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क्यों चिरंजीवी की बेटी ने परिवार के खिलाफ जाकर छोड़ दिया था घर? परिवार से मांग ली थी सुरक्षा!

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तेलुगु सिनेमा के सुपरस्टार मेगा स्टार चिरंजीवी के बारे में तारीफों के पुल बांधते हुए तो आपने बहुत सारे लोगों को सुना ही होगा कि वह ऐसे हैं, वह ऐसे हैं। लेकिन आज अपने इस वीडियो में हम आपको एक ऐसी सच्चाई से रूबरू करवाने वाले हैं जिन बातों के ऊपर सालों पहले से ही पर्दा डाल दिया गया। लेकिन पर्दा डालने से बातें खत्म नहीं हो जाती हैं और ना ही सच्चाई बदलती है। तो आज यह वीडियो काफी कंट्रोवर्शियल होने वाला है और चिरंजीवी के हम बहुत ही डारकेस्ट चैप्टर्स के बारे में बात करने वाले हैं क्योंकि जिस एक्टर को आप चाहते हो उसको दिल से प्यार करते हो उसकी फिल्मों को सपोर्ट करते हो उसके बारे में अच्छी-अच्छी बातें सुनते हो। लेकिन उनके बारे में कई ऐसी घिनौनी चीजें भी हैं जिनके बारे में सुनकर आप शॉक्ड हो जाएंगे और आज के पहले आपने शायद उनके बारे में इन बातों को कहीं सुना भी नहीं होगा। आखिर कौन से तेलुगु एक्टर ने चिरंजीवी की बड़ी बेटी से प्यार किया और इनकी इंगेजमेंट भी हो गई। लेकिन पारिवारिक दबाव के चलते यह इंगेजमेंट टूट गई और आगे चलकर उसने अपने आप को खत्म कर लिया। जिसके आरोप किसी और के ऊपर नहीं बल्कि चिरंजीवी के ऊपर लगे।

बेटी श्रीजा का घर से भागकर शादी करना: साल 2007 में चिरंजीवी की छोटी बेटी श्रीजा ने परिवार के खिलाफ जाकर श्रीश भारद्वाज से मंदिर में शादी कर ली और अपने परिवार से सुरक्षा की मांग की। बाद में यह रिश्ता तलाक और दहेज उत्पीड़न के मामलों के कारण काफी विवादों में रहा।इसमें कितनी सच्चाई थी। ब्लड बैंक की कालाबाजारी वाले विवाद और जिस अलू अर्जुन को उन्होंने बिल्कुल अपने बेटे रामचरण के जैसे रखा अलू अर्जुन को डांस करना सिखाया। लेकिन आगे चलकर कौन सी वजह से इनके रिश्ते में अंदरूनी दरारें आ गई। कैसे चिरंजीवी ने पैसे के लिए अपने आप को बेच दिया था और इस बात से उनके छोटे भाई पवन कल्याण इतने ज्यादा नाराज हो गए कि वह अपने भाई से दूर रहने लगे थे। एनटीआर के परिवार के साथ में कैसे उनके आपसी झगड़े रहे। कैसे चिरंजीवी की दूसरी बेटी

ने भी लव मैरिज कर ली और चिरंजीवी ने उसको घर से निकाल दिया। मतलब चिरंजीवी की पूरी लाइफ खंगालने के बाद पता चला कि चिरंजीवी और विवादों का बहुत ही पुराना नाता रहा है। हालांकि इस बात में कोई भी डाउट नहीं है कि चिरंजीवी अपने दम पर इस इंडस्ट्री में आए और अपना इतना बड़ा मुकाम बनाया। यहां तक कि 90ज में उनका कद सिनेमा में इतना ज्यादा बढ़ गया था कि वह अमिताभ बच्चन और रजनीकांत से भी ज्यादा फीस चार्ज करने लगे थे। और चिरंजीवी ऑफिशियली इंडिया के ऐसे पहले एक्टर थे जो अपनी फिल्म के लिए ₹1वा करोड़ की फीस चार्ज कर रहे थे। जितनी फीस एक फिल्म के लिए ना तो उस समय अमिताभ बच्चन और ना ही रजनीकांत को मिलती थी और कई फिल्मी पत्रिकाओं में यह आर्टिकल भी छापा गया कि बिगर देन बच्चन। ऐसे में आखिर किसने उनको