जीवन के दिन [संगीत] छोटे सही हम भी बड़े दिल आज हम बात करेंगे 70 के दशक की एक ऐसी बदनसीब हीरोइन की जिसकी कहानी आपको रुला देगी। चलो रे डोली [संगीत] उठाओ कहां पिया [संगीत] मिलन जिसकी मां ही उसकी सबसे बड़ी दुश्मन बन गई। उसके खुद के पति ने उसे नर्क से भी बदतर जिंदगी दिखाई और खुद की बेटियों ने उसके साथ जानवरों से भी बुरा व्यवहार किया। एक समय पर इसकी एक्टिंग देखकर लोग उसके दीवाने हो जाते थे और उनकी आंखों का रंग लोगों को सोचने पर मजबूर कर देता था। आंखें भी का पार करती [गाना गाने की आवाज़] हैं। पर्सनल से सवाल तो हम बात कर रहे हैं गुजरे जमाने की बेहतरीन हीरोइन और कमल हसन की पत्नी रही सारिका ठाकुर की। दिल हम पे रखने वाला कितना काम है।
आखिर इस एक्ट्रेस ने जीते जी नर्क कैसे देखा? क्यों हर किसी ने उसका फायदा उठाया? और उसकी जिंदगी बदतर बनाई। क्यों उसकी खुद की बेटी श्रुति हसन ने उसे मरने के लिए छोड़ दिया था? भारत को विश्व कप जिताने वाले कपिल देव ने इस हीरोइन का फायदा कैसे उठाया और आखिर कैसे कमल हसन ने सारिका को दो बच्चों की मां बनाकर छोड़ दिया। जानेंगे इस खूबसूरत हीरोइन की अनसुनी और रोचक कहानी। तो चलिए शुरू करते हैं। वेलकम टू फिल्मी विचार। सारिका का जन्म 5 सितंबर 1960 को दिल्ली में हुआ था। लेकिन उनका परिवार मराठी था और वह भी राजपूत परिवार। उनके पिता दिनेश और मां कमला दोनों ही अच्छे मां-बाप नहीं बन पाए। दोनों के बीच हमेशा बहस होती रहती थी और एक दिन यह बहस इतनी
बढ़ गई कि सारिका के पिता घर छोड़कर भाग गए और पत्नी को बेटी के साथ छोड़ दिया। हालांकि सारिका की मां ने भी सारिका के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया और उसने नन्ही सी सारिका को कमाई का जरिया बनाया। तो मैं उनसे बात नहीं करूंगा। क्या तुम बहुत तुम बहुत खराब हो तुम मुझे वो खुद कोई काम नहीं करना चाहती थी। इसलिए वह अपनी बेटी को भीख मांगने के लिए इस्तेमाल करने लगी और उसे सड़क पर डालकर पैसे इकट्ठे करने लगी। जैसे ही सारिका 5 साल की हुई तो सारिका की मां उसे नाटक में जबरदस्ती काम करवाने लगी ताकि उससे कुछ पैसे मिल जाए और इसके अलावा वह फिल्म स्टूडियोज के चक्कर भी लगाने लगी ताकि किसी मूवी में छोटी सी बच्ची का कोई रोल हो और उसे करवाकर वो पैसे कमा सके। कन्हैया किसको कहेगा तू मैया। मतलब अगर वह चाहती तो खुद मेहनत मजदूरी करके अपनी बेटी को पढ़ा लिखा सकती थी। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया बल्कि खुद अपना पेट 5 साल की बच्ची का इस्तेमाल करके भरने लगी। सारिका को पहली बार 1967 में आई मूवी मजली दीदी में काम करने का ऑफर मिला था और एक चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर उनके एक्टिंग करियर की शुरुआत यहीं से हुई। हालांकि सारिका यह काम खुद नहीं कर रही थी
