में जो हिंदू परिवार है ना वो प्रार्थना करते हैं अपने रब से कि उनके घर बेटी ना हो। छोटी सी बेटी नाजुक नाजुक सी उंगलियां जब बाप पाकिस्तान में ये हिंदू बाप उस बच्ची का हाथ थामता है ना तो रोता है पाकिस्तान में एक हिंदू भाई जब अपनी बहन से राखी बंधवा रहा होता है ना तो उसका सीना फटा चला जाता है क्योंकि उसे पता है कि चाहे वो कितनी कोशिश कर ले वो हैवानों से अपनी बहन की रक्षा नहीं कर पाए।
एक बूढ़ा दादा अपनी पोती को खिलाता है तब उसके हाथों में आशीर्वाद की ताकत वहां पाकिस्तान में नहीं होती। क्योंकि उसे पता है कि वो कितना भी इसे आशीर्वाद दे दे। दानव आकर इसे ले जाएंगे। वो वो आशीर्वाद दे दे। फलो फूलों स्वस्थ रहो, सुरक्षित रहो। लेकिन वहां जो वो दानव घूम रहे हैं उसके अगल-बगल वो इस आशीर्वाद को कभी सच्चा नहीं होने देंगे। हमारे हिंदुस्तान में जब बेटी जन्म लेती है तो आंगन में चाहक जो है वो सुनाई देने पड़ती है। लोग कहते हैं देखो घर में लक्ष्मी आई है। शहनाइयां मजती है।
खुशियां मनाई जाती है। लेकिन सीमा पार पाकिस्तान में जब किसी हिंदू के घर में बेटी जन्म लेती है तो वहां लक्ष्मी के आने का उत्सव नहीं होता है। वहां डर का साया मंडरा रहा होता है। मौत सा सन्नाटा पसर जाता है। वहां एक मां अपनी बच्ची को सीने से लगाकर [संगीत] बिलखने लगती है। पिता थरथर कांपने लगता है और बार-बार यह कहता है कि हे ईश्वर क्यों इस बच्ची को मेरी कोख में भेजा। वहां लोग यह कहते हैं कि बच्ची होने से बेहतर है कि बेऔलाद रहे। क्यों? क्योंकि उसे पता है कि ये बच्ची जैसे ही जवान होगी इसे कर लिया जाएगा।
कोई मां-बाप कोई चाहे वो हिंदू हो, मुसलमान हो, सिख, हो, ईसा, कोई मां-बाप यह नहीं कह सकता अपनी बेटी के बारे में। लेकिन वहां हिंदू परिवार यह कहने को मजबूर है। वो जानते हैं कि पाकिस्तान के इस नर्क में उनकी बेटी की उम्र जैसे ही 11 और 12 साल की होगी, उस पर दरिंदों की नजर पड़ जाएगी।
वहां पूरा का पूरा गैंग घूमता है। जानते हैं आप गिद्धों का टोला घूमता है जो सिर्फ इस ताक में रहता है कि कब कोई मासूम हिंदू बच्ची घर से बाहर निकले या कब कोई मासूम बच्ची घर में अकेली हो इसे उठा ले जाएंगे। इसका जबरन धर्म परिवर्तन कर लेगी। और फिर शुरू होती है वो हैवानियतजिसे सुनकर रूह कांप जाए। छोटी-छोटीबच्ची 11 12 साल क्या उम्र होती है? दुनिया की समझ भी नहीं होती है।
वो कल सुबह अपने मां-बाप के साथ होंगी कि नहीं होंगी नहीं मालूम होता। किसी के जकड़ में होंगी कोई नहीं जानता।मानव अधिकार संगठन ये सब मौन हो जाते हैं। एक रिपोर्ट आपको बताती हूं। बरसों से पाकिस्तानी हिंदुओं पर के एक आंकड़े को मैं बताती हूं। और यह मैं लिखकर आपको इसलिए बताती हूं ताकि आपको इस बात का एहसास रहेगा। चलो मैम बोर्ड बाबू बोर्ड बाबू कुछ आंकड़े ऐसे होते हैं जो बहुत सताते हैं। चलिए पाक की नापाक नियम क्या है बताऊं आपको?
