[संगीत] एक डायरेक्टर जिसके पास बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार थे। एक ऐसी फिल्म जिस पर करोड़ों रुपए लगाए जा चुके थे और एक ऐसा सपना जो बस पूरा ही होने वाला था। लेकिन तभी अचानक सब कुछ बदल गया। फिल्म की शूटिंग चल रही थी। आधी शूटिंग पूरी भी हो गई थी। बड़े-बड़े सितारे सेट पर थे। आने वाले दिनों में बॉलीवुड को एक बड़ी फिल्म मिलने की तैयारी हो रही थी। लेकिन इसी फिल्म के रिलीज होने से पहले उसके डायरेक्टर की जिंदगी की कहानी अचानक से खत्म हो गई। ना तो फिल्म पूरी हो सकी और ना ही वो डायरेक्टर अपने सपने को बड़े पर्दे पर देख पाया और ना ही बॉलीवुड को फिर कभी उस डायरेक्टर की बनाई कोई नई फिल्म देखने को मिली। महज 45 साल की उम्र में इस डायरेक्टर ने दुनिया को अलविदा कह दिया वो भी बेहद ही रहस्यमई तरीके से। इनकी मौत हुई लेकिन ऐसी परिस्थितियों में कि किसी को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। आज इस वीडियो में हम बात कर रहे हैं उस शानदार फिल्म मेकर की जिनका नाम था मुकुल एस आनंद।
[संगीत] आज उनकी डेथ एनिवर्सरी है। आज ही के दिन वो इस दुनिया से दूर चले गए थे। इसी के चलते इंडस्ट्री और उनके चाहने वाले उन्हें नरम आंखों से याद कर रहे हैं। ऐसे में आज जानते हैं इस बड़े डायरेक्टर की कहानी जिनके पास टैलेंट था। बड़े सपने थे, सुपरस्टार्स का साथ था, लेकिन जिंदगी ने उन्हें अपनी सबसे बड़ी फिल्म पूरी करने का मौका ही नहीं दिया। दरअसल आज 7 सितंबर को उनकी पुण्यतिथि है और यह कहानी सिर्फ एक डायरेक्टर की नहीं है बल्कि उस इंसान की है जिसने बेहद कम उम्र में बॉलीवुड को ऐसी फिल्में दे दी थी जिन्हें आज भी लोग याद करते हैं। मुगल एस आनंद का जन्म 11 अक्टूबर 1951 को मुंबई में ही हुआ था। उनका फिल्मों से रिश्ता था। मशहूर फिल्म राइटर इंद्रराज आनंद उनके चाचा थे और एक्टर डायरेक्टर टिनू आनंद उनके करीबी रिश्तेदार। लेकिन मुकुल आनंद सिर्फ परिवार के नाम के सहारे बॉलीवुड में आगे नहीं जाना चाहते थे। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने ऐड फिल्मों की दुनिया में काम किया। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। उनकी शुरुआती फिल्मों में गुजराती फिल्म कंकुनी कीमत शामिल थी।
हिंदी फिल्मों में उन्होंने कानून किया करेगा से डायरेक्शन की दुनिया में अपने कदम रखे। इसके बाद आई फिल्म एतबार। मुकुल आनंद की शुरुआत भले ही धीरे हुई थी लेकिन उनके अंदर एक बात शुरू से साफ थी। उन्हें छोटी सोच वाली फिल्में नहीं बनानी थी। वो बड़े सपने देखते थे। साल 1986 में उन्होंने सुल्तानत बनाई। यह फिल्म कई मायनों में खास थी। फिर आया साल 1990 और इसी साल मुकुल आनंद ने वो फिल्म बनाई जिसने उन्हें बॉलीवुड के बड़े डायरेक्टर्स की लिस्ट में खड़ा कर दिया था। फिल्म थी अग्निपथ, अमिताभ बच्चन की आवाज, विजय दीनाना चौहान का किरदार, फिल्म का डार्क माहौल और मुकुल आनंद का अलग डायरेक्शन। आज भी अग्निपथ को एक कल्ट क्लासिक फिल्म माना जाता है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के शानदार काम के लिए उन्हें नेशनल अवार्ड भी दिया गया था। अग्निपथ के बाद मुकुल आनंद और अमिताभ बच्चन की जोड़ी बॉलीवुड में एक अलग पहचान बना चुकी थी और इसके बाद आई फिल्म हम। साल 1991 में रिलीज हुई यह फिल्म एक बड़ी कमर्शियल सक्सेस बनी। फिल्म में अमिताभ बच्चन के साथ रजनीकांत और गोविंदा भी थे
