80 के दशक के हिंदी फिल्मों के जानेमाने एक्टर जिनकी भोलीभाली सूरत और सौम्य अंदाज ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर लिया। इनकी मुस्कान इतनी कातिलाना थी कि लड़कियां उन पर मर मिटा करती थी और इनकी आंखें इतनी गहरी थी कि हर एक्ट्रेस इनकी गहराई में डूब जाया करती थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह अपनी फिल्मों से ज्यादा अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में रहे और एक विवादित शख्सियत के तौर पर जाने गए और क्या आप मानेंगे कि अपनी पहली पत्नी को धोखा देकर चोरी छुपे इन्होंने एक एक्ट्रेस से शादी रचा ली और फिर कुछ ऐसा हुआ कि वो अदाकारा इन्हें छोड़कर एक डायरेक्टर के साथ भाग निकली और तो और क्या आप यकीन करेंगे कि इनके चार ने इस कदर जादू बिखेरा कि दो शादियां करने के बावजूद भी इनसे भी ज्यादा मशहूर एक्ट्रेस रेखा इन पर फिदा हो गई और इनसे शादी कर ली। और जब यह अपनी दुल्हन रेखा को घर लेकर आए तो इनकी मां ने रेखा का स्वागत चप्पलों से किया था। और फिर मां के दबाव में आकर इन्होंने कुछ समय बाद रेखा से रिश्ता तोड़ लिया और चौथी शादी कर ली। तो आखिर कौन थे यह कंट्रोवर्शियल एक्टर? और क्यों 45 की उम्र में ही इनका निधन हो गया और आज किस हाल में हैं इनकी ढेर सारी पत्नियां और बच्चे? बताएंगे यह सब कुछ। आप बस बने रहिए हमारे साथ हमारे चैनल वारिधी मंथन पर। आज की इस वीडियो में हम बात कर रहे हैं 70 और 80 के दौर के फेमस एक्टर विनोद मेहरा की जिन्होंने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट हिंदी सिनेमा में अपनी शुरुआत की और बड़े होने के बाद फिर से एक धमाकेदार एंट्री की। इससे पहले कि इनकी फिल्मोग्राफी और निजी जिंदगी के विवादों पर नजर डालें। सबसे पहले जानते हैं कि आखिर कौन थे विनोद मेहरा और कैसे मिली इन्हें फिल्मों में एंट्री। 13 फरवरी 1945 को पंजाब के अमृतसर में जन्मे विनोद मेहरा का शुरुआती जीवन साधारण रहा। इनके पिता परमेश्वरी दास मेहरा और मां कमला मेहरा स्वतंत्रता के बाद मुंबई शिफ्ट हो गए। इसका फायदा विनोद मेहरा की बड़ी बहन शारदा मेहरा को हुआ जो कि एक एक्ट्रेस बनना चाहती थी। उन्होंने बतौर सपोर्टिंग एक्ट्रेस कई फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। विनोद मेहरा की स्कूलिंग मुंबई के सेक्रेट हार्ट बॉयज स्कूल सांता क्रूज से हुई
और बाद में इन्होंने सेंट जेवियस कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। अपनी बहन शारदा के फिल्मी सफर के कारण विनोद को भी महज 12 साल की उम्र में ही फिल्म शारदा में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम करने का मौका मिला और अपने सहज और मासूम अभिनय से इन्होंने दर्शकों का दिल भी जीत लिया। इसके बाद तो इन्होंने कई फिल्मों में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया। लेकिन इनका दिल एक्टर बनने के लिए कभी भी तैयार नहीं था। स्कूल का सबसे ज्यादा होनहार बच्चा होने के बावजूद भी यह कभी एक्टर नहीं बनना चाहते थे। चाइल्ड आर्टिस्ट का काम करते-करते कुछ समय बाद विनोद बड़े हो गए और इसके बाद इन्होंने फिल्मी दुनिया छोड़ दी। 