एक और इस वक्त धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर और नए शिक्षा मंत्री को लेकर चर्चा हो रही है, cjp की बार हो रही है ऐसे में तेलेंगना cm ने केंद्र सरकार के सामने एक बड़ी मांग रख दी है, जिसे लेकर cm ने खुद खुलासा किया है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शनिवार , को नीट पेपर लीक मामले को लेकर आयोजित कैंडल लाइट रैली संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर इशारा करते हुए दावा किया कि जेन- आंदोलन ने 56 इंच के सीने को हरा दिया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से हटने के लिए मजबूर कर दिया.
इसके साथ ही, सीएम रेवंत रेड्डी ने संसद में जेन-Z की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाएगी. इस सत्र में एक प्रस्ताव पास किया जाएगा, जिसमें केंद्र सरकार से लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र घटाकर 21 साल करने की मांग की जाएगी.
तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा, ‘हम अगस्त के पहले हफ्ते में विधानसभा और विधान परिषद का विशेष सत्र बुलाएंगे. हम विधानसभा में चर्चा करेंगे और MLA और MP के तौर पर चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 21 साल करने का प्रस्ताव पास करके प्रधानमंत्री को भेजेंगे.’ उन्होंने कहा, ‘देश की आबादी में जेन-Z की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत है, लेकिन लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व एक प्रतिशत से भी कम है. अगर 21 साल से ज्यादा उम्र के युवा मंत्री बनते हैं, तो देश का भविष्य बदल जाएगा.’उन्होंने संविधान में संशोधन करके 21 साल के युवाओं को विधायक और सांसद के तौर पर चुनाव लड़ने का मौका देने का सुझाव दिया. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जर्मनी और ब्रिटेन में 18 साल का युवा प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बन सकता है और सिंगापुर में 21 साल का व्यक्ति प्रधानमंत्री बन सकता है, तो हमारे देश में क्यों नहीं बन सकता?
CM रेड्डी ने कहा, ‘अगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनते हैं, तो वह यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी लेंगे कि जेन-Z का कोई नेता केंद्रीय शिक्षा मंत्री बने. मैं INDIA गठबंधन से बात करूंगा और हर पार्टी के नेताओं से मिलूंगा कि इन लोगों को सड़कों पर आवाज उठाने के बाद बस घर नहीं लौट जाना चाहिए. इन युवाओं को संसद जाना चाहिए और पूरी दुनिया में जेन-Z की आवाज पहुंचानी चाहिए.’उन्होंने कहा कि 21 साल के युवा IAS और IPS अधिकारी बनने के साथ-साथ मेयर और जिला परिषद अध्यक्ष बनने के भी योग्य होते हैं. पुराने सुधारों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने वोट देने की न्यूनतम उम्र 21 से घटाकर 18 साल कर दी थी, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने 21 साल के युवाओं को मेयर और जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की इजाजत दी थी.