जहर देने की कोशिश की और चिरंजीवी ने इसको खा भी लिया था और उनके होठ बिल्कुल पूरी तरह से नीले पड़ गए थे। लेकिन वो तो अच्छा हुआ कि एंड मौके पर डॉक्टर्स ने उनकी जान बचा ली थी। आखिर इतना बेहतरीन डांस चिरंजीवी ने कहां से सीखा? जहां लगभग 45 साल से लंबे फिल्मी करियर में 156 से भी ज्यादा फिल्मों के टोटल 537 गानों में लगभग 24,000 से भी ज्यादा यूनिक डांस स्टेप्स करते हुए चिरंजीवी नजर आए। जो एक बहुत बड़ी बात है और इसको लेकर उनका नाम उस समय गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया था। और जो साउथ इंडियन एक्टर्स के आज के टाइम पर आप डांसर स्टेप से देखते हैं, चाहे अलू अर्जुन हो, रामचरण हो या फिर एनटीआर हो, कहीं ना कहीं इनके डांसर स्टेप से चिरंजीवी से ही इंस्पायर्ड हैं। और आज तेलुगु सिनेमा में कई जगहें ऐसी हैं जहां पर मेगा स्टार चिरंजीवी की लोग पूजा भी करते हैं। लेकिन इतनी सारी चीजें होने के बावजूद लोगों से इतना सारा प्यार मिलने के बावजूद चिरंजीवी जब पॉलिटिक्स में आए तो बिल्कुल पूरी तरह से फैल रहे। जबकि उनके छोटे भाई पवन कल्याण जब पॉलिटिक्स में आए तो वह आगे चलकर आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम भी बन गए। तो चलिए इन सारी बातों को बिल्कुल शुरू से स्टार्ट करते हैं।

जब चिरंजीवी स्ट्रगल कर रहे थे। 22 अगस्त 1955 आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले का एक छोटा सा गांव था मुगल तरु जहां एक मध्यमवर्गीय कांस्टेबल कोडेला वेंकट राव के घर में चिरंजीवी का जन्म होता है। जिनका शुरुआती नाम रखा गया कोनीडेला शिवशंकर वरा प्रसाद राव। अब क्योंकि उनके पिता कास्टेबल थे तो बार-बार उनका कहीं ना कहीं ट्रांसफर होता रहता था। तो चिरंजीवी की जो परवरिश है वह उनके दादा-दादी के साथ में हुई। चिरंजीवी टोटल तीन भाई और दो बहनें हैं और चिरंजीवी इनमें सबसे बड़े हैं। उनके छोटे भाई नागेंद्र बाबू जो एक फिल्म प्रोड्यूसर हैं और उनके छोटे भाई पवन कल्याण जो खुद एक जानेमाने एक्टर हैं और पॉलिटिक्स में काफी एक्टिव हैं। उनकी बहनें विजय दुर्गा और माधवी राव हैं जिनका फिल्म लाइन से कुछ भी लेना देना नहीं है। लेकिन विजय दुर्गा के बेटे साईं धर्मतेज आजकल फिल्मों में काफी एक्टिव हैं। यहां पर आपको बताते चलें कि इन दोनों के अलावा चिरंजीवी की एक और बहन थी जिसका नाम था रमन्ना। लेकिन बचपन में ही ब्रेन ट्यूमर की वजह से उनकी मृत्यु हो गई थी। चिरंजीवी की मां अंजना देवी हनुमान जी की परम भक्त थी तो उन्होंने अपने बड़े बेटे का नाम भी चिरंजीवी रख दिया जिसका मतलब होता है अमर। ठीक वैसे ही जैसे कि रामायण में हनुमान जी को चिरंजीवी कहा जाता है। खैर स्कूलिंग की पढ़ाई कंप्लीट हुई। उनके पिता एक कॉन्स्टेबल थे तो आगे चलकर चिरंजीवी ने भी एनसीसी ज्वाइन कर ली थी और वह अपने स्कूल के दिनों में एक अनुशासित एनसीसी कैडिट भी रहे हैं। यहां तक कि 1970 के दशक की शुरुआत में नई दिल्ली के रिपब्लिक डे परेड में आंध्र प्रदेश का वह प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। शुरुआत से ही चिरंजीवी का मन एक्टिंग में