बताइए मैम। पर्सक्यूशन की एक रिपोर्ट है। उस रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में 1000 से ज्यादा अल्पसंख्यक लड़कियों के साथ होती है। कितनी? हजार लड़कियों की जबरन धर्म परिवर्तन करवाया जाता है। फिर मुस्लिम लड़कों के साथ उनका निकाह कर दिया जाता है। यानी पाकिस्तान में हर दिन हर दिन दो से तीन लड़कियां पर डे दो से तीन लड़कियां हैवानियत से इसकी गुजरना पड़ता है। और उम्र भी आपको मैं बता देती हूं। ये जो दो से तीन लड़कियां हैं इनकी उम्र कितनी होती है? आपको पता है? इनकी उम्र होती है 10 से 14 साल। 10 से 14 साल की यह बच्चियां दो से तीन प्रतिदिन किडनैप हो जाती है। और यह सारी की सारी वो बच्चियां हैं जो नॉन मुस्लिम है।
या तो क्रिश्चियन होंगी या हिंदू। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू बेटियों का सबसे बड़ा दुश्मन है। यह जो मेरे बगल में आपको दिखाई दे रहा है। इसका नाम है मौलाना मियां अब्दुल हक। दुनिया भर में इसकी पहचान मियां मिट्ठू के नाम से है। सिंध प्रांत में पूरा गैंग इस शख्स काकाम करता है। हिंदू बेटी जैसे ही 11-12 साल की होती है, जिहाद के नाम पर यह मियां मिट्ठू भूखे भेड़ियों की तरह अपने पूरे गैंग को लगाता है और फिर होता है जबरदस्ती धर्म परिवर्तन। मियां मिट्ठू को क्यों पाकिस्तान में कन्वर्जन फैक्ट्री का मास्टरमाइंड कहा जाता है जानते हैं आप? कैसे यह का खेल इस्लाम की आड़ में खेलता है। पाकिस्तान भूखा मर रहा है।
लेकिन उसकी जिहादी हरकतों में कोई कमी नहीं है। पाकिस्तानी सरकार के लिए यह मियां मिट्ठू टूलकिट का काम कर रहा है। पाकिस्तान में हिंदू बेटियों के शोषण का सिलसिला आज का नहीं है। दशकों पुराना है। सबसे पहले रीना और रवीना दो बहनों की कहानी सुनिए। उम्र थी 13 और 15 साल।
पिता का नाम था हरीलाल। वो कहते हैं कि साल 2019 में घर में जबरदस्ती बंदूकधारी घुसे दोनों बेटियों को किडनैप कर लिया और फिर उनका धर्म परिवर्तन कराया और मुसलमान लड़कों से दोनों बेटियों की शादी करा दी। दोनों लड़कियों को डराधमका कर झूठे बयान देने के लिए मजबूर कर दिया। डर से दोनों ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट में अपनी उम्र 18 और 20 साल बताई। दोनों ने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल करने का भी दावा किया। घटनाएं बहुत सारी हैं। आप कहेंगे अरे दिल से वो कुबूल कर रही हैं। नहीं डराया जाता है वहां।
किया जाता है और घटनाएं बहुत सारी है। हम आपको वही बता रहे हैं जिसकी पुख्ता जानकारी हमारे पास है। 14 साल की सुहाना शर्मा। इसके साथ जो हुआ वो तो बहुत खतरनाक है। सुहाना शर्मा के परिवार का आरोप है कि उसको किया गया। जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराया गया और फिर उसकी शादी करा दी गई। कुछ दिन बाद सुहाना का एक सामने आया। उसने इस्लाम कबूल करने और एक मुस्लिम लड़के से शादी करने की बात कही। मामला कोर्ट पहुंचा। सुहाना ने जज से कहा कि उसका अपहरण किया गया।
जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराया गया और वह अपने मां-बाप के पास जाना चाहती है। अब अदालत को क्या करना चाहिए था? साथ देना चाहिए। साथ देना चाहिए था। मां-बाप के पास इस लड़की को भेज देना चाहिए था। लेकिन अदालत ने उसे उसी दिन महिला शेल्टर होम भेज दिया। रीना कुमारी मेघवार के साथ भी ऐसा ही हुआ। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में रहने वाली रीना का 13 फरवरी 2021 को अपहरण कर लिया गया। जबरन धन परिवर्तन हुआ। एक अधेड़ कासिम खासखली नाम के किसी शख्स से उसका निकाह करवा दिया गया। पाकिस्तान की संसद में भी यह मुद्दा गूंजा है।
हालांकि रीना थोड़ी खुशनसीब रही। लंबी लड़ाई के बाद उसे परिवार के हवाले कर दिया गया। फिर 17 साल की सिमरन सिंध के घोटकी की रहने वाली अचानक गायब हो जाती है। अगस्त 2020 में सिमरन अपनी मौसी के घर से लापता होती है। कुछ दिन बाद परिवारों को परिवार के लोगों को यह पता पड़ता है कि सिमरन एक मदरसे में है। जहां उसका धर्म परिवर्तन का काम चल रहा है। मतलब प्रक्रिया चल रही है और परिवार दौड़ते-भागते [संगीत] बदहवास वहां पहुंचता है। तो उसे सिमरन से मिलने ही नहीं दिया जाता। कुछ ही घंटों बाद घोषणा कर दी जाती है कि सिमरन ने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया है और उसकी फिर एक मुस्लिम लड़के से शादी करवा ली जाती है और उसको नया नाम भी दे दिया जाता है। आयशा मामला कोर्ट पहुंचता है।
अदालत सिमरन को उसके परिवार के साथ भेजने की बजाय पता है क्या करती है? अलग रखने का आदेश दे दिया। परिवार यह कह रहा है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर कारवाई नहीं की। बाद में एक और अदालत ने परिवार को सिमरन से मिलने पर रोक भी दिया कि नहीं मिल सकते तुम इससे। यह तो हो रहा है पाकिस्तान। और आपको यह बताऊं मैं सिमरन के भाई सनी बत्रा इस वक्त हमारे साथ जुड़े हुए हैं। पाकिस्तान से जुड़े हैं। वो जानते हैं कि उनकी जान को खतरा है। अगर किसी ने उनको इस तरीके से देख लिया तो कुछ भी हो सकता है। लेकिन वो हमसे बात करना चाहते हैं।
जो हुआ है उनकी बहन के साथ वो हमें बताना चाहते हैं। कुछ दिन पहले रोक लगाई थी और अब कोर्ट ने वापस अर्जी देने के बाद उनको मिलने का मौका दे दिया है। इनका नाम है सनी बत्रा। सनी आपका बहुत-बहुत स्वागत है और हमसे बातचीत करने के लिए टाइम्स नाउ नव भारत पर वक्त निकालने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। सबसे पहले अगर सिमरन की कहानी आप दर्शकों को बताएंगे तो बेहतर होगा कि वाकई उसे किडनैप किया गया था या वो अपनी मर्जी से गई थी। क्योंकि कई केसेस मैंने ऐसे बताए हैं सनी जी जिसमें लड़कियां कह रही है कि हमने तो मोहब्बत में आकर धर्म कुबूल किया है इस्लाम। तो उसे l भी किया गया हुआ था। लेकिन उसने अपने मुंह से भी बोला था। मैंने केस किया था सिंध ह्यूमन राइट्स में कराची में सेक्रेटेट में वो आशीष है। तो उसमें उसने खुद बोला था कि मैं अपनी फैमिली के साथ जाना चाहती हूं।
तो उसके हस्बैंड ने बोला कि हम मुसलमान है। तो मैं तुमको इजाजत नहीं दूंगा कि तुम उनके साथ जाओ। और ये चीजें उस आर्डर में भी लिखी हुई है। वो मैं आपको आर्डर आपसे शेयर करता हूं। तो बेसिकली उसे किडनैप भी किया गया था .
