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क्यों राज कपूर पर लगाए गए थे अश्लीलता के आरोप? वजह आपको चौंका देगी!

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दिग्गज फिल्मकार राज कपूर पर उनकी फिल्मों में महिलाओं के बोल्ड और कामुक (Sensuous) चित्रण के कारण अश्लीलता के आरोप लगे थे।बोल्ड लिबास और दृश्य: फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम (1978) में जीनत अमान के छोटे और पारदर्शी कपड़े तथा कामुक दृश्यों को लेकर देश भर में भारी विवाद हुआ थाआलोचकों का मानना था कि फिल्म का शीर्षक ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ धार्मिक और आध्यात्मिक है, जबकि इसके भीतर हद से ज्यादा कामुकता परोसी गई है।नग्नता के पुजारी: राज कपूर खुद को कला और सौंदर्य के रूप में नग्नता का पुजारी मानते थे। उनका तर्क था कि वह मानवीय शरीर और उसकी सुंदरता को पर्दे पर उतार रहे थे, जो कोई पाप या अश्लीलता नहीं हैराज कपूर ने अपनी आत्मकथा और बयानों में यह स्वीकार किया था कि उनके मन में इस तरह के सौंदर्य और कामुक दृश्यों के ख्याल तब से आने लगे थे, जब उन्होंने बचपन में अपनी माँ को स्नान करते हुए देखा था। वह फिल्मों में महिलाओं को किसी सपने की तरह पेश करते थे, जिसे उस दौर के रूढ़िवादी समाज ने अश्लील मान लिया था।राज कपूर की फिल्मों और उन पर लगे अश्लीलता के आरोपों के पीछे की पूरी कहा

और भय पखट पे [संगीत] मोहे नटखट श्याम सदा बित [संगीत] जाएगा माटी के मोर जग में रहना हर दिन जो प्यार करेगा [संगीत] वो गाना गाएगा दीवाना अगर कहीं बॉलीवुड के दिग्गजों की बात चले और वहां राज कपूर का जिक्र ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। राज कपूर को भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का शो मैन कहते हैं। डम डम डिगा डिगा मौसम भीगा भीगा बिन पिए मैं तो भले ही वो आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी एक्टिंग और काम को आज भी याद किया जाता है। जरा सोचो हम जैसे लोग पैसे के बगैर कर ही क्या सकते हैं? इस दुनिया में तो सांस लेने के लिए भी पैसा चाहिए।

राज कपूर की महत्वाकांक्षी और क्लासिक फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ (1970) अपने समय से काफी आगे की फिल्म थी, लेकिन इसमें फिल्माए गए कुछ दृश्यों, खासकर बोल्ड और न्यूड सीन्स को लेकर उस दौर में भारी विवाद खड़ा हो गया था। इस फिल्म में राज कपूर को जिन वजहों से आलोचनाओं और तीखे सवालों का सामना करना पड़ा, उसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे: टीचर और छात्र के रिश्ते की मर्यादा पर सवाल: फिल्म के पहले हिस्से में बाल कलाकार के रूप में ऋषि कपूर (जूनियर राजू) को अपनी टीचर ‘मैरी’ (जिसे सिमी गरेवाल ने निभाया था) के प्रति आकर्षित होते दिखाया गया है। एक सीन में टीचर को झाड़ियों के पास कपड़े बदलते हुए और छात्र को उन्हें देखते हुए दिखाया गया था। 70 के दशक के रूढ़िवादी सामाजिक परिवेश में एक स्कूली छात्र और शिक्षिका के बीच के इस कोमल व शारीरिक आकर्षण को परदे पर देखना दर्शकों और समीक्षकों को बहुत असहज कर गया था। इसे कई लोगों ने भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मर्यादा के खिलाफ माना था।

पैसा [हंसी] पैसा पैसा अगर राज कपूर की बनाई कुछ बेहतरीन फिल्मों की बात करें तो उनमें श्री 420 आवारा संगम बॉबी और सत्यम शिवम सुंदरम शामिल है। सत्यम [संगीत] शिवम सुंदरम उन्होंने विदेशों में भी भारतीय फिल्मों का डंका बजाया था। रजू जुदा नहीं होंगे तो फिर कैसे मिलेंगे? मैं फिलॉसफर नहीं हूं मरीना। एक संपूर्ण कलाकार होने की वजह से वो अभिनय, निर्देशन, निर्माण के अलावा [संगीत] कहानी बट कथा, संपादन, गीत, संगीत में भी अपनी रुचि रखते थे। मेरा जूता है जापानी, ये पगलू इंग्लिश, [संगीत] सर पे लाल, टोपी। बॉलीवुड के दमदार एक्टर डायरेक्टर और प्रोड्यूसर राज कपूर का जन्म पाकिस्तान के पेशेवर में 14 दिसंबर 1924 को हुआ।

