उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में जा रही है। पता करने की कोशिश कर रही है कि क्या मुद्दे हैं। सरकार को लेकर, धामी सरकार को लेकर लोग क्या कुछ राय रखते हैं। इस वक्त मेरे पीछे आप देख रहे हैं नकोट।
यह शब्द आपको नजर आ रहा होगा। दरअसल यह एक कस्बा है। मैं इस वक्त टिहरी गढ़वाल जिले में हूं। जहां पर नकोट के अंदर आने का एक उद्देश्य है।कि यहां से एक शख्स हैं जिनसे हमारी मुलाकात हुई राह चलते और उन्होंने कुछ ऐसी बातें हमें बताई कि हम मजबूर हो गए कैमरा चालू करने के लिए और इस मुद्दे को आपके बीच लाने के लिए। यह मुद्दा बहुत ही इस वक्त सुर्खियों में भी है। जब उत्तराखंड का जिक्र आता है तो डेमोग्राफी चेंज की बात भी होती है।
क्योंकि मौजूदा सरकार इस पर बहुत कुछ कह रही है। खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कई मंचों पर डेमोग्राफी चेंज पर आपको बोलते मिल जाएंगे। उत्तराखंड मैदान और पहाड़ दो रीजनों में बटा हुआ है। पहाड़ी इलाका अपने आप में बड़ा क्षेत्रफल रखता है। मैदान अपेक्षाकृत कम है। लेकिन मैदान में डेमोग्राफी चेंज बहुत हद तक हो चुका है। ऐसी बातें कही जाती हैं।
ऐसा दावा किया जाता है। चाहे आप देहरादून की बात कर लें, हद्वानी की बात कर लें, अह उधम सिंह नगर की बात कर लें। जिले दर जिले मैदान में बहुत परिवर्तन आया है। लेकिन, यह परिवर्तन क्या पहाड़ों में भी आ रहा है? क्या डेमोग्राफी चेंज वाकई लोगों के बीच का मुद्दा है? तब जब हम चुनाव में जा रहे हैं। तब जब चुनाव होने वाले हैं और तब जब सरकार डेमोग्राफी चेंज को रोकने का वादा करती है। जनता से दावा करती है। तो इसी बीच एक नाम आता है नकोट का। यहां एक स्थानीय व्यक्ति हमें मिले। उन्होंने हमें बताया कि किस तरीके से यहां पर ऐसी कुछ घटनाएं हाल फिलहाल में हुई जो बता रही हैं कि किस तरह से बाहरी असामाजिक तत्व आ रहे हैं। जो कि माहौल को खराब कर रहे हैं।
जितिन हमारे साथ हैं जितन उनियाल जी। जितिन जी आप हमें मिले। अभी हम जा रहे थे कवरेज के लिए। कैसे आप कह रहे हैं कि यहां डेमोग्राफी चेंज हो रहा है? नमस्कार सर। सबसे पहले मैं आपका जो चैनल है उनका धन्यवाद करना चाहूंगा कि भाई आप लोग आए और यहां पर आपने कोशिश की जानने की कि क्या यहां पे क्या कुछ चल रहा है। तो जो मैं आपको कहना चाहता हूं जो यहां पे सबसे जो मेन मुद्दा है वो यहां पे डेमोग्राफी जो चेंज हो रही जिस प्रकार से पहाड़ों की और अभी हाल ही में यहां पर जो चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। तीनचार चोरियां यहां पर मंदिरों में हो चुकी हैं और जिस प्रकार से बाहरी लोगों को हम ही लोग उनको पनाह देते हैं।
उनको बसाते हैं यहां पे और वह लोग काम के बहाने जैसे पेंट के बहाने घर में लकड़ी का काम, लोहे का काम, इस मिस्त्री का काम इस प्रकार के कामों के बहाने वह हमारे क्षेत्र में एंट्री कर रहे हैं। भारी जो गुंडे हैं जो जिहादी हैं और वह रेकी करते हैं पूरे क्षेत्र में और फिर उसके बाद वह चोरी को अंजाम देते हैं और इसमें जो सम्मिलित होते हैं जो लोकल में जो बाहरी जिहादी रह रहे हैं जो वो एक दो ही यहां पर रहते हैं। लेकिन वो एक दो लोग चारों तरफ रेकी करते हैं