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कैसे ताश के महल की तरह टूट गया देश के सबसे बड़े निर्माता-निर्देशक का साम्राज्य?

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नीले गगन के कले धरती का प्यार पले हम जब सिमट के आपकी बाहो में आ गए उनकी फिल्मों की लोकप्रियता का जादू ऐसा था कि लोग देश विदेश तक चर्चा करते थी ये देश है वीर जवानों का अलबेलो का मस्तानों का इस देश का यारो उनका जलवा ऐसा था कि बड़े से बड़ा स्टार भी उनके फिल्मों में कांस पाने के लिए बेताब रहता था तुम अगर साथ देने का वादा करो छोटे पर्दे यानी भारतीय टेलीविजन पर तो उन्होंने इतिहास ही रच दिया महाभारत लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह निर्माता निर्देशक अपने करियर की शुरुआत में ही उस दौर के सबसे चर्चित फिल्मी जोड़ी के अलग होने की वजह बन गए थे बार फिर से अजनबी बन जा क्या आप सोच सकते हैं कि इनकी एक फिल्म पर एक दो नहीं बल्कि 34 मुकदमे दर्ज हुए थे दिल की ये आरजू थी कोई दिल रुबा और क्या आप यकीन करेंगे कि इन पर एक विदेशी फिल्म निर्माता कंपनी ने कहानी चुराने का आरोप लगाया था और मांगा था करोड़ों का हरजाना मिस्टर बद्री प्रसाद कातिल आप है धनीराम का खून करते हुए कौन थे ये फिल्मकार जिन्होंने बतौर पत्रकार अपना जीवन शुरू किया और बन गए टॉप के निर्माता निर्देशक मेरी जोहर जबी तुझे मालूम नहीं तू अभी तक है

हसी और क्यों रहा इनका और देश के नंबर वन गायक रहे मोहम्मद रफी का 36 का आंकड़ा और एक प्रतिष्ठित फिल्मी खानदान के मुखिया होने के बावजूद कैसे ताश के पत्तों की तरह बिखर गया इनका फिल्मी साम्राज्य जानेंगे और भी बहुत कुछ आप बने रहिए हमारे साथ जिंदगी इत्तेफाक है कल भी इत्तेफाक थी नमस्कार दोस्तों आप देख रहे हैं ड्रामा सीरीज भारत और मैं हूं आपकी दोस्त और होस्ट श्वेता जया आज हम बात करने वाले हैं हिंदी फिल्मों के महान निर्माता निर्देशक बलदेव राज चोपड़ा यानी बी आर चोपड़ा साब के बारे में जिन्होंने ना सिर्फ सुपरहिट और ब्लॉकबस्टर फिल्मों की सीरीज खड़ी कर दी बल्कि कई कलाकारों को स्टार बना डाला ंड ठंडे पानी से नहाना चाहिए ना आए या ना आए हिंदी सिनेमा के नामी निर्माता निर्देशक रहे बीआर चोपड़ा ने प्रोडक्शन हाउस बीआर फिल्म्स की स्थापना की इसके बैनर तले कई सफल फिल्मों का निर्माण किया गया लेकिन आज इसका कोई नाम लेने वाला तक नहीं है आखिर ऐसा क्या हुआ कि सब कुछ बर्बाद हो गया दिल के अरमा आंसुओ में बह गए दोस्तों बलदेव राज चोपड़ा हिंदी सिनेमा की एक ऐसी शख्सियत रहे जिन्होंने कई लोकप्रिय फिल्मों की सौगात दी और इससे भी बढ़कर छोटे पर्दे की दुनिया में इन्होंने महाभारत जैसा धारावाहिक शो का निर्माण किया जो बेहद लोकप्रिय रहा तुमने अभी गांडीव की प्रत्यंचा की टंक नहीं सुनी अंगराज आपने भी अभी तक मेरे विजय धनुष की टंक नहीं सुनी है मद्र नरेश बात करें इनके शुरुआती जीवन की तो बलदेव राज चोपड़ा का जन्म 22 अप्रैल 1914 को तत्कालीन पंजाब के नवा शहर के राहन कस्बे में हुआ था आजकल यह इलाका शहीद भगत सिंह नगर का हिस्सा है इनके पिता विलायती राज चोपड़ा ब्रिटिश सरकार की नौकरी में थे बचपन भी वहीं बीता

