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प्यार करने की मिली बहुत बड़ी सजा! बिंदिया गोस्वामी की दर्द भरी और हैरान करने वाली दास्तान!

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दिल के [संगीत] टुकड़े-टुकड़े करके मुस्कुरा के चल। एक दौर था जब इस गाने को सुनते ही लोगों की आंखों [संगीत] के सामने एक खूबसूरत चेहरा आ जाता था। बड़ी-बड़ी मासूम आंखें, [संगीत] चेहरे पर अलग सी चमक और ऐसी खूबसूरती कि लोग उन्हें दूसरी हेमा मालिनी तक कहने लगे थे। वो लड़की जिसने [संगीत] कभी फिल्मों में आने का सपना भी नहीं देखा था, सिर्फ 14 साल की उम्र में बॉलीवुड की हीरोइन बन गई। देखते ही देखते [संगीत] वह अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, जितेंद्र, संजीव कुमार, सुनील [संगीत] दत्त और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़े सितारों के साथ काम करने लगी। उसके फिल्में चल [संगीत] रही थी, गाने हिट हो रहे थे और करियर तेजी से आगे बढ़ रहा था। लेकिन कहते [संगीत] हैं ना कि जिंदगी में सफलता मिलना आसान हो सकता है। उसे संभालना सबसे मुश्किल होता है। बिया गोस्वामी की जिंदगी में भी एक ऐसा प्यार आया जिसने उनकी पूरी दुनिया बदल [संगीत] कर रख दी। एक ऐसा रिश्ता जिसके लिए उन्हें लोगों की बातें सुननी पड़ी, विवादों का सामना करना [संगीत] पड़ा और धीरे-धीरे उनका चमकता हुआ फिल्मी करियर भी प्रभावित होने लगा। आखिर कौन [संगीत] थी बंध्या गोस्वामी? कैसे सिर्फ 14 साल की उम्र में वो बॉलीवुड की बड़ी हीरोइन बन गई। कैसे उनकी जिंदगी में अभिनेता विनोद मेहरा आए? उनके रिश्ते को लेकर इतने विवाद [संगीत] क्यों हुए? और आखिर कैसे फिल्मों की दुनिया की चमकती हुई यह अभिनेत्री कैमरे के सामने से दूर होकर कैमरे [संगीत] के पीछे काम करने लगी। आज हम जानेंगे बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री बिंद्या [संगीत] गोस्वामी की जिंदगी की पूरी कहानी। बंध्या गोस्वामी का जन्म 6 [संगीत] जनवरी 1962 को हुआ था। उनका बचपन भी किसी आम फिल्मी अभिनेत्री की तरह सपनों से भरा हुआ नहीं था। वो बचपन से [संगीत] ही फिल्मों में जाने की तैयारी नहीं कर रही थी, और ना ही उन्होंने कभी यह सोच कर जिंदगी बिताई थी कि एक [संगीत] दिन वो बॉलीवुड की बड़ी हीरोइन बनेंगी। दरअसल उनका सपना कुछ और था। वो एयर होस्टेस बनना चाहती थी। उन्हें लगता था कि उनका भविष्य आसमान [संगीत] में उड़ते हुए जहाजों के बीच होगा। लेकिन किस्मत ने उनके लिए एक बिल्कुल अलग रास्ता तैयार कर रखा था। कहते हैं कि [संगीत] इंसान जिंदगी की योजना कुछ और बनाता है और जिंदगी उसे वहां ले जाती है जहां उसने कभी जाने की कल्पना भी नहीं की होती। बिया [संगीत] के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उनका फिल्मी दुनिया से परिचय बहुत कम उम्र में ही हो गया था। बहुत कम लोग जानते हैं कि [संगीत] बिया ने बचपन में ही कैमरे के सामने काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने बाल कलाकार के रूप में कुछ फिल्मों में काम किया [संगीत] था। यानी फिल्मों से उनका रिश्ता