1930 में उनके पिता पृथ्वीराज कपूर थिएटर में काम करने मुंबई आ गए। अगर ऐसा ना हुआ तो सलीम तुझे मरने नहीं देगा। और हम मनारकली तुझे जीने नहीं देंगे। उनके पिता पृथ्वीराज कपूर भारतीय सिनेमा के सफल और मशहूर रंगकर्वि के साथ फिल्म अभिनेता हुआ करते। राज कपूर ने 1935 में आई फिल्म इंकलाब में अपने करियर की शुरुआत की। लेकिन इस [संगीत] फिल्म में वो बाल कलाकार के रूप में दिखे। बतौर हीरो नीलकमल से उनकी किस्मत खुली। से क्या मोह बढ़ाना जो नहीं सीखे जो नहीं सीखे। फिल्मी दुनिया में कदम रखने वाले राज को सिर्फ एक साल ही हुआ था कि उन्होंने 1948 में [संगीत] महज 24 साल की उम्र में अपना स्टूडियो खोल दिया जिसका नाम आर के फिल्म्स है। उनकी सत्यम शिवम सुंदरम तीसरी कसम चोरी-चोरी अनाड़ी छलिया आवारा श्री 420 मेरा नाम जोकर बरसात जागते रहो राम तेरी गंगा मैली प्रेम रोग और बॉबी जैसे फिल्में [संगीत] आज भी लोगों को खूब पसंद आती हैं। एक कमरे में बंद हूं। [संगीत] राज कपूर ने एक्टिंग

और डायरेक्शन के साथ-साथ शानदार लेखन से भी लोगों को अपना दीवाना बनाया। झूठ बोलने वाले को काला कौवा काट लेता है। तब तो सच बताना होगा। जानते हो मैं बैटमिंटन कौन? हालांकि उनके फैंस को शायद यह बात पता हो कि राज कपूर एक वक्त अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के स्टूडियो में बहुत ही कम वेतन पर काम किया करते थे। पृथ्वीराज कपूर को अपने बेटे की क्षमता पर कोई खास यकीन नहीं था। इसी वजह से उन्होंने अपने स्टूडियो में राज कपूर को झाड़ू लगाने का काम दे दिया। इसके बदले उन्हें ₹1 मासिक सैलरी मिलती। हालांकि बाद में राज कपूर की कला को केदार [संगीत] शर्मा ने पहचाना और उन्हें अपनी फिल्म नीलकमल में हीरो का रोल दे दिया। राज कपूर को उनके पिता पृथ्वीराज कपूर [संगीत] ने एक बार डायरेक्टर केदार शर्मा की फिल्मों के सेट पर बतौर क्लेपर बॉय काम के लिए कहा। जिसके बाद राज कपूर ने केदार शर्मा की फिल्म विषकन्या के [संगीत] दौरान यह काम किया। एक बार फिल्म की शूटिंग चल रही थी।

और इस दौरान गलती से राज कपूर का चेहरा कैमरे के सामने आ गया। इस गलती को ठीक करने की हड़बड़ी में राज कपूर का क्लैप बोर्ड उस सीन के अभिनेता की दाढ़ी में फंस गया। जिससे किरदार की दाढ़ी ही निकल गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बात पर डायरेक्टर केदार शर्मा इतने नाराज हुए कि उन्होंने राज कपूर को बुलाया और जोरदार थप्पड़ चढ़ दिया। हालांकि बाद में उन्हें इस बात का बेहद अफसोस हुआ। अगले दिन सेट पर आते ही उन्होंने राज कपूर से अपनी फिल्म में काम करने के लिए कहा। इसके लिए राज कपूर ने हां कर दी। जिसके बाद फिल्म नीलकमल में उन्होंने काम किया। इस फिल्म में उन्होंने बेहद खूबसूरत अदाकारा मधुबाला के साथ स्क्रीन शेयर की। कमल खिलाओगे हम भूले [संगीत] नहीं समाएंगे। जिसके बाद राज कपूर ने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। यहीं से उनके करियर की शुरुआत हुई। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई हिट फिल्में दी। राज कपूर ने नौ फिल्म फेयर अवार्ड्स अपने नाम किए। वहीं राज कपूर को 1971 में पद्म भूषण और दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। की चादर लपेटे हैं। पानी में खुद को समेटे हूं। बाहों के घेरे में

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