फिर लाहौर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद 1944 में यह मासिक पत्रिका सिने हेराल्ड से जुड़ गए बाद में इन्होंने खुद भी एक पत्रिका का पब्लिकेशन शुरू किया लेकिन जब आजादी के समय देश का विभाजन हुआ तो यह मुंबई चले गए वहां यह फिल्म निर्देशन और निर्माण से जुड़ गए 1949 में इन्होंने फिल्म करवट के निर्देशन में सहयोग दिया 1951 में फिल्म अफसाना आई तो इससे अपने फिल्म निर्माण करियर की शुरुआत की वो आए पहार लाए बजी शहनाई त पिया मिलन की आई इनकी यह पहली फिल्म खासी लोकप्रिय रही इसके बाद इन्होंने शोले चांद चौक और एक ही रास्ता आदि फिल्मों का निर्देशन किया सलोने आए दिन बहार के ूम न कुछ में बतौर को प्रोड्यूसर पैसा भी लगाया लेकिन साल 1955 में इन्होंने अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस बीआर फिल्म शुरू किया नया दौर इस बैनर के तहत बनने वाली पहली फिल्म थी मांग के सा तुम्हारा मैंने मांग लिया संसार इस फिल्म के निर्माण की कहानी कई मायनों में महत्त्वपूर्ण है इस फिल्म में इन्होंने दिलीप कुमार के साथ वजती माला को पर्दे पर उतारा था हालांकि वोह दिलीप कुमार की करीबी रही मधुबाला को फिल्म में लेना चाहते थे लेकिन फिल्म लगभग पूरी तरह एक आउटडोर लोकेशन पर शूट होनी थी और अदाकारा के पिता ने एन वक्त पर अपनी बेटी को शूटिंग के लिए बाहर भेजने से मना कर दिया हाथ बढ़ाना साथ ही हाथ बढ़ाना बाद में इसको लेकर बीर च और मधुबाला में मुकदमे बाजी भी हुई जिसमें दिलीप कुमार ने फिल्म निर्माता का ही साथ दिया कहते हैं यह मुकदमे बाजी ही मधुबाला और दिलीप कुमार के अलगाव की वजह बनी और बाद में उन्होंने किशोर कुमार से शादी की इस बारे में एक विस्तृत वीडियो इसी चैनल पर मौजूद है जिसका लिंक आई बटन में दिया गया है कम लोगों को मालूम होगा कि इस फिल्म के कारण बीर चोपड़ा और महान गायक मोहम्मद रफी में भी अनबन हो गई थी फिल्म में कुल नौ गाने थे जिनमें से सात में रफी साहब की सुरी आवाज का जादू बिखरा था आना है तो आरा हमें कुछ फेर नहीं है भगवा लेकिन विवाद की जड़ वो कांट्रैक्ट था जिसे बी आर चोपड़ा साहब साइन करवाना चाहते थे कांट्रैक्ट में शर्त थी कि मोहम्मद रफी इस फिल्म के बाद बीआर फिल्म की आने वाली तीन फिल्मों के भी गाने गाएंगे इस शर्त पर रफी साहब को कोई ऐतराज नहीं था लेकिन उन्होंने कांट्रैक्ट की अगली शर्त को मानने से इंकार कर दिया शर्त यह थी कि वह बर फिल् के अलावा किसी और कंपनी के लिए गाना नहीं गाएंगे बताया जाता है कि फिल्म नया दौर के सभी गाने चार्ट बस्टर होने के बावजूद चोपड़ा साहब ने अपनी अगली फिल्मों में रफी साहब से दूरी बना ली साथ ही हाथ बढ़ाना साथ ही हाथ बढ़ाना उन्होंने गुस्से में यहां तक कह दिया कि वह दूसरा मोहम्मद रफी खड़ा कर देंगे चोपड़ा साहब ने बाकी के प्रोड्यूसर से भी कहना शुरू कर दिया कि रफी साहब को अपनी फिल्मों में ना ले लेकिन प्रोड्यूसर डायरेक्टर इसके लिए राजी नहीं हो रहे थे साल 1965 में संगीतकार रवि बियर फिल्म्स की फिल्म वक्त में एक गाने को रफी साहब से गवाने पर अड़ गए शुरू में तो बीआर चोपड़ा नहीं माने लेकिन बाद में उन्होंने रवि साहब को अनुमति दे दी कि वह जिससे चाहे उससे गवा लें कहा जाता है कि चोपड़ा साहब ने रवि को एक ब्लैंक चेक देकर रफी साहब से गवाने की पेशकश की थी