नया नहीं था। लेकिन तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि ये छोटी सी बच्ची एक [संगीत] दिन हिंदी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हो जाएगी। बचपन में कैमरे के सामने आने के [संगीत] बावजूद बिया ने कभी अपने भविष्य को एक अभिनेत्री के रूप में नहीं देखा था। लेकिन जिंदगी की सबसे बड़ी खासियत [संगीत] यही है कि कभी-कभी एक छोटी सी मुलाकात इंसान की पूरी जिंदगी बदल देती है। बंदिया के परिवार का संगीत और फिल्मी दुनिया से कुछ परिचय था।

उस दौर के मशहूर संगीतकार प्यारेलाल [संगीत] उनके परिवार को जानते थे। एक दिन प्यारेलाल बंदिया को अपने साथ एक पार्टी में लेकर गए। यह शायद बिया की जिंदगी का वह [संगीत] दिन था जिसके बारे में उस समय किसी ने ज्यादा नहीं सोचा होगा। पार्टी में मौजूद लोगों के बीच बिया भी थी। लेकिन वहां उनकी खूबसूरती [संगीत] ने एक खास शख्स का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। [नाक से की जाने वाली आवाज़] कहा जाता है कि हेमा मालिनी की मां ने बिया [संगीत] को देखा और उनकी शक्ल सूरत में युवा हेमा मालिनी की झलक [संगीत] महसूस की। उन्हें लगा कि इस लड़की में कुछ अलग बात है। सिर्फ खूबसूरती [संगीत] ही नहीं बल्कि उसके चेहरे में कैमरे पर छा जाने वाली मासूमियत भी थी। यहीं से बंदिया की जिंदगी [संगीत] ने एक नया मोड़ लिया। उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका दिलाने की कोशिश शुरू हुई। उस समय बियां बहुत [संगीत] छोटी थी। लेकिन शायद उनकी खूबसूरती और कैमरे के सामने सहज रहने की क्षमता ने फिल्म निर्माताओं को प्रभावित कर दिया। आखिरकार साल 1976 में बंदिया को बॉलीवुड फिल्म जीवन ज्योति में काम करने का मौका मिला। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 14 [संगीत] साल थी। सोचिए जिस उम्र में ज्यादातर बच्चे स्कूल की पढ़ाई और बचपन की दुनिया में खोए रहते थे, उस उम्र में बंदियां बड़े पर्दे पर पहुंच चुकी थी। फिल्म में उन्हें अभिनेत्री के रूप [संगीत] में काम करने का मौका मिला और लोगों ने पहली बार उन्हें एक नई बॉलीवुड हीरोइन के रूप में देखा। उनकी उम्र भले ही कम [संगीत] थी, लेकिन स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। उनकी बड़ी आंखें, मासूम [संगीत] चेहरा और अलग से खूबसूरती लोगों को पसंद आने लगी। बिया के लिए [संगीत] यह सिर्फ एक फिल्म नहीं थी। यह उनके जीवन की शुरुआत थी। वो लड़की जो कभी एयर होस्टेस बनने का सपना देखती थी, [संगीत] अब बॉलीवुड की दुनिया में कदम रख चुकी थी। इसके बाद जैसे-जैसे समय आगे [संगीत] बढ़ा, वैसे-वैसे फिल्मों के ऑफर भी बढ़ने लगे। बिया को एक के बाद एक फिल्मों में काम मिलने लगा। धीरे-धीरे [संगीत] उन्होंने अपने लिए बॉलीवुड में एक अलग जगह बनानी शुरू कर दी। उनकी शुरुआती फिल्मों के बाद [संगीत] कई निर्माता और निर्देशक उनकी खूबसूरती और स्क्रीन प्रेज़ेंस से प्रभावित हुए। [संगीत] उस दौर में हीरोइन बनने के लिए सिर्फ अभिनय ही नहीं बल्कि दर्शकों के दिलों में उतर जाने वाली एक खास [संगीत] बात भी चाहिए होती थी और बंदिया में