इधर शिक्षा मंत्री दफ्तर पहुंचे। उधर पीएम मोदी ने देखिए एक और वीडियो जारी किया और बताया आगे की तैयारी क्या है। उठा रही है। फ्रेंड्स विद्यार्थियों के भविष्य के लिए भारत सरकार लगातार अनेक विध कदम उठा रही है। जिन लोगों ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। वे जेलों में सड़ रहे हैं। फास्ट ट्रैक कोर्ट बना चुके हैं। हम कल पार्लियामेंट के अंदर भी कठोर कानूनों के प्रावधान के साथ नया कानून बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। तो पीएम मोदी कह रहे हैं टास्क फोर्स और नया कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दूसरी तरफ एक्शन में आ गए शिक्षा मंत्री भी। आज ही शिक्षा मंत्री ने कार्यभार संभाला और अधिकारियों के साथ बैठक की है। तो शिक्षा मंत्री की अब कोशिश भी होगी कि जहांजहां जो लीकेज है, जो परेशानियां है, जो दिक्कतें हैं, उन्हें ठीक करना है शिक्षा सुधार के क्षेत्र में। और दूसरी तरफ पूरे देश की नजर भी उन पर होगी। तो देखिए जरा नए शिक्षा मंत्री ने कार्यभार संभाला और क्या-क्या काम किया है। आज धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रहलाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय संभाला और शनिवार शाम करीब 8:15 पर उन्हें शिक्षा मंत्रालय का प्रभार मिला। रविवार सुबह मंत्रालय पहुंचकर उन्होंने कार्यभार संभाल लिया।
पदभार संभालते ही शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। नए शिक्षा मंत्री की बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी भी आपको नजर आ रहे हैं। पहली मीटिंग में शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया है। कहा सरकारी काम या इंतजाम में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। प्रहलाद जोशी की गिनती पीएम मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री और नेताओं में होती है। खाद्य उपभोक्ता मामले और नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग भी उनके पास है। यानी रिन्यूएबल एनर्जी डिपार्टमेंट भी वो देखते हैं। अब आपको बताऊं प्रह्लाद जोशी 2004 में पहली बार कर्नाटक के धारवाड़ से लोकसभा के सांसद हुए और फिर लगातार पांच बार वो इसी सीट से सांसद चुने गए। 2019 में पीएम मोदी की दूसरी सरकार में उन्हें संसदीय कार्य मंत्रालय मिला था। कर्नाटक के गद्दावर नेता को मोदी ने कोयला और खनन मंत्री बनाया। प्रह्लाद जोशी को सरकार और संगठन में काफी भरोसेमंद और कड़क माना जाता है। कर्नाटक के ब्राह्मण प्रहलाद जोशी अपने करियर में कोई चुनाव नहीं हारे। 2012 से 2016 तक वह कर्नाटक में बीजेपी अध्यक्ष रहे। पार्टी का काफी विस्तार किया है। संसदीय कार्य मंत्री रहे तो कई अहम विधेयक पास कराने में अहम भूमिका निभाई। महिला आरक्षण बिल 2023, तीन तलाक और आर्टिकल 370 को हटाना का क्रेडिट उन्हें जाता है। नए शिक्षा मंत्री की शुरुआती शिक्षा रेलवे स्कूल और न्यू इंग्लिश स्कूल हुबली में हुई। फिर धारावाड़ के एस आर्ट्स कॉलेज से आर्ट्स में ग्रेजुएशन यानी बीए किया है। इसके बाद वो पूरी तरह समाज सेवा और राजनीति में सक्रिय हो गए। राजनीति में आने से पहले वो कई साल आरएसएस से भी जुड़े रहे। 