और उसकी जो दिमागी तवाजुन थी वो भी ठीक नहीं थी और यह भी चीज हाई कोर्ट में साबित हो चुकी हुई थी फिर भी एमटीएम ने आपको पता है यहां पे जुडिशरी का क्या निजाम है तो फिर उसके अभी मेरी मुलाकात होती रहती है हाई कोर्ट के आर्डर के तहत लेकिन उसको किडनैप किया गया था सनी आपको डर लगता है क्या पाकिस्तान में एक हिंदू होने के नाते आपको डर लगता है? बेसिकली देखा जाए अभी यहां तो सिचुएशन तो सबके लिए खराब है। अभी ये हिंदू हो या मुसलमान हो गरीब बंदे का रहना तो यहां मुश्किल है मेरे ख्याल से। तकलीफ होती है। दिमाग तो चलता है। कभी क्या कुछ हो जाए पता नहीं। कभी इधर है तो अभी क्या करें।
आपका दिल करता है कि आप हिंदुस्तान से राब्ता कायम करें। तमाम हिंदू जो यहां पर मौजूद हैं उनके साथ आ जाए। उनसे मिले। मैंने एक दो मर्तबा अप्लाई भी किया था लेकिन वीजा नहीं लगा। मतलब आप हिंदुस्तान आना चाहते हैं? बस अभी-अभी इधर है। क्या करें? अब वीजा मिल जाता तो मैं कब का? एक दो साल पहले मैंने अप्लाई किया था। वीजा नहीं मिला।
सिमरन के साथ क्या हुआ था? उसे कैसे किडनैप किया गया था? वो घर के बाहर गई थी। कैसे? अभी 17 अगस्त 2020 को उस दिन मेरी एक चाची की डेथ हो गई थी तो हम उधर थे सगी चाची ठीक है तो वो अकेली घर पे बैठी थी सिर्फ एक दो घंटे का सिर्फ हमने उसको छोड़ा था जब घर आए तो फिर वो थी नहीं जब नहीं थी तो दो तीन घंटे हमने ढूंढे लगाए वहां भी हमारे यहां मंदिर है वहां गए रिश्तेदार से पूछा तब मियां असलम मियां बिठ्ठू का जो बेटा है.
तो उसने मुझे कहा के आपकी बहन हमारे पास आए आप आए मिले आपकी होती है तो ले जाए तो मैंने उनको उस टाइम बोला था उसके की दिमागी सिचुएशन खराब है। उसका बचपन से ही दिमाग का ट्रीटमेंट चलता आ रहा है। तो उन्होंने मेरी कोई बात नहीं मानी। तो यहां पे जब हम पुलिस के बात करें तो पुलिस का यहां पे जो कारकरदगी है वो जीरो है। वो तो हमेशा पैसे लेके जो डाकू होते हैं या वो जिस जो होते हैं उनके साथ ही होती है। किस तरह का जुर्म सिमरन के साथ होता था? तुम्हारे भाई को मार देंगे, फैमिली को मार देंगे। अगर तुम वापसी गई तो ये तुम लोगों को अनाथ आश्रम भेज देंगे। बहुत सी चीजें अभी मैंने 5 साल के लड़े हुए हैं।
