आसपास खड़े चंद लोग और वीडियो कॉल पर इस अंतिम संस्कार को देखती एक महिला सोशल मीडिया पर अब तक आपने यह वीडियो देख लिया होगा खबर भी जान गए होंगे कि वीडियो कॉल पर दिख रही यह महिला उसी इंसान की बेटी है जिसका अंतिम संस्कार हो रहा है जिसने वृद्धाश्रम में रहने वाले पिता की अंतिम यात्रा में शामिल होने के बजाय कह दिया पैसे भेज रही हूं अंतिम संस्कार करके वीडियो भेज देना लेकिन इस पूरी खबर के पीछे एक कहानी है।
कहानी एक व्यापारी की। यह तस्वीर है मुंबई में कपड़ा व्यापारी रहे शिवचरण राम रत्न गुप्ता की। जीवन के 74 बसंत देखने के बाद इन्होंने अपना देह त्याग दिया। हरियाणा के सोनीपत के एक वृद्धा आश्रम में उनकी मौत हुई। 3 साल पहले ही शिव चरण अपनी पत्नी के साथ इस आश्रम में आए थे। लेकिन आश्रम में एक साल बिताने के बाद ही उनकी पत्नी की मौत हो गई थी। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई में कभी शिवचरण राम रत्न गुप्ता का नाम कपड़ों के बड़े व्यापारियों में गिना जाता था।
परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं। शिवचरण और उनकी पत्नी ने बेटियों को बेटों की तरह पाला। अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा उनकी पढ़ाई पर खर्च किया। उन्हें ग्रेजुएशन तक पढ़ाया और फिर धूमधाम से उनकी शादी कर दी। समय के साथ व्यापार में भारी नुकसान होता गया और शिव शरण आर्थिक संकट में घिर गए। हालात लगातार बिगड़ते गए। आर्थिक तंगी और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण शिव चरण और उनकी पत्नी महाराष्ट्र छोड़कर सोनीपत आ गए।
यहां एक वृद्धा आश्रम में उन्होंने पनाह ली। आश्रम आने के करीब एक साल के बाद उनकी पत्नी का निधन हो गया। पत्नी की के बाद शिव चरण और भी अकेले पड़ गए। बाद में उनका मन वहां लगा नहीं तो वह रामनगर के समाज कल्याण शिक्षा समिति के आश्रम में रहने चले गए। करीब दो दर्जन बुजुर्गों के बीच आश्रम संचालक आनंद कुमार ने बताया कि शिवचरण समय-समय पर अपनी बेटियों से फोन पर बात किया करते थे।
करीब 15 दिन पहले उनके पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई थी। उन्हें सिविल अस्पताल ले जाया गया। जहां जांच में पेट में इंफेक्शन मिला। इलाज के बाद उनकी तबीयत में कुछ सुधार हुआ। लेकिन 2 अगस्त को उन्हें फिर से गैस की समस्या उठी। डॉक्टरों ने दवा देकर उन्हें घर भेज दिया। 3 अगस्त की रात उन्होंने अच्छे से खाना खाया और अपने कमरे में सोने चले गए। 4 अगस्त की सुबह करीब 3:30 बजे जब आश्रम केयरटेकर शिव कुमार उन्हें देखने पहुंचे तो वह अचेत अवस्था में मिले।
जांच की तो पता चला कि उनकी मौत हो चुकी है। आश्रम के मैनेजर आनंद कुमार ने शिव शरण की मौत की खबर उनकी बेटियों को दी। सबसे छोटी बेटी जो मुंबई में रहती है उसे फोन मिलाया। आनंद को लगा कि पिता की खबर सुनते ही बेटियां रो पड़ेंगी और दौड़ी चली आएंगी।