और कौन भूल सकता है फिल्म का वो सुपरहिट गाना जुम्मा चुम्मा दे दे। हमने साबित कर दिया था कि मुकुल आनंद सिर्फ गंभीर और डार्क फिल्में ही नहीं बना सकते। वो ऐसी फिल्में भी बना सकते हैं जिसमें ऑडियंस को भरपूर एंटरटेनमेंट मिले। लेकिन मुकुल आनंद के करियर की सबसे बड़ी फिल्म अभी बाकी थी। साल 1992 में आई खुदा गवाह अमिताभ बच्चन और एक्ट्रेस श्रीदेवी की यह फिल्म सिर्फ एक मूवी नहीं थी। यह मुकुल आनंद की सोच और उनके विज़ का एक शानदार नगमा थी। फिर साल 1997 में मुकुल आनंद एक बेहद बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। फिल्म में एक्टर सलमान खान और संजय दत्त जैसे बड़े स्टार्स थे। मुकुल आनंद ने इस फिल्म को लेकर काफी तैयारी की थी। फिल्म 10 की शूटिंग शुरू भी हो गई थी। लेकिन फिर 7 सितंबर 1997 यह तारीख बॉलीवुड के लिए बेहद दुखद साबित हुई। मुकुल एस आनंद को अचानक ही दिल का दौरा पड़ा और महज 45 साल की उम्र में इस शानदार डायरेक्टर ने दुनिया को अलविदा कह दिया। वो उम्र जब एक डायरेक्टर अपने करियर के सबसे बेहतरीन दौर में होता है। वो उम्र जब मुकुल आनंद के पास ना जाने कितनी फिल्में और कितने सपने बाकी थे लेकिन किस्मत को कुछ शायद और ही मंजूर था। उनकी फिल्म 10 भी अधूरी रह गई। फिल्म कभी रिलीज नहीं हो सकी।
सोचिए जिस डायरेक्टर ने अग्निपथ बनाई जिसने हम बनाई जिसने खुदा गवाह जैसी भव्य फिल्म बॉलीवुड को दी वो अपनी जिंदगी की आखिरी फिल्म को पूरा होते हुए ही नहीं देख सका। मुकुल आनंद की पर्सनल लाइफ की बात करें तो वो अपनी पत्नी अनीता आनंद और अपने दो बच्चों अलिष्का और मिखाइल के साथ एक फैमिली [संगीत] मैन थे। उनके जाने के बाद सिर्फ बॉलीवुड ने ही एक शानदार डायरेक्टर नहीं खोया था। बल्कि एक पत्नी ने अपना जवान पति और दो बच्चों ने अपने पिता को हमेशा के लिए खो दिया था। यही शायद इस कहानी का सबसे भावुक हिस्सा भी है। मुकुल आनंद को वक्त ने बहुत जल्दी सबसे छीन लिया। आज मुकुल एस आनंद को गए हुए लगभग तीन दशक हो चुके हैं।
लेकिन जब भी विजय दीनाना चौहान का नाम लिया जाता है, जब भी जुम्मा चुम्मा की धुन बजती है, तो कहीं ना कहीं मुकुल एसानंद का नाम जरूर याद आ जाता है। और शायद यही एक कलाकार की सबसे बड़ी जीत भी है। इंसान तो दुनिया से चला जाता है लेकिन उसका काम उसे हमेशा जिंदा रखता है। आज उनकी पुण्यतिथि पर 4 पी.m. बॉलीवुड की टीम से [संगीत] भावपूर्ण नमन और आप हमें कमेंट कर जरूर बताइएगा। मुकुल एस आनंद की कौन सी फिल्म आपको सबसे ज्यादा पसंद है? अग्निपथ हम या [संगीत] फिर खुदा गवाह? और ऐसे ही बॉलीवुड की अनसुनी कहानियों, भूले-बिसरे सितारों और फिल्मी दुनिया के दिलचस्प किस्सों के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें और वीडियो को लाइक और शेयर करना बिल्कुल ना भूलें क्योंकि कुछ लोग भले ही इस दुनिया से चले जाते हैं, लेकिन उनकी बनाई हुई कहानियां कभी खत्म नहीं होती। [संगीत] हाय [संगीत]