बॉम्बे हाई कोर्ट ने मीडिया संगठनों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों को बांद्रा स्थित ‘आशीर्वाद’ बंगले को, जो कभी दिवंगत बॉलीवुड सुपरस्टार राजेश खन्ना का था , “शापित”, “भूतिया” या “अशुभ” बताने से रोक दिया है।न्यायमूर्ति आरिफ एस डॉक्टर ने 24 जुलाई को पारित एक अंतरिम आदेश में कहा कि इस तरह के विवरण प्रथम दृष्टया मानहानिकारक हैं और वादी के शांतिपूर्वक और गरिमापूर्ण जीवन जीने के मौलिक
अधिकार का उल्लंघन करते हैं।कुछ साल पहले इस मशहूर बंगले को खरीदने वाले व्यवसायी शशि शेट्टी ने इंटरनेट पर कई लेख, पोस्ट और वीडियो देखने के बाद अदालत का रुख किया, जिनमें इस संपत्ति को “भूतिया”, “शापित” और “अपमानजनक” बताया गया था।शेट्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने अदालत को बताया कि उन्होंने पुराने बंगले को गिराकर नया घर बनवाया, लेकिन उसका नाम नहीं बदला। वकील ने बताया कि नए घर का नाम भी ‘आशीर्वाद’ है।
न्यायाधीश ने माना कि मालिक द्वारा अंतरिम राहत की मांग करना “पूरी तरह से उचित” था। आदेश में कहागया, “मेरी प्रथम दृष्टया राय में, प्रस्तुत सामग्री स्पष्ट रूप से वादी की मानहानि करती है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह एक प्रेतवाधित और तथाकथित शापित बंगले में रहता है।”
इसके अलावा, उच्च न्यायालय ने कहा कि इससे शेट्टी परिवार के “शांतिपूर्वक और गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार” पर भी स्पष्ट रूप से अतिक्रमण होगा।न्यायाधीश ने यह भी कहा कि प्रतिवादियों में से कोई भी अपने प्रकाशनों को सही ठहराने या उनका बचाव करने के लिए अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ।अदालत ने फैसला सुनाया, “इसलिए, मेरी प्रथम दृष्टया राय में, ऐसे प्रकाशन पूरी तरह से अनुचित और सनसनीखेज बनाने के उद्देश्य से किए गए हैं, जिनका खामियाजा वादी को भुगतना पड़ा है और इसमें वादी की कोई गलती नहीं है।”अंतरिम राहत 21 अगस्त, 2026 को अगली सुनवाई तक जारी रहेगी।