1965 का समय था जब विनोद एक प्राइवेट कंपनी में मार्केटिंग की जॉब कर रहे थे। तभी इनके दोस्तों ने इन्हें ऑल इंडिया टैलेंट कॉन्टेस्ट के बारे में बताया। जिसमें विनोद मेहरा ने अपने दोस्तों को खुश करने के लिए और अपने दोस्तों का दिल रखने के लिए पार्टिसिपेट भी कर लिया। यह कॉन्टेस्ट नई प्रतिभाओं को फिल्म और मॉडलिंग की दुनिया में लाने का सुनहरा अवसर देती थी। हालांकि विनोद ने इस कॉन्टेस्ट में सिर्फ दोस्तों के कहने पर भाग लिया लेकिन इनके लुक्स और टैलेंट ने इन्हें फाइनल तक पहुंचा दिया। फाइनल में यह सेकंड पोजीशन पर रहे क्योंकि इस कंपटीशन के विनर हुए थे राजेश खन्ना जो बाद में भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार बने। इस कंपटीशन में सेकंड आने के बावजूद विनोद को पॉपुलैरिटी मिलने लगी। फिल्मी मैगजीनंस में इनकी तस्वीरें छपने लगी। इन्हें तुरंत कोई बड़ा मौका तो नहीं मिला लेकिन इस दौरान यह मुंबई के चर्च गेट इलाके में स्थित गिलार्ड रेस्टोरेंट में स्ट्रगल किया करते थे जो स्ट्रगलर्स का एक ठिकाना हुआ करता था। यहीं इनकी मुलाकात फिल्म निर्देशक रूप किशोरी से हुई। रोप किशोरी ऑल इंडिया टैलेंट कंटेस्ट में पहले ही विनोद को देखकर इनसे प्रभावित थे। तो उन्होंने विनोद को अपनी अगली फिल्म एक थी रीटा में बतौर लीड एक्टर कास्ट कर लिया। 1971 में रिलीज हुई इस फिल्म में तनुजा इनके साथ एक्ट्रेस के रूप में काम कर रही थी। यह फिल्म आते ही बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई और लीड एक्टर के तौर पर अपनी पहली फिल्म में विनोद मेहरा ने दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बना ली। एक थी रीटा के बाद विनोद ने कई फिल्मों में काम किया। 1972 में आई शक्ति सामंत की फिल्म अनुराग ने इनके करियर को नई ऊंचाई दी। इस फिल्म में इनकी जोड़ी मौसमी चटर्जी के साथ नजर आई और दोनों ने अपनी शानदार केमिस्ट्री से दर्शकों का फिर से दिल जीत लिया। इसके बाद इन्होंने मौसमी के साथ दो फिल्मों में काम किया। झूठ और स्वर्ग नर्क। यह फिल्में भी ऑडियंस को काफी ज्यादा पसंद आई थी। हालांकि विनोद मेहरा का अभिनय बेहतरीन था। इन्हें बहुत सारे लोग पसंद करते थे। लेकिन फिर भी ना जाने क्यों इन्हें कई डायरेक्टर्स लीड रोल देने की बजाय सपोर्टिंग रोल्स में साइन किया करते थे। 80 के दशक में विनोद मेहरा को कई दमदार फिल्में और रोल मिले। लेकिन इन फिल्मों की लाइमलाइट इनके को एक्टर्स ले जाया करते थे।
