आप जानते हैं कि अपने द्वार के बेहद आत्मविश्वासी और शानदार कॉमेडियन महमूद भी एक ऐसे अभिनेता से घबराते थे जिसके बारे में वे कहते थे पता ही नहीं चलता कि यह अपने किरदार के साथ अगला क्या कर देगा। महमूद उन कलाकारों में गिने जाते थे जिन्हें अभिनय के लिए लंबी रिहर्सल की जरूरत नहीं पड़ती थी।
बताया क्या बताया? पहले महाराज को ₹20 दक्षिणा दो। ₹20? अच्छा। अपने आप जब ₹200 हारते हो तब कुछ नहीं। और कैमरा ऑन होते ही उनका अंदाज ऐसा बदलता कि सीन खत्म होने के बाद तालियां बजना आम बात थी। यही वजह थी कि उस दौर की बड़ी फिल्मों में बड़े एक्टर के साथ पोस्टर पर महमूद की मौजूदगी भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच लाती थी। लेकिन महमूद खुद किशोर कुमार के अभिनय के बड़े प्रशंसक थे। किशोर कुमार आप किशोर कुमार है ना? नहीं तो क्या दिल का पागल हूं सर? किशोर कुमार की अनिश्चित और बेहद स्वाभाविक कॉमेडी से प्रभावित होकर महमूद ने उन्हें ध्यान में रखते हुए पड़ोसन और साधु और जैसी फिल्मों का निर्माण किया। एक किस्सा ऐसा भी है जब अभिनेता बीरबल ने मजाक में महमूद से पूछ लिया। .
क्या कोई ऐसा कलाकार है जिसकी एक्टिंग देखकर आपको डर लगता है? महमूद ने गंभीर होकर जवाब दिया कि वे लगभग हर अभिनेता की अभिनय शैली और उनकी सीमाओं को समझते हैं। लेकिन किशोर कुमार को लेकर कुछ भी पहले से अनुमान नहीं लगाया जा सकता। वे किरदार के साथ कब क्या कर दें इसका अंदाजा लगाना मुश्किल था और यही बात महमूद को डराती थी। शास्त्री जी एक आध पुरानी फिल्म का गाना प्रस्तुत कीजिए। हुआ ये पंछी बूंदे से इधर आया। अब कहानी पहुंचती है फिल्म पड़ोसन के मशहूर गाने एक चतुर नार तक। इस गाने में महमूद और सुनील दत्त के बीच संगीत की मजेदार जंग दिखाई गई थी।
सुनील दत्त के लिए पीछे से किशोर कुमार की आवाज थी। जबकि महमूद की गायकी के हिस्से के लिए मनन्ना डे को चुना गया था। जब मनन्ना डे को पता चला कि आखिर में उन्हें किशोर कुमार से हारना है तो वे पहले तैयार नहीं हुए। उनका सवाल था अगर सुरों की बात है तो वे किशोर से क्यों हारेंगे? महमूद ने उन्हें समझाया कि यह किसी कलाकार की क्षमता का सवाल नहीं बल्कि फिल्म की कहानी और दृश्य की जरूरत है। काफी समझाने के बाद मनन्नाडे मान गए। लेकिन उन्होंने एक खास शर्त रखी।
जहां गाने में जानबूझकर सुर लड़खड़ाने या अटकने वाला हिस्सा होगा। वहां वे खुद नहीं गाएंगे और इसी वजह से गाने के उन मजेदार हिस्सों में महमूद की आवाज सुनाई देतीदिलचस्प बात यह है कि एक चतुर नार कोई बिल्कुल नया गाना नहीं था। इसका पुराना रूप करीब 27 साल पहले फिल्म झूला के लिए रिकॉर्ड किया गया था। और बाद में किशोर कुमार ने इसे पड़ोसन में नए अंदाज के साथ यादगार बना दिया। एक चतुर नार कर कर श्रृंगार ढाड़े अपने द्वार जिया की सुजात यानी जिस किशोर कुमार की अनोखी एक्टिंग से महमूद घबराते थे वही किशोर कुमार अपनी गायकी और कॉमेडी से उन्हें एक बार फिर चुनौती दे रहे थे और मजे की बात किशोर कुमार खुद कहते थे कि महमूद के सामने वे कुछ भी नहीं थे।