वो बात मौजूद थी। उनकी मुस्कान, उनकी मासूमियत और उनका चेहरा लोगों को पसंद आने लगा था। [संगीत] जल्द ही उन्हें कई फिल्मों में काम करने का मौका मिला। उन्होंने मुक्ति, खेल किस्मत [संगीत] का, जय विजय और दूसरी फिल्मों में काम किया। हर नई फिल्म के साथ पिंडिया का अनुभव बढ़ रहा था। वो धीरे-धीरे [संगीत] फिल्मी दुनिया को समझ रही थी। अभी उनकी उम्र बहुत ज्यादा नहीं थी, लेकिन वह बॉलीवुड [संगीत] के बड़े कलाकारों के साथ काम करने लगी थी। फिर साल 1977 में उनके करियर में एक और महत्वपूर्ण फिल्म आई। फिल्म थी [संगीत] चला मुरारी हीरो बनने। इस फिल्म में असरानी मुख्य भूमिका में थे। असरानी को लोग आज भी एक शानदार कॉमेडियन के रूप में जानते हैं। लेकिन उस दौर में उन्होंने अभिनय के अलग-अलग रंग दिखाए थे। बिया को इस फिल्म में उनके साथ काम करने का मौका मिला। फिल्म के जरिए [संगीत] बिया की लोकप्रियता और बढ़ गई। लोगों को यह बात खास लगती थी कि इतनी कम उम्र की लड़की बॉलीवुड [संगीत] में इतनी तेजी से अपनी पहचान बना रही थी। वो किसी एक तरह की भूमिका तक सीमित नहीं थी। धीरे-धीरे उन्हें अलग-अलग [संगीत] फिल्मों में काम मिलने लगा और उनका चेहरा दर्शकों के लिए जाना पहचाना होता चला गया। इसके बाद उनके करियर में [संगीत] फिल्म खट्टामीठा आई। इस फिल्म में उनके साथ राकेश रोशन नजर आए। यह फिल्म उस दौर की चर्चित [संगीत] फिल्मों में शामिल रही। बिया को भी इससे काफी पहचान मिली।

फिल्मों के साथ-साथ [संगीत] उनके ऊपर फिल्माए गए गाने भी लोकप्रिय होने लगे थे। यही वह समय था जब बिस्वामी का नाम बॉलीवुड की नई पीढ़ी की [संगीत] खूबसूरत अभिनेत्रियों में लिया जाने लगा। उनकी खूबसूरती की तुलना हेमा मालिनी से की जाने लगी थी। हालांकि हर अभिनेत्री की अपनी अलग पहचान [संगीत] होती है। लेकिन उस समय बिया के चेहरे और उनकी सुंदरता को देखकर [संगीत] कई लोग उन्हें दूसरी हेमा मालिनी कहा करते थे। यह तुलना अपने आप में बहुत [संगीत] बड़ी बात थी क्योंकि हेमा मालिनी उस दौर की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों में शामिल थी। बंधिया लगातार आगे बढ़ रही थी। इसके [संगीत] बाद उन्हें कॉलेज गर्ल जैसी फिल्मों में काम करने का मौका मिला। इस फिल्म में उनके साथ सचिन पिलगांवकर नजर आए। सचिन उस दौर के लोकप्रिय कलाकारों में शामिल थे, [संगीत] और दोनों की जोड़ी भी दर्शकों को पसंद आई। फिल्म के गानों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। धीरे-धीरे [संगीत] बिंदिया अब केवल एक नई अभिनेत्री नहीं रह गई थी। वह बॉलीवुड में अपनी पहचान बना चुकी थी। उनके पास काम [संगीत] था, लोकप्रियता थी और सबसे बड़ी बात यह थी कि उन्हें उस दौर के बड़े-बड़े कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिल रहा था। उन्होंने [संगीत] सुनील दत्त और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे कलाकारों के साथ फिल्मों में काम किया। फिल्म मुकाबला में भी वह नजर आई। उस दौर में मल्टीस्टारर फिल्मों का चलन [संगीत] काफी था और किसी युवा अभिनेत्री के लिए बड़े सितारों के साथ काम करना बहुत