लेकिन उस महान गायक ने उतने ही पैसे लिए जितना वह दूसरे प्रोड्यूसर से लेते थे थे वक्त से दिन और रात वक्त से कल और इन तीन फिल्मों वाले एक्सक्लूसिव कांट्रैक्ट के चलते बीआर चोपड़ा साहब को एक और परेशानी में फंसना पड़ा इसका जिक्र हम आगे करेंगे बीआर फिल्म्स के बैनर में चोपड़ा साहब ने 1958 में साधना 1960 में कानून और 1963 में फिल्म गुमराह बनाई जो खासी लोकप्रिय रही तुझको मेरा प्यार पुकार इनके इन फिल्मों के कई रिमेक भी बने इनके फिल्मों की सफलता को देखते हुए बड़े-बड़े फिल्म स्टार इनके साथ काम करने को इच्छुक रहते थे और अपनी फीस आधी करने को भी तैयार हो जाते थे साल 1965 66 के आसपास इन्होंने राजकुमार सुनील दत्त आदि कलाकारों को लेकर मिस्ट्री थ्रिलर फिल्म हमराज बनाने का फैसला किया इस फिल्म में एक नया चेहरा हीरोइन के तौर पर लिया गया जिसका नाम था विमी नाम छुपा और ना सर झुका के जियो इस नई हीरोइन से भी चोपड़ा साहब ने तीन फिल्मों का कांट्रैक्ट साइन करवाया जैसा वह नया दौर के समय रफी साहब के साथ करना चाहते थे विमी ने फिल्म की आधी से ज्यादा शूटिंग पूरी करने के बाद चोपड़ा साहब को परेशान करना शुरू कर दिया और आखिरकार ब्लैकमेल कर कांट्रैक्ट तुड़वा लिया विमी के बारे में भी विस्तृत वीडियो इसी चैनल पर मौजूद है यह फिल्म 1967 में रिलीज हुई थी और खासी लोकप्रिय रही किसी पत्थर की मूरत से मोहब्बत का इरादा इन्होंने अपने छोटे भाई यश चोपड़ा को भी निर्देशन के गुण सिखाए और जब वह अपने विधा में पारंगत हो गए तो उन्हें अपने प्रोडक्शन हाउस में भी चांस दिया 1969 में आई फिल्में आदमी और इंसान और इत्तेफाक ऐसी ही फिल्में थी जिनका निर्माण तो बीआर फिल्म्स ने किया था लेकिन निर्देशन यश चोपड़ा का रहा और यह दोनों ही फिल्में खासी लोकप्रिय रही कल भी इत्तेफाक थी आज भी इत्तेफाक है 1970 में यश चोपड़ा ने अपने फिल्म कंपनी यशराज फिल्म्स भी बनाई जिसे रोमांटिक और नारी प्रधान फिल्मों के निर्माण की दिशा में मील का पत्थर माना जाता है जिनका जिक्र हम किसी और वीडियो में करेंगे अभी बात बी आर चोपड़ा साहब की बी आर चोपड़ा साहब ने 70 के दशक में कई हिट सुपरहिट या ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाई जिन्होंने वर्सों तक लोगों का मनोरंजन किया बेटे एक डाकू बने रहने से एक अच्छा इंसान बनना बेहतर है उस दशक की प्रमुख फिल्में रही 1972 में आई दास्तान 1973 में रिलीज धुंध 1975 में रिलीज जमीर और 1978 में रिलीज फिल्म पति पत्नी और वो तेरे नाम तेरे नाम तेरे नाम दिल तेरे नाम तेरे नाम तेरे नाम तेरे नाम 1980 के दशक में बीआर चोपड़ा सामाजिक मुद्दों को लेकर फिल्में बनाने के कारण चर्चा में रहे दशक की शुरुआत में ही इन्होंने फिल्म इंसाफ का तराजू बनाकर तहलका मचा दिया फिल्म को जीनत अमान और पद्मिनी कोल्हापुरे के बोल्ड सींस की वजह से भी खासी पब्लिसिटी मिली थी हालांकि इस फिल्म के लिए बीआर चोपड़ा साहब को खासी आलोचना भी झेलनी पड़ी लेकिन 2 साल बाद ही इन्होंने साफ-सुथरी और संगीत प्रधान फिल्म निकाह बनाकर आलोचकों के मुंह पर ताला लगा दिया दिल की ये आरजू थी कोई