1988 में सचिन और सुप्रिया ने करिश्मा मखानी नाम की एक छोटी बच्ची को गोद लिया। उसके पिता का लंदन में एक रेस्टोरेंट था। लेकिन उसकी माँ लगातार बीमार रहती थी, इसलिए करिश्मा अकेली रहती थी। इसलिए उसके पिता का उसे हॉस्टल में रखने का फैसला सचिन और सुप्रिया को पसंद नहीं आया। वे दोनों उनके खास दोस्त थे। इसलिए सचिन और सुप्रिया ने सिर्फ तीन साल की करिश्मा को अपने साथ रख लिया। उन्होंने उसे कानूनी तौर पर गोद नहीं लिया, बल्कि उसे भारत ले आए। उन्होंने उसे फिल्मों में छोटी-मोटी भूमिकाएँ भी दीं।
लेकिन एक दिन अचानक उसके असली पिता उसे लंदन ले गए। उन्होंने सचिन को इस बारे में ज़रा भी जानकारी नहीं दी थी। सचिन ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में आरोप लगाया था कि करिश्मा के पिता ने उसका अपहरण किया था। बाद में एक इंटरव्यू में करिश्मा ने कहा कि वह खुद अपने पिता के साथ गई थी। 12 साल बाद जब उसने फिल्म इंडस्ट्री में करियर बनाने का फैसला किया, तो वह फिर से सचिन और सुप्रिया के पास लौट आई। वह छह महीने उनके साथ रही, लेकिन बॉलीवुड में उसे स्थायी जगह नहीं मिली, इसलिए वह फिर से लंदन चली गई
लेकिन एक बार फिर एक इंटरव्यू में उन्होंने सनसनीखेज आरोप लगाया कि सचिन और सुप्रिया सिर्फ लोकप्रियता के लिए उनका इस्तेमाल कर रहे थे। सचिन पिलगांवकर ने अपनी आत्मकथा में भी जिक्र किया है कि उस लड़की ने उन्हें और उनके परिवार को बहुत मानसिक पीड़ा पहुंचाई थी। साथ ही, उनके पिता भी उनकी काफी संपत्ति छिपाकर भाग गए थे। उनकी मां ने हस्ताक्षर के लिए उनसे धोखाधड़ी की थी। इन सभी मामलों में उन्हें कई कानूनी लड़ाइयां लड़नी पड़ीं, जिससे उनकी छवि भी खराब हुई।
करिश्मा ने इन आरोपों के बारे में एक इंटरव्यू दिया। उसमें उन्होंने कहा कि मेरे पिता ने मेरा अपहरण नहीं किया, बल्कि उन्होंने मेरे पिता से मुझे वापस ले जाने के लिए कहा था। 12 साल बाद मैं सिनेमा में करियर बनाने के लिए भारत लौटी और उनके साथ 6 महीने रही, लेकिन तब भी मुझे ऐसा महसूस नहीं हुआ कि उन्होंने मुझे पूरी तरह से स्वीकार कर लिया है। फिर उन्होंने मुझे घर छोड़ने के लिए कहा, इन सब बातों ने मुझे बहुत परेशान किया है।
वही जो राम रच राखा पर क्या करें हम आने का मौका ही नहीं मिलता था काका भी कभी बीमार नहीं पड़ते क्या आने का 80 के दशक का एक ऐसा कलाकार जिसने अपनी भोली भाली मासूम अदाकारी से भारतीय सिनेमा में एक अलग पहचान बनाई पर गुंजा है कहां दिखाई नहीं दे रही 70 और 80 के दशक में भारतीय सिनेमा में पश्चिमी सभ्यता और बाजारवाद बढ़ चढ़कर बोलने लगा था दर्शक भी सिर्फ मारधार जैसी फिल्मों में अपनी रोचकता दिखा रहे थे पर तभी एक एक्टर धोती कुर्ता में अपनी देसी बोली में दिखा तो कौन थे यह अभिनेता कैसे इस अभिनेता ने भारत की सबसे ज्यादा देखे जाने वाली फिल्म में काम तो किया ही किया और साथ में इस फिल्म के सबसे आइकॉनिक सीन को भी खुद शूट किया आखिर क्यों इस बेहतरीन एक्टर के 16 फिल्म में एक लंबे सीन को अचानक