लगता था लेकिन उनके पिता के कहने पर उन्होंने बीकॉम में अपना ग्रेजुएशन कंप्लीट किया और डांस का तो चिरंजीवी को बिल्कुल बचपन से ही शौक रहा है। जहां फिल्मी अंदाज में उनका पूरा बचपन बीता और बचपन में टीवी पर एक्ट्रेस हेललेन का गाना उन्होंने देखा पिया तू अब तो आजा और इसी गाने पर उन्होंने डांस करना शुरू किया। धीरे-धीरे पैर मटकाना शुरू किए, कमर मटकाना शुरू की और आगे चलकर चिरंजीवी ने बहुत सारे नए डांस स्टेप्स खुद किए और जब भी स्कूल में कोई फंक्शन होता या घर पर कोई फंक्शन रखा जाता तो चिरंजीवी सबसे पहले डांस के लिए सामने आते। खैर, उनके दिल में तो सिनेमा था। लेकिन उनके पिता ऐसा नहीं चाहते थे। लेकिन फिर भी जब चिरंजीवी नहीं माने तो उनके पिता ने चिरंजीवी के सामने एक शर्त रखी कि पहले उन्हें एक्टिंग में प्रोफेशनल डिग्री कंप्लीट करनी होगी क्योंकि उनके पिता यह नहीं चाहते थे कि चिरंजीवी बिना कुछ सीखे ऐसे ही फिल्म लाइन में चले जाएं और वहां सालों तक धक्के खाते रहें। तो एक्टिंग का कोर्स करने के लिए वह साल 1976 में मद्रास फिल्म इंस्टट्यूट पहुंचे और वहां पर उन्होंने एक्टिंग में एडमिशन लिया। आपको बता दें कि यह वही इंस्टट्यूट है जहां पर चिरंजीवी की मुलाकात रजनीकांत से हुई थी। वो उनके सीनियर थे और इस तरह से चिरंजीवी ने अपनी एक्टिंग का यह कोर्स कंप्लीट किया और आगे चलकर उन्हें फिल्मों में बहुत ही छोटे-छोटे सपोर्टिंग रोल मिलने लगे। अबकि फिल्म लाइन में उस समय उनके पहचान वाला दूर-दूर तक कोई नहीं था जो कि चिरंजीवी को लीड एक्टर के तौर पर पहली फिल्म से ही लॉन्च कर सके। तो चिरंजीवी ने स्ट्रगल करना शुरू किया और फिल्मों में ऐसे सपोर्टिंग रोल करते चले गए। यह रोल इतने छोटे थे कि कुछ रोल के लिए तो उन्हें फिल्म में क्रेडिट दिया भी जाता और कुछ रोल के लिए उन्हें क्रेडिट दिया भी नहीं जाता और साल 1978 में चिरंजीवी ने अपने करियर की पहली फिल्म पुनाधी रिल्लू की शूटिंग शुरू की लेकिन यह फिल्म थोड़ी डिले हो गई और इसके पहले चिरंजीवी की दूसरी फिल्म प्राण खरीदू साल 1978 में रिलीज हो गई और इसमें काम करने के लिए चिरंजीवी को लगभग ₹116 मिले थे। हालांकि शुरुआत के दिनों में चिरंजीवी को फिल्मों में बहुत ही छोटे सपोर्टिंग रोल मिल रहे थे। लेकिन चिरंजीवी इन रोल को करते चले गए। तो चिरंजीवी को लोग उस समय नाम से तो नहीं लेकिन उनके चेहरे से पहचानने लगे थे

और आगे चलकर चिरंजीवी को फिल्मों में नेगेटिव रोल मिलने लगे। इनमें इदीि कथा कादू और मूसा जैसी फिल्में रही जिनमें चिरंजीवी हमें नेगेटिव रोल में नजर आए। यहां पर आपको बता दें कि इदीि कथा कादू चिरंजीवी की एक्चुअली में एक तमिल फिल्म अवरगल का तेलुगु रिमेक थी और चिरंजीवी ने इसमें वही किरदार निभाया था जो कि इसके तमिल वर्जन में रजनीकांत ऑलरेडी निभा चुके थे। तो दो-ती सालों तक यह चीजें चलती रही। लेकिन आगे चलकर साल 1983 में सब कुछ बदल गया। जब चिरंजीवी हमें फिल्म कैदी में नजर आए। यह फिल्म ब्लॉकबस्टर रही और मात्र ₹25 लाख के बजट में बनी इस फिल्म ने 6 करोड़ से भी ज्यादा की कमाई कर डाली थी और बस फिल्म कैदी