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जिसे बहन माना, उसी से रचाई शादी… क्या थी श्रीदेवी की जिंदगी की सबसे बड़ी कंट्रोवर्सी?

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एक ऐसी अभिनेत्री जिसने बचपन से ही अपनी जिंदगी सिनेमा के नाम कर दी। मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां है थोड़ा ठहरों से जो आगे चलकर बनी भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी और फेमस हीरोइन काटे नहीं कटते ये [संगीत] दिन ये रात कहनी थी तुमसे जो दिल की बात जिसने चार भाषाओं के सिनेमा को अपनी खूबसूरती और अभिनय के जादू से अपना दीवाना बनाया मैं तेरी दुश्मन मुश्किल नैना दिन जो थी खूबसूरती और अभिनय की अनूठी मिसाल और लोगों ने उनको नाम दिया हवा हवाई का। कहती है मुझको हवा हवाई। ये आगे चलकर बनी अपने दौर की सबसे ज्यादा चार्ज करने वाली इकलौती हीरोइन और ये बनी भारतीय सिनेमा की पहली लेडी सुपरस्टार। तेरा मन बरसा [संगीत] रे पानी क्यों बरसा रे तूने किसको क्या और कैसे इन्होंने एक शादीशुदा फिल्म डायरेक्टर बोनी कपूर के घर में शरण ली और बाद में कैसे मोना शौरी कपूर का शादीशुदा जीवन खत्म किया इस अभिनेत्री ने। लगी आज सावन के फिर वो झड़ी है। कैसे यह अभिनेत्री भाई को राखी बांधते बांधते उसी से शादी कर बैठी और कैसे शादी से पहले उसके बच्चे की मां बन गई और क्यों समाज और परिवार के डर से की गई थी ये शादी और कैसे एक दिन अचानक बात टब में डूब कर इनकी मौत हो गई। ये सच पर बर्दाश्त नहीं हो रहा छोटे। [हंसी] मैं पागल हो जाऊंगी। मैं मर जाऊंगी। मैं मर जाऊंगी। आज के इस अपने शो में हम बात कर रहे हैं ऐसी अभिनेत्री की जो बचपन से ही सिनेमा के पर्दे पर काम करने लगी थी। जिसकी पहली हिंदी फिल्म सुपर फ्लॉप हुई। लेकिन फिर भी वह बन गई भारतीय सिनेमा की हाई पेमेंट पाने वाली इकलौती हीरोइन और जिसने हिंदी सिनेमा के अलावा तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ भाषा के सिनेमा को भी अपनी एक्टिंग और खूबसूरती से दीवाना बनाया था। जिसको लोगों ने कभी हवा-हवाई कहा तो कभी चांद की चांदनी। जी हां, हम बात कर रहे हैं सिर्फ और सिर्फ श्रीदेवी की। श्रीदेवी का फिल्मी सफर कैसे शुरू हुआ? क्या थे इनके निजी जीवन के विवाद? और कैसे इनकी शादी अपने आप में एक विवाद थी, जिसकी चर्चा पूरे देश में हुई। शुरुआत करते हैं इनके फिल्मी सफर से। तेरे मेरे होठों पे मीठे-मीठे गीत मिलवा। [संगीत] [संगीत] श्रीदेवी का पूरा नाम है श्री अम्मा यंगर अयन। इनका जन्म 13 अगस्त 1963 को मद्रास यानी तमिलनाडु का वो गांव जिसे मीनाम पट्टी कहा जाता है में हुआ था। यह गांव जिला शिवकाशी में पड़ता है। इनके पिता का नाम था अयप्पन रेंजर जो जिला शिवकाशी में ही एक वकील के तौर पर काम करते थे। इनकी मां का नाम था राजेश्वरी एंजर जो तिरुपति आंध्र प्रदेश की रहने वाली थी और एक घरेलू गणी थी। श्रीदेवी के पिता ने दो शादियां की थी। श्रीदेवी दूसरी पत्नी की संतान है। श्रीदेवी को प्यार से सभी लोग घर में अमू बुलाया करते थे। श्रीदेवी की एक छोटी बहन भी है जिनका नाम है श्रीलता। इनके दो भाई भी थे जो कि पहली पत्नी से थे सतीश और आनंद। श्रीदेवी ने शुरुआत से अपने दोनों भाइयों से दूरी बना करके रखी थी। कारण था पारिवारिक मनमुटाव।