बड़ी उपलब्धि माना जाता था। [संगीत] फिर साल 1979 आया और यह साल बिया के करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण [संगीत] साबित हुआ। इस दौरान वह फिल्म खानदान में नजर आई। फिल्म में उनके [संगीत] साथ जितेंद्र थे। जितेंद्र उस समय बॉलीवुड के सबसे सफल अभिनेताओं [संगीत] में से एक थे। उनके साथ काम करना बिया के लिए बड़ी उपलब्धि थी। फिल्म और इसके गानों को दर्शकों ने पसंद किया और बिया [संगीत] की लोकप्रियता में भी इजाफा हुआ। इसके बाद आई फिल्म जानी दुश्मन। यह उस दौर [संगीत] की एक बड़ी मल्टीस्टारर फिल्म थी। फिल्म में कई बड़े कलाकार मौजूद थे [संगीत] और इसकी कहानी लोगों के बीच काफी चर्चा में रही। बिया भी इस फिल्म का हिस्सा थी। हालांकि इतने बड़े कलाकारों के बीच किसी एक अभिनेत्री पर ज्यादा ध्यान केंद्रित होना आसान नहीं था। लेकिन बिया अपनी मौजूदगी [संगीत] दर्ज कराने में कामयाब रही। साल 1979 में ही उनके [संगीत] करियर में एक ऐसी फिल्म आई, जिसे आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में गिना जाता है। यह फिल्म थी [संगीत] गोलमाल। फिल्म में उनके साथ अमोल पालेकर थे। गोलमाल की कहानी, कलाकार [संगीत] और कॉमेडी ने इसे एक क्लासिक फिल्म बना दिया। इस फिल्म में बिया का मासूम और सहज अंदाज लोगों को बहुत पसंद आया। वह उन अभिनेत्रियों [संगीत] में से थी, जिन्हें पर्दे पर देखकर दर्शकों को ऐसा लगता था कि उनके चेहरे पर बनावटीपन नहीं है। उनकी मासूमियत ही उनकी [संगीत] सबसे बड़ी ताकत थी। गोलमाल की सफलता ने बिंद्या के करियर को और मजबूत कर दिया। आज भी जब हिंदी सिनेमा की सबसे [संगीत] बेहतरीन कॉमेडी फिल्मों की बात होती है तो गोलमाल का नाम जरूर लिया जाता है। इस फिल्म [संगीत] का हिस्सा होना बंध्या के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि थी। लेकिन शायद उनकी जिंदगी का [संगीत] सबसे महत्वपूर्ण और सबसे विवादित अध्याय अभी शुरू होना बाकी था। इसके बाद बंदिया फिल्म [संगीत] दादा में नजर आई। इस फिल्म में उनके साथ अभिनेता विनोद मेहरा थे। फिल्म का [संगीत] एक गाना बेहद लोकप्रिय हुआ। दिल के टुकड़े-टुकड़े करके मुस्कुरा के चल। यह गाना आज भी लोगों को याद है। [संगीत] लेकिन उस समय शायद किसी को यह अंदाजा नहीं था कि पर्दे पर बिया के साथ नजर आने वाले विनोद मेहरा [संगीत] एक दिन उनकी असली जिंदगी में भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं। [संगीत] बिया और विनोद मेहरा ने फिल्मों में एक साथ काम किया। दोनों की जोड़ी पर्दे पर अच्छी [संगीत] लगती थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी। फिल्मों में साथ काम करते-करते दोनों एक दूसरे के करीब आते चले गए। यहां से बंदिया की जिंदगी [संगीत] में प्यार की शुरुआत हुई। लेकिन यह प्यार आसान नहीं था क्योंकि विनोद मेहरा की निजी जिंदगी पहले से ही [संगीत] जटिल थी। विनोद मेहरा उस दौर के चर्चित अभिनेताओं में शामिल थे। उनके जीवन को लेकर भी कई [संगीत] तरह की बातें होती रहती थी। उनकी शादीशुदा जिंदगी और रिश्तों की चर्चा फिल्मी दुनिया में होती रहती थी। ऐसे