कि कहां क्या हो रहा है और बाहर से जहां तक मेरा जैसा मुझे लगता है कि वो बाहर से लोगों को यहां पर बुलाते हैं और रातोंरात चोरियों को और अनेक अप्रिय घटनाओं को अंजाम देकर के और वो लोग रातोंरात फरार हो जाते हैं और चार चोरियां अभी यहां पर सर ऐसी हुई है जो जो कि पुलिस जो अभी तक सोई हुई है जिस पे तीन मंदिरों में चोरियां हुई है एक यहां पे बाइक चोरी हुई है। अभी हाल ही में जो आज तक पता नहीं चला किसने वह बाइक चोरी की।
इससे पहले यहां पे कोई भी ऐसी घटनाएं नहीं होती थी। लेकिन जो हमारे पूर्वज थे वह जो भारी जो जिहादी हैं उनको वो कभी भी घुसने नहीं देते अपने इलाके में। लेकिन आज के जो लोग हैं वह अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए अपनी संस्कृति को अपने उत्तराखंड की जो संस्कृति और मर्यादा है उसको दांव पे लगा करके अपने केवल व्यक्तिगत फायदे के लिए वो लोग इनको जगह देते हैं। अभी यहां पे बाइक चोरी हुई। तीन मंदिरों में चोरी हुई और यहां पर ऊपर डांडाचली नामक एक स्थान पड़ता है। वहां पर कम से कम 30 से 35 नए पाइप चोरी किए गए। जिसको चंबा पुलिस ने जिन्हें पकड़ा है और जो हरिद्वार से बरामद किए गए वह पाइप जो कि जिहादी थे दो तो मैं कहना यही चाहता हूं कि जो लोग इनको पनाह दे रहे हैं यहां पर बिना वेरिफिकेशन के ये लोग काम के बहाने आते हैं पूरे घर की रेकी करते हैं तो मैं कहना यह चाहता हूं कि जो लोग लोकल लोग इनको जो जगह दे रहे हैं जो अपना फायदा कुछ चंद पैसों के लिए किराए के लिए जो लोग इनको जगह दे रहे हैं मैं उनसे यही कहना चाहता हूं कि अगर आप हिंदू हो और एक सनातनी हो तो याद अगर आपके घर में मां बहन नहीं तो कम से कम आपके आसपास में मां बहनें होंगी। आपके गांव में मां बहनें होंगी। आपका कोई तो होगा लेडीज़ घर में। तो उनसे मैं यही कहूंगा कि उनकी आप चिंता कीजिए। केवल अपना फायदा ना देखिए।
अपने बच्चों की चिंता कीजिए। अपने जो माताएं बहने हैं उनकी चिंता कीजिए। जो डेमोग्राफी जो चेंज हो रही है जंगलों आपने देखा होगा 700 नाली जमीन किस प्रकार से विकास नगर जो जौनपुर का जो क्षेत्र है वहां पे कब्जा कर दिया गया तो ये लोग पहले सरकारी भूमि पे कब्जा करते हैं। फिर जब तक ये एक दो होते हैं तो ये लोग आप भरोसा जीतते हैं और जो क्षेत्र के लोग होते हैं उनसे दोस्ती करते हैं। लेकिन मैं उन लोगों से यही कहना चाहता हूं कि भाई हम हमें जिहादियों से बिल्कुल भी दोस्ती नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये लोग इनको घर में एंट्री देना इनको काम देना या अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ है अपने बच्चों के साथ और जो लोग इनको यहां पर जो दे रहे हैं पनाह मैं जो स्थानीय लोग हैं।
उनसे अपील करता हूं कि इनका विरोध होना चाहिए इन लोगों का इनसे किसी प्रकार की रिशेदारी ना रखी जाए। इनके घर में पानी भी ना पिया जाए क्योंकि यह सनातन के एक जो कहते हैं कि दुश्मन है सबसे बड़े दुश्मन हमारे ही जो हिंदू हैं वही दुश्मन है और बाहर से गुंडे प्रवृत्ति के लोग बार-बार आने कोई उनको ठेकेदार लेके आता है कोई उनको जो काम जो हम लोग नहीं कर पाते हैं जो लोग वो काम ये लोग करते हैं लोहे का काम मीट की दुकान नाई की दुकान तो स्थानीय लोगों से मैं यह भी कहूंगा कि आप चंद पैसों के लिए जो बाहर जा रहे हो इन पहाड़ों को छोड़ के अपनी जन्मभूमि को छोड़ के मैं उनसे यही कहूंगा कि भाई आप अपने बच्चों को मत पढ़ाओ बड़ी बड़ी-बड़ी डिग्रियां आप मत कराओ अगर आपके बस की नहीं है। लेकिन जो ये छोटे-मोटे काम है जो आपके बच्चे बाहर जाकर भी रोते हैं ।