बल्कि उनकी मां उनसे जबरदस्ती यह काम करवा रही थी। सारिका ने मीना कुमारी के बचपन का किरदार निभाकर अपनी जर्नी शुरू की थी। इसके बाद हमराज में उन्होंने सुनील दत्त और बिमी के साथ काम किया। तुम कौन हो? हम नहीं हम आंटी के आंटा हैं। और इसमें भी वो एक चाइल्ड आर्टिस्ट ही बनी थी। बड़ी बात यह थी कि जिस उम्र में उन्हें पढ़ाई लिखाई और खेलकूद करना चाहिए था उस उम्र में उनकी मां उनसे दिन रात काम करवा रही थी। सारिका ने सत्यकाम, ज्योति, आशीर्वाद, बालक, बेटी, देवी, छोटी बहू और हरजीत जैसी कई बेहतरीन मूवीज में बाल कलाकार के तौर पर काम किया। कमाल की बात यह थी कि सारिका की एक्टिंग बचपन में ही दिल जीतने वाली हो गई थी। वह लड़की होकर भी लड़के के किरदार निभाती थी और इतनी शिद्दत से निभाती थी कि लोग यह जान ही नहीं पाते थे कि वह लड़का नहीं लड़की है। नहीं मां नहीं मैं तुम्हें देखूंगा। तुम मर जाओगी। तुम मर जाओगी मां। सारिका ने अपना पूरा बचपन एक्टिंग करते हुए ही बिताया। वो ना तो कभी स्कूल जा पाई और ना ही कभी पढ़ लिख पाई। और जब भी वह स्कूल जाने की बात करती तो उनकी मां उन्हें पीट देती थी। खाना बंद कर देती थी। सारिका काम करते हुए कब बचपन से जवान हो गई और उसका बचपन कब उसकी मां की लालच की भेंट चढ़ गया। उन्हें पता भी नहीं चला। लेकिन मां का लालच यहीं खत्म नहीं हुआ। जैसे ही सारिका बड़ी हुई और थोड़ी समझदार हुई तो उसे पता चला कि उसकी बचपन से लेकर आज तक की जो भी कमाई है उन सबको उसकी मां अपने शौक पूरे करने में खर्च कर चुकी है और जो प्रॉपर्टी उसकी मां ने खरीदी भी है तो उसमें कहीं भी सारिका का नाम तक नहीं था। यह सब देखकर सारिका को बहुत बुरा लगा और वह मां से सवाल करने लगी। लेकिन जब उसने अपनी मां से अपनी कमाई का हिसाब किताब लेना शुरू किया तो उसकी मां ने उन्हें बहुत बुरी तरीके से पीटा और उसे सारी संपत्ति से बेदखल भी कर दिया। [संगीत] अब तक आई मिलन की [संगीत]
और उसकी सारी कमाई छीनकर अपनी बेटी से रिश्ता भी खत्म कर लिया। मतलब ऐसी मां भगवान किसी दुश्मन को भी ना दे। इसके बाद सारिका बेघर हो गई और दर-दर की ठोकरें खाते हुए सड़कों पर भटकने लगी। वह कभी किसी दोस्त के यहां रुकती तो कभी किसी मंदिर में रात निकालती थी। हालांकि सारिका काम कर रही थी तो धीरे-धीरे उन्होंने फिर से पैसे जोड़ना शुरू किया और किराए के घर में रहने लगी। 1975 में सारिका ने हीरोइन के तौर पर फिल्मों में कदम रखा और मैन हीरोइन बनकर उन्होंने एक नई शुरुआत की। मूवी आई कागज की नाव जिसमें उनके हीरो थे राज किरण। हर जन्म में हमारा मिलन। इसके बाद आई गीत गाता चल। इस मूवी में उनके हीरो थे नदिया के पार वाले चंदन यानी कि सचिन पिलगांवकर। गीत गाता चल ओ साथे [संगीत] चल। इस मूवी में सारिका ने बेहतरीन काम किया। मूवी भी बड़ी चर्चित रही और खासकर मूवी के गाने। श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम लोग करे मतलब हर गाना यादगार बना और कुछ गाने तो ऐसे हिट हुए कि यह हर घर में