काट दिया गया कैसे महज 4 वर्ष की उम्र में 103 डि बुखार पर ना चाहते हुए भी काम किया और उन्हें उस सीन के लिए नेशनल अवार्ड भी मिला आखिर भारत के पहले प्रधानमंत्री ने इन्हें गोद में लेकर क्या कह दिया था नमस्कार दोस्तों स्वागत है आप सभी का आपके अपने फेवरेट youtube0 बॉलीवुड में वीडियो के अंत में आपको हम यह भी बताएंगे कि अपनी भोली सी सूरत और मोहक मुस्कान के लिए जाने जाने वाले सचिन की जिंदगी में
आखिर उनकी बेटी ने क्या गंभीर आरोप लगाए थे मतलब आप कैसे झेला आपने इतने साल उनको बम्बे की एक कोकड़ी फैमिली में 17 अगस्त 1957 को सचिन का जन्म हुआ इनके पिता शरद बिलगा वकर एक फिल्म प्रोड्यूसर थे साथ ही साथ एक प्रिंटिंग प्रेस भी चलाते थे तो सचिन का बैकग्राउंड तो फिल्मी था तो इसी कारण उन्हें सिनेमा में एंट्री तो महज साढ़े साल की उम्र में मिल गई एक मराठी फिल्म मेकर थे माधोरा सिंधे जिन्होंने सचिन को को अपनी फिल्म सुनबाई में काम देने के लिए उनके पिता से गुजारिश की पर कुछ कारणों व सचिन को यह फिल्म नहीं मिल पाई हां तो इसके बाद उनके पिता ने सचिन को फिल्मों में भेजने का मन तो बना लिया क्योंकि शरद जी खुद प्रोड्यूसर थे इसलिए उन्होंने सचिन को फिल्में दिलाने के लिए कई फिल्म मेकर से बात की और सचिन साहब को अपना पहला मौका फिल्म मेकर राजा परांजपे ने किया परांजपे साहब 1961 में हा माझा मार्गे एक ला नामक एक फिल्म बना रहे थे इस फिल्म में सचिन जी को कास्ट कर लिया गया पर जिस दिन सचिन की शूटिंग होनी थी उस दिन सचिन जी को 103 डिग्री बुखार था तो मैं 4 साल का यह बच्चा शूटिंग करने में असमर्थ था और पिता भी यही चाह रहे थे कि आज शूटिंग कैंसिल हो जाए पर यह वो दिन थे जब शूटिंग का इंतजाम करना बेहद मुश्किल हुआ करता था तैयारियां सारी पूरी हो गई थी अंतता शूटिंग तो करनी ही थी पर इसे ईश्वर का करिश्मा ही कहेंगे कि जब सचिन को शूटिंग के लिए कपड़े पहनने को कहा गया तो कपड़े पहनते पहनते उनका बुखार कम होने लगा और जब वो शूटिंग पर पहुंचे तो उनका पूरा बुखार खत्म हो चुका था रा सियाराम सियाराम सचिन ने शूटिंग पूरी की और किसी तरह ये फिल्म बनकर तैयार हुई इस फिल्म में सचिन की भूमिका को सभी दर्शकों ने खूब सराहा और उससे भी ताज्जुब की बात तो यह है कि सचिन जी को अपनी पहली
फिल्म के लिए बेस्ट बाल कलाकार का नेशनल अवार्ड [संगीत] मिला सचिन जी खुद बताते हैं कि नेशनल अवार्ड के लिए उन्हें जब स्टेज पर बुलाया गया तो डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्ण उन्हें अवार्ड दे रहे थे उनसे कहा गया था कि अवार्ड लेने के बाद सीधे आप आकर अपनी कुर्सी में बैठ जाइएगा सचिन ने अवार्ड लिया और सीधे अपनी कुर्सी की ओर चलने लगे तभी स्टेज पर पंडित जी बैठे हुए थे पंडित जवाहरलाल नेहरू उन्होंने देखा कि पंडित जी उन्हें पुकार रहे हैं सचिन पंडित जवाहरलाल नेहरू के पास गए और पैर छुए सचिन को पंडित जी ने अपनी गोद में बैठाया और अपने कोर्ट में लगे हुए गुलाब के फूल को निकाला और सचिन की