21 करोड़ की संपत्ति के मालिक प्रहलाद जोशी के पास अपनी कोई गाड़ी और कार नहीं है। सुनिए जरा क्या कुछ कह रहे हैं नए शिक्षा मंत्री। माननीय प्रधानमंत्री जी ने पूरा विश्वास रख के मुझे यह जिम्मेदारी सौंपा है। पूरा डिटेल से जो भी इधर अभी हमको देखना है, निर्णय लेना है इस सब के बारे में इंफॉर्मेशन देने का और पूरा मिनिस्ट्री समझने का कोशिश मैंने किया हूं। एक बेहतर शिक्षा मंत्री लाते तो लोग कहते कि धर्मेंद्र प्रधान अब ऐसा लाए हैं जो संसदीय कार्य विभाग देख रहा था। हमने अपनी आंखों से देखा नहीं चला पाया मोदी जी ने निकाल दिया उसको और मंत्रालय दिए नहीं कर पाए निकाल दिए उसको। अब जानबूझ कर दिया गया है कि उससे छोटी लाइन खींचो जब ऊपर वाली बड़ी दिखाई पड़े। तो ये तो धर्मेंद्र प्रधान से ज्यादा व्यस्त और अक्षम है।
देखिए प्रह्लाद जोशी है टेंपरेरी एजुकेशन मिनिस्टर है। एजुकेशन मिनिस्टर की सर्च और रिसर्च सरकार में चल रही है। और बेस्ट एजुकेशन मिनिस्टर देवेंद्र फडनवीस हो सकते हैं। ये उसके ऊपर मोदी जी ने मन बना लिया है। हमारी जानकारी है। उनको अतिरिक्त प्रभार के रूप में दिया गया है। शिक्षा मंत्रालय लिंग शिक्षा मंत्रालय में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है। आमूलचूल जब मैं कह रहा हूं फ्रॉम बॉटम टू टॉप एंड टॉप टू बॉटम और अब तक सरकार एकनॉलेज नहीं कर रही थी। देखिए प्रहलाद जोशी जी नए शिक्षा मंत्री बने और हमें उम्मीद है कि जो काम 12 सालों से हमारी सरकार रिफॉर्म कर रही है शिक्षा में उसको जारी रखेंगे। अब दिलचस्प यह है कि धर्मेंद्र प्रधान का तो इस्तीफा हो गया लेकिन विपक्ष में खींचतान है। क्रेडिट किसे जाएगा? तो देखिए इस्तीफे के बाद शिवाजी पार्क में प्रदर्शन हो रहा था। जहां उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दोनों एक साथ मंच पर थे। और आइए अब आपको बताऊं कि आखिर कैसे लिखी गई धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की स्क्रिप्ट। सबसे पहले देखिए पहले मंत्री को समर्थन। आंदोलन के बीच सरकार धर्मेंद्र प्रधान के साथ मजबूती से खड़ी दिख रही यह तय हुआ था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा। लेकिन अंदर खाने इसको लेकर कई बैठकें हो रही थी। वांगचुक को जंतरमंतर से यह तस्वीर आप देख रहे हैं। वांगचुक को जंतरमंतर से उठाने के बाद माहौल बदल गया। संसद मार्ग मार्च के बाद दबाव बढ़ा। 20 जुलाई को संसद मार्च की तस्वीर देश भर में देखी गई। इसके बाद आंदोलन के समर्थन में लोग और जुटने लगे। सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी में दो राउंड की बैठक भी हो चुकी थी। लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी थी। उसके बाद देखिए विपक्ष ने मोर्चेबंदी शुरू कर दी। दूसरी तरफ संसद में विपक्ष इस मांग पर अड़ा हुआ था कि राहुल और अखिलेश हर दिन इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे थे। सरकार आंदोलनकारियों और विपक्ष के साथ दो मोर्चों पर भिड़ी। 