चिरंजीवी के करियर के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई और चिरंजीवी रातोंरात स्टार बन गए। जब इसमें चिरंजीवी ने लुंगी बांधकर आंखों में गुस्सा लिए बड़े पर्दे पर एंट्री ली तो थिएटर्स में सीटियां थमने का नाम नहीं ले रही थी। आपको बता दें कि 1980 में चिरंजीवी की बैक टू बैक 14 फिल्में रिलीज हुई थी और साल 1983 में भी उनकी 14 फिल्में रिलीज हुई और बस यहीं से मानो चिरंजीवी ने ब्लॉकबस्टर फिल्मों की लाइन लगा दी थी। 1987 में आई फिल्म में पसीबाड़ी परिणाम में चिरंजीवी ने पहली बार तेलुगु सिनेमा में ब्रेक डांस किया और यह उस समय तक बिल्कुल ही एक अनोखा डांस था। जैसा डांस इसके पहले तक तेलुगु सिनेमा में और किसी ने नहीं किया था। चिरंजीवी की पॉपुलैरिटी इतनी ज्यादा बढ़ने लगी कि जगह-जगह पर उनके कट लगने लगे। लोग उनको दूध से नहलाने लगे और मालाएं पहनाने लगे और आने वाले 4 से पांच सालों में ही चिरंजीवी तेलुगु सिनेमा के नंबर वन एक्टर बन चुके थे। 1988 में उनकी फिल्म रिलीज हुई मराना मुरदंगम जिस फिल्म में उनके नाम के आगे पहली बार मेगा स्टार लिखा गया। मेगा स्टार का मतलब होता है बिल्कुल कंप्लीट स्टार। चाहे डांस हो, एक्शन हो, ड्रामा हो या कोई भी सीन हो और बस 1988 में इसी फिल्म के बाद से यह चलन शुरू हो गया कि चिरंजीवी को लोग मेगा स्टार के नाम से जानने लगे। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान आपको बता दें कि चिरंजीवी को उनके एक फैन ने उन्हें जहर देने की कोशिश की। एक्चुअली में चिरंजीवी जब इस फिल्म की शूटिंग कर रहे थे तो उनके शूटिंग के आसपास के एरिया में उनके फैंस उन्हें घेर कर खड़े हो गए और इतनी भीड़ में एक फैन उनके पास में आया एक केक लेकर और उसने चिरंजीवी से यह बोला कि उसका आज बर्थडे है और वह केक काटेगा। उसने चिरंजीवी के सामने केक काटा और चिरंजीवी ने भी उसको केक काटने दिया और उसने केक का एक पीस उठाया और चिरंजीवी के मुंह में रख दिया। एक्चुअली में यह वह फोर्सफुली कर रहा था और चिरंजीवी उसको केक खिलाने के लिए मना कर रहे थे। लेकिन फिर भी केक का कुछ हिस्सा उनके होठों पर लग गया था और बाद में उनके होठ थोड़ी-थोड़ी नीले होने लगे। चिरंजीवी को भी चक्कर आने लगे। उनकी आंखों के सामने अंधेरा सा छा गया और बाद में जब उनकी जांच पड़ताल हुई तो पता चला कि इस केक में जहर था और उनका फैन उन्हें जहर देकर मारने की कोशिश कर रहा था। खैर, उनका फैन तो वहां से चला गया था। उसका बाद में पता नहीं चला कि आखिर उन्हें जहर देने की कोशिश वो क्यों कर रहा था। लेकिन जब चिरंजीवी ठीक हो गए तो उन्होंने इस इंसिडेंट को बहुत ही लाइट मूड से लिया और कुछ नहीं बोला। लेकिन कहा जाता है कि उनके फैन ने उन्हें जहर देने की कोशिश इसलिए की जिससे कि उसे थोड़ी लाइमलाइट मिल जाए और अपने एक्टर के साथ में रहने का मौका भी मिल जाए। इस इंसिडेंट के बारे में खुद चिरंजीवी ने साल 2023 में अपने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था। खैर, यह चिरंजीवी का मानो बिल्कुल गोल्डन पीरियड चल रहा था।