शरवानी में लगा दिया और कहा जाओ बहुत नाम करोगे फिर क्या था सचिन ने इसके बाद लगभग 60 से अधिक फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम किया यह फिल्में कभी देव साहब के साथ तो कभी मीना कुमारी के साथ कभी सम्मी कपूर जी के साथ तो कभी संजीव कुमार जी के साथ नकली बिच्छू के बदले में असली बिच्छू लगाता तो बहुत मजा आता ल बेटा सचिन साहब बताते हैं कि जब वोह सात वर्ष के थे तो उन्होंने लीजेंड गुरुदत्त साहब की फिल्म कागज के फूल देखी थी और वह कहते हैं इसी फिल्म को देखकर उन्होंने तय कर लिया था कि वह बड़े होकर बनेंगे तो सिर्फ एक एक्टर ही बनेंगे और सचिन जी खुद ही बताते हैं कि लगभग 2 साल बाद गुरुदत्त जी के ऑफिस से उनके लिए फोन आया गुरुदत्त साहब उनसे मिलना चाहते थे सचिन के पिता सचिन को लेकर गुरुदत्त साहब से मिलने पहुंच गए भले ही सचिन उन दिनों महज सात वर्ष के थे मगर उन्हें फिल्मों की खूब समझ थी गुरुदत्त साहब ने कहा कि मैं हॉलीवुड की फिल्म ओलिवर ट्विस्ट को हिंदी में बनाना चाहता हूं और सचिन को लेना चाहता हूं फिर गुरुदत्त साहब ने मेरी तरफ देखा और पूछा तुम कितने साल के हो सचिन ने तुरंत जवाब दिया मैं न वर्ष का हूं गुरुदत्त साहब ने बोला मेरा ओलिवर तो 11 साल का है तब नटखट सचिन बगैर कुछ रुके बोल पड़े तो क्या हुआ क्या आप मुझे इस फिल्म में नहीं लेंगे गुरुदत्त साहब ने मुस्कुराते हुए कहा नहीं मैं तुम्हारे 11 साल होने का इंतजार करूंगा तुम कितने पास कितने दूर है गुरुदत्त उसके बाद अपनी प्रोडक्शन की फिल्म बहारे फिर भी आए कि शूटिंग में व्यस्त हो गए और इस फिल्म के बनाने के दौरान 1964 में गुरुदत्त साहब की मृत्यु हो गई पर समय बीतते कहां समय लगता है सचिन अब 11 वर्ष के हो गए थे ऐसे में एक दिन सचिन के पिता शरद जी के पास गुरुदत्त के छोटे भाई आत्माराम पादुकोण का फोन आया उन्होंने कहा कि मैं आपसे मिलना चाहता हूं आत्माराम पादुकोण अगले दिन सचिन के घर पहुंच गए उन्होंने ओलिवर ट्विस्ट की स्क्रिप्ट सचिन को दी सचिन ने जैसे ही पहले प्रश् को खोला तो उसमें लिखा था टू बी मेड विद सचिन वेन 11 ईयर और तो और यह खुद गुरुदत्त साहब की हैंडराइटिंग थी मैं चक्का चक्के पे गाड़ी गाड़ी में निकली अप खैर इसके बाद जब सचिन 17 वर्ष के थे तो उन्हें ऑफर हुई 16 फिल्म 16 में सचिन ने रहीम चाचा के बेटे अहमद का रोल किया था पर सचिन साहब के साथ इस फिल्म में बहुत बुरा हुआ 16 में गब्बर अहमद को तड़पा तड़पा कर मार देता है फिल्म में सचिन साहब के पकड़े जाने से लेकर उनके मारे जाने तक बड़ा लंबा सीन था सचिन के साथ यह सूट भी हुआ था इसकी शूटिंग होने में लगभग 20 दिनों का लंबा समय लगा था