में जब [संगीत] बंदिया और विनोद मेहरा के करीब आने की खबरें सामने आने लगी, तो धीरे-धीरे यह रिश्ता चर्चा का विषय बन गया। बिंदिया उस [संगीत] समय बहुत कम उम्र की थी। वो अभी जिंदगी और रिश्तों के उस दौर में थी, जहां प्यार शायद सबसे बड़ी सच्चाई नजर आता है। दूसरी तरफ [संगीत] विनोद मेहरा उम्र और अनुभव में उनसे काफी आगे थे। दोनों के बीच बढ़ती [संगीत] नजदीकियों ने धीरे-धीरे फिल्मी गलियारों में चर्चाओं को जन्म देना शुरू कर दिया। कहा जाता है [संगीत] कि दोनों का रिश्ता इतना आगे बढ़ गया कि उन्होंने एक दूसरे के साथ जिंदगी बिताने का फैसला कर लिया। दोनों की शादी को लेकर [संगीत] भी कई बातें सामने आई और यह कहा गया

कि दोनों ने गुपचुप तरीके से शादी की थी। लेकिन इस रिश्ते की सबसे बड़ी मुश्किल यही [संगीत] थी कि विनोद मेहरा पहले से शादीशुदा थे। यहीं से शुरू हुआ विवाद। बिंदिया और विनोद मेहरा का रिश्ता जितना गहरा होता गया उतनी ही ज्यादा परेशानियां भी सामने आने लगी। एक तरफ [संगीत] प्यार था, दूसरी तरफ परिवार और समाज की प्रतिक्रिया थी। उस समय बॉलीवुड [संगीत] की दुनिया आज की तरह सोशल मीडिया से भले ही नहीं चलती थी, लेकिन फिल्मी मैगजीन [संगीत] और अखबारों में सितारों की निजी जिंदगी की खबरें खूब छपती थी। धीरे-धीरे बिया और विनोद के रिश्ते की खबरें बाहर आने लगी। अब बिया [संगीत] सिर्फ एक सफल अभिनेत्रीली नहीं थी। उनका नाम विवादों के साथ भी जुड़ने लगा। यह उनके लिए आसान [संगीत] समय नहीं था। एक युवा अभिनेत्री जिसका करियर तेजी से आगे बढ़ रहा था। अब उसकी निजी जिंदगी पर लोगों की नजरें टिक गई थी। बिया [संगीत] के लिए फिल्मों पर ध्यान देना मुश्किल होता जा रहा था। उनके रिश्ते को लेकर परिवारों में भी तनाव बढ़ने की बातें सामने आई। कहा जाता है कि इस पूरे विवाद का असर बियांदिया की मानसिक [संगीत] शांति और उनके काम पर भी पड़ने लगा। यह दौर बंदिया के लिए बेहद उलझा हुआ था। एक तरफ वो अपने प्यार को बचाना [संगीत] चाहती थी। दूसरी तरफ उनका करियर था। तीसरी तरफ समाज की बातें [संगीत] थी और सबसे बड़ी बात यह थी कि वह अभी भी बहुत कम उम्र की थी। जिस उम्र [संगीत] में इंसान अपनी जिंदगी को समझना शुरू करता है उस उम्र में बिया की जिंदगी पहले ही एक ऐसी कहानी बन चुकी थी जिस पर पूरी [संगीत] फिल्म बनाई जा सकती थी। कई रिपोर्टों और चर्चाओं के अनुसार बिया और विनोद मेहरा के रिश्ते में समय [संगीत] के साथ तनाव बढ़ने लगा। दोनों के बीच पहले जैसी स्थिति नहीं रही। विनोद मेहरा [संगीत] की निजी जिंदगी में दूसरे रिश्तों की चर्चा भी होने लगी। इसी दौरान [संगीत] विनोद मेहरा और अभिनेत्री रेखा के रिश्ते को लेकर भी बॉलीवुड में चर्चाएं [संगीत] होने लगी। इन खबरों ने बिया और विनोद के रिश्ते को और मुश्किल बना [संगीत] दिया। बिया के लिए यह शायद बहुत कठिन समय रहा होगा। जिस इंसान [संगीत] के साथ उन्होंने अपनी जिंदगी के सपने देखे थे। अब उसी रिश्ते में अनिश्चितता पैदा हो चुकी थी। प्यार जब शुरू होता है तो इंसान [संगीत] भविष्य की सबसे खूबसूरत तस्वीर देखता है। लेकिन जब वही प्यार टूटने