जिस फिल्म से चिरंजीवी का नाम जुड़ जाता वो ब्लॉकबस्टर हो जाती और तेलुगु सिनेमा में लोग चिरंजीवी को पैसे छापने की मशीन तक बोलने लगे थे। आलम यह हो रहा था कि जितने पैसे चिरंजीवी की फिल्में टिकट बेचकर कमा रही थी, उतने ही पैसे लोग फिल्म में उनके एक्शन सीन और डांस देखकर बड़े पर्दे पर उड़ा रहे थे। मतलब पैसे की बिल्कुल बारिश हो रही थी और चिरंजीवी एक के बाद एक नए डांस स्टेप से सेट करते नया ट्रेंड सेट करते। 1992 में चिरंजीवी की फिल्म रिलीज होती है घराना मोगदू। और यह ऐसी पहली फिल्में बनी जिसने साउथ इंडिया में 10 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन कर डाला। और उस समय 1992 में इंडिया टुडे मैगजीन के कवर पर चिरंजीवी की बड़ी फोटो छपी और उस पर हेडिंग लिखी गई बिगर देन बच्चन। आपको बता दें कि 1992 में ही रिलीज हुई उनकी अगली फिल्म आप बांधवों के लिए चिरंजीवी को ₹1 करोड़25 लाख फीस दी गई। जो उस समय पूरे इंडिया की हाईएस्ट फीस थी। उस समय अमिताभ बच्चन और रजनीकांत जैसे एक्टर भी 80 से ₹90 लाख फीस चार्ज करते थे। लेकिन चिरंजीवी की फिल्में हिट होने की गारंटी हुआ करती थी। इस वजह से प्रोड्यूसर्स उनको इतनी मोटी फीस दे रहे थे। तेलुगु सिनेमा में चिरंजीवी का कद इतना ऊंचा हो गया तो उन्हें हिंदी फिल्में भी ऑफर हुई। जहां उन्होंने पहली बार हिंदी फिल्म में काम किया। साल 1990 में आई प्रतिबंध में जिसमें वह जूही चावला के साथ में नजर आए और फिल्म सुपरहिट रही। आगे चलकर वह मीनाक्षी शेषादरी के साथ में आज का गुंडा राज में नजर आए और फिर से जूही चावला के साथ में द जेंटलमैन में नजर आए। हालांकि चिरंजीवी की यह फिल्में अच्छी थी। उनकी एक्टिंग की भी लोगों ने काफी तारीफ की। लेकिन फिर भी यहां पर उन्हें वह मुकाम नहीं मिल पाया जो सफलता उन्हें तेलुगु सिनेमा में मिल रही थी और इसके बाद वह ज्यादातर तेलुगु फिल्में ही करने लगे। हालांकि मिड 90ज की अगर बात करें तो चिरंजीवी की फिल्मों में थोड़ी डाउनफॉल देखने के लिए मिला। जहां इस समय उनकी फिल्में उतनी ज्यादा नहीं चल पा रही थी। लेकिन इसके बाद उनकी फिल्म हिटलर, मास्टर, चुदलानी, बंधु जैसी फिल्में फिर से ब्लॉकबस्टर रही। इस समय चिरंजीवी एक हॉलीवुड फिल्में में भी काम कर रहे थे। जिसका टाइटल होने वाला था द रिटर्न ऑफ द थीफ ऑफ बगदाद जिसकी शूटिंग भी शुरू हो गई थी लेकिन आगे चलकर यह फिल्म बीच में बंद हो गई। 2000 के टिकेट में भी चिरंजीवी हमें कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में नजर आए जिनमें अनन्या, इंदिरा द टाइगर और आगे चलकर टैगोर, शंकर दादा एमबीबीएस और स्टालिन जैसी कई फिल्में शामिल रहीं। लेकिन 2007 में आई उनकी फिल्म शंकर दादा जिंदाबाद के बाद उन्होंने लगभग 10 साल लंबा एक ब्रेक ले लिया था और इस दौरान चिरंजीवी ने पॉलिटिक्स में आने का डिसाइड किया। 