तो आप लोकल में जो लोहे का काम है अपने बच्चे को सिखाइए। गाड़ियों के मिस्त्री का काम है वो अपने बच्चे को सिखाइए। आप नाई का काम सिखाइए अपने बच्चे को। मीट की दुकान खुलवाइए। लेकिन जो आप अगर इस तरीके से आप यहां से मुंह मोड़ लेंगे इन पहाड़ों से अपनी जन्मभूमि से कि आप यहां से चले गए। लेकिन जब आप यहां पर आएंगे तो आपको कश्मीर जैसी यहां पर हालत मिलेगी। कश्मीर में भी जो मालिक थे जो कश्मीरी पंडित थे उन्होंने अपने बगीचे, अपनी कोठियां अपना सब कुछ इनको नौकर की तरह इनको सौंपा था कि ये यहां पे नौकरी करेंगे, चौकीदारी करेंगे। तो हम लोग भी इसी प्रकार से इनको बसा रहे हैं। एक चौकीदार के रूप में यह काम मजदूर के रूप में। लेकिन जब हम मुंह मोड़ के जब लोग वापस आएंगे जो देश विदेश में हमारे पहाड़ी लोग हैं जब आप लोग वापस आएंगे तो तब तक आपको यहां पर कुछ नहीं मिलेगा। आपको केवल यही कहा जाएगा जैसे कश्मीर में कहा गया कि आप अपनी मां बहनों को छोड़ दो और आप या तो इस्लाम कबूल कर लो या तो आप कश्मीर को छोड़ दो। तो यही हम यह चाहते हैं कि जो घटनाएं निरंतर जिस प्रकार से जगह-जगह बढ़ रही हैं। हम लोगों को जागरूक करना चाहते हैं कि मैं रुद्रसेना भी मैंने ज्वाइन किए राकेश उत्तराखंडी जो लगातार जिन्होंने 100 से 110 लड़कियों को लव जिहाद से बचाया है। तो एक सनातनी होने के नाते मैं लोगों से यही अपील करता हूं कि इनको बाहर के लोगों को आप मत बसाइए। आप अपने लोगों को काम दीजिए और जो जो जवान बच्चे हैं जो हमारी युवती हैं जो हमारी बहनें उनसे भी मैं यह कहूंगा कि भाई आप सोच समझकर आप किसी से मित्रता करती हैं आप किसी से दोस्ती कर रही हैं तो आप सोच समझ के उसके बारे में सब कुछ जानिए तभी इनसे मित्रता कीजिए और दूसरा जो मुद्दा है दूसरा यहां पर जो स्वास्थ्य है स्वास्थ्य सेवा भी यहां पे ठप है।
क्योंकि जितने भी यहां से लोग जाते हैं चंबा टिहरी बोराड़ी से वो वहां से खाली हाथ लौट के उनको ऋषिकेश देहरादून भेज दिया जाता है इलाज के बहाने गर्भवती महिलाएं हमारी कई माताएं बहनें मर चुकी हैं और कईयों को सरकार चाहती है कि अब आगे भी मरती रहें और यहां से ऋषिकेश देहरादून तक उन्हें कोई इलाज नहीं मिलता आज तक मैं जितनी बार भी बोराड़ी में गया जितनी बार भी मैं चंबा के अस्पताल में गया मुझे कभी भी वहां पर कोई भी वहां पर नहीं मिला और रात का समय अगर वहां गलती से कोई चला गया तो वहां पर एक पंछी भी नहीं होता है। और जो नर्स और जितने डॉक्टर्स या एक आध अगर कोई होता भी है वहां पे तो वो सीधा कह देते हैं कि आप एम्स जाइए या आप रिस्क के देहरादून में जाइए और नकोट की जो हालत है नकोट अस्पताल की वो बिल्कुल ही दयनीय है जो कि एक खंडर की हालत होती है। उस प्रकार से नकोट की हालत हो चुकी है। और चलिए इस पे इस पे बात करेंगे उनियाल जी।
