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नदी की सफाई की और विदेश में मिली नौकरी! कौन है MP का बिटु तबाही?

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सामान्य रूप से लोग डिग्रियां लेते हैं, इंटरव्यू देते हैं, बड़े-बड़े सीवी और रिज्यूमे तैयार करते हैं, और फिर भी विदेश में नौकरी पाना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन सोचिए अगर कोई व्यक्ति सिर्फ अपने हाथ में एक मोटी बांस की लाठी और जाली लेकर कीचड़ में उतर जाए और उसकी इस मेहनत को देखकर सीधे नीदरलैंड से अरबों रुपये की एक संस्था सामने आकर यह कहे कि “चलो, तुम कहाँ फसे हो? सीधे हमारे साथ काम करने विदेश आ जाओ।”

सुनने में यह किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है, लेकिन यह हकीकत है। सोशल मीडिया पर इस समय एक नाम बहुत धूम मचा रहा है, और वह है ‘बिट्टू तबाही’।मध्य प्रदेश के एक सामान्य 20 साल के लड़के ने ऐसा काम किया कि उसके काम का वीडियो वायरल हो गया और नीदरलैंड की एक बड़ी संस्था के सीईओ ने उसे सामने से नौकरी का ऑफर दे दिया। आइए जानते हैं क्या है बिट्टू तबाही की पूरी कहानी।नाम तबाही है, लेकिन काम भलाई का है!ऑनलाइन दुनिया में यह भाई ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से फेमस है, लेकिन इसका असली नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी है।

वह मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा गांव के रहने वाले हैं और अभी कॉलेज के दूसरे वर्ष में पढ़ाई कर रहे हैं।कहानी की शुरुआतइस साल 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के दिन से कहानी शुरू होती है। ब्यावरा गांव से गुजरने वाली अजनार नदी की हालत नाले या गटर जैसी हो गई थी। नदी में प्लास्टिक की बोतलें, केमिकल कचरा और काई इस हद तक जम गए थे कि वहां से गुजरना भी मुश्किल था।आम तौर पर लोग क्या करते हैं? सरकार या नगरपालिका को दोष देते हैं। लेकिन बिट्टू ने किसी का इंतजार नहीं किया। उन्होंने अपनी जेब से 30,000 रुपये खर्च करके नदी को साफ करने का बीड़ा उठाया। शुरुआत में कुछ दोस्त उनके साथ जुड़े, लेकिन कीचड़ और गंदगी देखकर सभी भाग गए।

बिट्टू अकेले ही नदी में उतर पड़े। उन्हें तैरना भी नहीं आता था, नदी में सांप भी निकलते थे और गंदे पानी की वजह से उनके पैरों में इन्फेक्शन भी हो गया। फिर भी यह लड़का हारा नहीं और महीनों तक अकेले अपने दम पर नदी से टनों कचरा बाहर निकाल फेंका।एक ट्वीट और बदल गई किस्मतबिट्टू नदी सफाई के ये वीडियो इंस्टाग्राम पर डालते थे, जो धीरे-धीरे वायरल होने लगे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किसी ने बिट्टू के नदी साफ करने के ‘बिफोर’ और ‘आफ्टर’ के फोटो शेयर किए। इन फोटो पर नजर पड़ी नीदरलैंड की वर्ल्ड फेमस

पर्यावरण संस्था ‘द ओशन क्लीनअप’ (The Ocean Cleanup) के संस्थापक और सीईओ बोयान स्लट (Boyan Slat) की। उनकी यह संस्था दुनिया भर के समुद्रों और नदियों से प्लास्टिक कचरा साफ करने का करोड़ों डॉलर का मिशन चलाती है।बिट्टू की इस निस्वार्थ मेहनत को देखकर बोयान स्लट इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने ट्वीट पर केवल तीन शब्द लिखे: “Come work for us” (आओ हमारे साथ काम करो)।सिर्फ इतना ही नहीं, इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर केविन पीटरसन और भारत के मशहूर बिजनेसमैन आनंद महिंद्रा भी बिट्टू के इस जज्बे को सलाम कर चुके हैं।

इस भाई की चर्चा इतनी बढ़ गई है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी बिट्टू को विशेष तौर पर अपने घर बुलाकर सम्मानित किया है।इस कहानी से सीखबिट्टू तबाही की यह स्टोरी हमें दो चीजें सिखाती है: * अगर आपके अंदर कुछ बदलने का जज्बा है, तो पूरी दुनिया आपकी सुध लेती है। * लेकिन इस सिक्के का दूसरा पहलू एक कड़वी सच्चाई भी है। सवाल यह उठता है कि जिस काम को करने के लिए हमारी नगरपाइकाएं और तंत्र करोड़ों रुपये का बजट खर्च करते हैं, वही काम एक 21 साल के साधारण लड़के को अपनी जान के जोखिम में डालकर क्यों करना पड़ा? क्या हमारे देश में ऐसे टैलेंट और जूनून की कदर करने के लिए नीदरलैंड से ऑफर आने का इंतजार करना पड़ेगा? यह सोचने वाला मुद्दा है।गंदगी फैलाने वाले लाखों हैं, लेकिन साफ करने वाला एक ‘बिट्टू तबाही’ ही भारी पड़ गया। इस युवा के जज्बे को सलाम!

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