बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव एक बार फिर मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। चेक बाउंस के मामले के बाद अब उन पर बैंक लोन की वसूली का दबाव बढ़ गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अब उनकी पैतृक संपत्तियों की नीलामी की तैयारी शुरू हो चुकी है। राजपाल यादव की संपत्ति पर नीलामी का नोटिस।
जानकारी के मुताबिक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुंबई शाखा 9 सितंबर को यूपी के शाहजहांपुर में स्थित राजपाल यादव की दो संपत्तियों की नीलामी करने जा रही है। इनमें उनका पैतृक मकान और खेत शामिल है। बैंक की ओर से दावा किया गया है कि राजपाल यादव पर करीब 16 करोड़ 6164000 बकाया है। इस राशि में मूल लोन के साथ ब्याज और अन्य शुल्क भी शामिल है। लोन के लिए राजपाल यादव ने अपनी पत्नी राधा यादव और मां गोदावरी यादव की संपत्तियों को गारंटी के तौर पर रखा था। बताया जा रहा है कि जिन दो संपत्तियों की नीलामी होनी है उनकी अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ 1926000 है। बैंक की ओर से गांव में नीलामी का नोटिस भी चसपा किया जा चुका है। अब सवाल है कि क्या इस नीलामी को रोका जा सकता है? अगर नीलामी से पहले पूरा बकाया ब्याज और अन्य शुल्क जमा कर दिए जाए तो कई मामलों में बैंक नीलामी की प्रक्रिया रोक सकता है। इसके अलावा उधारकर्ता बैंक से वन टाइम सेटलमेंट यानी ओटीसी का अनुरोध भी कर सकता है। अगर बैंक इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो नीलामी टल सकती है। वहीं यदि नोटिस किए जाने की प्रक्रिया के नियमों का पालन नहीं किया गया तो अदालत से भी राहत मांगी जा सकती है। आइए अब जानते हैं कि राजपाल यादव इस स्थिति तक कैसे पहुंचे। साल 2010 में उन्होंने अभिनेता के साथ-साथ निर्माता बनने का फैसला किया और फिल्म अतापता लापता बनाई। इस फिल्म के निर्माण में उन्होंने करीब ₹5 करोड़ का कर्ज लिया था। लेकिन साल 2012 में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई और यहीं से उनकी आर्थिक परेशानियां बढ़नी शुरू होगई।
समय पर लोन ना चुकाने की वजह से उनकी कंपनी की ओर से जारी किए गए कई चेक बाउंस हो गए। यह मामला अदालत पहुंचा और साल 2018 में कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को चेक बाउंस के मामले में 6 महीने की सजा सुनाई। हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। हालांकि ब्याज, पेनल्टी और समय पर भुगतान ना करने से कुल देनदारी करीब ₹9 करोड़ तक पहुंच गई। अक्टूबर 2025 में राजपाल यादव ने कुछ डिमांड ड्राफ्ट जमा भी कराए लेकिन बकाया ₹9 करोड़ जस का तस रहा क्योंकि राजपाल यादव कर्ज चुकाने में असफल रहे। आपको बता दें जुलाई के महीने में राजपालयादव को दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से 3 महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी। यही नहीं कोर्ट की ओर से राजपाल यादव पर भारीभरकम जुर्माना भी लगाया गया था। दरअसल दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस फंड कांता शर्मा की बेंच ने राजपाल यादव की कईचेक बाउंस मामलों में सजा को बरकरार रखा। ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ उनकी याचिका को खारिज करते हुए यह सुनिश्चित किया गया कि एक्टर को अगले 3 महीने जेल में ही गुजारने होंगे। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने यह आदेश मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दर्ज कराए गए केस के बाद सुनाया। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच की ओर से कहा गया कि राजपाल यादव को कई मौके दिए गए लेकिन उन्होंने अपना वादा नहीं निभाया।
साथ ही सजा बरकरार रखते हुए राजपाल यादव के व्यवहार को संदिग्ध बताया। अधिकारियों से उन्हें वापस जेल भेजने के लिए कहा। मामले में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने कहा राजपाल यादव को अपना वादा निभाने और कंपनी का कर्ज वापस करने के लिए कई मौके दिए गए। लेकिन वह ऐसा करने में नाकाम रहे। इस मामले में एक्टर का रवैया संदिग्ध रहा है। सवालों के जवाब नहीं दिए जा रहे हैं। अंडरटेिंग में जो बात कही गई, अब उससे अलग बातें सामनेरखी जा रही हैं। राजपाल यादव की ओर से दिए गए बयानों में विरोधाभास नजर आया। इसी वजह से इस साल 2 फरवरी को कोर्ट ने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था और अब [संगीत] उनकी सजा को बरकरार रखा जाता है। आपको याद दिला दें कि इस दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को केवल जेल की सजा ही नहीं सुनाई बल्कि उन पर भारीभरकम जुर्माना भी लगाया था। कोर्ट ने चेक बाउंस के कुल सात मामलों में सुनवाई करते हुए हर एक मामले पर 1 करोड़ 5 लाख का जुर्माना ठोका था। तो इन सात मामलों को कुल मिलाकर जुर्माना बना 7 करोड़35 लाख।
अदालत के आदेश के मुताबिक हर मामले में मिलने वाले ₹1 करोड़ 5 लाख में से 1 करोड़475000 [संगीत] शिकायत्तकर्ता कंपनी को दिए जाएंगे। जबकि ₹25,000 राज्य सरकार के खाते में जमा कराने होंगे। यानी कुल रिकवरी कंपनी के लिए होगी 7 करोड़ 333 लाख की सात मामलों में और सरकार को कुल मिलाकर मिलेंगे ₹175,000। अदालत की ओर से कहा गया कि मामले को खत्म करने के लिए हाईकोर्ट ने कई बार दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश भी की। यह भी बताया गया कि कोर्ट के सुझाव पर शिकायतकर्ता कंपनी ₹ करोड़ लेकर मामले का पूरा और अंतिम निपटारा करने के लिए भी तैयार हो गई थी। लेकिन इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए राजपाल यादव ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्हें पहले ही भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। तब राजपाल यादव ने कहा था कि उन्हें अपनी संपत्तितक बेचनी पड़ी और वे काफी रकम चुका चुके हैं। इसके बाद अदालत ने ₹3 करोड़ समय सीमा के अंदर चुकाने का तरीका भी सुझाया था।
हालांकि दोनों पक्ष किसी भी सहमति पर नहीं पहुंच सकी। अब समय के साथ ब्याज और पेनल्टी बढ़ती चली गई और अब बैंक उनकी संपत्तियों की नीलामी की तैयारी कर रहा है। अब सभी की नजर 9 सितंबर पर टिकी है। अगर समय से पहले बैंक के साथ समझौता हो जाता है या अदालत से राहत मिल जाती है तो हो सकता है कि राजपाल यादव की संपत्तियों की नीलामी टल जाए। हालांकि ऐसा नहीं हुआ तो राजपाल यादव की पैतृक संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
अब यह देखना होगा कि राजपाल यादव और उनके वकील क्या इस समस्या का कोई हल निकाल पाएंगे। गौरतलब है पिछली दफा जब राजपाल यादव जेल गए थे तो बॉलीवुड के कई सेलिब्रिटीज ने उनकी मदद का दावा किया था।
इस खबर के पब्लिक होने के बाद अब यह सवाल भी है कि क्या राजपाल यादव की मदद को कोई सामने आता है? क्या राजपाल यादव को कहीं से मदद मिल पाएगी? खैर, यह सारी बातें फिलहाल सवाल ही हैं।