हिंदी सिनेमा में एक वह दौर भी था जब फिल्मों में एक्शन की खूब डिमांड हुआ करती थी। फिल्म के हीरो के साथ-साथ मेकर्स के लिए भी एक दमदार विलेन चुनना भी बड़ी चुनौती हुआ करती थी। 70 और 80 के दशक में एक से बढ़कर एक खलनायक हुए हैं। जिनमें जीवन, प्राण, अजीत, रंजीत, प्रेम चोपड़ा, अमसद खान, अमरीश पुरी और डेनी डैंगसों समेत कई बेहतरीन विलेन शामिल हैं। यह नाम आज भी लोगों को याद है, लेकिन एक नाम ऐसा भी है जिसे पर्दे पर आते ही देखकर लोग डर जाया करते थे। हालांकि समय के साथ लोग उन्हें भूलते चले गए। जिस इंडस्ट्री में उन्होंने अपनी जिंदगी के कई साल दे दिए। आज वहां भी उनका नाम बहुत कम सुनाई देता है। हम बात कर रहे हैं माणिक ईरानी की जिन्हें लोग बिल्ला के नाम से भी जानते हैं। साल 1983 में आई जैकी श्रॉफ की फिल्म हीरो ने माणिक ईरानी को एक ऐसी पहचान दी जिसे वह जिंदगी भर भूल नहीं पाई। फिल्म में उनका किरदार बिल्ला था और इस नाम से वह इतने मशहूर हुए कि बच्चा-बच्चा उन्हें बिल्ला के नाम से जानने लगा। माणिकानी की मौत कैसे हुई इस बारे में कोई स्पष्ट और पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। कुछ खबरों में दावा किया गया कि 90 के दशक में ज्यादा शराब पीने की वजह से उनकी मौत हुई तो कुछ रिपोर्ट्स में उनकी मौत को हादसे से जोड़ा देखा गया। वहीं कुछ अन्य खबरें में ऐसा दावा भी किया गया कि माणिक किरानी ने आत्महत्या की थी। इन दावों के पीछे की सच्चाई क्या थी?
इसकी पुख्ता जानकारी आज भी सामने नहीं आई है। लेकिन इस वीडियो में हम आपको माणिक किरानी के फिल्मी सफर के साथ-साथ उनके परिवार और निजी जिंदगी से जुड़ी उन बातों के बारे में भी बताएंगे जिनका जिक्र बहुत कम होता है। तो वीडियो शुरू करने से पहले हमेशा की तरह आपसे एक छोटी सी गुजारिश है। अगर आप हमारे चैनल पर नए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर लें और वीडियो को लाइक करना ना भूलें। बॉलीवुड के इस विलेन को लोग असली नाम से नहीं बिल्ला के नाम से जानते हैं। बॉलीवुड के इस विलेन को उनके असली नाम से शायद ही बहुत कम लोग जानते होंगे। ज्यादातर लोग उन्हें माणिक की रानी के नाम से नहीं बल्कि बिल्ला के नाम से जानते हैं। हो सकता है कि नाम सुनकर आपको तुरंत याद ना आए कि माणिक की रानी कौन थे। लेकिन अगर उनकी तस्वीर आपके सामने आ जाए तो शायद आप भी कह उठेंगे। अरे यह तो वही बिल्ला है। पुरानी फिल्मों में आपने उन्हें जरूर देखा होगा। 70 और 80 के दशक में उन्होंने खलनायक और बदमाशों के किरदारों को खूब निभाया। उस दौर के कई बड़े अभिनेताओं के साथ उन्होंने काम किया। पर्दे पर उनका चेहरा लंबा, चौड़ा, शरीर और डरावना अंदाज देखकर दर्शकों के मन में खौफ पैदा हो जाता है। माणिक रानी का अलग अंदाज। माणिक्य रानी का अपना ही एक अलग अंदाज था। उनका लुक ऐसा था कि कोई भी उन्हें देखकर डर जाए और उस पर उनकी दमदार डायलॉग डिलीवरी उनके किरदार को और प्रभावशाली बना देती थी। स्क्रीन पर माणिक ईरानी के आते ही दहशत का माहौल बन जाता था। दर्शकों के लिए वह किसी सुपरस्टार से कम नहीं थे। भले ही उन्हें फिल्मों में अक्सर छोटे या सहायक किरदार ही मिले। माणिक रानी ने साल 1974 में