वैसे आपको अच्छी तरह पता होगा कि सोले फिल्म अपने क्लाइमैक्स के लिए बहुत चर्चा में थी उन दिनों सेंसर बोर्ड क्लाइमैक्स के सीन को हटवा चाह आता था और हुआ भी कुछ ऐसा ही सोले फिल्म जब रिलीज हुई तो उसका एंड बदल दिया गया था एक और सीन भी हटा दिया गया था जो कि सचिन का सीन था इस सीन में डाकू गब्बर सिंह अहमद को बड़ी बेदर्दी से मार देता है लोगों को लगा सेंसर बोर्ड ने ही यह सीन हटा दिया है पर बात कुछ और थी सचिन साहब ने खुद अपने एक इंटरव्यू में बताया है तब उनकी उम्र 17 साल थी और डायरेक्टर रमेश सिपी साहब नहीं चाहते थे कि 17 साल के बच्चे के साथ पर्दे पर इतना हिंसक सीन दिखाया जाए उन्हें लगा दर्शक शायद यह सब सीन पचा नहीं पाएंगे शायद आपको भी याद होगा कि उस सीन को सिंबॉलिक तरीके से ही फिल्म में दिखाया गया मुझे जाने दीजिए मैं फिल्म के बाद सचिन साहब को लोग अहमद के नाम से ही जानने लगे थे सोले फिल्म से जुड़ा हुआ सचिन का एक और दिलचस्प किस्सा है फिल्म में सचिन की शूटिंग खत्म हो गई थी फिर भी सचिन साहब रोज फिल्म के सेट पर पहुंच जाया करते थे डायरेक्टर साहब शूटिंग करते और वह कैमरे के पीछे जमीन पर बैठकर सारे प्रोसेस को देखा करते रमेश सिप्पी साहब फिल्म में सब कुछ परफेक्ट चाहते थे इसलिए उन्होंने कई टेक्निशियन टीम बनाई थी जिसका काम था फिल्म के अलग-अलग हिस्से को शूट करना और उन्हें दिखाना उसके बाद जो परफेक्ट होता उसे वह सेलेक्ट कर लेते कुछ गलती होती तो उस सीन को वो खुद दोबारा शूट करते सचिन साहब का काम के प्रति लगाव देखते हुए सचिन को ही क्रिएटिव हेड बनाया गया 16 फिल्म का सबसे आइकॉनिक ट्रेन वाला सीन शूट किया गया और यह सब सचिन की देखरेख में हुआ जब रमेश सिप्पी साहब ने सीन को देखा तो वो बेहद इंप्रेस हुए और उस सीन को बगैर कुछ बदलाव किए वैसे ही हूबहू रख लिया बतिया बुझा दो के नींद नहीं आ आप सभी ने देखा होगा कि बाल कलाकारों का करियर बड़े होते होते खत्म हो जाता है और इसका कारण भी है उन्हें हीरो के रूप में एक बच्चे को देखना शायद कठिन होता है उस दौर में भी जूनियर महमूद मास्टर राजू अलंकार जोशी जैसे कई बाल कलाकारों ने खूब नाम कमाया पर बड़े होते होते शायद उन्हें एक दो फिल्में ही [संगीत] मिली पर ऐसा सचिन जी के साथ नहीं हुआ उन्हीं दिनों रासी प्रोडक्शन के राजकुमार बर्ज त्या ने सचिन की एक मराठी फिल्म देखी यह फिल्म थी अजब तुझे सरकार उन्हें सचिन का काम बहुत पसंद आया बर्ज त्या साहब सचिन के साथ दोस्ती और प्रेम के विषय पर एक फिल्म करना चाहते थे उन्हें सचिन साहब इतना पसंद थे कि उन्होंने सबसे पहले सचिन को साइन कर लिया सचिन के साइन करने के बाद स्क्रिप्ट लिखी गई और फिल्म बनी गीत गाता चल अरे वाह जब देख शत मनवाती रहती हो इससे तो अच्छा होता कि लला बाबू के साथ तुम्हारी शादी हो जाती फिल्म में संगीत दिया था रवीन जैन साहब ने फिल्म एक बड़ी म्यूजिकल हिट रही माता इस फिल्म की सफलता के बाद सचिन ने राष्ट्री प्रोडक्शन की कई बड़ी हिट फिल्मों में काम किया उन्हीं दिनों केशव प्रसाद मिश्रा के उपन्यास कोहबर की सर से प्रेरित होकर रा श्री प्रोडक्शन ने एक फिल्म बनाने की योजना बनाई नाम रखा गया नदिया के पार इस पारिवारिक फिल्म में सचिन साहब लीड रोल में थे यह फिल्म जब आई तो उत्तर प्रदेश बिहार में एक बड़ी हिट साबित हुई यह बहुत छोटे बजट की फिल्म थी