मगर तीनों बेटियों में से किसी ने भी आने की इच्छा तक नहीं जताई। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक शिव चरण की बड़ी बेटी नेपाल में रहती हैं। उन्होंने कॉल पर कहा, बहुत दूर हूं आना संभव नहीं। यूपी के आजमगढ़ में रहने वाली मजली बेटी ने कहा, “मैं नहीं पहुंच सकती।” मुंबई में रहने वाली छोटी बेटी ने तो सबसे शॉकिंग जवाब दिया। बोली, हम इतनी जल्दी नहीं आ सकते। आप फोन पर ही अंतिम संस्कार दिखा दीजिए।
जनसत्ता की रिपोर्ट में वृद्धाश्रम के अधिकारियों के हवाले लिखा गया कि लंबे वक्त से बीमार चल रहे शिव चरण अपनी बेटियों से मिलना चाहते थे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। बेटियों से मिलने की उम्मीद में ही उनकी मौत हो गई। दैनिक भास्कर और जनसत्ता की रिपोर्ट बताती है कि शिवचरण की बेटियों ने अंतिम संस्कार में शामिल होने के बजाय खर्च के लिए ₹5100 भेजे और कहा कि वहीं सोनीपत में उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाए और इसकी वीडियो बनाकर उन्हें भेज दी जाए।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक जब मुखाग्नि देने की बात हुई तो बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए पूरी प्रक्रिया दिखाने को कह दिया। बिना किसी परिवार वालों के स्थानीय समुदाय के लोगों ने और वृद्धाश्रम के सदस्यों ने मिलकर शिव चरण का अंतिम संस्कार किया। आश्रम के मैनेजर आनंद कुमार के मुताबिक अंतिम संस्कार के दौरान भी बेटी फोन पर लगातार जानकारी ही लेती रही। उन्होंने बताया कि जब चिता को मुखाग्नि दी गई तब छोटी बेटी ने सवाल पूछा। अभी और कितना समय लगेगा? इस पर उसे बताया गया कि मुखाग्नि दी जा चुकी है। 10-15 मिनट में पूरी प्रक्रिया हो जाएगी। इसके बाद बेटी का जवाब आता है सारा काम अच्छे से हो गया ना? मुझे सारी वीडियो भेज दीजिएगा। संस्कार के पूरे होने के बाद मैनेजर आनंद ने बेटियों से कहा कि 20 तारीख से पहले आकर वह पिता की अस्थियां ले जाए।
इस पर मुंबई में रहने वाली उनकी सबसे छोटी बेटी का जवाब आता है। देखते हैं। दैनिक भास्कर ने शिव चरण की छोटी बेटी से बात की। रिपोर्ट के मुताबिक बातचीत के दौरान बेटी के जवाब में पछतावे की जगह एक अजीब सी ठंडक नजर आई। शिवचरण की पर उन्होंने कहा पापा का बिजनेस डूब गया था। हम बहुत गरीब हो गए थे। आज दुख का दिन है कि पापा नहीं रहे। 2 साल पहले मां भी चली गई थी।
दैनिक भास्कर की टीम ने सवाल पूछा कि आप अस्थियां चुनकर गंगा में प्रवाहित करने तो आएंगी ना। इस पर बेटी का जवाब आया अब तो पिताजी दुनिया में ही नहीं रहे तो अब आकर क्या करेंगे? अब कुछ भी बचा नहीं है। धन भास्कर की रिपोर्ट में ही उन लोगों का बयान मिलता है जिन्होंने शिव चरण का अंतिम संस्कार किया। समाजसेवी मंजीत तिहाड़ा ने कहा आज समाज किस दिशा में जा रहा है यह सोचकर ही रूह कांप जाती है। औलादें अपने जन्मदाता के प्रति इतनी निष्ठुर कैसे हो सकती हैं।
जो मां-बाप बच्चों को पालने में अपनी पूरी जिंदगी लगा देते हैं। उन्हें अंतिम विदाई देने भी कोई ना आए। यह पूरे समाज के माथे पर कलंक जैसा है। बहरहाल, इस वीडियो को लेकर के सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।