पाकिस्तान के फादर ऑफ नेशन या कायदे आजम के तौर पर जिन्ना को जाना जाता और जिन्ना के एक आह्वान पर कई लोग भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए। लेकिन जिन्ना की बेटी भारत में ही रही। और जिन्ना की इकलौती बेटी यानी कि अगर देखा जाए ब्लड लाइन जिन्ना की तो इकलौती बेटी इकलौता परिवार जो था वो भारत में रह गई। आखिर ऐसा क्यों? आखिर ऐसी क्या वजह थी कि जिन्ना की बेटी दीना में रह गई।
उन्होंने भारत को चुना पाकिस्तान को नहीं चुना। आज इस पर हम बात करेंगे। , मोहम्मद अली जिन्ना ने पूरे भारत को जब भारत आजाद नहीं हुआ था, अंग्रेजों के खिलाफ चल रही थी, तब पूरे भारत के मुसलमानों को यह कहा कि तुम्हारा भविष्य यहां नहीं है। तुम्हारा भविष्य हिंदुस्तान में भारत में नहीं है और इसके लिए हमें अलग देश चाहिए। मुसलमानों का देश वो है पाकिस्तान।
बहुत सारे लोगों ने जिन्ना की बात सुनी। जिन्ना के साथ खड़े हुए और तो और विभाजन के बाद पाकिस्तान भी गए लेकिन जिन्ना की बेटी ही भारत में रही दीना वाडिया और वो इकलौती बेटी थी। दीना वाडिया भारत में रही। इसके पीछे की जो वजह बताई जाती है वो यही बताई जाती है कि दीना वाडिया की शादी भारत में हुई।
उनके बच्चे भारत में थे। इसलिए उन्होंने पाकिस्तान को नहीं चुना। दीना वाडिया की शादी एक पारसी परिवार में हुई थी। और आपको यह भी बता दें कि खुद मोहम्मद अली जिन्ना ने पारसी परिवार में ही शादी की थी। यानी कि उनकी जो पत्नी थी वो भी पारसी थी और डीना वाडिया जो उनकी बेटी थी उन्होंने भी पारसी परिवार में शादी की थी। अब इस सब में एक चीज बहुत ही दिलचस्प है.
अपने आप में कि जिन्ना का खानदान है कहां? पाकिस्तान बन गया। मोहम्मद अली जिन्ना कायदे आजम बन गए और उसके बाद बड़ी संख्या में लोग इधर-उधर गए। लेकिन पाकिस्तान की बेटी तो हिंदुस्तान में ही रह गई। बाकी लोग कहां गए जिन्ना के परिवार के?
तो जिन्ना के परिवार से उनकी एक बहन फातिमा वो जिन्ना के साथ गई। जिन्ना के भाई बहन आपको बता दें कि जिन्ना जो है सात भाई बहन जिन्ना और जिन्ना के साथ भाई बहन में एक फातिमा जो जिन्ना के साथ पाकिस्तान गई। बाकी लोग कहां रह गए? इसके बारे में हम फिर कभी आपको बताएंगे। और साथ ही अगले वीडियो में जब मौका मिलेगा तो हम आपको यह भी समझाएंगे कि गुजरात से आने वाले जिन्ना के परिवार की असली कहानी क्या है? क्योंकि जिन्ना के रूट्स हिंदू बताए जाते हैं। कहां से जिन्ना के परिवार ने इस्लाम धर्म कुबूल किया?
और क्या गुजरात में आज भी जिन्ना के परिवार के लोग हिंदू हैं? ये सवाल बहुत दिलचस्प है। हम इस पर आगे चर्चा करेंगे। लेकिन आज बात करेंगे हम दीनावाडिया की। दीनावाडिया की बात करें तो दीनावाडिया आज भारत के एक बहुत बड़े बिजनेस घराने से उनका नाम जुड़ा हुआ है। वो हम आपको बताएंगे।
लेकिन सबसे पहले समझिए कि मोहम्मद अली जिन्ना जो पाकिस्तान में चले गए और उनकी जो बेटी हैं दीना वाडिया वो यहां इंडिया में रह गई। अब दीना वाडिया के परिवार के जरा ट्री को देख लीजिए। जो लोग भारत में रह गए हैं उसमें नुसली वाडिडिया बिल्कुल। और उसके बाद नसवाडिया और जहांगीर वाडिया और डायनावाडिया जो कि नोसलीवाडिया की बहन थी।