सुने जाने लगे। सांवरे की बंसी [संगीत] को बजने से काम राधा का भी। सचिन के साथ सारिका की जोड़ी भी खूब जमी और हर कोई अब एक चाइल्ड आर्टिस्ट को हीरोइन के किरदार में देख रहा था और सारिका की जिंदगी भी बदलने लगी थी। दोनों की जोड़ी ऐसी जमी कि अगली मूवी में फिर से दोनों एक साथ दिखाई दिए। मूवी का नाम था जििद। होली के बहाने [संगीत] आ गए। होली के बहाने इस मूवी में भी सारिका और सचिन ने खूब रोमांस किया। मतलब इतना किया कि वह पतिपत्नी बनकर सुहागरात मनाने भी पहुंच गए थे। तेरा राजकुमार आया है रथ पे सवार हो के। लेकिन मूवी में इसके गाने भी बड़े हिट हुए और सारिका की एक्टिंग ने भी लोगों का खूब दिल जीता। इसके बाद भी रक्षाबंधन, बंडलबाज, श्याम तेरे कितने नाम, प्रतिमा और पायल, खेल किस्मत का और अनपढ़ जैसी कई बेहतरीन मूवीज में सारिका ने काम किया। इन सभी मूवीज में सारिका ने इतना बेहतरीन काम किया कि अब वो एक जाना माना नाम बन चुकी थी। तेरी पलकों के तले [संगीत] ये जो दीपक इसके बाद भी सारिका की मूवीज आती रही जिनमें दिल और दीवार अंजाम देवता और मधु मालती जैसी मूवीस शामिल रहीं। मधु मालती उनकी सचिन पलगांवकर के साथ एक और बेहतरीन मूवी थी। चलो [संगीत] हम बसा लेंगे। दुनिया से दूर नहीं एक दुनिया जिसे देखकर दिल भर आता है। घर से भागे दो लोगों की कहानी जिनके सामने जब जिंदगी की असलियत आती है, मुश्किलें आती हैं तो प्यार कम और टकरार ज्यादा होने लगती है और इस कहानी को इस तरीके से दिखाया गया कि आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे और सारिका और सचिन की एक्टिंग भी आपके दिल में घर कर लेगी। इसके बाद सारिका मिथुन दा की हीरोइन बनी। मूवी आई हमारा संसार और सारिका ने मिथुन चक्रवर्ती के साथ भी अच्छी जोड़ी बनाई। कहते हैं दोनों खोए खोए निहारो निहारो। इसके बाद सारिका जाने दुश्मन में जितेंद्र की बहन बनी थी और इस महान गाने में भी दिखाई दी। जिसके बिना आज भी दुल्हन की विदाई अधूरी लगती है। चलो रे [संगीत] डोली उठाओ कहां पिया मिलन। इसके बाद बिन फेरे हम तेरे में वह विनोद मेहरा की हीरोइन बनी। इसके बाद शोले के गब्बर सिंह ने राखी की सौगंध खाई और सारिका रंजीत की बहन बनी। मतलब इस मूवी में भक्षक ही रक्षक बना था और उससे उसकी बहन
यह कह रही थी। जीना [संगीत] चाहे तो जी ले, मरना चाहे तो मर। इसके बाद सचिन पिलगांवकर जाने बाहर लेकर आए और सारिका फिर से उनकी हीरोइन बनी। सारिका ने सबसे ज्यादा सचिन की हीरोइन बनकर ही काम किया। दोनों की जोड़ी पर्दे पर ऐसी जमती थी कि हर फिल्म मेकर उन्हें साथ में साइन करता था। इसके बाद भी सारिका की मूवीज आती रही। कुछ हिट हुई और कुछ फ्लॉप। जमाना बुरा है तुम ऐसा ना करना। तो फिर मैं क्या करूं दिलदार? जैसे ज्योति बने ज्वाला में उनका काम बहुत अच्छा था। इसके बाद यह कैसा इंसाफ भी अच्छी रही। इसके बाद नजराना प्यार का आई और इसके गाने भी बड़े हिट रहे। सच