दिल रुबा हालांकि यह फिल्म अन्य कई वजहों से चर्चा में रही फिल्म में पाकिस्तानी मूल की अदाकारा सलमा आगा को पहली बार पर्दे पर उतारा गया था जिनके रूप रंग के साथ-साथ आवाज की भी काफी प्रशंसा हुई है हवा फिल्म तो ब्लॉकबस्टर हुई ही इसका संगीत भी बेहद लोकप्रिय हुआ चुप चुप रात दिन मुख्य अदाकारा और फिल्म के सात में से पांच गानों में अपनी आवाज देने वाली सलमा आगा को दिल के अरमा गाने के लिए उस साल का सर्वश्रेष्ठ गायिका का पुरस्कार भी मिला केरमा आसुओं में ब फिल्म ने और भी कई अवार्ड जीते और इसे कई कैटेगरी में नॉमिनेशन भी मिला लेकिन मुस्लिम समाज में तलाक और हलाला की कुरीतियों पर प्रहार करने वाली इस फिल्म को मुकदमे बाजी का भी शिकार होना पड़ा फिल्म और इसके निर्माता निर्देशक बी आर चोपड़ा पर देश भर की विभिन्न अदालतों में 34 मुकदमे दर्ज हुए इसकी लेखिका महान साहित्यकार अमृत लाल नागर की पुत्री अचला नागर थी

जिन्हें बेस्ट डायलॉग राइटर का फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला था 80 के दशक में बीआर चोपड़ा साहब ने छोटे पदे यानी टेलीविजन जगत में भी प्रवेश किया और 1985 में दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक बहादुर शाह जफर का भी निर्देशन किया इस धारावाहिक के प्रोड्यूसर उनके पुत्र रवि चोपड़ा थे जिले सुभानी तशरीफ ला रहे हैं 1988 में बीआर चोपड़ा साहब ने महाभारत पर धारावाहिक बनाकर मानो इतिहास रच दिया दूरदर्शन पर कुछ ही दिनों पहले समाप्त हुए लोकप्रिय धारावाहिक रामायण के बाद यह भारतीय धार्मिक दर्शकों के लिए एक बड़ी सौगात थी इस धारावाहिक के पात्र दर्शकों को आज भी पूरी तरह याद हैं और उनके डायलॉग्स अभी तक लोगों की जुबान पर है यह प्रतिद्वंदी दिव्यास्त्र के योग्य है पार्थ दिव्यास्त्र चलाओ जो आज्ञा केशव इसके बाद के वर्षों में बी आर चोपड़ा ने फिल्में बनाने पर कम ध्यान लगाया और टीवी धारावाहिकों पर ज्यादा केंद्रित किया इसके अलावा साल 1997 से 98 में दूरदर्शन पर प्रसारित इनका धारावाहिक महाभारत कथा भी खासा लोकप्रिय रहा जिसमें महाभारत युद्ध के बाद बचे घटोतकच हिडिंबा और बर्बरिक आदि के जीवन को दर्शाया गया था हालांकि बाद के वर्षों में निजी चैनलों के बाजार में उतरने के कारण दूरदर्शन के दर्शकों में भारी कमी आई लेकिन साल 2000 से 2002 तक प्रसारित विष्णु पुराण दुश्मन और आप बीती आदि सीरियलों ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा वो इस घर में आएगी उसकी पाजेब की झंकार से यह पूरा घर गूंज उठेगा साल 2003 में बीआर चोपड़ा साहब ने अपने प्रिय कलाकार नितीश भारद्वाज को लेकर रामायण सीरियल का भी निर्माण किया जिसे जी टीवी पर प्रसारित किया गया था हालांकि लोकप्रियता में यह रामायण रामानंद सागर के का वाही की बराबरी नहीं कर पाया लेकिन उस दौर में यह सबसे लोकप्रिय सीरियल्स में शामिल जरूर रहा साल 2002 में इनकी फिल्म बागवान ने एक बार फिर फिल्म निर्माण की इनकी क्षमता को साबित कर दिया मैं यहां तो वहां जिंदगी है कहां इस फिल्म का निर्देशन इनके बेटे रवि चोपड़ा ने किया था फिल्म में अमिताभ बच्चन हेमा मालिनी और सलमान खान ने बेहद सशक्त अभिनय किया था बागवान फिल्म इसलिए भी चर्चित रही क्योंकि एक अरसे बाद अमिताभ और हेमा एक दूसरे के अपोजिट दिखे थे सोनी तेरी चाल सोनी लग दी कमाल सोनी वे अचला नागर की