कर्तव्य की सक्सेस का क्रेडिट धर्मेंद्र और रेखा को मिला। खुददार के लिए अमिताभ बच्चन ने सारी लाइमलाइट बटोर ली और लाल पत्थर की कामयाबी राजकुमार और हेमा मालिनी के खाते में गई। द बर्निंग ट्रेन बेमिसाल और जानी दुश्मन जैसी फिल्मों ने विनोद मेहरा को एक खास मुकाम दिलाया। मल्टीस्टारर फिल्मों के दौर में जहां राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना जैसे दिग्गज छाए हुए थे। वहीं विनोद मेहरा को अक्सर लीड रोल करने के लिए अब सिर्फ बी ग्रेड फिल्मों का ही रुख करना पड़ता था। इसके बावजूद विनोद मेहरा ने अपने अभिनय से अपनी एक अलग पहचान बनाई और अपने चाहने वालों के दिलों में हमेशा के लिए जगह बना ली। वहीं दूसरी तरफ विनोद के करियर में थोड़ी शोहरत आते ही इनकी मां ने इनकी शादी की चिंता शुरू कर दी। क्योंकि विनोद अपनी मां के बेहद करीब थे तो इन्होंने मां की पसंद की लड़की मीना ब्रोका से शादी भी कर ली। शादी के बाद सब कुछ नॉर्मल चल रहा था। लेकिन फिल्मों में काम करने के दौरान मुलाकात हुई एक्ट्रेस बिया गोस्वामी से। फिल्मों में साथ काम करते-करते विनोद का दिल बिया पर पूरी तरह से आ गया। शादीशुदा होने के बावजूद विनोद बिया के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में शामिल हो गए। वहीं बिया को भी इससे कोई खास आपत्ति नहीं थी। यह किसी शादीशुदा के साथ दूसरी औरत बनकर उनके घर पर रहने को तैयार थी। जल्द ही इन दोनों का रिश्ता फिल्म इंडस्ट्री में गॉसिप का हॉट विषय बन गया। फिर 1980 में खबर आई कि विनोद और बिया ने चोरी-छुपे शादी भी कर ली है और अक्सर होटलों या शूटिंग के बहाने साथ रहने लगे। यह खबर आग की तरह फैली और विनोद की पहली पत्नी मीना ब्रोका तक भी पहुंच गई। परिवार में हंगामा हो गया। रिपोर्टर्स के मुताबिक मीना के भाइयों ने बिया को धमकाया और विनोद पर दबाव बनाया कि बिया से यह रिश्ता पूरी तरह से खत्म कर ले। इन धमकियों से बिया गोस्वामी डर गई और छुप कर रहने लगी। इसी दौरान बिया की जिंदगी में डायरेक्टर जेपी दत्ता आ गए। जेपी के साथ बिया की नजदीकियां बढ़ने लगी और धमकियों से परेशान बिया अब जेपी दत्ता को ही डेट करने लगी। जब यह बात विनोद तक पहुंची तो यह बुरी तरह से हिल गए। उन्हें उम्मीद थी कि यह मीना को तलाक देकर बिया के साथ जिंदगी बिताएंगे। लेकिन अब बिया गोस्वामी किसी और के साथ भाग चुकी थी। इसके बाद विनोद ने बिया से मिलने की बहुत कोशिश की और उनसे गुजारिश की कि वह उनकी जिंदगी में वापस लौट आए। लेकिन बिया गोस्वामी ने साफ इंकार कर दिया। बिया ने विनोद को छोड़ने का फैसला किया क्योंकि वह केवल उनके ससुराल वालों की धमकियों से ही परेशान नहीं थी बल्कि इस वजह से उनका करियर भी डगमगाने लगा था। गौर करने वाली बात यह है कि जिस तरह विनोद ने अपनी पत्नी मीना ब्रोका को धोखा दिया था। ठीक उसी तरह बिया गोस्वामी ने उन्हें जेपी दत्ता के लिए छोड़ दिया। 4 साल तक चला यह रिश्ता 1984 में खत्म हो गया और विनोद और बिया अलग हो गए। बंधिया के जाने के बाद विनोद मेहरा काफी समय तक अकेले रहे क्योंकि तब मीना ब्रोका ने भी इनके दिल फेक अंदाज से ऊबकर इन्हें छोड़ दिया था। वहीं इनके कुछ समय बाद फिल्मों में साथ काम करने वाली एक्ट्रेस रेखा से नजदीकियां बढ़ गई।