श्रीदेवी के पिता तमिल थे और मां तेलुगु। इसीलिए शायद श्रीदेवी दोनों राज्यों की भाषा और संस्कृति की भली-भांति परिचित थी। मैं कहूं [संगीत] कभी तुम कहो श्रीदेवी कभी स्कूल कॉलेज नहीं गई थी। बचपन से ही उन्होंने देखा तो सिर्फ सिनेमा का पर्दा। श्रीदेवी ने अपना फिल्मी सफर 4 साल की उम्र में शुरू कर दिया था। श्रीदेवी ने बाल कलाकार के रूप में फिल्मों में काम शुरू किया। साल 1967 का वो समय जब श्रीदेवी ने पहली बार एक तमिल भाषा की फिल्म कांधन करुणाई की जो कि माइथोलॉजिकल फिल्म थी। इस फिल्म में श्रीदेवी के साथ शिवाजी, गणेशन, शिवकुमार और जय ललिता जैसे बड़े कलाकार मुख्य भूमिका में थे। श्रीदेवी ने इस फिल्म में भगवान मुर्गन का बाल रूप निभाया था। इस फिल्म में निभाई भूमिका को लोगों ने बहुत पसंद किया। लिहाजा ठीक 2 साल बाद 1959 में फिर इसी तरह की एक फिल्म आई [संगीत] जिसमें श्रीदेवी ने एक बार फिर से मुर्गन का अभिनय किया। इनकी तमिल भाषा की पहली फिल्म थी खुनाईवा। तमिल भाषा के साथ श्रीदेवी ने मलयालम फिल्मों में भी काम किया था। इनकी पहली फिल्म कुमार संभव थी। यह फिल्म कालिदास के संस्कृत नाटक पर आधारित थी। आहा मुर्गा करुणा करनी परीक्षा विनोद 1971 में इनका बाल कलाकार के रूप में नेम फेम बढ़ा और एक मलयालम फिल्म पम पट्टा में ऐसा किरदार इन्होंने निभाया कि लोग इनकी एक्टिंग को देखते ही रह गए और इनकी इसी एक्टिंग के कारण केरल राज्य के फिल्म अवार्ड में श्रीदेवी को बेस्ट चाइल्ड एक्टर का अवार्ड मिला। श्रीदेवी का यह पहला अवार्ड था जिसने इनके नाम को चार चांद लगा दिए थे। पहला अवार्ड इनको महज 8 साल की उम्र में मिला था। इतनी कम उम्र में अवार्ड पाने वाली यह पहली बाल कलाकार थी। श्रीदेवी ने 1967 से 1972 तक भगवान के ही रोल किए थे। इन्होंने बाल कलाकार के रूप में चार भाषाओं में काम किया। श्रीदेवी ने तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और तमिल जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में अपनी एक्टिंग का दमखम दिखाया। किसी के हाथ [संगीत] ना आएगी ये लड़की। किसी के श्रीदेवी कभी स्कूल और कॉलेज तो नहीं गई इसीलिए कभी वो अपनी पढ़ाई नहीं कर पाई। लेकिन वो पूरी जिंदगी यही कहती रही कि मुझे अपने जीवन से कोई भी शिकायत नहीं है। जिंदगी [गला साफ़ करने की आवाज़] के सभी रंग मुझे अच्छे लगते हैं। अगर जिंदगी दोबारा से शुरू हुई तो मैं फिर से अपनी आंखें फिल्मों में ही खोलूं। श्रीदेवी के लिए फिल्मी पर्दा कैमरा ही सब कुछ था। श्रीदेवी को काम और नाम दोनों मिलता गया और श्रीदेवी अपनी मेहनत और लगन से अपने कद को और बड़ा करती गई। श्रीदेवी को अपने बचपन के दिनों से ही डांस में बहुत रुचि थी और यही कारण था कि श्रीदेवी अव्वल नंबर की डांसर थी। फिल्म की कहानी एक तरफ और श्रीदेवी का डांस एक तरफ होता था। उनके डांस की पूरी दुनिया मुरीद थी। श्रीदेवी ने कई साउथ फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गजों के साथ काम किया। जिनमें जय ललिता, शिवाजी गणेशन, एंटी रामाराव, कमल हसन,

