी में बदल जाता है, तो एक बार जब वह घी बन जाता है, तो आप उसे वापस दूध में नहीं बदल सकते। तो, मैं घी बन गई हूँ। यह ब्रह्मविद्या सचमुच कोई मज़ाक नहीं है।

“23 साल की कठोर तपस्या और हठयोगममता कुलकर्णी ने अपने संन्यास के पीछे की कठिन साधना का जिक्र करते हुए अपनी साधना के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने महीनों तक अन्न का त्याग किया और चरम हठयोग के माध्यम से आदि शक्ति को प्रकट करने का प्रयास किया:”मैंने महीनों तक खाना छोड़ दिया था। अपने 12वें दिन के बाद पाँच दिनों तक मैं बिना पानी के रही, और 15वें दिन मेरा देवी के साथ दिव्य साक्षात्कार हुआ। और उसके बाद ही मैंने भोजन ग्रहण किया।”

भौतिक सुखों और फ्लैटों के खंडहर बनने का सचबातचीत के दौरान जब भौतिक संपत्ति और फ्लैटों की स्थिति पर बात आई, तो उन्होंने साफ कर दिया कि उन्हें अब सांसारिक मोह-माया से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने बताया कि उनके फ्लैट 25 सालों से बंद हैं और खंडहर बन चुके हैं, लेकिन उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं है क्योंकि एक असली योगी के लिए भौतिक घर कोई मायने नहीं रखता।उन्होंने अपनी बात को समाप्त करते हुए आध्यात्मिक दार्शनिक संदर्भ दिया कि कैसे भगवान को भी लीला करने के लिए भक्तों या माध्यमों (जैसे रामायण में हनुमान) की आवश्यकता होती है, और उन्होंने अपने जीवन को पूरी तरह से उस ‘भयंकर चंडिका’ (प्रकृति/ईश्वर) को समर्पित कर दिया है।

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