विनोद मेहरा और रेखा की नजदीकियों की खबरें भी अब सामने आने लगी थी। फेमस फिल्म समीक्षक यासिर उस्मान की किताब रेखा द अनटोल्ड स्टोरी के मुताबिक कुछ दिनों की डेटिंग के बाद विनोद और रेखा ने कोलकाता में गुपचुप तरीके से शादी रचा ली। लेकिन जब विनोद मेहरा रेखा को लेकर अपने घर पहुंचे तो वहां कुछ ऐसा हुआ जिसके लिए विनोद या रेखा कभी भी कल्पना भी नहीं कर सकते थे। दरअसल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विनोद की मां ने रेखा को घर में घुसने से रोक दिया और कथित तौर पर गुस्से में रेखा की चप्पल से पिटाई कर डाली। हालांकि इन घटनाओं की पुष्टि कभी नहीं हो सकी क्योंकि रेखा ने पब्लिकली इन मामलों पर चुप्पी बनाए रखी। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि विनोद मेहरा अपनी मां के सामने खामोश रहे। रेखा को अपमानित होते देखकर उन्होंने कुछ भी नहीं कहा। एक नवविवाहिता के लिए यह स्थिति बेहद शर्मनाक थी। अंततः रेखा को घर छोड़कर एक होटल में रात बितानी पड़ी। फिल्मी मैगजींस ने तब यह खबरें छापी कि विनोद की मां कमला मेहरा ने रेखा को स्वीकारने से साफ इंकार कर दिया है। रेखा के पास्ट अफेयर्स और उनके मां-बाप की नाजायज बेटी होने के कारण कमला मेहरा को रेखा के साथ अपने बेटे का यह रिश्ता मंजूर नहीं था। लोगों के मन में यह सवाल था कि जब विनोद को अपनी मां का विरोध का अंदाजा था और यह अपनी पत्नी के लिए स्टैंड नहीं ले सकते थे, तो इन्होंने यह शादी की ही क्यों? इस घटना के बाद रेखा का रिश्तों और शादी को लेकर नजरिया पूरी तरह से बदल गया। रेखा ने हमेशा मीडिया के सामने इस शादी से इंकार किया। हालांकि 1986 में एक फिल्मी मैगजीन ने इनकी शादी का सर्टिफिकेट छाप दिया। जिसके बाद रेखा ने इसे फर्जी बताया। बाद में एक इंटरव्यू में रेखा ने इस शादी को महज अफवाह करार देते हुए विनोद मेहरा को सिर्फ एक शुभचिंतक बताया। इतना ही नहीं इसके बाद भी विनोद नहीं रुके। रेखा से अलग होने के बाद विनोद मेहरा ने 1988 में किरण नाम की एक महिला से शादी की। यह शादी विवादों से दूर रही लेकिन लंबी नहीं चल सकी। इस शादी से इनके दो बच्चे हुए। बेटा रोहन और बेटी सोनिया। दुर्भाग्यवश विनोद अपने बच्चों को बड़ा होते हुए नहीं देख सके। इनका फिल्मी करियर ढलान पर था और लीड या सेकंड लीड रोल मिलना लगभग बंद हो गया था। हालांकि एक्टिंग में लिमिटेड अपॉर्चुनिटी मिलने पर इन्होंने डायरेक्शन में भी हाथ आजमाया। विनोद ने ऋषि कपूर, अनिल कपूर और श्रीदेवी के साथ फिल्म गुरुदेव बनाई। हालांकि इन बड़े स्टार्स के बिजी शेड्यूल के कारण फिल्म को पूरा करने में काफी समय लगा। इस देरी और फिल्म को पूरा करने के प्रेशर से विनोद को गहरी चिंता होने लगी और फिल्म की रिलीज से पहले ही इन्हें दिल का दौरा पड़ गया
और महज 45 की उम्र में साल 1990 में इनका निधन हो गया। विनोद मेहरा का फिल्मी सफर एक एक्टर के तौर पर अधूरा ही रह गया। 