रजनीकांत जैसे सुपरस्टार रहे। ए जिंदगी गले लगा [संगीत] ले श्रीदेवी के एक तेलुगु फिल्म रऊडी रानी का हिंदी रिमेक आया। उस फिल्म में श्रीदेवी भी नजर आई। फिल्म का नाम था रानी मेरा नाम। इस फिल्म के डायरेक्टर के एसआर दास थे। श्रीदेवी की यह पहली डेब्यू फिल्म मानी जाती है हिंदी सिनेमा के बाल कलाकार के रूप में। इसके ठीक 3 साल बाद श्रीदेवी फिर से हिंदी सिनेमा में नजर आई और फिल्म का नाम था जली। जली में श्रीदेवी जली की छोटी बहन के रोल में नजर आई। जूली अपने दौर की हिट फिल्मों में शुमार थी। नैनो में सपना सपनों में सजना सजना पे दिल आ गया। श्रीदेवी की एक तेलुगु फिल्म थी 16 बया नीले जो तमिल की एक ब्लॉकबस्टर फिल्म थी। इसको तेलुगु मलयालम के साथ हिंदी में भी रिलीज किया गया था। हिंदी में इस फिल्म का नाम रखा गया था 16वा सावन। यह फिल्म 1979 में बन करके रिलीज हुई थी। पहले श्रीदेवी ने इस फिल्म में काम करने से मना कर दिया था क्योंकि ना तो उनको हिंदी आती थी और ना ही इंग्लिश लेकिन इस सब के बावजूद फिल्म के डायरेक्टर भारती राजा ने श्रीदेवी को मना लिया और श्रीदेवी ने इस फिल्म के लिए हां कर दी और इस तरह श्रीदेवी आ गई मुंबई। इस फिल्म में इनके साथ इनके हीरो थे अमोल पालेकर। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ कमाल तो नहीं कर पाई और सुबह फ्लॉप हो गई। इस फिल्म से श्रीदेवी को नाकामयाबी मिली और वो वापस अपनी साउथ फिल्म इंडस्ट्री में चली गई। इस फिल्म को बतौर हीरोइन उनकी पहली डेब्यू हिंदी फिल्म माना जाता है। हिंदी सिनेमा का पहला कदम श्रीदेवी को हताशा और मायूसी देने वाला था। वाह वाह वाह खेल शुरू हो गया। कुछ मुझे मिला और कुछ हो [संगीत] गया। इसके बाद श्रीदेवी साउथ की फिल्में करती रही। लिहाजा 1981 में पहली बार तमिल फिल्मफेयर अवार्ड फंक्शन में इनको बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड मिला। फिल्म थी मेनदुम कोकिला। इसके बाद सन 1982 में श्रीदेवी को एक बार फिर से अवार्ड मिला। ये अवार्ड इनको तमिलनाडु स्टेट फिल्म फॉर बेस्ट हीरोइन के लिए दिया गया। फिल्म का नाम था मून ड्रेन पिराई जिसका आगे चलकर हिंदी में रिमेक बनाया गया और नाम रखा गया सदमा। भारतीय हिंदी सिनेमा में श्रीदेवी का पहला कदम सही नहीं था। उनकी पहली फिल्म 16वां सावन पूरी तरह से फ्लॉप थी। लिहाजा 4 साल बाद श्रीदेवी एक बार फिर से 1983 में मुंबई आई। इस बार श्रीदेवी ने अपना एक-एक कदम बहुत ही फूंक-फूंक कर रखा और हिम्मत वाला फिल्म साइन कर ली। श्रीदेवी ने इसमें बड़ी मेहनत से काम किया और जब यह फिल्म रिलीज हुई तो बॉक्स ऑफिस पर धमाल मच गया। यह फिल्म इतनी बड़ी हिट साबित हुई कि इस फिल्म में श्रीदेवी रातोंरात स्टार बन गई और ये फिल्म इस साल की ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई। इस फिल्म में श्रीदेवी के साथ जितेंद्र भी थे। [चीखने की आवाज़] इस फिल्म से जितेंद्र को भी काफी फायदा हुआ क्योंकि पिछले कुछ समय से जितेंद्र की कई फिल्में लगातार फ्लॉप साबित हो रही थी। तो श्रीदेवी के साथ उनकी फिल्म हिम्मत वाला ब्लॉकबस्टर साबित हुई और जितेंद्र की भी किस्मत चमक गई। श्रीदेवी साउथ से आई थी। उनकी इस फिल्म में डबिंग की गई थी। उनकी हिंदी डबिंग आर्टिस्ट के द्वारा की गई थी। इस फिल्म में श्रीदेवी और जितेंद्र की जोड़ी को काफी पसंद किया गया।