लगता है तो इंसान को अपने चारों तरफ सिर्फ सवाल दिखाई देने [संगीत] लगते हैं। बिया के साथ भी शायद कुछ ऐसा ही हुआ। उनका करियर भी धीरे-धीरे प्रभावित होने [संगीत] लगा था। एक समय था जब उनके पास लगातार फिल्मों की लाइन लगी हुई थी। वो एक [संगीत] के बाद एक फिल्मों में काम कर रही थी। लेकिन अब फिल्मों की संख्या कम होने लगी। उनकी निजी जिंदगी का असर उनके [संगीत] पेशेवर जीवन पर दिखाई देने लगा। फिर भी बंदिया का फिल्मी सफर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था। उन्होंने एहसास, आत्माराम, टक्कर, शान [संगीत] और दूसरी फिल्मों में काम किया। फिल्म शान में उन्हें शशि कपूर जैसे बड़े अभिनेता के साथ [संगीत] काम करने का मौका मिला। यह उस दौर की बड़ी फिल्मों में शामिल थी। इसके बाद भी [संगीत] बंदिया ने कई फिल्मों में काम किया। बंदिश, सनसनी, होटल, और दूसरी फिल्मों में वह नजर आई। उन्होंने अमिताभ बच्चन, [संगीत] संजीव कुमार, शशि कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा और कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया। साल 1981 [संगीत] में, वो मिथुन चक्रवर्ती के साथ फिल्म जीने की आरजू में नजर [संगीत] आई। उनका फिल्मी सफर काफी लंबा रहा, और उन्होंने अपने करियर में अलग-अलग तरह की फिल्मों [संगीत] में काम किया। खुददार हीों का चोर हमारी बहू अलका आमने-सामने डायल 100 लालच मेहंदी अविनाश [संगीत] विशाल और मेरा प्यार मेरा दुश्मन जैसी फिल्मों में भी उन्होंने काम किया। लेकिन एक [संगीत] सच्चाई यह थी कि जितनी तेजी से उनका करियर शुरू हुआ था, उतनी ही तेजी से उनकी निजी जिंदगी ने उनकी प्राथमिकताओं को बदलना शुरू कर दिया। बिंद्या को [संगीत] शायद महसूस होने लगा था कि जिंदगी केवल फिल्मों और सफलता का नाम नहीं है। उन्हें अपनी जिंदगी के बारे में फैसला [संगीत] लेना था। विनोद मेहरा के साथ उनका रिश्ता अब पहले जैसा नहीं रहा था [संगीत] और इसी बीच उनकी जिंदगी में एक नया इंसान आया। यह इंसान था जेपी दत्ता। जेपी दत्ता उस समय फिल्मी दुनिया से जुड़े हुए थे और [संगीत] आगे चलकर हिंदी सिनेमा के बड़े निर्देशकों में शामिल हुए। उन्होंने बाद में बॉर्डर, रिफ्यूजी, एलओसी [संगीत] कारगिल और कई यादगार फिल्में बनाई। बिंदिया और जेपी दत्ता के बीच मुलाकात हुई। धीरे-धीरे [संगीत] दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी।

बिंदिया पहले ही अपनी जिंदगी [संगीत] में काफी कुछ देख चुकी थी। कम उम्र में स्टारडम, प्यार, विवाद और टूटते रिश्ते, इन सब ने उन्हें बदल दिया था। शायद [संगीत] अब वो अपनी जिंदगी में स्थिरता चाहती थी। जेपी दत्ता के साथ उनका रिश्ता आगे बढ़ने लगा। [संगीत] दोनों के अफेयर की चर्चाएं भी फिल्मी दुनिया में होने लगी। बिया के सामने [संगीत] अब जिंदगी का एक बड़ा फैसला था। क्या वह अपनी पुरानी जिंदगी में उलझी रहे या फिर सब कुछ पीछे छोड़कर नई शुरुआत करें। आखिरकार उन्होंने [संगीत] एक नया फैसला लिया। बताया जाता है कि बिया और विनोद मेहरा का रिश्ता समाप्त हो गया और साल 1984 के आसपास [संगीत] दोनों अलग हो गए। यह बिया की