2008 में चिरंजीवी ने अपनी खुद की एक पॉलिटिकल पार्टी बनाई जिसका नाम रखा गया प्रराज्यम पार्टी और 2009 के विधानसभा इलेक्शन उन्होंने लड़े और जब चिरंजीवी ने यह अपनी पॉलिटिकल पार्टी बनाई थी उस समय लोगों को यह लग रहा था कि यह आंध्र प्रदेश की राजनीति को बिल्कुल पूरी तरह से पलट के रख देगी और सबको बहुत ज्यादा उम्मीदें थी लेकिन हुआ इसका बिल्कुल ही उल्टा जहां लगभग 294 सीटों वाली विधानसभा में चिरंजीवी की पार्टी मात्र 18 सीटें जीत पाई थी और हैरानी की बात तो यह है कि उनकी पार्टी को लोकसभा में एक भी सीट नहीं मिली थी और यह सबके लिए और चिरंजीवी के लिए एक बहुत बड़ा झटका था। जहां वह यह सोच रहे थे कि करोड़ों फैंस का प्यार वोटों में तब्दील क्यों नहीं हो पाया है। हालांकि खुद चिरंजीवी तिरुपति से विधायक रहे। लेकिन आगे चलकर धीरे-धीरे उनकी पार्टी बहुत ज्यादा कमजोर होने लगी। जहां पर आपको बता दें कि जब चिरंजीवी ने पॉलिटिक्स में कदम रखा था तो उनके छोटे भाई पवन कल्याण ने दिन रात इसके लिए प्रचार प्रसार किया था। अब क्योंकि उस समय तक पावर स्टार पवन कल्याण भी एक जाना पहचाना नाम बन चुके थे और उनके भी करोड़ों फैंस थे और पवन कल्याण ने अपने भाई चिरंजीवी को सपोर्ट करने के लिए जी जान लगा दी थी जहां बड़े-बड़े वादे किए जा रहे थे लेकिन चुनाव में उनकी पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई और आगे चलकर चिरंजीवी ने अपनी पार्टी को कांग्रेस में मर्ज कर दिया और आगे चलकर कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा से इलेक्ट करके टूरिज्म में मिनिस्टर तक बना दिया था। लेकिन कहीं ना कहीं चिरंजीवी के समर्थक इस बात से खुश नहीं थे

और उनका यह कहना था कि चिरंजीवी को अपनी खुद की इंडिपेंडेंट पार्टी रखनी चाहिए थी। लेकिन अब वो ही कांग्रेस से मर्ज हो गए हैं तो उनकी पार्टी का अस्तित्व ही क्या बचा। यहां तक कि कई लोगों ने तो चिरंजीवी के ऊपर यह भी आरोप लगाए थे कि चिरंजीवी पैसे की वजह से बिक गए हैं। और खुद के लिए उन्होंने टूरिज्म में मिनिस्टर का पद चुना और पार्टी को ऐसे ही अधर में छोड़ दिया। उसी समय तेलंगाना को आंध्र प्रदेश से अलग करने की मांग भी काफी जोर शोर से चल रही थी। लेकिन चिरंजीवी का मत इसको लेकर बिल्कुल भी क्लियर नहीं था। तो इन सारी बातों को लेकर भी लोग चिरंजीवी से काफी अपसेट थे कि वह खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं और कांग्रेस ने उन्हें टूरिज्म में मिनिस्टर का पद दिया है। इस वजह से उनका मुंह बिल्कुल ही बंद है। जहां तक कि आपको बता दें कि एक समय तो इस बात को लेकर उनकी गाड़ी के ऊपर पथराव भी हुआ था। जहां तक कि खुद चिरंजीवी के छोटे भाई पवन कल्याण भी चिरंजीवी की इन सारी बातों से बिल्कुल भी खुश नहीं थे। खासकर से इस बात को लेकर कि वह कांग्रेस के साथ में मिल गए हैं और इस बात से बहुत ज्यादा अपसेट रहे पवन कल्याण ने आगे चलकर अपनी खुद की एक पार्टी बनाई थी जनसेना के नाम से। जिनकी पार्टी चिरंजीवी की पार्टी से बिल्कुल ही अलग तरह से काम कर रही थी और पवन कल्याण की इस पॉलिटिकल पार्टी को शानदार रिस्पांस मिला। आगे चलकर यह बीजेपी से जुड़ गए और आज के टाइम पर पवन कल्याण आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम हैं। तो यहां पर बड़े भाई चिरंजीवी जो फिल्मों में तो पवन कल्याण से कई गुना ज्यादा सफल रहे। लेकिन पॉलिटिक्स में चिरंजीवी बुरी तरह से