लिखी यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई जो बच्चे अपने मां-बाप को प्यार नहीं दे सकते उन्हें मैं कभी माफ नहीं करता हालांकि सितारों और निर्माता निर्देशकों का यह समीकरण साल 2006 में रिलीज फिल्म बाबुल में भी था लेकिन अपनी सफलता की कहानी नहीं दोहरा पाया बीच के वर्ष 2004 में इन्होंने सहारा वन चैनल के लिए हेमा मालिनी को लेकर धारावाहिक कामिनी दामिनी का भी निर्माण किया था लेकिन इसे भी कोई खास लोकप्रियता हासिल नहीं हो पाई साल 2008 में अमिताभ बच्चन को लेकर इन्होंने एक और फिल्म भूतनाथ बनाई जो दर्शकों के बीच खासी लोकप्रिय रही इसे लिए तुम्हें यहां नहीं रहना चाहिए चलो जा यहां से क्यों जाओ बल्कि इस घर को साफ करना चाहिए मैं तुझे करने नहीं दूंगा इसी साल 5थ नवंबर को 94 वर्ष की आयु में बी आर चोपड़ा साहब का निधन हो गया बी आर चोपड़ा साहब ने कुल 50 के आसपास फिल्मों और धारावाहिकों का निर्माण किया था और करीब दो दर्जन फिल्मों को ही खुद निर्देशित किया था लेकिन इनकी फिल्मों ने खूब पुरस्कार बटोरे बतौर फिल्मकार इन्हें दादा साहब फालके पुरस्कार और देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है इनके तीन भाइयों में यश चोपड़ा भी निर्माता निर्देशक थे जबकि धर्म चोपड़ा सिनेमेट ग्राफर थे इनके सबसे छोटे भाई फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े थे इनके बेटे रवि चोपड़ा भी मशहूर निर्देशक थे बीर चोपड़ा साहब के मित्र और फिल्मकार आईएस जौहर के छोटे भाई यश जौहर से उनकी बहन हीरू चोपड़ा की शादी हुई थी उदय चोपड़ा आदित्य चोपड़ा इनके भतीजे हैं और करण जौहर इनके भांजे अब आते हैं उस मसले पर जिसने बीआर चोपड़ा साहब को अपयश भी दिलाया और इनके परिवार की बर्बादी का कारण भी बना साल 2008 में ही इन्होंने एक फिल्म का निर्माण शुरू किया था

जिसका नाम था बंदा यह बिंदास है फिल्म के निर्देशक रवि चोपड़ा थे और हीरो गोविंदा जबकि हीरोइनें तबू और लारा दत्त थी फिल्म 2009 में रिलीज को तैयार भी थी लेकिन अचानक एक अंग्रेजी फिल्म कंपनी 20 सेंचुरी फॉक्स ने रवि चोपड़ा को नोटिस थमा दिया कि यह फिल्म उनकी 1992 की फिल्म माय कजिन विन्नी की नकल है हालांकि बीआर चोपड़ा साहब ने फिल्म 20 सेंचुरी फॉक्स से यह फिल्म बनाने का परमिशन भी ले रखा था लेकिन कंपनी अदालत जा पहुंची करीब पाच सालों तक यह फिल्म मुकदमे बाजी के कारण रिलीज नहीं हो पाई और साल 2014 में रवि चोपड़ा का भी निधन हो जाने से मुकदमा अधर में लटक गया बीआर चोपड़ा साहब ने फिल्मों में एक लंबी पारी खेली और हर मोर्चे पर सफल रहे आज यह बेशक हमसे दूर चले गए हो लेकिन इनकी फिल्में और धारावाहिक इन्हें हमेशा हमारे पास रखेंगे तो दोस्तों यह वीडियो आपको कैसा लगा हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर अवश्य बताएं अगर आपके पास भी चोपड़ा साहब से जुड़ी कोई और जानकारी हो तो भी हमें लिखना ना भूलें अब दीजिए अपने दोस्त और होस्ट श्वेता जया को इजाजत नमस्कार [संगीत]

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