और बजट से कई गुना ज्यादा इस फिल्म ने पैसा कमाया मन भर माए नैना बांधे ये रिया इस फिल्म के रिलीज के बाद सचिन का चेहरा अब सभी का चहता चेहरा हो गया था सचिन को लोग चंदन के नाम से जानने लगे थे अब इस फिल्म की सफलता का अंदाजा तो हम यहीं से लगा सकते हैं कि सलमान साहब के करियर की सबसे बड़ी हिट फिल्म की न्यू यही फिल्म [संगीत] बनी नदिया के पार फिल्म रिलीज होने के 10 वर्षों बाद रात्री ने इसे बड़े बजट पर सलमान खान को लेकर बनाने की योजना बनाई रही बात नाम की तो नदिया के पार फिल्म के एक डायलॉग को ही फिल्म का नाम बना दिया फिल्म का नाम था हम आपके हैं कौन ताराचंद बर्ज त्या आश्वस्त थे कि फिल्म हिट होगी और फिल्म जब पर्दे पर आई तो पूरे देश ही नहीं पूरी दुनिया भर से गजब के रिस्पांस [संगीत] मिलेवा यों को यहां तक कि 16 फिल्म का रिकॉर्ड तोड़ते हुए हम आपके कौन फिल्म भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी तो अगर सचिन साहब की एक कलाकार के रूप में बात करें तो उनकी सफल हिंदी फिल्में थी गीत गाता चल अखियों के झरोखे में गोपाल कृष्ण नदिया के पार सत्ते पर सत्ता और तो और सचिन साहब ने 15 से अधिक मराठी फिल्मों में डायरेक्शन भी किया इन मराठी फिल्मों की सफलता को देखते हुए डायरेक्टर सुभाष गई ने अपनी कंपनी मुक्ता आर्ट के तहत हिंदी फिल्म डायरेक्शन में इन्हें डेब्यू कराया तो इनकी फिल्म थी प्रेम दीवाने इस फिल्म में जैकी दादा विवेक मुसरा माधुरी दीक्षित जैसे बड़े कलाकार पर यह फिल्म सफल नहीं रही सचिन मराठी सिनेमा की तरफ फिर लौट गए इसी दौरान सचिन के जीवन ने एक नया मोड़ लिया जब वह अपनी अगली मराठी फिल्म नवरी मिले नवर याल बना रहे थे तो उन्हें एक हीरोइन की तलाश थी और उनकी यह तलाश पूरी हुई नई
नवेली सुप्रिया शनिस पर फिल्म की शूटिंग के दौरान सचिन को सुप्रिया से प्यार हो गया धीरे-धीरे फिल्म की शूटिंग खत्म हो रही थी पर सचिन अपने प्यार का इजहार कर ही नहीं पा रहे थे दरअसल सुप्रिया सचिन से 10 वर्ष छोटी थी किसी तरह सचिन ने सुप्रिया से अपने प्यार का इजहार किया सुप्रिया ने हां भी कर दी और साथ ही कहा मुझे लगता था कि आप शादीशुदा हैं पर सुप्रिया के घर वालों ने शादी से साफ इंकार कर दिया इसका कारण यह भी था कि उस समय सुप्रिया महज 17 वर्ष की की थी थोड़ी बहुत खटपट के बाद सचिन ने सुप्रिया के घर वालों को मना ही लिया सुप्रिया जब 18 वर्ष की हुई तब उन दोनों ने शादी कर ली अगर तुम्हे मनचाहा पर मिल जाए तो हमें तो सब कुछ मिल जाएगा सचिन और सुप्रिया आज भी एक बेहतरीन जोड़ी की तरह अपनी जिंदगी जी रहे हैं और तो और सचिन साहब आज भी मराठी और हिंदी सिनेमा में एक्टिव है का एक दिन तो रंगना ही है लजाते गए हो आपको 2018 की हिचकी फिल्म तो याद ही होगी रानी मुखर्जी के पिता का रोल इन्होंने ही किया था और फिर एक मराठी फिल्म रणा गण में भी यह दिखे सचिन और सुप्रिया के एक बेटी भी है नाम है श्रेया पिलगाओंकर जो कि अपने माता-पिता की तरह एक एक्ट्रेस हैं जिन्होंने शाहरुख खान