इस फिल्म में श्रीदेवी और जितेंद्र की डांस की आज भी तारीफ होती है। नैनों में सपना सपनों में सजना सजना पे दिल आ गया। क्यों सजना पे? इसके बाद इन दोनों ने उसी साल तीन फिल्म और की थी। जानी दोस्त जस्टिस चौधरी और मवाली। इन तीन फिल्मों के बाद तो श्रीदेवी ने हिंदी सिनेमा में अपने पैर जमा लिए और लोग भी उनको काफी पसंद करने लगे थे। हिंदी सिनेमा में नेम फिल्म मिलने पर श्रीदेवी ने अपने साउथ सिनेमा को कभी छोड़ा नहीं और वो वहां भी लगातार काम करती रही। कामयाबी इस तरह उनके सर चढ़कर बोल रही थी कि श्रीदेवी को हिंदी सिनेमा ने थंडर थाई की उपाधि दे दी थी। इसके बाद इनकी एक फिल्म तोहफा जिसमें श्रीदेवी और जितेंद्र की जोड़ी एक बार फिर से साथ में नजर आई। इस फिल्म में श्रीदेवी के डांस और गीतों को लोगों ने बहुत पसंद किया और यह फिल्म बन गई इस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म| 1984 [गला साफ़ करने की आवाज़] में फिल्मफेयर मैगजीन ने तो श्रीदेवी की फोटो छाप कर उनके कद और लोकप्रियता को और बढ़ा दिया था। इस फिल्म में दो गाने थे एक प्यार का तोहफा [संगीत] और एक आंख मारूं को। दोनों ही गाने चार्ट बस्टर रहे। किशोर कुमार और आशा जी ने ही इन दोनों गानों को गाया था। इस फिल्म में भी श्रीदेवी की हिंदी डबिंग की गई थी। उनकी हिंदी डबिंग वॉइस ओवर आर्टिस्ट नाज़ के द्वारा की गई। श्रीदेवी और जितेंद्र ने लगभग 16 फिल्में साथ में की जिनमें हिम्मतवाला, जानी, जस्टिस चौधरी, जानी दोस्त और मवाली यह कुछ फिल्में थी जो सन 1983 में एक साथ आई थी। एक अपमान [संगीत] श्रीदेवी एक ऐसी हीरोइन थी जिन्होंने धर्मेंद्र के साथ उनके बेटे सनी देओल के साथ भी काम किया। श्रीदेवी अकेली हीरोइन थी जो पिता और बेटे दोनों की हीरोइन बनकर एक साथ आई। सनी देओल के साथ श्रीदेवी ने कुछ फिल्में की जिनमें सल्तनत, चालबाज, निगाहें, जोशीले जैसी फिल्में थी। तो वहीं धर्मेंद्र के साथ नाकाबंदी, फरिश्ते, वतन के रखवाले, सोने पर सुहागा जैसी बड़ी फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई थी। यार मुझे बड़े महफूस की है श्रीदेवी ने राजेश खन्ना के साथ भी काम किया था। लेकिन [गला साफ़ करने की आवाज़] श्रीदेवी को राजेश खन्ना के साथ काम करना ज्यादा पसंद नहीं था। श्रीदेवी को लगता था कि राजेश खन्ना उनकी झूठी तारीफें करते हैं और इसी बात के कारण श्रीदेवी ने राजेश खन्ना के साथ बहुत ही कम फिल्में की। श्रीदेवी की एक फिल्म नगीना अपने दौर की सुपरहिट फिल्मों में से एक है। इस फिल्म में श्रीदेवी ने जो इच्छाधारी नागिन का रोल अदा किया, उसे दुनिया देखती रह गई। इस फिल्म को नाग-नागिन के ऊपर की बेस्ट फिल्म माना गया। इस फिल्म के लिए