1977 में आई अनुरोध, 1979 में आई अमरदीप और 1982 में आई बेमिसाल जैसी फिल्मों के लिए इन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए नॉमिनेट भी किया गया। लेकिन कोई अवार्ड नहीं मिल सका। इनकी आखिरी फिल्म 1993 में आई गुरुदेव जो इनके मरणोपरांत रिलीज हुई। लेकिन यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप ही साबित हुई। वहीं इनकी फैमिली की बात करें तो विनोद मेहरा के दो बच्चे रहे। रोहन और सोनिया। इनकी पत्नी किरण ने इनके निधन के बाद बच्चों की परवरिश की और इन्हें लाइमलाइट से दूर रखा। हालांकि बड़े होने के बाद रोहन और सोनिया दोनों ने ही फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाई लेकिन इन्हें अपने पिता जैसी सफलता नहीं मिली। बताया जाता है कि सोनिया का बचपन अपने नाना-नानी के साथ केन्या में बीता और उन्होंने लंदन में अपनी पढ़ाई पूरी की। 18 साल की होने पर वह मुंबई लौट आई और अनुपम खेर की एक्टिंग क्लासेस में ट्रेनिंग भी ली। साल 2007 में इन्होंने फिल्म विक्टोरिया 203 में बॉलीवुड में डेब्यू किया। हालांकि यह फिल्म फ्लॉप हो गई। इसके बाद इन्हें फिल्म शैडो एक में और एक तू और रागिनी एमएमएस 2 जैसी फिल्मों में देखा गया। लेकिन इन फिल्मों से भी सोनिया को कुछ खास पहचान नहीं मिल सकी। इसके बाद सोनिया ने बतौर एमT वीजे कुछ शोज़ भी होस्ट किए। लेकिन वहां भी उन्हें सफलता नहीं मिल सकी।
बताया जाता है कि इसके बाद सोनिया दुबई शिफ्ट हो गई और वहां एक योगा इंस्ट्रक्टर के तौर पर अपने करियर को आगे बढ़ाया। फिर वहां के एक बिजनेसमैन कुणाल सिंह के साथ सगाई कर दुबई में ही सेटल हो गई। वहीं विनोद के बेटे रोहन ने भी बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने के लिए हाथ-पांव मारे। साल 2000 से ले साल 2015 में आई फिल्म बाजीराव मस्तानी में इन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया। इसके बाद इन्हें सैफ अली खान की फिल्म बाजार में बतौर एक्टर काम करने का मौका मिला। हालांकि यह फिल्म फ्लॉप हो गई और रोहन को इस फिल्म में कुछ खास पहचान नहीं मिल सकी। इसके बाद रोहन को 420 आईपीसी 4, मोर शॉट्स, प्लीज, कला और अद्भुत जैसी ओटीटी फिल्मों और वेब सीरीज में देखा गया। जिनमें ज्यादातर छोटे या साइड रोल्स में नजर आए। बताया जाता है कि रोहन एक्ट्रेस तारा सुतारिया के एक्स बॉयफ्रेंड रह चुके हैं। जिन्होंने रोहन से फिल्म स्टूडेंट ऑफ ईयर में काम किया था। इसके बाद इन दोनों का ब्रेकअप हो गया।
खैर भले ही रोहन और सोनिया को फिल्मों में अपने पिता जैसी सफलता नहीं मिल सकी लेकिन दोनों ने हार नहीं मानी और अपनी लाइफ में आगे बढ़ रहे हैं। आज विनोद मेहरा को उनके प्रशंसक एक एक्टर के रूप में याद करते हैं जिनके अभिनय में सादगी और गहराई थी। इनका फिल्मी सफर भले ही अधूरा रहा लेकिन इनकी मुस्कान सौम्य व्यक्तित्व सभी लोगों के दिलों में हमेशा बसा रहेगा। वारिधि मंथन चैनल इनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता है। दोस्तों, आपको विनोद मेहरा की कोई फिल्म या इन पर फिल्माया कोई गाना याद हो या पसंद हो, तो हमें कमेंट्स में जरूर बताइएगा। अगर यह जानकारी पसंद आई हो, तो इस वीडियो को लाइक करिएगा और अगर आप हमारे चैनल वारधी मंथन पर नए हैं तो इसे सब्सक्राइब करके बेल आइकन दबाना बिल्कुल मत भूलिएगा। वीडियो में अब तक बने रहने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।