पर एक चीज बताइए कि बहुत सारी चीजें जब समाज में कही जाती हैं, राजनेता ही कह दे लेकिन अगर को लेकर जो राहुल गांधी ने कहा है, क्या वह गलत है? क्या वह कहा है? मैंने सुना नहीं। उन्होंने महिलाओं के लिए कहा कि महिलाओं के लिए जो में लिखा गया है, वह बिल्कुल गलत है और यह बताता है कि हमें करना है यानी कि हम उसको पीछे छोड़ें और उन सारी चीजों को ना मिले। यह पहली बार नहीं है। की प्रतियां कई बार से देखो मैं राजनीति में नहीं जाता ना राजनीति मुझे अच्छी लगती है।
परंतु जब वह राजनेता होकर धर्म में घुसेंगे तो हम भी उनको जवाब दे रहे हैं। ऐसा है कि राहुल गांधी जी कहते हैं गलत है। क्या वह कह सकते हैं कि कुरान गलत है? क्या उनकी हिम्मत है कि कह सकते हैं कि बुर्का गलत है? क्या कह सकते थे तलाक गलत है? क्या कह सकते थे कि वो वहां पर वो भी होता ना महिलाओं को तलाक देने के बाद फिर दूसरी बार जाती हैं यदि स्वीकार तो कुछ होता है। हलाला वगैरह क्या होता है?
हलाला तो क्या राहुल गांधी जी कह सकते हैं कि हलाला गलत है। हलाला को वो गलत नहीं कहते। तलाक तीन तलाक को गलत नहीं कहते। बुर्खा को गलत नहीं कहते। सनातन को गलत कहेंगे वो। क्योंकि सनातन सीधा है, जवाब देता नहीं है। तो राहुल गांधी जी जैसे लोग केवल सनातन को टारगेट करते हैं। में क्या गलत है? वही तो लिखा है, नारी का सम्मान करो। नारी का अपमान अब बताइए, तलाक देकर छोड़ देना यह नारी का सम्मान है। तो राहुल गांधी जी को यह क्यों नहीं दिखा। दिख गई कि उसमें गलत है। वहां भी देख लेते तीन तलाक पर थोड़ी बात कर लेते। नहीं करेंगे बात। क्योंकि सनातन पर राजनीति करनी है। सनातन को गलत ठहराना है।
जो आप कह रहे हैं कि जो लोग नहीं गीता पढ़ रहे हैं उनको मैं बता रहा हूं। तो बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिन्होंने नहीं पढ़ा। गीता ज्ञान नहीं लिया। रामचरितमानस नहीं पढ़ा। लेकिन जो सोशल मीडिया के रील्स हैं उसके जरिए एक छोटा ज्ञान आप हिस्सा उसका ले लेते हैं। आपको लगता है गलत व्याख्या सनातन के लिए कौन कर रहा है गलत व्याख्या? बहुत सारे लोग राजनीति में ही सही। अब राजनेताओं का क्या है? वह तो रहे थे। कुछ नेता हमने देखा बोल रहे थे यह चौपाई गलत है। अरे तुम्हारे बाप दादा ने वह पढ़ी है। ठीक से अर्थ करना आता है।
पढ़ी लिखी कुछ नहीं जला रहे हैं। अब समस्या यह है कि आज तक सुना आपने कि कोई मुसलमान कुरान को जला रहा है। आज तक सुना कि कोई ईसाई है। पर हिंदू को पता नहीं क्या हो गया है। रहा है। मनो शत्रु रहा है। पढ़ लो भैया, पढ़ लो। जो बातें अच्छी लगे वह उतार लो, जो नहीं लगे छोड़ लो कहा है ना, सार सार को गई वैसा चाहिए जैसे सूप स्वभाव सूपड़ा होता है सुपड़ा आप जानती हैं? फटके हैं कभी उसमें। सूपड़ा होता है बांस का। उसमें ना धान और चीजें साफ करते हैं। दादी अम्मा उसमें ना जो खराब चीज होती है उड़ जाता है और जो अच्छी होती है वह बच जाता है। तो व्यक्ति का स्वभाव ऐसा होना चाहिए कि बुराइयां उड़ा देनी चाहिए। यदि माना कि मेरे में कोई बुराई है।
आप में कोई बुराई मैं आपकी बुराई क्यों देखूं? बुराई सृष्टि में किस में नहीं है। इस एक आदमी बताइए संसार में जिसमें कोई बुराई ना हो। अरे में अच्छाई लिखी है वो ग्रहण कर लो। तुम्हारे हिसाब से तुम्हें बुरा लगे। है बुरा कुछ नहीं पर तुम्हें बुरा लग रहा वह छोड़ दो। रामचरितमानस में जो अच्छा लगे वो ग्रहण कर लो जो तुम्हें कुछ बुरा है नहीं पर जो तुम्हें बुरा लगे छोड़ दो हमारी हमारे में 1 लाख बुराइयां हैं। पर एक अच्छाई भी शायद हो तो आप अच्छाई देख लो। अब बुराई ही देखना है तो फिर क्या देखते रहो बुराई। बुरा जो देखन मैं चला बुरा ना मिलिया कोई जो दिल खोजा अपना हम जो बुरा कह रहे हैं को वही बुरे हैं।