श्रीदेवी को स्पेशल लेंस आंखों में पहनने के लिए दिए गए थे। जिसमें उनकी आंखों को बिल्कुल कातिलाना अंदाज में दिखाया गया। इस फिल्म ने श्रीदेवी को दुनिया भर में चर्चा में ला दिया। इसके बाद सन 1986 में श्रीदेवी की सुपरहिट फिल्म कर्मा भी रिलीज हुई। यह एक मल्टीस्टारर फिल्म थी। इसके बाद श्रीदेवी की फिरोज़ खान के साथ एक फिल्म जांबाज आई। [संगीत] इस फिल्म का श्रीदेवी का एक सॉन्ग पूरी फिल्म पर भारी पड़ गया था। दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई। किसी को [संगीत] नहीं मिलता क्या प्यार श्रीदेवी ने लगातार 30 सालों तक भारतीय सिनेमा के सभी टॉप हीरोज़ के साथ काम किया और वो उनके साथ फिल्मी पर्दे पर रोमांस करती भी नजर आई। उन्होंने 70 के दशक में राजेश खन्ना, विनोद खन्ना, धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, जितेंद्र और ऋषि कपूर के साथ काम किया। तो वहीं 80 के दशक में मिथुन चक्रवर्ती, सनी देओल, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ के साथ भी काम किया। और 90 के दशक में शाहरुख खान, अक्षय कुमार, सलमान खान की भी नायिका बनकर वो फिल्मी पर्दे पर नजर आई। श्रीदेवी की संजय दत्त के साथ कभी [संगीत] नहीं बनी और इसकी वजह थी कि जब श्रीदेवी हिम्मतवाला फिल्म की शूटिंग कर रही थी तो संजय दत्त ने श्रीदेवी की खूबसूरती और एक्टिंग के चर्चे सुने थे जिसके चलते संजय दत्त श्रीदेवी से मिलने उनके सेट पर शराब पीकर पहुंच गए थे। उनके इस तरह के रवैया से श्रीदेवी बहुत नाराज हो गई थी और फिल्म के सेट से उठकर अपने मेकअप [संगीत] रूम में चली गई थी। तो वहीं उन्होंने यह मन बना लिया था कि वह जिंदगी में संजय दत्त के साथ कभी काम नहीं करेंगी। लेकिन सन 1993 में महेश भट्ट ने एक फिल्म बनाई जिसका नाम [गला साफ़ करने की आवाज़] था गुमराह।

इसमें संजय दत्त और श्रीदेवी ने एक साथ काम किया। फिल्म में काम करने को लेकर उनको नहीं पता था कि फिल्म में संजय दत्त भी हैं। महेश भट्ट को किए गए वादे को पूरा करने के लिए श्रीदेवी ने इस फिल्म को पूरा किया और यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई। प्यार को सलाम और सनम। इसके बाद यश चोपड़ा ने एक फिल्म बनाई जिसका नाम था चांदनी। इस फिल्म में श्रीदेवी को दर्शकों के सामने एक अलग ही ढंग से पेश किया गया था। इस फिल्म में श्रीदेवी के कपड़ों उनके स्टाइल को बहुत पसंद किया गया। इस फिल्म में जो ड्रेस कोट श्रीदेवी ने पहना था वो उस समय की हर लड़की की पसंद बन गया था। जो इतना फेमस हुआ कि दिल्ली में तो एक ड्रेस डिजाइनर लीना दारू ने तो इनके नाम से चांदनी लोक शोरूम को ओपन ही कर दिया था। इस फिल्म का संगीत आज भी महिला संगीत में सर चढ़कर गाया जाता है। इस फिल्म के गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं। मेरे हाथों से चूड़ियां है। श्रीदेवी ने लगभग 300 फिल्मों में काम किया। 