अभी 5 साल की बातें मैं आपसे 5 मिनट या 15 मिनट में तो शेयर नहीं कर सकता। मैं तो यहां सरहद पार बैठी हूं और आपकी बातों को महसूस कर पा रही हूं। उस तकलीफ का सिर्फ एहसास भर कर पा रही हूं कि आप किन हालात से वहां पर गुजर रहे होंगे। लेकिन एक भाई जब अपनी बहन को किडनैप होते हुए देखता है और जब वो यह जानता है कि वह कुछ कर ही नहीं सकता। वो दर्द सच में अलग ही होता है। लेकिन आपको लगता है कि वहां की हुकूमत, वहां की इंतजामिया आपको किसी तरह का इंसाफ देगी? जहां तक हुकूमत या इंतजामिया है तो वो मुझे नहीं लगता कि वो मुझे जस्टिस दे पाएंगे।
लेकिन आपके चैनल के थ्रू मैं अपने पाकिस्तान के आर्मी चीफ को हाथ जोड़ के अपील करूंगा के वो मुझे सुने और मैं जो देख रहे हैं उनको भी बोलूंगा कि ये वीडियो उन तक पहुंचाए वो मुझे बुलाए मेरी बात सुने मेरी एविडेंस सुने की बातें सुने फिर वो जो फैसला करेंगे मुझे मजबूरे पर ये ये कन्वर्ट क्यों करना चाहेंगे इससे क्या मिल जाएगा किस वजह से ये लोग चाहेंगे कि कोई और कन्वर्ट हो जाए। जब मैंने उनसे पहले दिन ही रिक्वेस्ट की थी ना के वो मियां का तब उसने बोला था कि यार तेरे लिए मैं अपनी जन्नत छोड़ दूं क्या? अभी उनको जन्नत चाहिए। उस जन्नत के के लिए ये चीजें हो रही है। वो मरने के बाद जन्नत के लिए आपकी जिंदगी जहन्नुम बना देते हैं। ये जो मियां मिट्ठू का नेक्सेस चल रहा है सनी भाई इसको देखते हुए क्या सबने आंखों पर पट्टी बांध ली है?
कोई कुछ करता नहीं है क्या दिखता नहीं है यह क्या कर रहा है साहब सब आंखों पे पट्टी बांध इवन उनके आंखों के सामने ये चीज है फिर भी उस जज ने उसके खिलाफ रिएक्शन नहीं कितनी बच्चियों का कन्वर्शन कर देता है ये अभी तो गिनने भी नहीं है अभी तो जो सोशल मीडिया पे आ रहा है वो लोग यहां पे अभी जो कम्युनिटी है कम्युनिटी है जो है बहुत चीजें तो मीडिया पे भी नहीं आता है उनके साथ वहां जुल्म होता रहता अच्छा एक बात बताइए सनी भाई ये लड़कियों को ही क्यों ज्यादातर कन्वर्ट करते हैं? उनको पता है ना अभी मुझे करेंगे फिर वो अपनी देंगे बहन बेटी नहीं देंगे वो वो वजह से समझे ना आप लव पर ये आप मैं आपको बता दूं वो लव जिहाद के पीछे मुझे करें ना मुझे बताएं मुझे नहीं करेंगे जब एक बार लड़की का फौज शादी हो गई फिर वो जब जब वो मुस्लिम का फौज कन्वर्जन का नाम आएगा तो फिर मैं भी कुछ नहीं कर सकता आगे भी कोई नहीं आ सकता जब मैं उतर जाऊंगा तो वो मुझे कैसे देंगे वो मुझे अपने घर में कैसे वो रखेंगे नहीं रखेंगे .