बोले कोई कहा [संगीत] झूठा है ये सारा ज 1981 में आई पांच कैदी और इसमें भी सारिका ठाकुर ने अपने काम से सबका दिल जीता और हां डांस से भी तेरा प्यार जोगन हूं मैं जोगन हूं हां मैं इसके बाद भी सारिका अलग-अलग तरह की मूवीज में काम करती रही लेकिन सबसे अलग रही उनकी मूवी दहशत जिसमें वो नवीन निश्चल की हीरोइन बनी थी। यह मूवी रामसे ब्रदर्स की थी जो हॉरर मूवीज के लिए जानी जाती थी। तो यह उस समय की एक हॉरर साइंस फिक्शन मूवी थी जिसमें एक डॉक्टर खुद पर एक्सपेरिमेंट करके जानवर बन जाता है। बिल्कुल स्पाइडरमैन की छिपकली की तरह। तो कहीं मार्वल वालों ने रामसे ब्रदर्स के आईडिया तो चोरी नहीं किए हैं। कुछ भी लोगों ने भूतिया डरावनी मूवीज में सारिका को इतना पसंद किया कि उन्होंने फिर से रामसी ब्रदर्स की दूसरी मूवी में काम किया जिसका नाम था सन्नाटा और यह भी एक बेहतरीन मूवी रही। इसके बाद भी सारिका ने लगातार काम किया। लेकिन फिर धीरे-धीरे वह हीरोइन के किरदार से हटने लगी थी और एक साइड एक्ट्रेस बनने लगी थी। सारिका वो हीरोइन रही जो हर तरह का किरदार निभा लेती थी। वह किसी भी किरदार के लिए मना नहीं करती थी। वह एक मूवी में हीरोइन बन जाती थी। अगली मूवी में सपोर्टिंग किरदार निभा लेती थी और फिर अगली मूवी में फिर से हीरोइन बनकर हीरो के साथ रोमांस करने लगती थी। उन्होंने नास्तिक में अमिताभ बच्चन के साथ काम किया। मैं आपको पत्थर समझ कर तो लाई नहीं। और फिर हीरा
भी तो पत्थर ही होता है। विधाता में संजय दत्त के साथ काम किया। कितनी खूबसूरत अंगूठी है। हीरे की है। शायद दादू ने पहनाई थी। आपको पसंद है? आप रख लीजिए। बड़े दिलवाला में वो ऋषि कपूर के साथ नजर आई और कुंवारी बहू में निभाया गया उनका किरदार कौन भूल सकता है? सुन सुने कहानी [संगीत] बन का राजा मिले जिगर की रानी। राजतिलक में वो कमल हसन की हीरोइन बनी और फिर बाद में उनकी पर्सनल हीरोइन भी बन गई। जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे। 1980 से 1990 तक सारिका ने लगभग 70 से भी ज्यादा फिल्मों में काम कर लिया था। यह उनके करियर का पीक टाइम था जब वह हर साल छ से सात फिल्मों में काम कर रही थी और हर एक्टर की हीरोइन बन रही थी। हालांकि उनकी ज्यादातर मूवीज फ्लॉप होती रही और बड़ी हिट नहीं हो पाई। यही कारण रहा कि उन्हें उतनी पहचान नहीं मिल पाई जितना वो डिर्व करती थी। लोग देखेंगे लोग देखेंगे अजान। 1989 के बाद सारिका ने फिल्मों से एक लंबा ब्रेक ले लिया था और फिर सीधा 1997 में वह वापस लौटी फिल्म आखिरी संघर्ष से। इसी बीच उनकी जिंदगी नरक बन गई थी। जिसकी चर्चा भी हम आगे करेंगे। सारिका ने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत सपोर्टिंग किरदार से की और वह छोटे-मोटे किरदार निभाने लगी। लेकिन दूसरी पारी शुरू होने से पहले उनके साथ जो हुआ वह आपकी आंखें नम कर सकता है। जिसके बारे में हम आगे विस्तार