जरा सोचिए सुबह-सुबह आपके घर की घंटी बजती है। आप दरवाजा खोलते हैं और सामने 8 से 10 लोग खड़े मिलते हैं। उनके कपड़ों पर सीबीआई का लोगो लगा है। गले में आई कार्ड टंगे हैं। उनके चेहरे पर सख्त पुलिस या रब है। वो आपसे कहते हैं कि हम सीबीआई से हैं। आपके घर पर रेड मारिए। तुरंत गेट खोलिए। ऐसे में कोई भी आम इंसान घबरा जाएगा पसीने छूट जाएंगे और बिना सोचे समझे दरवाजा खोल देगा। लेकिन क्या हो अगर वो असली पुलिस नहीं बल्कि फ्रॉड। जी हां, दिल्ली के रोहिणी इलाके में बिल्कुल ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।
जहां 8 से 10 फर्जी सीबीआई अधिकारियों का एक पूरा गिरोह एक कारोबारी के घर में घुसने पहुंचा था। लेकिन इस पूरी साजिश के आगे ढाल बनकर खड़ी हो गई घर की मालकिन। एक महिला की सूझबूझ ने कैसे करोड़ों की ठगी और एक बड़ी वारदात को नाकाम कर दिया। आइए आपको बताते हैं इस पूरी वारदात की एक-एक इनसाइड स्टोरी। यह वाक्य है दिल्ली के रोहिणी इलाके का। तारीख थी 8 अगस्त। एक नामी बिजनेसमैन का परिवार अपने घर में मौजूद था। तभी अचानक घर के बाहर हलचल होती है। बाहर करीब 8 से 10 लोगों की एक टीम पहुंचती है। इन लोगों ने बकायदा सीबीआई के लोगो वाले कपड़े पहन रखे थे। गले में फर्जी पहचान पत्र झूल रहे थे।
घर पहुंचते ही उन्होंने पूरे रब के साथ दरवाजा खटखटाया और अंदर मौजूद परिवार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि सीबीआई की टीम आई है तुरंत गेट खोल लिया। हम आपके घर की तलाशी यानी सर्च ऑपरेशन चलाना है। अगर कोई सामान्य व्यक्ति होता तो शायद डर के मारे तुरंत कुंडी खोल देता। लेकिन घर में मौजूद व्यापारी की पत्नी ने हिम्मत और अकलमंदी का परिचय दिया। महिला को मामला कुछ संदिग्ध लगा।
उन्होंने गेट की कुंडी अंदर से बंद ही रखी और दरवाजे के पीछे ही एक कड़ा सवाल पूछा। अगर आप सीबीआई से हैं तो पहले अपना आधिकारिक पहचान पत्र यानी आईडी कार्ड और सर्च वारंट का सरकारी कागज दिखाई। बस यही वो सवाल था जिसने उन 810 छात्र बदमाशों के होश उड़ा दिए। जब महिला ने गेट खोलने से साफ इंकार कर दिया तो फर्जी सीबीआई की टीम बाहर ही डटी रही। यह ड्रामा कोई 510 मिनट नहीं बल्कि पूरे 1ढ़ घंटे तक चलता रहा। गिरोह लगातार अंदर आने के लिए मानसिक दबाव बनाता रहा। जब बदमाशों ने देखा कि महिला बिना कागजात के गेट खोलने नहीं वाली तो उन्होंने एक नया पंतरा आजमाया।
उन्होंने कारोबारी के पिता के WhatsApp नंबर पर एक नोटिस भेजा। इस नोटिस को ध्यान से सुनिए। इस फर्जी कागज पर बकायदा सीबीआई डायरेक्टर के नाम और दस्तखत बने हुए थे ताकि परिवार डर जाए। हालांकि बदमाशों ने चालाकी दिखाते हुए कुछ ही देर में उस मैसेज को डिलीट फॉर एवरीवन कर दिया। लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि परिवार उनसे भी दो कदम आगे था। परिवार ने मैसेज डिलीट होने से पहले ही उस फर्जी नोटिस का स्क्रीनशॉट अपने फोन में सेव कर लिया था। डेढ़ घंटे तक चले इस ड्रामे और बहसबाजी का शोर सुनकर आसपास के पड़ोसी भी इकट्ठा होने लगे। जब पड़ोसियों ने देखा कि मामला गंभीर है तो उन्होंने भी उन तथाकथित सीबीआई अफसरों को घेर लिया और सवाल दागने शुरू कर दिए। कि हमें नोटिस और सर्च वारंट की हार्ड कॉपी सामने दिखाई। पड़ोसियों का दखल और महिला का सख्त रुख देखकर फर्जी अधिकारियों के पसीने छूट गए। उन्हें समझ आ गया कि अब उनकी पोल पट्टी खुलने वाली है।
जब उनसे बार-बार असली कागजात की मांग की गई तो ठगों ने बहाना बनाया कि अरे नोटिस का ओरिजिनल कागज हमारी कार में रखा है। हम अभी लेकर आते हैं। और यह कहकर वह कार की तरफ गए। उसमें सवार हुए। गाड़ी की स्पीड बढ़ाकर मौके से रफूचक्कर हो गए। उनके जाते ही परिवार ने तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल कर पीसीआर को सूचना दी। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पूरी वारदात घर और गली में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो चुकी है। पुलिस ने पीड़ित परिवार की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी। पुलिस के हाथ वो सीसीटीवी फुटेज और WhatsApp पर भेजा गया फर्जी नोटिस का स्क्रीनशॉट लग चुका है। दिल्ली पुलिस अब इलेक्ट्रॉनिक सर्वििलांस और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन 8 से 10 संदीप ठगों की पहचान करने और उनके गिरोह तक पहुंचने में जुटी है। रोहिणी की सतर्क महिला की समझदारी ने ना सिर्फ एक बहुत बड़ी डकैती को नाकाम किया बल्कि हम सबके लिए एक बहुत बड़ा सबक भी छोड़ दिया है।
फिल्म स्पेशल 26 तो हमने पर्दे पर देखी थी लेकिन असल जिंदगी में ऐसे अपराधी हमारे आपके आसपास घूम रहे हैं। इसलिए याद रखिए अगर कभी कोई खुद को पुलिस सीबीआई या फिर ईडी या इनकम टैक्स का अधिकारी बताकर आपके घर आए तो डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। पहला कदम जब तक वो आधिकारिक ऑथराइजेशन लेटर सर्च वारंट और अपना वैलिड आईडी कार्ड ना दिखाए घर का दरवाजा कभी ना खोलें। दूसरा कदम किसी भी डिजिटल या WhatsApp नोटिस पर आंख मूंदकर भरोसा ना करें और तीसरा कदम शक होते ही तुरंत अपने पड़ोसियों को सूचित करें और पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल करें। लेकिन सवाल यह है कि आखिर कौन थे यह 8 से 10 लोग? क्या इन्हें घर के अंदर किसी बड़े कैशियर ज्वेलरी की मुखबरी मिली थी? और क्या दिल्ली में स्पेशल 26 जैसा कोई संगठित गिरोह सक्रिय हो चुका है? पुलिस की जांच जैसे ही आगे बढ़ेगी, हम आप तक हर खबर सबसे पहले पहुंचाएंगे।