80 से 90 के दशक में वह सबसे ज्यादा पेमेंट पाने वाली इकलौती हीरोइन थी। इनकी एक्टिंग और खूबसूरती का हर डायरेक्टर और प्रोड्यूसर दीवाना था। श्रीदेवी ने सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ भी काम किया। उनके साथ श्रीदेवी ने आखिरी रास्ता खुदा गवाह इंकलाब जैसी फिल्में की। आखिरी रास्ता वही फिल्म है जिसमें श्रीदेवी की हिंदी डबिंग हीरोइन रेखा ने की थी। क्योंकि श्रीदेवी को हिंदी नहीं आती थी। लिहाजा उनकी हिंदी डबिंग एक्ट्रेस रेखा के द्वारा कराई गई [हंसी] थी। बाकी की सभी फिल्मों में उनकी हिंदी डबिंग वॉइस ओवर आर्टिस्ट नास के द्वारा ही कराई जाती थी। मोरनी बादामा बोले रामा मोरनी। अब बात करते हैं श्रीदेवी के निजी जीवन की। श्रीदेवी की एक्टिंग और खूबसूरती किसी से भी छिपी नहीं है। जिसने भी श्रीदेवी को देखा वो उनका दीवाना हो गया। श्रीदेवी अपनी प्राइवेट और पब्लिक लाइफ को एकदम अलग-अलग रखती थी। सन 1984 में श्रीदेवी एक फिल्म कर रही थी जिसका नाम था जाग उठा इंसान। इस फिल्म में इनके साथ एक्टर मिथुन चक्रवर्ती भी थे। बताया जाता है कि श्रीदेवी और मिथुन दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे थे। श्रीदेवी जानती थी कि मिथुन पहले से ही शादीशुदा हैं। लेकिन श्री ने इन सब बातों की परवाह नहीं की और यह दोनों एक दूसरे के प्यार में बहते चले गए। इन दोनों के प्यार की चर्चा फिल्मी गलियारों पर जोरों पर थी। जानकार बताते हैं कि श्रीदेवी और मिथुन ने गुपचुप तरीके से शादी भी कर ली थी। जब फैन नामक एक पत्रिका ने उनके विवाह प्रमाण पत्र को प्रकाशित कर दिया था। तो इसके बाद उनकी शादी का यह राज सभी लोगों के सामने आ गया था। उनके इस कदम की काफी आलोचना हुई। तो वहीं जब इस बात का पता मिथुन चक्रवर्ती की पत्नी योगिता बाली को चला तो वह हैरान रह गई। वो मिथुन चक्रवर्ती के इस कदम को समझ नहीं पाई और उन्होंने अपनी जिंदगी खत्म करने की कोशिश की। वो मिथुन चक्रवर्ती से बिल्कुल भी अलग नहीं होना चाहती थी और इसका असर यह हुआ कि मिथुन चक्रवर्ती अपनी पत्नी योगिता बाली के दबाव में आ गए और श्रीदेवी से अलग हो गए और इस तरह श्रीदेवी का साथ मिथुन चक्रवर्ती ने हमेशा के लिए छोड़ दिया। तुम दीवाने इतनी दूर एक दूसरे के बगैर कैसे जिएंगे? रात दिन मेरी भाषा के बगैर [चीखने की आवाज़] ये तूने क्या किया? मिथुन से अलग होने के बाद श्रीदेवी लगातार फिल्मों में काम कर रही थी। श्रीदेवी की जिंदगी में अभी मुसीबतें कम नहीं हुई थी। सन 70 से 80 के दशक में फिल्म मेकर बोनी कपूर ने श्रीदेवी को एक तमिल फिल्म में देखा था। बोनी कपूर पहली नजर में श्रीदेवी के दीवाने हो गए थे। और वो उस समय अपनी एक फिल्म ऋषि कपूर के साथ बना रहे थे, जिसके लिए वह एक हीरोइन की तलाश में थे। उन्होंने श्रीदेवी को देखा था तो वो उनको साइन करने के लिए उनके घर मद्रास पहुंच गए। लेकिन वहां श्रीदेवी नहीं थी। वो उस समय आउट ऑफ इंडिया अपनी फिल्म की शूटिंग कर रही थी। बताया जाता है कि श्रीदेवी की साउथ इंडियन सिनेमा में हाई फीस हुआ करती थी। बोनी कपूर को जब उनकी फीस पता चली तो वो वापस मुंबई आ गए। लेकिन सन 1986 में बोनी कपूर मिस्टर इंडिया फिल्म बना रहे थे। तो अनिल कपूर के अपोजिट उन्हें एक हीरोइन की तलाश थी। उन्हें श्रीदेवी का ख्याल आया और वो फिर पहुंच गए श्रीदेवी के घर, जहां उनकी मुलाकात श्रीदेवी से हुई। बोनी कपूर श्रीदेवी से पहली मुलाकात में ही अपना दिल हार गए। उस समय श्रीदेवी की फिल्म की