ना मुझे मतलब हिंदुओं की बेटी चाहिए लेकिन बेटा नहीं हिंदू के पानी का गिलास नहीं चाहिए हिंदू की बेटी चाहिए हिंदू के साथ खाना नहीं खाएंगे हिंदू की बेटी चाहिए हमको ये रियल फैक्ट है तो हिंदू परिवार तो बहुत ही घबराता होगा कि अगर घर में बेटी पैदा हो जाएगी तो ये मैं अपनी आपको पर्सनल बात बताऊं।
दूसरों का मैं नहीं बोल सकता। ये आज नहीं मेरी छ साल पहले से जब ये इशू हुआ है। अगर मैं मेरी लड़की होगी तो मैं इधर नहीं होगा। ये मैंने छ साल सात साल पहले ही कसम खाई थी। इशू भी नहीं हुआ था। उससे पहले का जो मैंने यहां का निजाम देखा है। अगर जब मेरे घर में लड़की पैदा होगी मैं अंदर नहीं हूं। मतलब एक बाप को यह डर हमेशा सताता रहता है कि बेटी हुई और जरा बड़ी हुई तो ये लोग इसको उठाकर लेकर चले जाएंगे। सनी भाई जैसा मैं पहले कह रही थी मैं बहुत फिक्रमंद हूं। आप हमसे ऐसे बात कर रहे हैं। आपको सच में अपनी जान का खतरा नहीं है। अभी ये चलेगा उसके बाद क्या होगा? जो भी होगा वो तो मैं बर्दाश्त कर लूंगा। जितना मैंने बर्दाश्त किया है ऐसे वीडियो के बाद तो इतनी ज्यादा तकलीफ नहीं आएगी जितनी मैंने फेस की हुई है। लेकिन जो आएगी मैं फेस कर लूंगा।
और आज भी मुझे मुझे यह भी पता है जिस तरीके से मैं ओपनली आपसे बात कर रहा हूं तो इसका जो भी होगा तकलीफ वो मुझे बर्दाश्त करनी पड़ेगी और बहुत सी चीजें हैं जो मैं नहीं बोल सकता जो मुझे पता है ये मुझे नहीं बोलनी चाहिए अगर मैंने बोली तो मेरे लिए इशू हो जाएगी सनी भाई एक बात बताइए कहीं ऐसा तो नहीं है कि हिंदुस्तान का जो बदला है वो वहां के हिंदुओं से ले रहे हो क्योंकि उनकी अपनी कोई सोच होगी यह बड़ी बातें हैं हम छोटे लोग हैं। आपकी इस मुस्कान में मैं सिर्फ दर्द देख पा रही हूं और यहां इस सरहद पार से आपको बस हम खूब सारी दुआएं दे सकते हैं और हिम्मत ही भेज सकते हैं और हम कोशिश करेंगे कि न्यूज़ की पाठशाला के दर्शक टाइम्स नाउ नव भारत के दर्शक यहां की सरकार आपकी इस बात को सुने और वहां पाकिस्तान में रह रहे हिंदुओं के दर्द को समझे और यह विश्व पटल तक जाए कि कैसे एक भाई अपनी बहन की इज्जत के लिए, अपनी लड़ाई के लिए ऐसे लड़ रहा है। किसी भाई को इस तरह से, किसी पिता को इस तरह से, किसी मां, किसी परिवार को इस तरह से तकलीफ में ना डालें। हम तो सिर्फ यह दुआ कर सकते हैं।
लेकिन पाकिस्तान में यह हो रहा है। हिंदू परिवारों के साथ इवन क्रिश्चियन परिवारों के साथ बड़े लेवल पर कन्वर्शन का यह खेल चल रहा है। और सिर्फ इसलिए क्योंकि उनको लगता है कि इससे उन्हें जन्नत मिल जाएगी। यह सवाब का काम है। घरों को तोड़ देना। खौफ कायम कर देना उन घरों में। इनको लगता है कि इससे जन्नत मिल जाएगी। अब आप कहेंगे मैडम पाकिस्तान में इतनी ज्यादती हो रही है हिंदू महिलाओं पर। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के लिए कोई तो कानून होगा ना? बिल्कुल है पाकिस्तान में कानून। और यह कानून बना है दिसंबर 2025 में। अब से डेढ़ साल पहले पाकिस्तान की संसद में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग विधेयक 2025 पारित किया गया। इस कानून में व्यवस्था है कि अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले भेदभाव को रोका जाए। उनकी शिकायतों की जांच की जाए। 