बॉलीवुड की इस चमचमाती और चकाचौंध से भरी माया नगरी में हर साल लाखों युवा अपनी आंखों में एक बड़ा सपना संजोकर कदम रखते हैं। लेकिन इस रंगीन दुनिया की कड़वी हकीकत यह है कि बेहद कम लोग ही यहां पर अपनी मंजिल तक पहुंच पाते हैं और जिन्हें कामयाबी मिल जाती है। वे इस सुनहरी दुनिया के सबसे चमकते हुए मशहूर और प्रतिष्ठित सितारे बन जाते हैं और अपनी रोशनी और शानो शौकत से दुनिया में अपना जलवा बिखेरते हैं। वहीं दूसरी ओर जिन बदकिस्मत लोगों को असफलता हाथ लगती है और दर-दर की ठोकर खाकर पूरी तरह निराश और हताश होकर अपने घर लौट जाते हैं। या फिर ताम्र इसी धुंधली सी उम्मीद में अपनी जिंदगी गुजार देते हैं कि शायद एक ना एक दिन उनकी किस्मत का पहिया जरूर घूमेगा और उन्हें अपना हुनर दिखाने का मौका जरूर मिलेगा। नमस्कार दोस्तों, आज की वीडियो बेहद खास और प्रेरणादायक होने वाली है क्योंकि आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसे जुनूनी जिद्दी और संघर्षशील पिता की जिसने खुद पर्दे के पीछे रहकर अपने खून पसीने की मेहनत से अपने बेटे को बॉलीवुड का एक बहुत बड़ा सुपरस्टार बना दिया। हिंदी सिनेमा में वैसे तो कई बड़े खानदान हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी फिल्मी जगत को एक से एक बड़े सितारे देते आए हैं। जिनमें जो सितारे वाकई प्रतिभावान और मेहनती होते हैं वे अपनी काबिलियत के दम पर इस बॉलीवुड की चमचमाती दुनिया में हमेशा के लिए चमक उठते हैं। लेकिन जिनकी प्रतिभा में थोड़ी सी भी कमी होती है। फिर वे कितने भी बड़े घराने या रसूखदार खानदान से ताल्लुक क्यों ना रखते हों, उनका सिक्का इस कठोर और निर्मम बॉलीवुड में कभी नहीं चल पाता। आज हम बॉलीवुड के एक ऐसे ही प्रतिष्ठित और सम्मानजनक घराने की बात करेंगे जो कपूर परिवार खान ब्रदर्स या फिर देओल परिवार की तरह ही हिंदी सिनेमा में अपनी बेहद खास और सम्मानजनक जगह रखता है
और वह परिवार है हम सबका चहेता देवगन परिवार। आज हम देवगन खानदान के इतिहास से जुड़े कुछ ऐसे अनसुने राजों, बेहद दिलचस्प किस्सों और पुरानी यादों के बारे में विस्तार से बात करेंगे जिनसे शायद बहुत से लोग आज भी पूरी तरह अनजान हैं। हिंदी सिनेमा जगत में देवगन परिवार की पहली मजबूत नींव रखने वाले इंसान थे मशहूर और दिग्गज एक्शन डायरेक्टर वीरू देवगन जी। इसी गौरवशाली देवगन परिवार के एक सबसे [संगीत] अहम सदस्य हैं अजय देवगन जिन्हें आज पूरी दुनिया एक बेहद सफल संजीदा और वर्सटाइल सुपरस्टार के रूप में जानती है। अजय देवगन के पिता वीरू देवगन का जन्म साल 1950 में पंजाब के बेहद खूबसूरत और ऐतिहासिक शहर अमृतसर में हुआ। उन्हें बचपन के दिनों से ही फिल्मी दुनिया यानी बॉलीवुड का बहुत गहरा जुनून था। वे बेहद दीवानगी के साथ सिनेमाघरों में जाकर फिल्में देखा करते थे और हमेशा यही सोचते थे कि एक दिन वे भी बड़े पर्दे पर नजर आएंगे। जब वीरू देवगन जी थोड़े बड़े और समझदार हुए तो अपने सीने में हीरो बनने का अटूट सपना लेकर साल 1957 में अपने कुछ जिगरी दोस्तों के साथ माया नगरी मुंबई आ पहुंचे। लेकिन, जब वे मुंबई की अनजान और अजनबी जमीन पर उतरे, तो उन्हें धीरे-धीरे इस बात का एहसास हुआ कि इस बड़े शहर में बिना किसी सहारे के टिके रहना और जिंदगी जीना कितना कठोर, बेरहम और मुश्किल होता है। मुंबई की अजनबी भीड़, कड़ा संघर्ष और भयानक भूख ने उनके दोस्तों का हौसला पूरी तरह तोड़ दिया और वे सब डरकर वापस अपनेपने घर लौट गए। लेकिन वीरू देवगन जी ने हार मानकर लौटने के बजाय यहीं रहकर जंग लड़ने का फैसला किया। वे अपना पेट पालने के लिए कभी सड़कों पर खड़ी गाड़ियां साफ कर लिया करते तो कभी कारपेंटर यानी बढ़ई का काम करके जैसे तैसे अपना गुजारा करते थे। फिर जब उनका हौसला थोड़ा और बढ़ा तो उन्होंने मुंबई के तमाम मशहूर फिल्म स्टूडियोज के चक्कर काटना शुरू कर दिया।