जिंदगी का एक बहुत बड़ा मोड़ था। एक ऐसा रिश्ता [संगीत] जिसने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया था। अब खत्म हो चुका था। लेकिन जिंदगी यहीं नहीं रुकी। अगले [संगीत] ही साल बिया ने जेपी दत्ता के साथ शादी कर ली। साल 1985 में दोनों ने शादी करके अपनी जिंदगी की नई शुरुआत की। यह शादी भी [संगीत] काफी चर्चा में रही। दोनों की उम्र में अंतर को लेकर भी बातें हुई। परिवार की [संगीत] नाराजगी और दूसरी तरह की चर्चाएं भी सामने आई। लेकिन बिया ने इस बार अपनी जिंदगी का फैसला खुद लिया। वो अब बिया [संगीत] गोस्वामी से बिया दत्ता बन चुकी थी। उनकी जिंदगी का नया अध्याय शुरू हो गया था। यह वो बिया [संगीत] थी जिन्होंने कम उम्र में बॉलीवुड की चमक देखी थी। वो बिया जिन्होंने बड़े-बड़े सितारों के साथ [संगीत] काम किया था। वो बिया जिन्होंने प्यार के लिए मुश्किलों का सामना किया था। और अब वही बिया अपनी जिंदगी [संगीत] को एक नई दिशा देने जा रही थी। शादी के बाद बंदिया ने धीरे-धीरे अभिनय की दुनिया से दूरी बना ली। यह फैसला [संगीत] बहुत बड़ा था। एक समय था जब उनका नाम बॉलीवुड की खूबसूरत और लोकप्रिय अभिनेत्रियों में लिया जाता था। उनके [संगीत] पास फिल्मों के ऑफर थे। उनके गाने हिट होते थे। उनके साथ बड़े अभिनेता काम करते थे। लेकिन अब [संगीत] उनकी जिंदगी बदल चुकी थी। उन्होंने परिवार को ज्यादा महत्व देना शुरू किया। जेपी दत्ता के साथ शादी के बाद बििया ने फिल्मों में अभिनेत्री के [संगीत] रूप में काम करना लगभग छोड़ दिया। लेकिन उन्होंने बॉलीवुड को पूरी तरह से अलविदा नहीं कहा। उनकी जिंदगी अब कैमरे के सामने से कैमरे के [संगीत] पीछे की दुनिया की तरफ बढ़ रही थी। बिया ने फिल्म निर्माण के दूसरे क्षेत्रों में काम करना शुरू किया। उन्होंने कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग से भी खुद को जोड़ा। जेपी दत्ता [संगीत] की फिल्मों में उनकी भूमिका कैमरे के पीछे दिखाई देने लगी। यह उनकी जिंदगी की दूसरी बारी थी। पहली बारी [संगीत] में वह पर्दे पर थी। लोग उन्हें देखते थे। उनकी खूबसूरती की तारीफ [संगीत] करते थे। उनके गाने सुनते थे। लेकिन दूसरी पारी में वह पर्दे के पीछे थी। अब उनका काम अलग [संगीत] था। लेकिन फिल्मी दुनिया से उनका रिश्ता अभी भी बना हुआ था। जेपी दत्ता [संगीत] की फिल्मों ने हिंदी सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनाई। बॉर्डर जैसी फिल्म ने इतिहास रच दिया। रिफ्यूजी [संगीत] और एलओसी कारगिल जैसी फिल्मों की भी काफी चर्चा रही। इन फिल्मों के निर्माण से जुड़े कई क्षेत्रों [संगीत] में बिया की भागीदारी की बातें सामने आती रही हैं।