फिल्मी दुनिया में कदम रखा। उनके शुरुआती दौर में वह गुंडे और बदमाशों के किरदारों में नजर आए। इसके बाद उन्होंने कालीचरण, त्रिशूल, मिस्टर नटवर लाल, शान और कसम पैदा करने वाले की जैसी कई फिल्मों में काम किया। सुभाष घई की फिल्म कालीचरण में माणिक किरानी ने गूंगे खलनायक का किरदार निभाया था। बोलने के लिए ज्यादा संवाद ना होने के बावजूद उन्होंने अपने हावभाव और व्यक्तित्व से दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ी थी। इस तरह माणिक्य की रानी ने 80 और 90 के दशक में विलेन और बदमाशों के किरदारों के जरिए अपनी एक अलग पहचान बनाई और पर्दे पर अपना खौफ कायम रखा। डॉन में बने अमिताभ बच्चन के बॉडी डबल माणिक गिरानी यानी बिल्ला का जन्म कब
और कहां हुआ इसके बारे में ज्यादा प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनका जन्म मैसूर में एक पारसी परिवार में हुआ था। माणिक ईरानी ने फिल्मों में बतौर स्टंट मैन भी काम किया था। अपने शुरुआती दौर में वह फिल्मों में हीरो के बॉडी डबल के रूप में नजर आते थे। बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने अमिताभ बच्चन की मशहूर फिल्म डॉन में उनके बॉडी डबल के रूप में कई स्टंट किए। बताया जाता है कि माणिक रानी की लंबाई अमिताभ बच्चन से थोड़ी ज्यादा थी। इसीलिए कई स्टंट सीन में वह बॉडी डबल के तौर पर इस्तेमाल किए गए थे। डॉन सुपरहिट साबित हुई और फिल्म में अमिताभ बच्चन के अभिनय और एक्शन की खूब तारीफ हुई। लेकिन माणिक रानी जैसे स्टंट कलाकारों के योगदान को उस दौर में वह पहचान और क्रेडिट नहीं मिल पाया जिसके वे हकदार थे। पाप और पुण्य से एक्टिंग करियर की शुरुआत। माणिक रानी ने साल 1974 में शशि कपूर और शर्मिला टैगोर स्टारर फिल्म पाप और पुण्य से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। इस फिल्म में उन्होंने अजीत के गुगरे का छोटा सा किरदार निभाया था। अपनी पहली ही फिल्म में नेगेटिव किरदार निभाने वाले माणिक की रानी ने अपनी पर्सनालिटी और स्क्रीन प्रेजेंस से लोगों का ध्यान खींचा। इसके बाद उन्हें लगातार फिल्मों में छोटे-बड़े नकारात्मक किरदार मिलने लगे और धीरे-धीरे वह फिल्म इंडस्ट्री में एक पहचाना हुआ चेहरा बन गई। माणिक ने की कई यादगार फिल्में। माणिक ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई फिल्मों में काम किया। इनमें कालीचरण, त्रिशूल, डॉन, विश्वनाथ, मिस्टर नटवर लाल, शान, सिलसिला, नास्तिक और मंगल पांडे जैसी फिल्में शामिल हैं। कालीचरण में उनका गूंगे बदमाश का किरदार आज भी पुराने सिनेमा के दर्शकों को याद है। इसके बाद वह अमिताभ बच्चन के साथ त्रिशूल में भी नजर आए। इस फिल्म में उनका किरदार काफी दमदार था और उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ एक्शन सीन भी किए। बिल्ला बनकर घर-घर में बनाई पहचान। साल 1983 में सुभाष घई के निर्देशन में फिल्म हीरो रिलीज हुई। इस फिल्म में जैकी श्रॉफ और मीनाक्षी शेषाद्री मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म में शमी कपूर, संजीव कुमार, शक्ति कपूर और मदन पुरी जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए।