2027 में पांच राज्यों के चुनाव पर आंदोलन का असर होने की आशंका थी। साथ ही संघ में मंथन शुरू हुआ। सीजेपी का अल्टीमेटम भी आ गया। सूत्रों के मुताबिक संघ के नेताओं की भी इसको लेकर बैठक हुई। दूसरे राउंड की बैठक में सीजेपी ने सरकार को अल्टीमेटम दिया। वह धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम पर मानने के मूड में नहीं थे। साथ ही ऐसा ना होने पर दोबारा संसद मार्च का ऐलान कर दिया गया। बीजेपी के दिग्गज मुरली मनोहर जोशी का बयान छात्रों के समर्थन में आ गया। इसके बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संवाद पर जोर दिया। देश में फैली आंदोलन की आग। आंदोलन जंतरमंतर से होते हुए उसके बाद कई राज्यों तक पहुंच चुका था। साथ ही इसमें अधिकतर युवा थे जो आंदोलन में शामिल थे। 2014, 2019 और 204 में जीत में इन वोटरों का अहम योगदान रहा एनडीए की जीत में। बीजेपी इन वोटर्स को नाराज करने का रिस्क नहीं लेना चाहती थी। तीसरे राउंड की बैठक से पहले धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। सुनिए जरा क्या कुछ कह रहे हैं सियासतदान इस पर। मैं सलाम करता हूं उन बहादुर तालिबेल्म को और उन कुलबाओं को जिन्होंने कई हफ्तों से जंतरमंतर पर बैठकर ऐसा मंतर पड़ा कि मोदी को रात के [हौसला बढ़ाने की आवाज़] ये चाह रहे थे आराजकता फैलाना। नरेंद्र मोदी युवाओं के भविष्य के साथ संवेदनशील है। वह देश की चिंता करते [गला साफ़ करने की आवाज़] हैं और वो जीत और हार से चिंता करते हैं। अंतर इतना ही। यही तो देश की ताकत है।
यही नया भारत है जो सवाल पूछता है और सवाल सरकार से पूछना जरूरी है। जवाब सरकार से आना जरूरी है। अगर नहीं आया तो ऐसे ही बड़ी-बड़ी घटनाएं होती रहें। अभी तो आंदोलन खत्म हो गया। अभी तो ये क्या चालू है? यह क्रेडिट लेने की बात है और वामचुक जी की जो पत्नी है, उन्होंने खुद ही कहा था कि यह कांग्रेस की नौटंकी है। यह कांग्रेस का तमाशा है। क्या है? जंतरमंतर में आंदोलन बैठे हैं और राहुल गांधी जाते हैं प्रधानमंत्री के निवास पर। क्या है? ये धर्मेंद्र जी का इस्तीफा उन सब विदेशी ताकतों को जो देश में हिंसा कराना चाहते थे। बांग्लादेश की तरह, श्रीलंका की तरह उनके मंसूबे उनकी मंसूबे खत्म हो। इसलिए मैं मानता हूं कि जनरल प्रधान जी ने जो काम किया है उसके लिए मैं उनको बधाई भी देता हूं। अब सवाल यह है कि प्रदर्शन तो खत्म हो गया। मंत्री जी का इस्तीफा भी हो गया। अब अगला क्या? क्या कुछ कर रहे हैं सीजेपी के चीफ दीपके? दीपके आज पहुंचे एक बड़े वकील से मिलने के लिए। यह तस्वीर आप देख रहे हैं। अभिजीत दीपके पहुंचे हैं कपिल सिब्बल के आवास पर। अभिजीत अभिजीत अभिजीत अभिजीत अभिजीत अब देखिए दीपके का आगे का प्लान क्या है? पार्टी उनकी क्या करने वाली है? आंदोलन के बाद सीजेपी अगले प्लान पर काम कर रही है। इसलिए तो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सीजीपी के फाउंडर कानूनी कारवाही से बचने में लगे हैं। तभी तो दीपके ने वकील कपिल सिब्बल से मुलाकात की। दिल्ली में अभिजीत दीपके सिब्बल के घर पहुंचे। जहां दोनों के बीच कई मुद्दों पर बातचीत होने का दावा है। कहा यह जा रहा है कि आंदोलन में जिन लोगों पर केस दर्ज हुए उसको लेकर आगे की कानूनी कारवाही पर मंथन हुआ। क्योंकि सीजेपी चाहती है कि सब पर एफआईआर दर्ज जो एफआईआर हुई वो वापस ली जाए। यह मांग उन्होंने सरकार से भी रखी है जिसे माना गया है। हालांकि केस वापसी का कोई ब्लूप्रिंट सामने नहीं आया है।