तो इस तरीके से यह सभी भारत में रह गए। क्योंकि आप देखिए कि नेसवाडिया नेवाडिया का नाम आप सबने सुना होगा। नेसवाडिया का जब नाम आता है तो प्रीति जिंटा का नाम आता है। 2014 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में आईपीएल का मैच था और पंजाब की टीम का मुकाबला था।
आपको बता दें कि प्रीति जिंटा और नेसवाडिया के संबंध बहुत अच्छे थे। बहुत गहरी दोस्ती थी। रिलेशनशिप में थे और वो को ओनर भी थे पंजाब की टीम के। लेकिन उसी दौरान कुछ विवाद हुआ, बहस हुआ और मामला यहां तक लीगल लड़ाई तक चला गया। प्रीति सेंटर ने बड़े गंभीर आरोप लगाए नेसवाडिया पर। वही नेसवाडिया जिनका संबंध दीना वाडिया और जीना के परिवार से है।
और आज एक बड़ा बिजनेस घराना है ये भी। तो इस तरीके से जैसा मैंने आपको बताया कि दीनावाडिया के अगर अगर परिवार की बात करें तो वो परिवार भारत में ही रह गया। कई लोग ये सवाल उठाते हैं कि आखिर दीना वाडिया ने जिन्ना की बात क्या नहीं सुनी? क्या वो भारत के समर्थन में थी? तो जरा इसको भी देखिए। दीना वाडिया जब भारत में रह गई और उसके बाद पाकिस्तान बना हुआ तो दो बार दीना वाडिया दो बार पाकिस्तान गई हैं।
एक बार 1948 में गई वो जिन्ना की मौत के बाद उनके रिचुअल्स में दीनावाडिया गई। उसके बाद वो पाकिस्तान कभी नहीं गई। फिर 2017 में एक लास्ट विजिट उनका। अब बाद के साल में लास्ट विजिट हुआ। 2017 में उनकी हो गई। उसके बाद काफी समय बाद एक बार और पाकिस्तान वो गई है। लेकिन उसके अलावा उन्होंने पाकिस्तान विजिट नहीं किया।
वो इंडिया के अंदर ही रही। और जब पाकिस्तान बन गया था और जीना कायदे आजम बन गए तो रीना वाडिया ने उनको बधाई भी दी थी इसके लिए यानी कि पाकिस्तान बनने के लिए। तो एक चीज समझ में आती है जो यहां पर दिखाई देता है कि पाकिस्तान को ना चुनने के पीछे एक बड़ा कारण परिवार रहा क्योंकि दीना वाडिया का परिवार उनके बच्चे यहीं पर थे और 43 में दीना वाडिया की जो शादी हुई थी वो भी आगे नहीं चल पाई थी 1943 में उनका तलाक भी हो गया सेपरेटेड हो गए लेकिन फिर भी सभीकि यहीं पर थे इसलिए दीना वाडिया ने यहां चुना भारत को चुना इसलिए ये जो बात आती है कि दीना भाडिया ने भारत में रहना क्यों चुना?
तो इसके पीछे की जो बड़ी वजह है सबसे बड़ी वजह है वो है फैमिली और अक्सर इसकी बात कही जाती है कि परिवार को उन्होंने चुना औरकि परिवार भारत के अंदर था तो फिर उन्होंने यहां चुना और नेविल वाडिया जो थे उनके पति 1938 में जब उनकी शादी हुई थी तो नेविल वाडिया काफी बड़े उद्योगपति थे तब भी और आज भी वाडिया परिवार जो है बड़ा उद्योगपति घराना माना जाता है। नुसली और डायना उनके दो बच्चे हुए और नुसली वाडिया डायनाकि उनकी बेटी थी डीना और नेविल वाडिया की के जो दो बच्चे थे उसमें नुसली और डायना यानी कि नुसली भाई और डायना बहन नसली के ही खानदान से नेसवाडिया है जिनका हमने थोड़ी देर पहले जिक्र किया जो अब भारत में बड़े बिजनेस टकून के रूप में जाने जाते हैं। अब एक बड़ी मजेदार बात आपको बताने जा रहा हूं मैं कि यह जो शादी हुई थी.