साहब की फिल्म फैन से डेब्यू किया और आपने उन्हें अन प्राइम की चर्चित फिल्म मिर्जापुर में स्वीटी के रोल में देखा होगा तुमको समझ में नहीं आता है मुन्ना नहीं स्वीटी हम सॉरी हमारी तरफ से ना है पर सचिन साहब की बेटी से जुड़ा एक विवाद उनके जीवन में बेहद गंभीर रहा अपनी बेटी श्रेया के जन्म से पहले साल 1988 में उन्होंने एक बच्ची को गोद लिया जिस बच्ची का नाम था करिश्मा मकनी बताते हैं कि कुछ वर्षों बाद करिश्मा अपने बायोलॉजिकल माता-पिता के पास वापस चली गई थी और युवा होने पर करिश्मा फिर एक बार भारत वापस आई और सिनेमा जगत में किस्मत आजमाने लगी तभी साल 2005 में सच और सुप्रिया ने नज बलिय रियालिटी शो में हिस्सा लिया और उस रियलिटी शो के वह विजेता भी रहे बताते हैं शो के दौरान सचिन साहब ने कहा था कि उनकी एक बेटी भी थी जिसे उन्होंने गोद लिया था पर उनके बायोलॉजिकल माता-पिता उसे चुपके से मेरे पास से ले गए इस खबर ने तूल पकड़ लिया करिश्मा मखनी के सामने भी यह बात आई और उन्होंने इस बात का खंडन किया उन्होंने कहा कि मेरे पिता कुलदीप मकनी और सचिन जी अच्छे मित्र थे तभी मेरे पिता ने मेरी देखभाल के लिए मुझे सचिन जी के पास रहने को भेज दिया यह कोई लीगली एडॉप्शन नहीं था सचिन जी और सुप्रिया जी के उस समय कोई बच्चा भी नहीं था
मामा दूर के पुए पकाए के कुछ वर्षों बाद करिश्मा की मां की बीमारी ठीक हो गई और उन्हीं दिनों सचिन और सुप्रिया के भी एक बेटी हो गई थी सच ने खुद कहा कि करिश्मा अब तुम अपने माता-पिता के पास चली जाओ और करिश्मा अपने मां-बाप के पास चली गई फिर जब बड़ी हुई तो सिनेमा में किस्मत आजमाने के लिए एक बार फिर भारत आई पर सचिन और सुप्रिया जी का व्यवहार अब करिश्मा के साथ पहले जैसा नहीं था सचिन को लग रहा था कि करिश्मा उनके नाम का इस्तेमाल कर रही हैं और फायदा उठाकर वे फिल्में पाना चाह रही हैं हां सचिन जी ने इन सभी इल्जाम पर कोई सफाई कभी नहीं दी पर उनकी भोली भाली मुस्कुराती छवि पर कुछ ना कुछ इन सब बयानों से असर जरूर पड़ा अपना लागे सारा तो दोस्तों सचिन जी के बारे में बताई गई यह रोचक बातें आपको कैसी लगी जरूर बताइएगा और सचिन जी का नाम लेते ही आपको इनकी कौन सी फेवरेट फिल्म याद आ जाती है वैसे मेरी फेवरेट फिल्म नदिया के पार है और आप बताइएगा नदिया के पार में इनका क्या नाम था साथ ही साथ आप यह भी बताइएगा कि इनके साथ काम करने वाली एक्ट्रेस का उस फिल्म में क्या नाम था और अगर आपको यह छोटा सा वीडियो थोड़ा सा भी पसंद आया हो तो प्लीज लाइक जरूर कर दीजिएगा क्योंकि आपके द्वारा किया हुआ लाइक हमारे 1015 मिनट के वीडियो में की गई 20 से 30 घंटों की मेहनत को आपके द्वारा दिया हुआ एक पुरस्कार होता है और आपने इस वीडियो को अंत तक देखा इसके लिए दिल से शुक्रिया क्योंकि आपका एक-एक व्यू हमारे और हमारे परिवार की किसी ना किसी तरीके से आर्थिक मदद करता है में चक्का चक्के प गाड़ी गाड़ी में निकली अपनी सवा तो चलिए मिलते हैं किसी अगले वीडियो में जय हिंद जय भारत