यह बात पहुंचेगी सरकार तक। लेकिन जब आप डेमोग्राफी चेंज की बात करते हैं, आप कहते हैं कि मैं बच्चियों से भी, बेटियों से भी, महिलाओं से भी आग्रह करूंगा कि सोच समझ कर मित्रता करें। जब आप ऐसा कहते हैं तो क्या ऐसे कोई केस यहां नकोट में भी हुए हैं? महिलाओं को लेकर क्योंकि हमने उत्तरकाशी के पुरो में देखा कि पहचान छिपाकर, बहला फुसलाकर अपने चंगुल में फंसा लेते हैं कुछ लोग। अरमान नाम का लड़का जो है बाद में अरमान खान निकलता है।
अरमान कुरैशी निकलता है। क्या नकोट में भी ऐसा हुआ? क्योंकि ये तो बहुत इंटीरियर है। टिहरी से काफी अंदर ये है और चंबा के पास ये एरिया आता है। कैसे देख रहे हैं? इस तरह की घटनाएं क्या यहां पर भी हुई? जी बिल्कुल यहां पर सर इस प्रकार की कई घटनाएं हो चुकी हैं और कई घटनाएं ऐसी होती है जो कैमरे में नहीं आ पाती किसी कारणवश और एक घटना यहां पे कुछ समय पहले हुई है जहां पे एक एससी एसटी जो यहां पर एक व्यक्ति था हमारा भाई था उसकी जो पत्नी थी उसको एक यहां से भगा के ले गया आज तक वो वापस नहीं आई तो ऐसे यहां पर कई हो चुके कई लोग गरीबी के कारण आर्थिक स्थिति के कारण कईयों को डराया जाता है धमकाया जाता है कई लोग नहीं बोलते तो इंटीरियर एरिया होने के कारण भी यहां पे मतलब लोग पत्रकार नहीं पहुंच पाते हैं। तो यह घटनाएं यहां पे बहुत होती हैं। लेकिन कैमरे में नहीं आती हैं।
वायरल नहीं होती इसलिए लोग और सरकारें इस पर ध्यान नहीं देती। लेकिन मैं लोगों को ये घटनाएं जिस प्रकार से अन्य जगहों में हो रही हैं उत्तराखंड के पहाड़ों में। मैं चाहता हूं कि यह घटनाएं यहां पर ना हो और होने से पहले हम लोग सचेत हो जाए। हम लोग जागरूक हो जाएं। ये नहीं कि जब जब चिड़िया चुक गई खेत तब पछताए क्या हो तब जब घटनाएं हो जाएंगी तब हम जागे तो उससे कोई फायदा नहीं जी देखिए आप बहुत जागरूक इंसान हैं और एक जिम्मेदार नागरिक भी हैं लेकिन आप यह थोड़ा सा बताइए कि सरकार जो डेमोग्राफी चेंज की बात कर रही है खासकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आने के बाद से यह शब्द बहुत चर्चा में आ गया मीडिया के अंदर भी और कई मंचों पर हमने उन्हें बोलते हुए सुना है तो डेमोग्राफी चेंज पर अब तो बात भी हो रही सरकार का यह जो रवैया डेमोग्राफी चेंज को खत्म करने को लेकर है या डेमोग्राफी ना बदले इसका इरादा सरकार करके चल रही है।
सरकार के बारे में आपकी क्या मंशा है? क्या राय है? थोड़ा सा पहले तो यह बताइए क्योंकि विपक्ष सरकार की इस मंशा पर सवाल उठाता है। ये कहता है कि ये तो बरगलाने की कोशिश हो रही है। ऐसा तो कुछ है ही नहीं। देखिए सर जो सरकार इस पर जो कर रही कुछ चीजें तो अच्छी कर रही है। जैसा कि अभी मदरसा बोर्ड खत्म किया गया है तो वो जो फैसला है दामी जी का उसका पूरी जनता स्वागत कर रही है। हम भी स्वागत करते हैं। कई फैसले सरकारें अच्छे ले रही है। जो सरकारी जमीनों पर जो कब्जा हुआ है, उनको हटा रही है। तो, सरकार के कई फैसले इस पर अच्छे भी हैं। लेकिन जो कुछ फैसले जो मैं मानता हूं व्यक्तिगत जो मेरी राय है वह मेरी राय यह है कि जो पलायन यहां से हो रहा है लगातार जो शिक्षा और स्वास्थ्य पे भी अगर सरकारें और ज़्यादा ध्यान दें जो सरकारें कर रही हैं उससे और अगर अच्छा करें तो लोग यहां पर रुक सकते हैं। पलायन नहीं होगा। यहां पर रोजगार मिलेगा। शिक्षा स्वास्थ्य अगर यहां पर अच्छी हो तो मुझे लगता है कि जो ये जो बाहरी लोग घुस रहे हैं धीरे-धीरे यहां पर डेमोग्रे की जो चेंज हो रही है वो उसका यह भी कारण हो सकता है कि जो लोग यहां से चले गए हैं और यहां पर गिनती के लोग रह गए हैं इसलिए वो लोग ध्यान नहीं दे पाते।