इसी फिल्म में माणिक ईरानी ने बिल्ला नाम के विलेन का किरदार निभाया था। माणिक ने इससे पहले भी कई नकारात्मक किरदार निभाए थे। लेकिन हीरो के बिल्ला ने उन्हें ऐसी पहचान दी कि उनका अस्थि नाम पीछे छूट गया और लोग उन्हें बिल्ला के नाम से पहचानने लगे। आज भी जब पुराने हिंदी सिनेमा के खतरनाक विलेन की बात होती है तो माणिक किरानी का बिल्ला वाला किरदार लोगों को याद आ जाता है। पुरानी हवेली में बनकर डराया हैवान। मणिक किरानी के बारे में यह बात भी बहुत कम लोग जानते हैं कि रामसे ब्रदर्स की हॉरर फिल्म पुरानी हवेली में उन्होंने एक हैवान का किरदार निभाया था। उनका यह रूप इतना डरावना था कि दर्शकों के बीच उनका खौफ और बढ़ गया था। कहा जाता है कि फिल्मों में उनके डरावने किरदारों का बच्चों पर भी काफी असर पड़ता था। यहां तक कि जब वह आम जिंदगी में सड़क से गुजरते थे तो बच्चे उन्हें देखकर छिप जाया करते थे। माणिक्यरानी ने अपने करियर में करीब 100 फिल्मों में काम किया। फिल्मों में उनके ज्यादातर किरदार छोटे होते थे। इसीलिए वह एक साल में कई-कई फिल्मों में काम कर लेते थे। बाद की फिल्मों में माणिक की रानी अक्सर गलियों के गुंडे और बदमाशों के किरदारों तक सीमित होते चले गई। दीदार में बाटली दादा बाप नंबरी बेटा 10 नंबरी मैं कोल्हापुरी दादा और कसम पैदा करने वाले की मैं बल्लू दादा जैसे किरदारों से पता चलता है कि निर्देशक उनकी लंबी कद काठी और
दमदार व्यक्तित्व का किस तरह इस्तेमाल करते थे। करीब 6 फुट लंबे माणिक किरानी अपने शरीर को लेकर काफी संजीदा रहते थे। उस दौर में जब बॉडी बिल्डिंग का चलन फिल्म इंडस्ट्री में आज की तरह आम नहीं था। तब माणिकरानी नेशनल हेल्थ लीग जिम के नियमित सदस्य बताए जाते थे। वह जानते थे कि फिल्मों में उनके लिए उनकी अलग कद काठी और शरीर ही सबसे बड़ी पहचान थी। अपनी लंबाई, मजबूत शरीर और कुछ मेकअप की मदद से वह कुछ ही सेकंड के शॉट में दर्शकों के मन में सिरहन पैदा कर देते थे। यही वजह थी कि 80 के दशक के मध्य में जब हिंदी हॉरर फिल्मों का दौर आया तो डरावनी और पैशाचिक किरदारों के लिए भी माणिक ईरानी को खूब इस्तेमाल किया गया था। माणिक के डायलॉग भी थे मशहूर। माणिक ईरानी के किरदार ही नहीं बल्कि उनके डायलॉग भी काफी ज्यादा प्रसिद्ध रहे। उनकी खास डायलॉग डिलीवरी उनके किरदारों को और ज्यादा प्रभावशाली बना देती थी। उनके कुछ चर्चित डायलॉग जैसे आशिक की जगह जमीन पर नहीं ऊपर होती है और मैं इस हरामजादे की वो हालत बनाऊंगा कि वैद्य और हकीम भी परेशान हो जाएंगे और सोचेंगे कि थोबड़ा कौन सा है और हाथ पैर कौन से हैं। इस तरह के डायलॉग और उनकी दमदार आवाज ने माणिकी रानी को उस दौर के खलनायकों के बीच अलग पहचान दी। नीची जिंदगी में आया दर्द। पर्दे पर खौफ पैदा करने वाले माणिक किरानी की निजी जिंदगी के बारे में बहुत कम जानकारी सामने आती है। उनकी जिंदगी के आखिरी दौर को लेकर कई तरह की बातें और दावे किए जाते रहे हैं। कहा जाता है कि उनकी पत्नी उन्हें छोड़कर चली गई थी। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे की परवरिश अकेले की। बेटे को उन्होंने अपने दम पर पालापोसा और बड़ा किया