से जानेंगे। इसके बाद उन्होंने अलाव बाधन रघु रोमियो जैसी मूवीज में काम किया। सारिका ने सिर्फ हिंदी मूवीज में काम नहीं किया बल्कि तमिल, तेलुगु, कन्नड़ भाषा की फिल्मों में भी काम किया। सारिका कुछ इंग्लिश मूवीज का भी हिस्सा रही। जिनमें सबसे चर्चित रही अमेरिकन डे लाइट, परजानिया और सीक्रेट इविल। सारिका ने काम करना बंद नहीं किया और वह अब भी अच्छी खासी मूवीज का हिस्सा बन रही हैं। मनोरमा 6 फीट अंडर जैसी सस्पेंसिव मूवी में उन्होंने मनोरमा का किरदार निभाया। मतलब इस मूवी की मेन कैरेक्टर वही थी। मेरा नाम मनोरमा और मेरी उम्र 32 साल। ये याद रखिएगा। प्लीज याद रखिएगा अगर मुझे [संगीत] कुछ हो गया तो। प्लीज इसके बाद भी हरिपुत्र, भेजा फ्राई और कच्चा लिंू जैसी कई मूवीज में सारिका दिखाई दी। सारिका ने 2012 में आई शाहरुख खान की जब तक है जान में भी काम किया था। इसके बाद 2014 की पुराने जींस में भी वह दिखाई दी। इसके बाद 2016 में आई सिद्धार्थ और कैटरीना कैफ की बार-बार देखो में भी वो नजर आई थी। काला चश्मा। [संगीत] सारिका आखिरी बार बुड्ढों से सजी हुई मूवी ऊंचाई में दिखाई दी थी। जिसमें अमिताभ बच्चन एवरेस्ट चढ़ते हैं। हालांकि साउथ में वह अब भी एक्टिव बनी हुई हैं। सारिका ठाकुर ने लगभग 130 से भी ज्यादा फिल्मों में काम कर लिया है और आज भी काम कर रही हैं। यह थी उनकी प्रोफेशनल लाइफ और अब हम बात करेंगे उनकी पर्सनल लाइफ की जो सच में किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।
ये तो मेरा दिल जल रहा है। यह तो मेरा दिल सारिका की जिंदगी में जो पहला इंसान आया था वो थे भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव। कपिल देव और सारिका ठाकुर की मुलाकात हुई, दोस्ती हुई और फिर प्यार हो गया और दोनों इतने सीरियस थे कि बात शादी तक पहुंच गई थी। लेकिन फिर इसके बाद जब कपिल देव क्रिकेट में बिजी हो गए और बड़ा नाम बन गए तो उनके परिवार ने एक हीरोइन को बहू बनाने से मना कर दिया। कपिल देव ने भी अपने परिवार की बात मानी और सारिका को छोड़ दिया। जबकि सारिका उनसे बहुत प्यार करती थी। लेकिन कपिल देव ने अपनी इमेज को बड़ा मानकर सारिका का दिल तोड़ दिया। ये तो मेरा दिल [संगीत] जल रहा है। हो। इसके बाद सारिका की जिंदगी में आए साउथ के सुपरस्टार कमल हसन। सारिका ने कमल हसन के साथ कई मूवीज में काम किया और धीरे-धीरे दोनों की नजदीकियां बढ़ने लगी। सारिका भी कमल के प्यार में पड़ गई और फिर दोनों प्यार के समंदर में गोते लगाने लगे। बड़ी बात यह थी कि कमल हसन पहले से शादीशुदा थे और अपनी पहली पत्नी का प्यार में काट चुके थे। शादीशुदा होने के बाद भी वह अपनी पत्नी के साथ नहीं रहते थे बल्कि अलग रहते थे और इसी समय सारिका उनके करीब आई थी। सारिका को भी इससे कोई फर्क नहीं पड़ा कि कमल हसन पहले ही किसी का कमल खिला चुके हैं। वह फिर भी उनके साथ प्यार की नाव में सवार हो गई और इतनी