क्योंकि उनके दिल में तो सिर्फ एक ही सपना पल रहा था कि किसी भी तरह बड़े पर्दे पर मुख्य हीरो बनना है। इसलिए वीरू जी ने लगातार 10 सालों तक बिना थके और बिना रुके बहुत कड़ा संघर्ष किया। लेकिन 10 साल के इस लंबे समय के बाद उन्हें यह जमीनी हकीकत अच्छी तरह समझ में आ गई कि उस दौर में जो खूबसूरत और चॉकलेटी चेहरे वाले हीरो बने बैठे हैं उनके सामने वीरू देवगन का हीरो के रूप में टिक पाना लगभग नामुमकिन है। एक इंटरव्यू के दौरान खुद वीरू देवगन ने इस कड़वे सच को स्वीकार करते हुए बताया था कि जब उन्होंने आईने में ध्यान से अपना चेहरा देखा तो पाया कि बाकी संघर्ष कर रहे नए चेहरों की तुलना में वे लुक के मामले में काफी पीछे थे। इस इसी वजह से उन्होंने खुद को हीरो बनाने की जिद तो छोड़ दी लेकिन हार मानने के साथ ही उन्होंने अपने दिल में एक बहुत बड़ा और अटूट प्रण लिया हो। उन्होंने खुद से यह कसम खाई कि वे भले ही बड़े पर्दे पर हीरो ना बन पाए हो लेकिन उनका जो भी पहला बेटा होगा वे उसे हर कीमत पर तराश कर बॉलीवुड का सबसे बड़ा सुपरस्टार बनाकर ही दम लेंगे। इसी स्ट्रगल के दौर में जब वे काम ढूंढ रहे थे तो उनकी मुलाकात एक एक्शन डायरेक्टर से हुई। जिन्होंने वीरू देवगन जी की मजबूत कद काठी को देखकर उन्हें फिल्म में स्टंट मैन का काम ऑफर कर दिया। क्योंकि वीरू देवगन जी को काम और पैसों की सख्त जरूरत इसलिए उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार कर लिया और दिनरा जी जान से मेहनत करने लगे। वीरू देवगन की गजब की मेहनत, निडरता और काम के प्रति लगन को देखकर उस दौर के दिग्गज हीरो मनोज कुमार इतने ज्यादा प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी आने वाली बहुत बड़ी देशभक्ति फिल्म रोटी, कपड़ा और मकान के लिए वीरू देवगन जी को मुख्य एक्शन डायरेक्टर के रूप में साइन कर लिया। बस यहीं से बीरू देवगन का एक बड़े एक्शन डायरेक्टर के रूप में शानदार सफर शुरू हुआ जो
उनके करियर का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और क्रांति सत्यम शिवम सुंदरम मिस्टर नटवर लाल हिम्मतवाला मिस्टर इंडिया त्रिदेव और विश्वात्मा जैसी 80 से भी ज्यादा सुपरहिट फिल्मों में हैरतंगेज एक्शन सीन डायरेक्टर किए। उन्होंने अपने दौर में दिलीप कुमार, मनोज कुमार, अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और आमिर खान जैसे हर बड़े अभिनेता के साथ काम किया। वे असिस्टेंट डायरेक्टर भी रहे। उन्होंने हिंदुस्तान की कसम जैसी बड़े बजट की मल्टीस्टारर फिल्म का सफल निर्देशन भी किया। लेकिन आखिरकार साल 2019 में 85 वर्ष की उम्र में इस महान स्टंट मैन का निधन हो गया। शायद आप में से बहुत से लोग इस खास बात से आज भी अनजान होंगे कि हम सबके पसंदीदा अजय देवगन का असली और दस्तावेजी नाम वास्तव में विशाल देवगन है। अजय देवगन का जन्म माया नगरी मुंबई में 2 अप्रैल 1969 को हुआ था। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा यानी ग्रेजुएशन मुंबई के प्रसिद्ध मीठाबाई कॉलेज से पूरा किया। जैसा कि हमने आपको बताया कि वीरू देवगन जी ने अपने बड़े बेटे को हीरो बनाने का पक्का इरादा कर लिया था। इसलिए उन्होंने अजय देवगन को एक मुकम्मल और ऑलराउंडर एक्टर बनाने में दर्रा एक कर दिए और अपनी ओर से कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ी। एक तरफ जहां अजय की कॉलेज की पढ़ाई चल रही थी तो वहीं दूसरी तरफ घर पर ही उनकी फिल्मी दुनिया की ट्रेनिंग भी पूरी रफ्तार से जारी थी। बीरू जी ने अजय देवगन के लिए घर में ही एक हाईटेक जिम बनवाया। स्पेशल डांस क्लासेस, डायलॉग डिलीवरी और आवाज में भारीपन लाने के लिए उर्दू की ट्यूशन, हॉर्स राइडिंग और कार ड्राइविंग सिखवाई। इतना ही नहीं वे अजय को अपनी एक्शन टीम के साथ फिल्म सेट पर भी ले जाते थे ताकि वे शूटिंग के असली माहौल, लाइटिंग, कैमरे के एंगल और डायरेक्शन की हर छोटी बड़ी बारीकी को अच्छे तरह समझ सकें।