यानी अभिनय छोड़ने के बाद भी [संगीत] उन्होंने अपने आप को पूरी तरह फिल्मी दुनिया से अलग नहीं किया। बिया और जेपी दत्ता की शादीशुदा जिंदगी में दो [संगीत] बेटियों का जन्म हुआ। अब बिया की जिंदगी का केंद्र बदल चुका था। पहले उनके जीवन में शूटिंग [संगीत] सेट, कैमरे और फिल्में थी। अब परिवार उनकी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका था। बिया की जिंदगी को अगर ध्यान से देखा जाए तो [संगीत] ऐसा लगता है जैसे उनकी कहानी खुद किसी बॉलीवुड फिल्म की कहानी हो। एक लड़की जो बचपन में एयर होस्टेस बनने का सपना देखती है। [संगीत] किस्मत उसे फिल्मों तक पहुंचा देती है। वो सिर्फ 14 साल की उम्र में बॉलीवुड की हीरोइन बन जाती है। उसकी [संगीत] खूबसूरती के चर्चे होने लगते हैं। उसे दूसरी हेमा मालिनी कहा जाने लगता है। वो एक के बाद एक [संगीत] फिल्मों में काम करती है। बड़े-बड़े सितारों के साथ स्क्रीन शेयर करती है। उसके गाने लोगों की जुबान पर चढ़ जाते हैं। फिर उसकी [संगीत] जिंदगी में प्यार आता है। लेकिन यह प्यार आसान नहीं होता। विवाद होते [संगीत] हैं, मुश्किलें आती हैं, करियर प्रभावित होता है, रिश्ते टूटते [संगीत] हैं और फिर वही लड़की अपनी जिंदगी को एक बार फिर से शुरू करती है। यही बिया [संगीत] गोस्वामी की जिंदगी की सबसे बड़ी खासियत रही। उन्होंने जिंदगी के अलग-अलग रंग देखे, सफलता भी देखी, प्यार भी देखा, विवाद भी देखे, मुश्किलें भी देखी।

लेकिन जिंदगी [संगीत] को आगे बढ़ाना कभी नहीं छोड़ा। बिया के करियर को देखें तो उन्होंने उस दौर [संगीत] के लगभग हर बड़े अभिनेता के साथ काम किया। अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, जितेंद्र, संजीव कुमार, सुनील [संगीत] दत्त, शत्रुघ्न सिन्हा, मिथुन चक्रवर्ती और कई दूसरे कलाकारों के साथ [संगीत] उन्होंने फिल्मों में काम किया। इतने बड़े कलाकारों के साथ काम करना [संगीत] किसी भी अभिनेत्री के लिए बड़ी उपलब्धि थी। लेकिन इसके बावजूद बि्या का नाम अक्सर उनकी निजी जिंदगी की वजह [संगीत] से ज्यादा चर्चा में रहा। यह शायद बॉलीवुड की एक बड़ी सच्चाई भी है। कई बार किसी कलाकार की उपलब्धियों [संगीत] से ज्यादा उसकी निजी जिंदगी लोगों का ध्यान खींच लेती है। बिया के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनकी फिल्मों [संगीत] की सफलता और उनके अभिनय की चर्चा के साथ-साथ उनके रिश्ते भी सुर्खियों में रहे। लेकिन समय बीतता गया। [संगीत] फिल्में बदलती गई। बॉलीवुड बदल गया। नई अभिनेत्रियां आई। नई पीढ़ी ने फिल्मों में जगह बना ली और बियां धीरे-धीरे पर्दे से दूर होती चली गई। आज की पीढ़ी शायद उन्हें उतना नहीं जानती जितना [संगीत] 70 और 80 के दशक के दर्शक जानते थे। लेकिन जिन्होंने उस दौर की फिल्में देखी हैं उनके लिए बंदिया [संगीत] गोस्वामी का नाम कोई नया नहीं है। उन्हें आज भी गोलमाल की मासूम अभिनेत्री के रूप में याद किया [संगीत] जाता है। उन्हें खट्टा मीठा और दूसरी फिल्मों के लिए याद किया जाता है। उन्हें उनके [संगीत] खूबसूरत चेहरे और बड़ी-बड़ी आंखों के लिए याद किया जाता है। और उन्हें उस गाने [संगीत] के लिए भी याद किया जाता है जिसने जाने कितने टूटे दिलों को अपनी तरफ खींचा। दिल के टुकड़े-टुकड़े [संगीत] करके मुस्कुरा के चल। शायद इस गाने की लाइनें बिया की जिंदगी पर भी किसी हद तक फिट बैठती [संगीत] हैं। क्योंकि जिंदगी में उन्होंने भी उतार-चढ़ाव देखे। कई रिश्ते [संगीत] आए और चले गए। करियर की ऊंचाइया

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