तेजी से सवार हुई कि बिना शादी के ही प्रेग्नेंट हो गई। कमल हसन और सारिका बिना शादी के ही लिवन में रहने लगी थी। कमल ने अपनी पत्नी को तलाक नहीं दिया था और इधर सारिका को प्रेग्नेंट भी कर दिया था। है दिल इसी ममता की छा में अपनी [संगीत] मंजिल पा सारिका ने बिना शादी किए ही एक बेटी को जन्म भी दे दिया था जिसका नाम श्रुति हसन रखा गया और यही श्रुति हसन आज साउथ की जानीमानी हीरोइन है। पहले से [संगीत] ज्यादा तुम पे मरने लगा। बड़ी बात यह थी कि श्रुति को पिता का नाम पैदा होने के बाद मिला। जब उनके पिता ने पहली पत्नी को तलाक दिया और सारिका से शादी की। मतलब श्रुति हसन का जन्म 1986 में हुआ था और उनके मां-बाप ने शादी 1988 में की और यह अपने आप में एक बड़ी रोचक बात है। मतलब बच्चे पैदा करने के लिए शादी की क्या जरूरत है। यह बात शायद इन्हीं लोगों [गला साफ़ करने की आवाज़] के लिए कही गई है। शादी के बाद सारिका ने एक और बेटी को जन्म दिया जिसका नाम अक्षरा हसन रखा गया। जिसे आपने सामिताभ मूवी में देखा होगा। सी फॉर तुम दोनों को अच्छी तरह मालूम है। सी वो होता है जो समझ सके कि वो अकेला बढ़ सकता है। और वो हूबहू अपनी मां पर गई है। 1989 से 1997 तक सारिका ने फिल्मों में काम नहीं किया और वह पूरी तरह से अपने बच्चों की परवरिश में लगी रही। उसने अपने परिवार और शादीशुदा जिंदगी के लिए अपना करियर छोड़ दिया। जबकि उस समय पर वह अपने करियर की पीक पर थी। लेकिन सारिका ने यह सब कमल हसन के प्यार और अपने बच्चों के लिए छोड़ दिया था। अब इन सब का परिणाम जहां सारिका को अच्छा मिलना चाहिए था वो उसे नहीं मिला और उल्टा कमल हसन ने उसे इस प्यार और बलिदान के बदले खून के आंसू दिए। [संगीत] कि सारिका की एक दोस्त थी गौतमी जिसका अपने पति से तलाक हो चुका था। वह दुखी थी और सारिका को अपना दुखड़ा सुनाने के लिए उनके घर पर आती जाती रहती थी। सारिका उनके दुख को बांटती थी और उसे सहारा देती थी। लेकिन उसे यह नहीं पता था कि यह दुख बांटना उसे कितना भारी पड़ने वाला था।
धीरे-धीरे गौतमी कमल हसन से भी उनके घर पर मिलती रहती थी और फिर तो ऐसा हुआ कि गौतमी सारिका से ज्यादा कमल हसन से मिलने आने लगी। कमल हसन को एक और मछली मिल गई थी और वह भी एक अबला नारी तो इसे वह कैसे छोड़ती तो उन्होंने अपने ही घर में गौतमी के साथ रास रचाना शुरू कर दिया। जब गुलहर तुम्हारा नाम होता [संगीत] जब सारिका घर पर नहीं होती थी तब दोनों घर में ही पलंग तोड़ खेल खेलती थी। मतलब कमल हसन की पर्सनल लाइफ का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि पहली पत्नी का इस्तेमाल करके उन्होंने उसे छोड़ दिया और अपने साथ काम करने वाली हीरोइन को शादी से पहले मां बना दिया और अपने ही घर में दो बेटियों का बाप होने के बाद भी अपनी पत्नी के बिस्तर पर दूसरी औरत के साथ रंग रैलियां मना रहे थे। लोग कहते हैं कि पत्थर के [संगीत] मसीहा एक