वैसे तो अजय देवगन ने एक बाल कलाकार के रूप में प्यारी बहना फिल्म में ही पहली बार कैमरे का सामना किया था। लेकिन बतौर मुख्य अभिनेता उनकी धमाकेदार और यादगार एंट्री साल 1991 की ब्लॉकबस्टर फिल्म फूल और कांटे से हुई। इस पहली फिल्म के मिलने के पीछे भी एक बहुत ही हैरान कर देने वाला और रोमांचक किस्सा छुपा हुआ है। शुरुआत में इस फिल्म के लिए किसी और को नहीं बल्कि आज के सुपरस्टार अक्षय कुमार को चुना गया था। लेकिन मेकर्स की नजर जब अजय देवगन पर पड़ी तो उन्हें अजय का हुनर, आंखों का इंटेंस लुक और एटीट्यूड इतना पसंद आ गया कि उन्होंने अक्षय कुमार की जगह अजय देवगन को लीड हीरो के रूप में साइन कर लिया। विशाल देवगन को अपनी पहली फिल्म तो मिल गई लेकिन शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले ही उन्होंने अपना नाम बदलकर अजय देवगन रख लिया क्योंकि उस समय मनोज कुमार के बेटे विशाल गोस्वामी भी इंडस्ट्री में डेब्यू कर रहे थे और वे नाम के साथ कोई कंफ्यूजन नहीं चाहते थे। फूल और कांटे में दो मोटरसाइकिल पर पैर रखकर की गई उनकी एंट्री आज भी भारतीय सिनेमा इतिहास के सबसे प्रतिष्ठित एंट्री सींस में गिनी जाती है। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी हिट साबित हुई और अजय को इसके लिए बेस्ट डेब्यू एक्टर का फिल्म फेयर अवार्ड भी दिया गया। इसके बाद तो [संगीत] जिगर दिल वाले सुहाग जख्म द लीजेंड ऑफ भगत सिंह कंपनी गंगाजल सिंघम और दृश्यम जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी संजीदा गंभीर और दमदार अदाकारी का लोहा पूरी दुनिया में मनवाया।
फिल्म जख्म और द लीजेंड ऑफ भगत सिंह में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें भारत के सर्वोच्च राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार नेशनल अवार्ड से भी नवाजा गया। अजय देवगन ने अपने करियर में 150 से भी ज्यादा फिल्मों में एक्टिंग कर अपना जलवा बिखेरा। उन्होंने सिवाय रनवे 34 और भोला जैसी बड़ी फिल्मों का सफल निर्देशन भी किया और साल 2016 में उन्हें भारत सरकार द्वारा देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म श्री से भी सम्मानित किया जा चुका है। अजय देवगन की निजी जिंदगी की बात करें तो उन्होंने 90 के दशक की सबसे सफल अभिनेत्री काजोल से शादी की और उनके दो प्यारे बच्चे हैं जिसमें बेटी न्यासा देवगन और बेटा युग देवगन हैं। वहीं दूसरी ओर वीरू देवगन के दूसरे बेटे यानी अजय देवगन के छोटे भाई अनिल देवगन हमेशा कैमरे की चकाचौंध से दूर रहकर पर्दे के पीछे रहकर काम करना ही पसंद करते हैं। अनिल देवगन ने अजय को मुख्य भूमिका में लेकर राजू चाचा ब्लैकमेल और हाले दिल जैसी बड़ी फिल्मों का सफल निर्देशन किया। हालांकि ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर इतना बड़ा कमाल तो नहीं दिखा सकी लेकिन बाद के दिनों में वे अजय देवगन के होम प्रोडक्शन हाउस अजय देवगन फिल्म्स का सारा कामकाज और प्रोजेक्ट्स और मैनेजमेंट बहुत ही कुशलता से संभाला करते थे। तो दोस्तों, यह थी कड़े संघर्ष, अटूट समर्पण और ऐतिहासिक सफलता से भरी अजय देवगन परिवार की अनसुनी कहानी। आपको अजय देवगन की एक्टिंग और उनकी कौन सी फिल्म सबसे ज्यादा पसंद है? हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताइए। मैं आपका दोस्त लव कुश। आपसे मिलूंगा डेली फ्लो के अगले वीडियो में फिर किसी नई और दिलचस्प बॉलीवुड कहानी के साथ। अगर आपको यह वीडियो पसंद आया हो तो इसे लाइक करें और अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमारे चैनल डेली फ्लो को सब्सक्राइब करना बिल्कुल भी ना भूलें। तब तक के लिए आप सभी को मेरा प्यार