फैल रहे। अर्ली 200 में तेलुगु सिनेमा में एक ब्राह्मण लड़का आया हीरो बनने के लिए जिसका नाम था उदय किरण जिसने लगभग 2 से तीन सालों में ही चित्रम, नव्य नैनु, मनसंधा नोभे और नी स्नेहम जैसी फिल्मों में काम किया और यह सारी फिल्में हिट रही और उस समय उदयकरण को टॉलीवुड का बिल्कुल एक नया चॉकलेटी हीरो माना जाने लगा। इसी दौरान उदयकरण और चिरंजीवी की बड़ी बेटी को एक दूसरे से प्यार हो गया। अबकि उदय करण बिल्कुल नए थे। फिल्म इंडस्ट्री में उनका कोई भी ठिकाना नहीं था और चिरंजीवी जाने-माने परिवार बन चुके थे और इन दोनों के प्यार को देखते हुए उस समय चिरंजीवी की बड़ी बेटी सुष्मिता की उदयकरण के साथ में धूमधाम से इंगेजमेंट हो गई। लेकिन इसके कुछ महीनों बाद ही इनकी यह इंगेजमेंट टूट गई। कहा जाता है कि चिरंजीवी इससे खुश नहीं थे और वह चाहते थे कि उनकी बेटी किसी और बड़े परिवार में किसी अच्छे लड़के से शादी करें और आगे चलकर उनकी बेटी सुष्मिता की किसी अच्छे परिवार में शादी हो गई। लेकिन इधर उदय करण का करियर टॉलीवुड में बिल्कुल पूरी तरह से बर्बाद हो गया। उन्हें बड़ी फिल्में मिली ही नहीं। नहीं तो उनकी शुरुआत इतनी धमाकेदार हुई थी कि उन्हें एक से बढ़कर एक फिल्में मिलनी चाहिए थी। लेकिन उन्हें आगे चलकर फिल्में ही नहीं मिली। उन्हें बिल्कुल पूरी तरह से साइडलाइन कर दिया गया और वह बहुत ज्यादा तनाव में रहने लगे। और आपको बता दें कि आगे चलकर उन्होंने 2012 में एक शादी की लेकिन वह इतने ज्यादा तनाव में थे कि उन्होंने 2014 में अपने आप को खत्म कर लिया था। और इसके बारे में कई लोगों ने अलग-अलग तरह के बयान देना शुरू कर दिए।

जहां इस बारे में तो कई लोगों का यह कहना था कि चिरंजीवी की वजह से कई लोगों ने उदयकरण को फिल्में ही ऑफर नहीं की। तो वहीं दूसरी तरफ कई लोगों का यह कहना था कि किसी एक आदमी के कहने पर ऐसा नहीं है कि किसी को बिल्कुल फिल्में ही ना मिले। खैर, अब इस बात में कितनी सच्चाई है, यह चिरंजीवी की वजह से हुआ था या नहीं। लेकिन आज उदय किरण हमारे बीच मौजूद नहीं है और कुछ-कुछ उनका भी हाल वैसे ही हुआ था जैसा कि बॉलीवुड में सुशांत सिंह राजपूत के साथ में हुआ था। मतलब इतना ज्यादा तनाव, इतना ज्यादा प्रेशर, टैलेंट होने के बावजूद भी फिल्में नहीं मिलना और इस वजह से उदयकरण ने यह स्टेप उठाया था और वैसे ही सुशांत सिंह राजपूत ने भी ऐसा कदम उठाया था। खैर, चिरंजीवी की बेटी सुष्मिता की शादी किसी और से हो जाती है और आज उनके दो बच्चे हैं। एक्चुअली चिरंजीवी की फैमिली में ना बड़े विवाद चलते ही रहे। जहां उनकी बड़ी बेटी के साथ में यह हुआ तो वहीं उनकी छोटी बेटी श्रीजा कोडेला ने भी 2007 में अपने घर से भागकर अपने प्रेमी श्रीश भारद्वाज से मंदिर में शादी कर ली थी जो चिरंजीवी और उनके परिवार के लिए बड़ा सदमा था। उस समय उनकी बेटी लगभग 19 साल की थी। यहां तक कि उनकी बेटी ने पुलिस से अपनी सुरक्षा की भी मांग की और यह बोला कि उन्हें उनके खुद के परिवार वालों से खतरा है। 