दिन सारिका ने उन्हेंगे हाथों पकड़ लिया और जब उसे पता चला कि उसकी दोस्त जिसे सारिका सहारा देना चाहती थी उसने सारिका के जीने का सहारा ही छीन लिया था और जिस आदमी पर भरोसा करके वह शादी से पहले मां बनी थी दुनिया के ताने सुने बदनामी झेली और आज वह उसी के घर में दूसरी औरत की बाहों में पड़ा था। एक औरत के लिए इससे बड़ा सदमा और क्या हो सकता है? तो सारिका यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने अपने घर की पांच मंजिला छत से छलांग लगा दी। हालांकि वह मरी नहीं और बच गई और इसके बाद जिंदगी मौत से भी बदतर बन गई। 3 महीने तक सारिका बिस्तर पर पड़ी रही। वह ना चल पाती थी और ना ही अपना कोई काम कर पाती थी और वह अस्पताल में ही पड़ी रही। दूसरी तरफ उनकी दोस्त उनकी सौतन बनकर उनके घर में बैठ गई थी और उसने बड़ी आसानी से सारिका की जगह ले ली थी। हमें फुर्सत [संगीत] कहां सोचे जो हम सारिका जब ठीक हुई तो उसकी जिंदगी में कुछ भी नहीं बचा था। ना पति ना ही बेटियों का साथ। यहां सबसे दर्दनाक पल वो रहा जब सारिका को कमल हसन ने 2004 में तलाक दे दिया और अपनी जिंदगी से निकाल फेंका। उससे भी बड़ा सदमा सारिका को तब लगा जब उनकी खुद की बेटियों ने सारिका का साथ देने से मना कर दिया। श्रुति हसन उस समय 16 साल की थी और उनकी दूसरी बेटी 13 साल की। दोनों बेटियों को बाप के पैसे और मां की कंगाली दिखाई देने लगी थी। उन्होंने दिमाग लगाया कि मां के पास जाने से कोई फायदा नहीं है। वह कंगाल है और हमें ऐशो आराम वाली जिंदगी नहीं दे सकती। इसलिए उन्होंने अपनी मां को दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया और खुद उस सौतेली मां के साथ रहने लगी जिसने उनकी मां की जिंदगी बर्बाद की थी। रिश्ते [संगीत] [गाना गाने की आवाज़] जो जिंदगी में मिलते [संगीत] हैं प्यार। मतलब यह सच में कितनी शर्मनाक बात थी कि केवल ऐशो आराम और पैसों के लिए अपनी सगी मां को सड़क पर उन्होंने छोड़ दिया था और उनसे सारे रिश्ते भी खत्म कर लिए थे। और अपने पिता की दूसरी औरत को मां बना लिया था। जबकि इन सब का कारण वही थी। सोचने वाली बात यह है कि कोई भी औरत इतना दुख सहन नहीं कर सकती जितना सारिका को मिल रहा था। उनकी खुद की मानव ने सामान की तरह इस्तेमाल किया था। पैसे कमाए थे। उन्होंने जिससे प्यार किया उसने सब कुछ करने के बाद भी उसे छोड़ दिया था। जिस पर भरोसा करके शादी की उसने शादी से पहले ही उसे मां बना दिया था और जमाने भर के लोगों के सामने बदनाम किया। जिस दोस्त पर भरोसा करके उसके दुख का साथी बनने की कोशिश की उसी ने उसका पति और घर छीन लिया और अब खुद की सगी बेटियों ने उससे मुंह फेर लिया था। साथी मिलते हैं छूटते हैं। ऐसी कहानी शायद ही किसी हीरोइन की रही होगी। सारिका अब पूरी तरह से टूट चुकी थी। ना उनके पास काम था, ना परिवार था, ना घर था और ना ही कोई हालचाल पूछने वाला था और उनकी जिंदगी के कई साल गरीबी और तंगहाली में गुजरे और दुख तकलीफ में वह रो-रो कर अपने दिन बिताने लगी। