स्वर कोकिला लता मंगेशकर पर अनेक किताबें लिखी गई हैं। लेकिन हाल ही में प्रकाशन विभाग भारत सरकार द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में लता मंगेशकर के जीवन के अनेक अनछुए पहलुओं पर रोशनी डाली गई है। पुस्तक के माध्यम से लता मंगेशकर ना केवल एक गायिका बल्कि एक महान शख्सियत के तौर पर हमारे सामने आती हैं। आइए जानते हैं इस पुस्तक की कुछ बड़ी बातें। दोस्तों वीडियो में आगे बढ़ने से पहले प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन को जरूर प्रेस कर दीजिएगा। तो चलिए दोस्तों वीडियो को शुरू करते हैं। भारत रत्न और स्वर कोकिला नाम से मशहूर पासर्व गायिका लता मंगेशकर की शख्सियत से हर कोई परिचित है। लता के जीवन की कहानियां लता की गायकी के किस्से अनेकानेक बार लिखे और सुने सुनाए गए हैं। भारत की विभिन्न भाषाओं में उनकी उपलब्धियों पर कई किताबें भी लिखी गई हैं।
इसके बावजूद यह दावे के साथ कहा जा सकता है कि उस महान गायिका के बारे में बहुत कुछ लिखा जाना अभी बाकी है। मसलन लता मंगेशकर गीत संगीत के अलावा कला के विविध क्षेत्रों के बारे में क्या सोचती थी या गायकी के इत दूसरी फील्ड के दिग्गजों ने लता मंगेशकर के बारे में क्या-क्या कहा है। यह जानना भी उतना ही अनोखा है जितना कि उनके सुर और शख्सियत के बारे में। इस दृष्टिकोण से हालिया प्रकाशित पुस्तक लता मंगेशकर गायकी की गंगा लता के जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डालती है। इस पुस्तक के लेखक हैं इंद्रजीत सिंह। पुस्तक को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के प्रकाशन विभाग से प्रकाशित किया गया है। देहरादून के रहने वाले इंद्रजीत सिंह गीत संगीत समीक्षक और फिल्म इतिहासकार हैं। उन्होंने इससे पहले गीतकार शैलेंद्र की जीवनी भी लिखी थी। लता मंगेशकर गायकी की गंगा गीत संगीत और फिल्म इतिहास के अध्यताओं के लिए एक उपयोगी पुस्तक है ना केवल सिनेमा के शौकीनों के लिए बल्कि उनके लिए भी जो इस क्षेत्र में विशेष अध्ययन करने वाले सुधार्थी हैं। पुस्तक की भूमिका जाने-माने गीतकार इरशाद कामिल ने लिखी है। उन्होंने लिखा है किसी ने कहा लता मंगेशकर जादू है। किसी ने कहा तिलिसम है।
किसी ने कहा स्वर कोकिला है। किसी ने कहा स्वर साधिका कोई साक्षात सरस्वती मानने लगा। कोई शाम की ठंडक कहने लगा। कोई सुबह की धूप। मैंने बिना किसी किंतु परंतु के अच्छे बच्चे की तरह सबकी बात मान ली। चुपचाप गाने सुनता रहा और सपने बुनता रहा। वाकई लता को सुनने के बाद हर कोई सुनहरे सपने में खो जाता है। लता की गायकी ने लोगों के सपने सजाए हैं। जीने का सलीका भी सिखाया है। बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि लता मंगेशकर का क्रिकेट प्रेम जबरदस्त था। पुस्तक में बताया गया है कि सुनील गावस्कर, कपिल देव, सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली के खेल कौशल से लता जी को विशेष प्रेम था। वह बहुत ही रुचि के साथ क्रिकेट मैच देखा करती थी। सचिन तेंदुलकर को तो वह अपने बेटे समान मानती थी। सचिन भी उन्हें अपनी मां समान स्नेह करते थे। सचिन तेंदुलकर को लता जी का गाया गाना तू जहांजहां चलेगा मेरा साया साथ होगा। विशेष तौर पर पसंद था। जब भी ऐसा कोई मैच होता जिसमें सचिन तेंदुलकर खेल रहे होते थे तो लता उस दिन अपनी रिकॉर्डिंग कैंसिल कर देती थी। सचिन जब शतक लगाते तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता था।
जब कम रन बनाकर आउट हो जाते तो लता मंगेशकर बहुत उदास हो जातीं। करोड़ों भारतीयों की तरह लता जी को भी भारत-पाकिस्तान का मैच बहुत रोमांचक लगता था। गीत गायन के सारे कार्यक्रम रद्द करके भारतपाक के मैच दिन भर देखा करती थी। उस मैच में अगर सचिन तेंदुलकर खेल रहे हो तो वह और भी ज्यादा उत्साहित रहती थी। ऐसे तमाम रोचक प्रसंगों से यह किताब भरी पड़ी है। इसी तरह पुस्तक में हरीश भीमानी और यतिंदर मिश्र के जरिए भी कई अनोखे प्रसंग आए हैं। हरीश भीमानी जानेमाने उद्घोषक और साहित्यकार हैं। उन्होंने भी एक किताब लिखी थी। लता दीदी अजीब दास्ता हैं यह। इस पुस्तक में उनके माध्यम से लता जी की कई स्टेज परफॉर्मेंस के रोचक संस्मरण दर्ज हैं। 80 के दशक में कई लाइव कंसर्ट में लता जी की गायकी और उस दौरान उमड़ी भीड़ आदि की अनोखी दास्तान हैं। हरीश भिमानी के शब्द हैं। मेरा व्यक्तिगत विचार है कि लता जी संगीत को पूजा का दर्जा देती हैं। रिकॉर्डिंग या स्टेज कार्यक्रमों में उनका चप्पल उतार कर गाना बहुत प्रचलित है। अगर कोई उनके समान संगीत को इतना सम्मान ना देता दिखता तो वह परेशान हो जाती और उस रास्ते से कतराती। इसी तरह लता सुरगाथा के लेखक और संगीत इतिहासकार यतिंद्र मिश्र सुर साम्राज्ञ के बारे में एक अनोखा तथ्य उजागर करते हैं। वह कहते हैं, लता जी को अपने लोकप्रिय गीत कम ही पसंद थे।
उन्हें अपने गाय ऑफ बीट गाने ज्यादा पसंद थे। शैलेंद्र साहिर गुलजार के गाने को वह बहुत पसंद करती थी। भजन गाना उन्हें बहुत अच्छा लगता था। उनका साहित्य प्रेम भी उतना ही अनूठा था। हिंदी, मराठी कवियों, गीतकारों को वह खूब पसंद करती थी। उनके लिखी रचनाएं जो संगीतबद्ध हैं, उन्हें वह बड़ी श्रद्धा से सुनती थी। इस किताब की और भी खासियतें हैं। जानीमानी शख्सियतों के संग लता मंगेशकर की रंगीन तस्वीरों के साथ करीब 200 पृष्ठों की इस पुस्तक की छपाई बहुत ही आकर्षक है। अगर आप इस किताब को पढ़ने के इच्छुक हैं और मंगवाना चाहते हैं तो प्रकाशन विभाग के पुस्तक विक्रय केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। तो दोस्तों, आज का यह वीडियो यहीं समाप्त करते हैं। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए आप सभी को टाटा बाय-ब टेक केयर।