फीस ₹8 लाख हुआ करती थी। श्री की सारी फिल्म की डेट उनकी मां ही फाइनल करती थी। श्रीदेवी की मां ने बोनी कपूर से उस फिल्म के लिए ₹1 लाख मांगे जो कि उस समय काफी हाई पेमेंट हुआ करती थी। बोनी कपूर श्रीदेवी के दीवाने थे। लिहाजा उन्होंने उनकी मां को 10 की जगह ₹11 लाख दिए और उनकी डेट्स बुक कर ली। आई लव यू। आई लव यू। [संगीत][गाना गाने की आवाज़] फिल्म की शूटिंग के लिए श्रीदेवी मुंबई आई। इस बार श्रीदेवी को बोनी कपूर ने अपने ही घर में जगह दी। लेकिन बोनी कपूर उस समय मिथुन चक्रवर्ती और श्रीदेवी के अफेयर से अनजान थे। श्रीदेवी मिथुन चक्रवर्ती से प्यार करती थी, लेकिन मिथुन चक्रवर्ती को श्रीदेवी का बोनी कपूर के घर पर रहना बिल्कुल पसंद नहीं था। वो हमेशा श्रीदेवी से इस बात के लिए झगड़ते थे। बोनी कपूर श्रीदेवी की बहुत फिक्र करते थे, और उनकी काफी देखभाल भी करते थे। बस उनका यही रवैया मिथुन चक्रवर्ती को खटकता था। बात यहां तक बढ़ गई कि एक दिन मिथुन चक्रवर्ती ने श्रीदेवी को बोनी कपूर को राखी बांधने तक के लिए कह दिया। श्रीदेवी ने भी मिथुन चक्रवर्ती की बात मानी और बोनी कपूर को राखी बांध दी। बताया जाता है कि श्रीदेवी ने बोनी कपूर को उनकी पत्नी मोना शोरी कपूर के सामने राखी बांधी। यह सिलसिला कई साल तक चला। श्रीदेवी बोनी कपूर को हर साल की तरह राखी बांधती रहीं। लेकिन कुछ समय बाद ही मिथुन चक्रवर्ती और श्रीदेवी का अफेयर खत्म हो गया। लेकिन राखी बांधने के कारण बोनी कपूर काफी उलझनों में फंस गए। क्योंकि न तो वो अपने दिल की बात श्रीदेवी को बता पा रहे थे और वहीं श्रीदेवी ने उनको अपना भाई बना लिया था। हम तुमको अच्छा आदमी समझा। तुम पर भरोसा किया। बोनी कपूर पहले से ही शादीशुदा थे, और वो श्रीदेवी को भी प्यार करने लगे थे। वो अपनी पत्नी और श्रीदेवी के प्यार में इस तरह से फंसे हुए थे कि वो कोई भी फैसला नहीं ले पा रहे थे। एक दिन फिल्म मिस्टर इंडिया के सेट पर बोनी कपूर ने अपने दिल की बात आखिरकार श्रीदेवी को कह डाली। तो वहीं श्रीदेवी भी बोनी कपूर के द्वारा की गई उनकी देखभाल और फ़िक्र को देखते हुए उन्होंने बिना कुछ सोचे समझे बोनी कपूर को हां कर दी। जबकि श्रीदेवी बोनी कपूर को राखी बांधती थी। उन्होंने किसी भी रिश्ते की मर्यादा समाज की परवाह किए बिना बोनी कपूर के फैसले को स्वीकार कर लिया। बोनी कपूर ने मोना शौरी कपूर को तलाक दे दिया और सन 1996 में श्रीदेवी से एक मंदिर में शादी [संगीत] कर ली। मोना शौरी कपूर वही थीं जिन्होंने श्रीदेवी को अपने घर में जगह दी थी। और श्रीदेवी ने उनका ही घर तोड़ दिया। उनकी शादी के बाद उनकी कड़ी आलोचना हुई। श्रीदेवी को पहली बार मीडिया ने घर तोड़ने वाली महिला का खिताब दे दिया। श्रीदेवी की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुई। बताया जाता है कि श्रीदेवी शादी से पहले ही प्रेग्नेंट हो गई थी और इसीलिए यह शादी जल्दबाजी में एक मंदिर में की