नमस्कार दोस्तों, मैं प्रिया स्वागत है आपका एक बार फिर से हमारे YouTube चैनल पर। दोस्तों, हिंदी सिनेमा के इतिहास में ऐसे कई कलाकार हुए जिन्होंने दशकों तक भारतीय फिल्मों में काम किया। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वे भारतीय मूल के नहीं थे। इनमें कुछ ऐसे नाम भी हैं जिन्हें दर्शक आज तक भारतीय ही समझते हैं। किसी का जन्म बर्मा में हुआ, कोई ऑस्ट्रेलिया से आया, कोई मिस्र से। तो किसी की जड़े अमेरिका और यूरोप से जुड़ी थी। आज की इस वीडियो में हम बात करेंगे बॉलीवुड के उन विदेशी मूल के कलाकारों की जिन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। सबसे पहले बात करते हैं
हिंदी फिल्मों की सबसे मशहूर डांसर और वैंप हेलेन की। हेलेन एन रिचर्डसन का जन्म 21 नवंबर 1938 को बर्मा यानी आज के म्यांमार में हुआ था। उनके पिता अंग्रेज थे और मां बर्मी मूल की थी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनका परिवार भारी मुश्किलों से गुजरते हुए भारत पहुंचा। गरीबी इतनी थी कि परिवार के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया। ऐसे समय में छोटी सी उम्र में ही हेलेन ने फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। शुरुआत में वे बैकग्राउंड डांसर थी। लेकिन धीरे-धीरे उनका टैलेंट लोगों की नजर में आने लगा। फिर एक ऐसा दौर आया जब हेललेन का नाम ही किसी फिल्म की सफलता की गारंटी माना जाने लगा। पिया तू अब तो आजा महबूबा महबूबा और यह मेरा दिल जैसे गीत आज भी उनकी पहचान है।
विदेशी मूल की होने के बावजूद उन्होंने भारतीय दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए जगह बना ली। अब बात करते हैं एक ऐसे अभिनेता की जिन्हें अक्सर अंग्रेज अफसर या विदेशी किरदारों में देखा गया। टॉम ऑल्टर टॉम ऑल्टर का परिवार मूल रूप से अमेरिका से था। उनके दादा-दादी मिशनरी के रूप में भारत आए थे। हालांकि टॉम का जन्म भारत में हुआ लेकिन उनकी पारिवारिक जड़े पूरी तरह अमेरिकी थीं। दिलचस्प बात यह है कि विदेशी मूल के होने के बावजूद टॉम ऑल्टर हिंदी और उर्दू बहुत अच्छी बोलते थे। उन्होंने शतरंज के खिलाड़ी क्रांति, जुनून और कई अन्य फिल्मों में शानदार अभिनय किया।
उनके अभिनय की वजह से दर्शक अक्सर भूल जाते थे कि वे भारतीय मूल के नहीं है। अब बात उस चेहरे की जिसे 80 के दशक की फिल्मों के दर्शक कभी नहीं भूल सकते। बॉब क्रिस्टो ऑस्ट्रेलिया में जन्मे बॉब क्रिस्टो भारत आए और देखते ही देखते हिंदी फिल्मों के सबसे लोकप्रिय विदेशी कलाकारों में शामिल हो गए। उनकी लंबी कद काठी, नीली आंखें और खतरनाक व्यक्तित्व उन्हें विलेन के गुर्गे या विदेशी अपराधी की भूमिका के लिए बिल्कुल उपयुक्त बनाता था। उन्होंने मर्द, काला पत्थर, मिस्टर इंडिया, हुकूमत और दर्जनों सुपरहिट फिल्मों में काम किया। उस दौर में जब भी किसी फिल्म में विदेशी विलेन या बॉडीगार्ड की जरूरत होती थी, अक्सर बॉब क्रिस्टो को ही चुना जाता था। लेकिन दोस्तों, अगर आपने अमर अकबर एंथनी देखी है तो आपको एक और विदेशी कलाकार जरूर याद होगा। वो था परवीन बाबी के बॉडीगार्ड जेबिस्को का किरदार। यह किरदार निभाया था यूसुफ खान ने। बहुत कम लोग जानते हैं कि यूसुफ खान का जन्म भारत में नहीं बल्कि मिस्र यानी इजिप्ट में हुआ था। उनका असली नाम यूसुफ अबूश शेर था। वे भारत आए और हिंदी फिल्मों में काम करने लगे। उनकी लंबी चौड़ी, कद, काठी और प्रभावशाली व्यक्तित्व ने उन्हें फिल्मों में खास पहचान दिलाई।
अमर अकबर एंथनी में जेबिस्को का किरदार इतना लोकप्रिय हुआ कि लोग उन्हें उनके असली नाम से कम और जेबिस्को के नाम से ज्यादा पहचानने लगे। उन्होंने डॉन, मुकद्दर का सिकंदर, नसीब, कर्ज और डिस्को डांसर जैसी फिल्मों में भी काम किया। यूसुफ खान का एक और दिलचस्प संबंध बॉलीवुड से था। अभिनेता फराज खान उनके बेटे थे। कहा जाता है कि फिल्म मैंने प्यार किया के लिए पहले फराज खान को चुना गया था। लेकिन स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वे फिल्म नहीं कर पाए और बाद में यह अवसर सलमान खान को मिला। अब बात करते हैं हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर की अभिनेत्री सुलोचना की। सुलोचना का असली नाम रूबी मायर्स था। वे यहूदी मूल के परिवार से थी। मूक फिल्मों के दौर में उनका स्टारडम इतना बड़ा था कि वे उस समय की सबसे अधिक पारिश्रमिक पाने वाली अभिनेत्रियों में गिनी जाती थी। जब भारत में फिल्म उद्योग अपने शुरुआती चरण में था तब सुलोचना लाखों दर्शकों की पसंद बन चुकी थी। इसी तरह अभिनेत्री नादिरा भी भारतीय मूल की नहीं थी।
उनका असली नाम फ्लोरेंस एजेकिल था और वे बगदादी यहूदी परिवार से थी। राज कपूर की फिल्म श्री 420 इंच में माया का किरदार निभाकर उन्होंने इतिहास रच दिया। बाद में फिल्म जली में मां की भूमिका के लिए उन्हें काफी सराहना मिली। दोस्तों, हिंदी सिनेमा की खूबसूरती यही है कि उसने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकारों को अपनाया और उन्हें स्टार बना दिया। हेललेन बर्मा से आई। बॉब क्रिस्टो ऑस्ट्रेलिया से आए। यूसुफ खान मिस्र से आए। टॉम ऑल्टर अमेरिकी मूल के थे। जबकि सुलोचना और नादिरा की जड़े यहूदी समुदाय से जुड़ी थी। लेकिन जब यह कलाकार पर्दे पर नजर आते थे तब दर्शक उनकी राष्ट्रीयता नहीं देखते थे। वे सिर्फ उनका अभिनय देखते थे। शायद यही वजह है कि दशकों बाद भी इन कलाकारों को हिंदी सिनेमा के इतिहास में सम्मान के साथ याद किया जाता है। आपको इनमें से किस कलाकार की कहानी सबसे दिलचस्प लगी? कमेंट में जरूर बताइए। धन्यवाद।