। लेकिन जिंदगी ने उन्हें एक और बड़ा दर्द दिया। बताया जाता है कि अचानक उनके बेटे की तबीयत खराब हो गई और बाद में उसकी मौत हो गई। बेटे की मौत का सदमा माणिक किरानी के लिए बेहद गहरा था। कहा जाता है कि इस घटना के बाद वह बुरी तरह टूट गए और शराब की तरफ उनका झुकाव बढ़ गया। बेटे की मौत ने तोड़ दिया। मीडिया रिपोर्ट्स और कुछ पुराने दावों के अनुसार बेटे की मौत के बाद माणिक्य रानी रात दिन शराब के नशे में रहने लगे थे। जिस इंसान ने पर्दे पर अपने खतरनाक किरदारों से दूसरों को डराया था, वह असल जिंदगी में अपने ही दुखों से लड़ रहा था। बेटे की मौत का गम और अकेलापन उनकी जिंदगी पर भारी पड़ता गया। शराब की लत ने उनकी हालत और खराब कर दी। दरअसल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार माणिक ईरानी की पत्नी उन्हें छोड़कर चली गई थी। उनके निजी जीवन में काफी उतार-चढ़ाव आए थे। बच्चे उनका एक बेटा था जिसका नाम शूर ईरानी था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक बेटे की कम उम्र में या गंभीर बीमारी के कारण मृत्यु हो गई थी। बेटे की मौत के सदमे और अकेलेपन के कारण ही उन्होंने अत्यधिक शराब पीना शुरू कर दिया था। जिसके चलते 16 जून 1991 को मात्र 38 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था। कैसे हुई माणिक ईरानी की मौत? माणिक ईरानी की मौत को लेकर आज भी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। उनकी मृत्यु कब कहां और किस परिस्थिति में हुई इस बारे में अलग-अलग रिपोर्ट्स में अलग-अलग दावे किए गए हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि उनकी मौत ज्यादा शराब पीने की वजह से हुई थी। वहीं कुछ जगहों पर उनकी मौत को हादसे से जोड़कर बताया गया। इसके अलावा कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया कि माणिक किरानी ने आत्महत्या की थी। लेकिन इन दावों की स्वतंत्र और पुख्ता पुष्टि नहीं हो पाई है। इसीलिए माणिक रानी की मौत की वास्तविक वजह को लेकर निश्चित रूप से कुछ कहना मुश्किल है। इतना जरूर है कि बिल्ला यानी माणिक के रानी आज हमारे बीच नहीं है। कभी पर्दे पर उनकी मौजूदगी से दर्शकों के बीच खौफ पैदा हो जाता था। लेकिन समय बीतने के साथ हिंदी सिनेमा का यह दमदार चेहरा धीरे-धीरे लोगों की यादों से दूर होता चला गया। माणिक की रानी ने अपने शरीर, अंदाज और अभिनय से हिंदी फिल्मों में एक अलग जगह बनाई थी। उन्हें शायद मुख्य विलन की तरह यह स्टारम नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। लेकिन छोटे-छोटे किरदारों में भी उन्होंने ऐसी छाप छोड़ी कि आज भी पुरानी फिल्मों के दर्शक उन्हें बिल्ला के नाम से पहचान लेते हैं। उनकी जिंदगी की कहानी हमें यह भी बताती है कि पर्दे पर मजबूत और खतरनाक नजर आने वाला इंसान निजी जिंदगी में किन मुश्किलों और दर्द से गुजर रहा हो। यह दर्शकों को हमेशा दिखाई नहीं देता। तो दोस्तों, यह थी मणि किरानी उर्फ बिल्ला की कहानी एक ऐसे विलेन की जिसने अपने खौफनाक किरदारों से भी कभी हिंदी सिनेमा के पर्दे पर राज किया। लेकिन निजी जिंदगी में उसे बेहद दर्दनाक दौर से गुजरना पड़ा। तो दोस्तों, अभी के लिए बस इतना ही। मिलते हैं अगली वीडियो में। तब तक आप अपना ध्यान रखिए। बाय बाय।