2020 में अल्पसंख्यकों के लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग बनाया भी गया जो एडहॉक बेसिस पर काम भी कर रहा था। वो भी तब जब पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने वहां की सरकार को फटकार लगाई। लेकिन क्या ढाक के तीन पात सब मिले हुए हैं। पूरा सिस्टम मिला हुआ है। आयोग बन गया लेकिन कोई काम का नहीं। हकीकत मैं आपको बताती हूं। इस आयोग को वहां के लोग ट्रुथलेस कहते हैं। दंतहीन क्योंकि संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े बताते हैं। यह सिमरन वाला केस संयुक्त राष्ट्र में भी पहुंचा। उसके बावजूद कुछ नहीं किया यहां की सरकार ने। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े हैं आपके सामने। पाकिस्तान में जबरदस्ती धर्मांतरण मामले में 75% केस हिंदुओं [संगीत] से जुड़े हुए हैं। 25% ईसाई 14 से 18 साल की लड़कियों को खासतौर पर शिकार बनाया जाता है। यह चिंता की बात है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल सिर्फ बाहर से नहीं उठ रहे। पाकिस्तान की संसद के अंदर भी गूंज रहे हैं। जून 2024 में पाकिस्तान के तत्कालीन रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में माना कि देश में धार्मिक अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है। कहा कि इस्लाम के नाम पर हर दिन अल्पसंख्यकों की हो रही है।
वो सुरक्षित नहीं है। सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि इस्लाम के अंदर जो ये छोटे-छोटे अलग-अलग फिरके हैं उन्हें भी हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है। इन्होंने कहा है अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए सरकार। ऐसी घटनाओं से पाकिस्तान की दुनिया भर में बदनामी हो रही है। लेकिन कोई फर्क पड़ता है इनको तो जन्नत की पड़ी। आज आपको यह भी याद करना चाहिए कि पाकिस्तान को चलाने वाली वहां की सेना के जनरल आसिम मुनीर हिंदुओं के बारे में राय क्या रखते हैं। वो यह कहते हैं हम एक नहीं दो राष्ट्र हैं।
हमारे पूर्वज का यह मानना था कि हम हर मामले में हिंदुओं से अलदा हैं। हमारा मजहब, रिवाज, परंपरा, सोच, मकसद सब अलग है। और इसीलिए तो यह इस तरीके के करते हैं। पाकिस्तान के जनरल असीम मुनीर को यह लगता है कि यह एक नहीं है। इनके पूर्वज कोई और ही थे। सुरखाब के पर लगाकर आए थे। जरा सोचिए खुद को पाकिस्तान की सबसे ताकतवर हस्ती ये अपने आप को मानता है। और हिंदुओं के खिलाफ सोच क्या है? तो कट्टरपंथी तो यही देखेंगे ना कि उनका सरगना कैसा है। हमारे साथ निखिल चंदवानी भी जुड़ चुके हैं जो पाकिस्तान में प्रताड़ित हिंदुओं के लिए बहुत काम कर रहे हैं और ना सिर्फ वहां पर जो हिंदू बसे हैं उनके संपर्क में हैं बल्कि उनसे जो वहां से जो हिंदू यहां आ गए हैं उनके लिए भी बहुत काम कर रहे हैं।
निखिल बहुत-बहुत स्वागत है आपका। सबसे पहले तो बहुत नेक काम कर रहे हैं आप। एक बड़ा और महत्वपूर्ण जो सवाल है वो यही कि पाकिस्तान में इस वक्त हिंदुओं को समस्या क्या आ रही है? इंटीरियर सिम में एवरीडे तीन से पांच हिंदू लड़कियां किडनैप होती है। 1947 से आज तक मेरी तीन से पांच हिंदू लड़कियां 11 से 13 साल की उम्र में किडनैप हो जाती है। किडनैप होने के बाद वो एक मौलाना उनको अपने मदरसा में ले जाता है।
