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पेपर लीक पर आया नया सख्त कानून, जानकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे।

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शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद से प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 49 दिनों तक चले आंदोलन के बाद जंतरमंतर खाली हो गया है। लेकिन अब देश की नजर सोमवार को जो मसून सेशन है उस पर होने वाली है।

ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि सोमवार बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। पेपर लीक कानून के जरिए विपक्ष पर जो हम देख रहे थे लगातार हंगामा हो रहा था। वो चाह नहीं रहे थे कि वहां पर सेशन [संगीत] चले। उसको लेकर अब हम कह सकते हैं कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोमवार को अब सुचारू रूप से शायद संसद चलेगी। इससे l जुड़ी आपको एक रिपोर्ट भी दिखाते हैं। 49 दिनों तक आंदोलन चला। तीन दौर की बातचीत हुई और सहमति के बाद प्रदर्शनकारी वापस लौट गए। लेकिन इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल आंदोलन नहीं बल्कि विपक्ष की राजनीति है।

जिस आंदोलन को विपक्ष ने सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा सियासी हथियार बनाने की कोशिश की जिसके मंच पर विपक्ष के बड़े-बड़े चेहरे एकजुट दिखाई दिए वो हथियार अब विपक्ष के हाथ से निकल गया है। सरकार के एक मास्टर स्ट्रोक ने विपक्ष का एजेंडा फेल कर दिया। मोदी सरकार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसलिए पेपर लीक को लेकर मोदी सरकार लगातार कठोर कदम उठा रही है। देशव्यापी हिंसा को रोकने और छात्रों के हित को सर्वोपरि मानते हुए पिछले तीन दिनों में तीन बड़े फैसले लिए जा चुके हैं। पेपर लीक पर कानून में संशोधन हो या फिर एग्जाम माफिया पर शिकंजा और अब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।

यह वो बड़े फैसले हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की छात्रों के प्रति सर्वोच्च प्रतिबद्धता से देश को रूबरू करा दिया है और अब पेपर लीक माफिया पर शिकंजा कसने वाला मसौदा तैयार कर लिया गया है। देश की नजर अब सोमवार को होने वाले संसद सत्र पर है। क्योंकि संसद के मानसून सत्र में सोमवार को परीक्षा संशोधन बिल पेश होगा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह इस बिल को पेश करेंगे। बिल में पेपर लीक दोषियों के लिए कठोर दंड के प्रावधान की तैयारी है। जुर्माना राशि 10 गुना तक बढ़ाने का भी इसमें प्रावधान संभव है। मतलब यह कि सरकार विपक्ष को कोई मौका नहीं देना चाहती।

आप दिल्ली में भिन्न-भिन्न स्थानों के ऊपर भिन्न-भिन्न प्रकार के भड़काऊ बयान बयान देते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। मगर संविधान के द्वारा निर्धारित स्थान संसद पर चर्चा से भाग रहे हैं। यह दर्शाता है कि इनका उद्देश्य व्यवस्था और समाधान ढूंढना नहीं, अराजकता और घमासान ढूंढना है। विपक्ष धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद नहीं चलने दे रहा था। अब इस्तीफा हो चुका है। विपक्ष के मंसूबे मटियामेट हो गए हैं।

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