2008 में उनकी एक बेटी भी हुई लेकिन आगे चलकर इन दोनों का रिश्ता अच्छा नहीं चला और 2011 में इनके बीच में बहुत ज्यादा झड़प होने लगी और फाइनली आगे चलकर चिरंजीवी की बेटी ने अपने पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का केस भी दर्ज करवा दिया और आगे चलकर 2014 में इनका डिवोर्स हो गया था और फिर इसके 2 साल बाद उनकी बेटी ने अपने बचपन के एक दोस्त से फिर से शादी कर ली लेकिन उनकी यह दूसरी शादी भी ज्यादा लंबे समय तक नहीं चल पाई और बाद में यहां भी उनका डिवोर्स हो गया और इन सारी बातों से चिरंजीवी भी काफी नाराज थे और वह कई सालों तक अपनी बेटी से नहीं मिले। खैर, उनके भाई रामचरण उनसे मिले और कई बार उन्होंने कहा कि अब उनके बीच में सब कुछ सही है। लेकिन कहीं ना कहीं इनके परिवार में चीजें बहुत ही खराब रही। 80 और 90 के दशक में जहां तेलुगु सिनेमा में एक तरफ चिरंजीवी का राज चलता था तो वहीं दूसरी तरफ एनटीआर परिवार में से बालकृष्ण का राज चलता था। और इन दोनों के फैंस भी अक्सर एक दूसरे से टकराते रहते थे।

अगर एक थिएटर में चिरंजीवी की फिल्म लगी है तो उसमें बालकृष्ण के फैन नहीं जाते थे। और अगर किसी थिएटर में बालकृष्ण की फिल्म लगी है तो चिरंजीवी के फैन उस थिएटर के आसपास भी नहीं भटकते थे। कई बार इनके फैंस के बीच में खूनी झड़पें भी हुई हैं। फैंस एक दूसरे के ऊपर पत्थरबाजी भी करते रहे और अक्सर इन दोनों के फैंस के बीच में हमें यह झगड़े देखने के लिए मिलते रहे और कहीं ना कहीं एनटीआर परिवार की और चिरंजीवी परिवार की यह राइवलरी काफी लंबे समय तक हमें देखने के लिए मिलती रही। लेकिन पीढ़ियों से चली आ रही इस दुश्मनी को खत्म करने की पहल की। चिरंजीवी के बेटे रामचरण ने और एंटीआर फैमिली से जूनियर एनटीआर ने। जहां कई बार यह दोनों एक साथ नजर आए। इन दोनों के बीच में ऐसा कुछ भी नहीं है और ना ही इनके परिवार वालों के बीच में ऐसी कोई आपसी दुश्मनी अब रही है। ऐसे अलग-अलग बयान यह दोनों देते ही रहे। अभी यह दोनों हमें हाल ही में फिल्म आरआरआर में भी एक साथ नजर आए थे। और कहीं ना कहीं इन दोनों ने सालों से चली आ रही इस पारिवारिक दुश्मनी को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। जहां यह दोनों एक दूसरे का बहुत मान सम्मान करते हैं और एक दूसरे की इज्जत भी करते हैं। साल 1999 और 2000 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने चिरंजीवी को पूरे भारत में सबसे ज्यादा टैक्स जमा करने वाला एक्टर बताया और इसके लिए उन्हें एक अवार्ड भी दिया गया था। साल 1998 में चिरंजीवी ने चिरंजीवी चैरिटेबल ट्रस्ट भी ओपन किया जिसे आज भी आंध्र प्रदेश में ब्लड और आई डोनेशन के मामले में सबसे बड़ा एनजीओ माना गया। उनकी इस आई बैंक की वजह से हजारों लोगों को आंखों की रोशनी मिली। यहां तक कि 2019 और 20 में कोविड के दौरान भी उन्होंने जगह-जगह पर ऑक्सीजन बैंक भी ओपन करवाए जिससे भी कई मरीजों को मदद मिली। हालांकि आगे चलकर एक्टर डॉक्टर राजशेखर और उनकी पत्नी जीविता ने चिरंजीवी के इस ट्रस्ट के ऊपर कई तरह के आरोप लगाए। जहां उनका यह कहना था कि चिरंजीवी मुफ्त में अपने ब्लड डोनेशन बैंक

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