गई। बताया तो यहां तक जाता है कि श्रीदेवी शादी के समय 7 महीने की प्रेग्नेंट थी। उनकी पहली बेटी जानवी कपूर वही बेटी है। बताया जाता है कि श्रीदेवी ने दो बच्चों को जन्म दिया। जिसमें उनकी पहली बेटी जानवी कपूर जो कि शादी से पहले और दूसरी बेटी खुशी कपूर हैं। उनकी पहली पत्नी मोना शौरी कपूर ने भी दो बच्चों को जन्म दिया। अर्जुन कपूर और अंशुला कपूर। एंड आई गॉट टू बी अ प्राउड मदर दैट टू ट्वाइस। आई विल मेक देम प्राउड ऑफ द मूवीज आई डू। जुदाई फिल्म के बाद 15 साल तक श्रीदेवी ने फिल्मों से दूरी बना ली थी। यह पूरा समय श्रीदेवी ने अपने परिवार को दिया। 15 साल के बाद श्रीदेवी ने फिर से एक बार कमबैक किया और इस बार यह नजर आई फिल्म इंग्लिश वि इंग्लिश में। इस फिल्म में ये टूटी फूटी इंग्लिश बोलती हुई नजर आई। श्रीदेवी ने बड़े पर्दे के साथ छोटे पर्दे पर भी काम किया।

जिसमें इनके कुछ प्रमुख सीरियल्स थे। 10 का दम जीना इसी का नाम है। श्रीदेवी कभी स्कूल नहीं गई। लेकिन उसके बावजूद वो बनी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविज़ की जहां पर बच्चों को पढ़ाया जाता है। श्रीदेवी ने भारतीय हिंदी सिनेमा में लगभग 300 फिल्मों में काम किया। लेकिन उन्होंने कुछ ऐसी फिल्में भी की जिनको ठुकरा दिया था। जिसमें शक्ति द पावर जिसमें शाहरुख खान और नाना पाटेकर थे। कामयाब होशियार खुदगर्ज विजय अभिमन्यु अजूबा लेकिन बेटा डर आईना बाजीगर मोहरा अंजाम दिल तो पागल है यादें और बागवान जैसी फिल्में थी दुनिया भूल सकती है बाबा लेकिन जो कुछ भी हुआ वो मैं नहीं भूल सकती श्रीदेवी को उनके शानदार अभिनय के लिए चारों भाषाओं में पुरस्कार और सम्मान सम्मान भी मिले जिस उन्हें सम्मानित किया गया। तो वहीं 1982 में तमिल फिल्म मीनदुम कोकिला के लिए फिल्म फेयर बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड से उनको सम्मानित किया गया। 1990 में हिंदी फिल्म चालबाज के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के खिताब से सम्मानित किया गया। तो वहीं 1991 में तेलुगु फिल्म के लिए फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड उन्हें मिला। 1992 में हिंदी फिल्म लम्हे के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया गया। तो वहीं साल 2013 में हिंदी फिल्म नगीना और इंडिया के लिए सम्मानित किया गया। 2013 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री अवार्ड देकर सम्मानित किया गया और 2017 में इनको सबसे बड़ा अवार्ड राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला। में श्रीदेवी अपने भतीजे मोहित मारवा की शादी अटेंड करने के लिए दुबई चली गई। जहां श्रीदेवी कुछ दिन अपने परिवार के साथ खुशी-खुशी समय बिता रही थी। बताया जाता है कि शाम के समय श्रीदेवी नहाने के लिए बाथरूम गई। उसी होटल में उनके साथ उनकी बेटी और पति बोनी कपूर भी मौजूद थे। श्रीदेवी जब बाथरूम से काफी देर तक बाहर नहीं आई तो बोनी कपूर ने अंदर जाकर देखा तो श्रीदेवी बाथ टब में ही डूबी हुई थी। उ

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