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा से काम करना शुरू किया। अब वह खूबसूरती भी नहीं बची थी तो उन्हें मेन लीड में काम मिलना मुश्किल था। इसलिए उन्होंने सपोर्टिंग किरदार निभाना शुरू किया। 2005 में उन्हें एक इंग्लिश मूवी परजानिया में काम करने का मौका मिला। उन्होंने इस मूवी में ऐसी एक्टिंग की कि इसके लिए सारिका को नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया और यह अपने आप में एक बड़ी बात थी उनकी कहानी के लिए। [चीखने की आवाज़] इसके बाद भी सारिका ने लगातार काम किया। हर भाषा की मूवीज में वह काम करने लगी और दूसरी पारी की शुरुआत उन्होंने ऐसे की जैसे यह पारी कभी खत्म ही नहीं हुई थी। उन्होंने एक से बढ़कर एक मूवीज में काम किया जिनमें मनोरमा, सुबाइट, जब तक है जान, पुरानी जींस, बार-बार देखो और भेजा फिराई जैसी मूवीज शामिल रहीं। उन्होंने वेब सीरीज, टीवी शोज़ और अलग-अलग भाषाओं की मूवीज में काम करके अपने आत्मसम्मान को बनाए रखा और दोबारा से अपने दम पर खड़ी हुई और एक मिसाल पेश की। मेरी गलती का पश्चाताप करने का यह मेरा आखिरी मौका है। कोई और होता तो टूट कर खत्म हो जाता। लेकिन उन्होंने एक सच्ची नायिका की तरह फिर से अपनी पहचान बनाई। पैसे कमाए और मजबूती से खुद को साबित किया। जो बेटियां उन्हें छोड़कर चली गई थी, वह बड़ी होकर उनसे मिलने लगी क्योंकि कमल हसन तो गौतमी पर भी नहीं रुके थे और 2005 से 2016 तक वह गौतमी के साथ भी लिविन में ही रहे और उन्होंने कभी गौतमी से शादी नहीं की और 2016 में उससे भी अलग हो गए। अब जाकर उनकी बेटियों को समझ में आया कि गलती उनकी मां की नहीं बल्कि पिता की थी
और उन्होंने अपनी मां के साथ कितना गलत किया है। तो अब वह अपनी मां के साथ रहना चाहती थी। हालांकि अब सारिका ठाकुर को उनकी जरूरत नहीं थी। जब मुश्किल समय में उनका साथ उन्होंने नहीं दिया तो अब सारिका भी उनके साथ नहीं रहना चाहती थी। हालांकि फिर भी उन्होंने अपनी बेटियों पर गुस्सा नहीं निकाला और अपनी ममता दिखाते हुए उन्होंने अपनी बेटियों को माफ कर दिया। सब कुछ लागे [संगीत] नयानया मैं वही दर्पण [संगीत] वही। अब वो कभी कबभार अपनी बेटियों के साथ भी दिखाई देती रहती हैं। हालांकि उनकी पहचान उनकी अपनी है। उनकी पूरी जिंदगी दुखों से भरी रही। ना मां-बाप का दुलार मिला, ना प्यार मिला, ना पति की ईमानदारी मिली, ना अपनों का साथ मिला और ना ही बच्चों का सहारा मिला। लेकिन फिर भी वह आज सम्मान के साथ अपने दम पर खड़ी हैं। वो मुंबई में ही रहती हैं और आज भी काम कर रही हैं। सच में ऐसी औरत को दिल से सैल्यूट है। आपको सारिका ठाकुर की कहानी कैसी लगी? हमें कमेंट में जरूर बताएं और चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें। जीवन के दिन [संगीत] छोटे सही हम भी बड़े दिल