ऐसे में सीजेपी इस मामले में कपिल सिब्बल से कानूनी सलाह ले रही है। क्योंकि दीपके ने कहा है कि धर्मेंद्र प्रधान तो पहला विकेट है। वो कह रहे हैं उन्होंने दावा किया हम यहीं नहीं रुकेंगे। यह बस शुरुआत है। राजनीति के मोर्चे पर फिलहाल सीजेपी ने बड़ा प्लान नहीं बनाया नहीं बताया अब तक। मगर उनके दावों के मुताबिक वो शिक्षा में सुधार पर काम करेंगे। इसके लिए यूपी, बिहार समेत कई जगह आंदोलन कर सकते हैं। सीजेपी ने यूपी में पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी। दीपके खुद कह चुके हैं कि दिल्ली के बाद बिहार भी जाऊंगा। एक और अहम बात यह कि मुझे हीरो मत बनाओ। दीप के कहते हैं एक शख्स को हीरो बनाने से देश को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। पीएम मोदी पर अटैक करते हैं। वो सुनिए जरा दीप के क्या कह रहे हैं। जितने भी लोग जंतरमंतर पर बने रहे फॉर 37 डेज आई वांट टू थैंक ईच एंड एवरीवन ऑफ यू एंड आई वांट टू टेल यू दैट आई आई रियली रियली रियली अप्रिशिएट व्हाट यू डीड फॉर दिस कंट्री। और जिन लोगों ने हम पर डाउट किया, हमें क्रिटिसाइज़ करा या हमसे सवाल किए कि आप लोग सीरियस नहीं हो। आप लोग प्रोटेस्ट करना नहीं जानते हो। आई वांट टू थैंक देम एज वेल। अगर आप लोग हमें क्रिटिसाइज नहीं करते, अगर आप लोग हमसे सवाल नहीं करते तो हमें शायद से इंप्रूव करने का मौका नहीं मिलता। दिस इज़ जस्ट अ बिगनिंग। द कॉकरोच जनता पार्टी हैज़ अ लॉन्ग वे टू गो एंड फॉर श्योर वी विल गो लॉन्ग वे। दिस इज़ जस्ट अ बिगनिंग। तो दीपके कह रहे हैं कि अभी कॉकरोच जनता पार्टी को बहुत काम करना है। शिक्षा के क्षेत्र में काम करना है। दूसरी तरफ देखिए उनके घर उनके परिवार से मिलने के लिए आज महाराष्ट्र के एक मंत्री पहुंचे हैं। पहुंचे हैं संजय और दीपके की माता जी को आप देख रहे हैं और उनके पिताजी को इस पूरे आंदोलन में चार बड़े चेहरे थे जो इस आंदोलन को लीड कर रहे थे। कौन है वो? सबसे पहले अभिजीत दीप के कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक सीजीआई की एक टिप्पणी के बाद पार्टी बनाने का ऐलान किया। 2 महीने में सोशल मीडिया पर 2 करोड़ से ज्यादा फॉलोवर्स हो गए। कॉकरोच जनता पार्टी बनाने वाले अभिजीत पत्रकारिता कर चुके हैं।
अमेरिका के बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन की पढ़ाई की है। दीपके के पास राजनीतिक संदेशों को वायरल करने का पुराना अनुभव है। साल 2020 से 2022 के बीच में आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया टीम में थे और पहली बार ऑनलाइन गुस्से को बड़े आंदोलन के रूप में खड़ा किया। महाराज के संभाजी नगर के रहने वाले दीपके का राजनीति से कोई लेना देना नहीं। उनके पिता रिटायर्ड इंजीनियर चाहते हैं कि बेटा