1938 में जिन्ना की बेटी और नेविल नेविल वाडिया की दोनों की शादी से जिन्ना बहुत नाराज बहुत ही नाराज जिन्ना को यह अंतरधार्मिक विवाह पसंद नहीं था। जिन्ना ने इसका विरोध किया था। क्योंकि आप समझ सकते हैं वो जिन्ना जो एक मुस्लिम देश की जंग लड़ रहा था। वो जिन्ना जो मुसलमानों का नेता था वो भला अपनी ही बेटी का किसी दूसरे गैर मुस्लिम में शादी कैसे मंजूर कर सकता था। इसलिए यह बहुत विरोध था। लेकिन बहुत अजीब और हास्यास्पद बात यह है कि खुद जिन्ना ने शादी की थी और जिन्ना ने मुस्लिम में शादी नहीं की थी और यह बड़ी अजीब सी बात है कि खुद अपनी शादी उन्होंने पारसी परिवार में की थी। लेकिन जब उनकी बेटी दीना ने पारसी परिवार में शादी की तो भाई इसका विरोध किया था और ये बड़ी अजीब बात है कि रतन बाई उनकी पत्नी जो खुद पारसी थी और जब अपनी शादी की का समय था तो उन्होंने धर्म नहीं देखा जिन्ना ने लेकिन जब अपनी बेटी की बात आई तो इस बात का पुरजोर विरोध किया और बाप और बेटी में यहां से डिफरेंसेस भी शुरू हो गए। तो ये बड़ी दिलचस्प बात है दीना वाडिया को लेकर। हो सकता है कि एक बड़ा कारण यही हो कि दीना वाडिया ने फिर भारत में रहना ही प्रेफर किया हो क्योंकि बाप से थोड़ी नाराजगी चल ही रही थी और इस लंबे समय तक कभी भी दीनावाडिया ने पाकिस्तान जाने का सोचा ही नहीं।
यानी कि पूरे जीवन वो भारत में ही रही। अब अब इसमें एक बड़ी दिलचस्प बात ये है कि दीनावाडिया की दीनावाडिया जिन्ना की इकलौती संतान थी। तो अगर यह सवाल उठता है कि पाकिस्तान में क्या जिन्ना का कोई ब्लड लाइन है? यह बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल है। क्या जिन्ना के अपने खानदान का कोई भी व्यक्ति पाकिस्तान में जिंदा है? तो दो बातें इसमें सामने आती है। देखिए जिन्ना के जो बाकी के भाई बहन थे उनमें से कुछ लोग पाकिस्तान में तो थे लेकिन उनके बारे में आज सार्वजनिक तौर पर कोई सूचना नहीं है। ये कह पाना बहुत मुश्किल है कि भाई जिन्ना के बाकी के मेंबर्स यानी सात भाई बहन में बाकी जो भाई बहन थे वो पाकिस्तान में रहे। उनके परिवार के लोग हैं नहीं है यह कहना बहुत मुश्किल है। एक जो रिकॉर्ड है वो यही रिकॉर्ड है कि उनकी बहन जो थी वो इंडिया से पाकिस्तान गई थी साथ में और वो उनके मरने तक यानी कि जब जिन्ना की हुई तब तक उनके साथ थी और उसके बाद भी 1967 तक वो पाकिस्तान में रही। लेकिन जिन्ना की बहन ने शादी नहीं की। इसलिए यह बात तो क्लियर है कि जिन्ना के परिवार का कोई भी सदस्य पाकिस्तान में इस वक्त प्रमाणित तौर पे है यह कहना मुश्किल है। तो दीनावाडिया दीनावाडिया की शादी नेविलवाडिया से होती है और इस तरीके से नेविलवाडिया के दो बच्चे यानी दीना और नेविल के दो बच्चे होते हैं और अह उसके बाद जो उनका एक तरीके से देखिए परनाती जो है वो फिर नेसवाडिया। तो नेसवाडिया इस वक्त हैं और नेसवाडिया काफी चर्चा में भी रहे हैं। क्यों रहे हैं.
वो प्रीटीजेंटा की कहानी भी हमने आपको बताई है और भारत एक ऐसा देश है जहां विभाजन के बाद भी जो भी रहना चाहता था उसका स्वागत था। लेकिन पाकिस्तान का कैरेक्टर ही अलग था। तो ये एक बहुत दिलचस्प कहानी थी जिन्ना को लेकर जो हमने आपको बताई यानी कि जिन्ना के खानदान खून की अगर बात होगी तो वो खून भी भारत में ही है और भारत को ही उसने चुना और भारत में ही उसने ग्रो किया। आज एक नामी बिजनेस घराने के रूप में हम उसे जानते हैं और भारत में वो फला फूला आगे बढ़ा। जिन्ना ने मुसलमानों को जो डर दिखाया था उसके परिवार के सामने ही वो डर झूठा साबित हुआ और परिवार ने जब यहां रहने का तय किया तो भारत ने उसको अपनाया उसको स्वीकार किया। तब जबकि भारत से लाखों करोड़ों की संख्या में जो मुसलमान पाकिस्तान में गए उनको मुहाजिर कहा गया। आज भी बहुत सारे ऐसे भारतीय जो पहले पाकिस्तान गए उनकी बहुत अच्छी स्थिति नहीं है। उनके सामने बड़ी अजीब सी चुनौती रहती है क्योंकि पहले से जो पाकिस्तान में लोग थे उन्होंने दोहरा रवैया उनके खिलाफ अपनाया। एक लंबा वक्त उनको स्ट्रगल करने में ही बीत गया।
तो ये कहानी थी जिन्ना के ओरिजिनल रियल फर्स्ट ब्लड लाइन की जो भारत में रहा और भारत का अभिन्न हिस्सा बन गया। भारत का ही हिस्सा बन गया और भारत ने उसको स्वीकार भी किया क्योंकि उन्होंने अपने आप को भारतीय ही समझा पाकिस्तानी नहीं समझा। आगे आपको हम बताएंगे कि जिन्ना के परिवार की पीछे की कहानी क्या है?