मदरसा में वो लड़की के साथ हलाला होता है। हलाला होने के बाद उसका फेक सर्टिफिकेट बनाया जाता है और दिखाया जाता है कि वो 19 साल की है। एक बार उसको 19 दिखा दे उसके बाद इसकी शादी करा दी जाती है। पहले कलमा पढ़वाया जाता है। तीन दिन तक इसको लड़की को भूखा रखा जाएगा। भूखा रखने के बाद इसको बहुत टॉर्चर किया जाता है। मारा जाता है। ऐसी ऐसी चीजें की जाती है जो बस वीडियोस में अभी अवेलेबल है। वहां जो हिंदू परिवार है ये इस हालात में यही तो दुआ करते होंगे कि बस सब हो जाए। किसी भी कीमत पर हमारे घर में बच्ची ना हो।
एक्सक्टली मैम इसी चीज के कारण देखती हूं कि ये एजुकेशन बंद कर देते हैं 9 10 साल की उम्र में। काफी सारे लोगों को वहां से हम लोगों ने निकाल के यहां पर लाया है। तो जब हम बताते हैं इनको की दसवीं के बाद भी पढ़ाई होती है बच्चे की। वो बोलते है नहीं हम नहीं पढ़ाएंगे हम शादी करा देंगे। अब मैं जब उनके पास गया उनसे इंटरेक्ट किया उनसे बात किया तब पता चला कि उनके अंदर ये डर रहता है कि बच्ची अगर शादीशुदा ना हो दसवीं के बाद 11वीं के बाद 12वीं के बाद तो वो किडनैप हो जाएगी। उसके साथ बहुत गलत हो जाएगा। पूरी फैमिली टूट जाएगी। निखिल ये जो बातें आप बता रहे हैं ये सच में मतलब समझ नहीं आ रहा है। आप यह कह रहे हैं कि इतने डरे हुए होते हैं वहां से आए हिंदू यहां पाकिस्तान से आए कि वो यह कहने लग जाते हैं कि हम तो 10वीं तक ही पढ़ाएंगे फिर शादी कर लेंगे। वो जानते ही नहीं है कि 11वीं 12वीं भी पढ़ा सकते हैं।
मतलब यह हैरान करने वाली चीज है जो आज मैं सुन रही हूं। और अगर वहां से हिंदू परिवार यहां आना चाहे तो आप उनकी मदद नहीं करते हैं। चैलेंज क्या आता है सबसे बड़ा? अगर वो आना चाहे वो बचना चाहे तो पैसा दे रहे है इनको डॉक्यूमेंट बनाने का और हम लोग से बस यहां से एक स्पोंसरशिप लेटर लगता है कोई भी अगर इंडिया आना चाहता है उनके परिवार का एक लेटर लगता है और वो एकेड ऑफिसर स्प होना जरूरी है उसके बाद ही उनका वीजा छ से आठ महीने के करो बैकग्राउंड चेक जो की बहुत जरूरी भी है वो होने के बाद इनका अप्रूव होता है बट वो छ से आठ महीने का जो टाइम रहता है तब पाकिस्तान में खबर है भी जाती है कहीं कहीं से उठ जाता पड़ोसी बता देते हैं कि ये लोग अपनी प्रॉपर्टी बेचने वाले हैं। ये लोग इंडिया जाने वाले हैं। तभी जो मुस्लिम लैंड है वहां पे वो इनकी जमीन को हड़प लेते हैं।
इनके घर को ले लेते हैं। इनको धमकियां देने लगते हैं। उसके बाद इन पे फेक एफआईआर करा देते हैं ताकि इनका वीजा अप्रूव ना हो। अगर एफआईआर हो गया था तो वी कैन नॉट बी पाकिस्तान करना पड़ेगा।
मतलब किसी तरह का कोई बेहतरी का रास्ता नहीं। अगर आप कहीं और जाना चाह तो वह आप पर केस कर लेंगे। आपके घर बार को लूट लेंगे। आप पर और दबाव बनाएंगे। और यही तो वजह है कि जो हिंदुओं की आबादी वहां डबल डिजिट में हुआ करती थी 47 के बाद वो आज लगभग 1ढ़% हो गई है। तो जिनको यह कहना है कि देखिए क्या हाल है अकलियत अकलियत का यानी माइनॉरिटीज का तो वो पाकिस्तान का चेहरा जरूर देखें। और इतिहास कहता भी है कि सभ्यताओं की पहचान उनकी इमारतों से नहीं इस बात से होती है कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिक के साथ व्यवहार कैसा करती है। पाकिस्तान में जब भी किसी हिंदू परिवार की बेटी के अपहरण, जबरन धर्मांतरण या किसी हिंदू की हत्या की खबर आती है.