समाज सेवा करे सियासत ना करे। दीपक की माताजी भी चाहती हैं कि बेटा सुरक्षित रहे और राजनीति से दूर रहे। अगला नाम है नेहा बोरा। नेहा बोरा जेएनयू से पीएचडी कर रही हैं। लेफ्ट विंग आयशा की अध्यक्ष हैं। जंतरमंतर में जमीनी स्तर पर छात्रों की आवाज बुलंद की है। आंदोलन से जुड़ी जानकारी लोगों और छात्र संगठनों तक पहुंचाई। कड़े तेवर, भाषण और 23 दिनों तक अनशन से चर्चा में आ गई। नेहा के साथ जेएनयू के और दूसरे संस्थानों के छात्र भी जुड़ने लगे। एक और नाम सौरभ दास का है। खोजी पत्रकार सौरभ दास ने सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता का रोल निभाया। प्रदर्शन की तारीख, मांग और सरकार से संवाद की लाइन स्पष्ट की। हिंसा, पुलिस, चोटों और आंदोलन में फैली अफवाहों का जवाब दिया। दिल्ली के सौरभ दास ने एमटी यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। 18 साल की उम्र में आरटीआई कार्यकर्ता के तौर पर खास पहचान बना ली थी। एक और नाम आशुतोष राका ने छात्र आंदोलन के एजेंडे को संभाला। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मुआवजा और केस वापसी का मुद्दा रखा। राका ने राजनीतिक दलों को आंदोलन पर हावी नहीं होने दिया। जयपुर के रहने वाले आशुतोष आईआईटी कानपुर से इन्होंने पढ़ाई की है और बाद में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा हासिल की। लंदन में कंपनी के सलाहकार और कॉरपोरेट क्षेत्र में काम किया है।
भारत लौटने पर पर्यावरण और समाज सेवा से जुड़े कार्यक्रमों में जुटे आइए अब आपको सुनवाता हूं। सुनिए जरा आपको लिए चलता हूं। महाराष्ट्र दीपके के माताजी और पिताजी क्या कह रहे हैं वो सुनिए। वो हट्टी था ना इसलिए वो डिमांड पूरी करने वाला ही था। मुझे मैं उसको नहीं बोली थी मगर वो नहीं बोला। मम्मी जब तक राजीनामा नहीं होता जब तक मैं घर पे नहीं आता है। मुझे वो बोला भी मगर मैंने बोली नहीं कि इसको बोली जान बहुत हट्टी है। बोले नहीं मम्मी पापा हाथ पूरा सकते हैं। सरकार नहीं हाथ पूरा सकती। नहीं बोले उनको हट ये करना ही पड़ेगा। बोले बच्चों का हार्ट है ये तो उनको पूरा करना ही पड़ेगा। क्या बोले पहले बहुत बोले तो पहले डर लग रहा था अपना बच्चा अकेला उधर है बच्चों भी है मगर थोड़ा सा डर लगा था अभी अच्छा लग रहा है बहुत अच्छा लग रहा है जो पहला मूवमेंट चालू किया उसके मूवमेंट की पहली जीत है उसके लिए मैं मुझे गर्व है कि मैं अभी जिनका पीता हूं तो उसको सपोर्ट करने वाले जो भी बच्चे थे उसके जैन जीते उन्होंने भी बहुत रट के रखा उसके साथ नहीं छोड़ा ये बस एक ट्रेलर है पिक्चर अभी बाकी है देश के युवा जग चुके हैं देश के युवा इस देश में जितने समस्याएं हैं उनको हल करेंगे। हम एज अ पार्टी एज अ मूवमेंट ऑब्वियसली ये खत्म नहीं हो रहा है। अब हम लोग देश भर जाएंगे। युवाओं की बात सुनेंगे। युवाओं के लिए सबसे बेस्ट जो पॉलिसी होगा वो हम लोग लाएंगे। ये युवाओं के लिए बनाया गया प्लेटफार्म है। युवाओं के मुद्दे उठाता रहेगा। हम अपने आप को पूरे देश में ले जाएंगे। उनको संगठित करेंगे और जिस तरह से शिक्षा के मुद्दे पे हमने बात की है।