ये कह रहे हैं कि बाहर के लोगों का आना, डेमोग्राफी चेंज होना, उससे अपराध बढ़ना और अपराध की वजह से पलायन होना। ये आपस में चीजें जुड़ी हुई है। आप ये कह रहे हैं। सर इस पे मैं यही कहना चाहता हूं कि सरकार को चाहिए कि जो हमारे जो जल जंगल जमीन है इसके लिए सरकार को कठोर कानून बनाने चाहिए और हमारे लोग जो जमीनों को बेच रहे हैं भारी लोगों को बिना उनको जाने हुए। तो उन लोगों से मैं अपील करना चाहता हूं कि आप सोच समझ के अपनी जमीन जिसको भी दे रहे हो आप सोच समझ समझ के दो और सरकारों से भी मैं यह चाहता हूं कि जो जल जंगल जमीन है इसको हमारे लिए सुरक्षित किया जाए और हिमाचल जैसा कानून मतलब ऐसा कोई कानून हो कि जिससे हम बाहर का आदमी यहां पर जमीन बिल्कुल ना ले पाए या उतनी ही ले पाए जितनी उसे जरूरत हो। तो क्योंकि जिस प्रकार से आप देख रहे हैं कि हिमाचल और उत्तराखंड में लगातार सरकारी भूमि पर कब्जा हो रहा है। जिहादी कुछ कब्जा कर रहे हैं।
कुछ भारी लोग कब्जा कर रहे हैं। तो ये सब यहां भी ना हो हमारे क्षेत्र में। तो हम यही चाहते हैं कि जल जंगल जमीन हमारे लिए सुरक्षित की जाए। हमें आजादी मिलनी चाहिए कि हमारे जंगल पे हमारा हक होना चाहिए। और ये जो बुलडोजर चलाया जा रहा है मस्जिदों पर, मदारों पर नीचे आप देख रहे होंगे इस पर कुछ लोग कह रहे हैं कि सरकार मुसलमानों को टारगेट करके काम कर रही है। मुसलमानों को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? इस पर आपका क्या कुछ मानना है? आप क्या सोच रखते हैं? नहीं इस पे सर मैं मेरा मानना तो यही है कि सरकार इस पे बहुत अच्छा काम कर रही है। मदरसा बोर्ड सरकार ने खत्म कर दिया है और सरकार जो मस्जिदें जो मस्जिदें जो जगह-जगह मजारें बनी हैं और सरकारी भूमि पर जितने कब्जे हुए थे वो सरकार लगातार तोड़ रही है। तो यह स्वागत योग्य फैसला है और काफी कुछ सरकारें इस पर अच्छा काम कर रही है। हम सरकार का इस पे स्वागत करते हैं और और ध्यान सरकार को इस पे थोड़ा देना चाहिए कि जो इंटीरियर एरिया है जहां पे विकास नहीं है वहां पे विकास होना चाहिए जिससे वहां पे लोग रुके और जब वहां पे लोग रुकेंगे तो भाई तब विकास होगा क्योंकि खाली जंगल में बिल्कुल विकास नहीं हो पाएगा। जब लोग यहां रहेंगे लोग जब रहेंगे तो वह कुछ मांगेंगे भी और जब मांगेंगे तो तब उन्हें विकास यहां पे कुछ ना कुछ होगा। लेकिन तभी होगा जब यहां से पलायन रुकेगा।
जब पलायन रुकेगा तभी होगा। यह सब चीजें आपस में जुड़ी हुई हैं। नकोट गांव में नकोट कस्बे में इस वक्त मैं मौजूद हूं और ये मैं फिर दोहरा दूं कि टिहरी गढ़वाल में ये क्षेत्र आता है और हम लोग टिहरी गढ़वाल में ही क्या कुछ लोगों की राय है? सरकार का क्या कार्यकाल कैसा रहा धामी सरकार का? धामी सरकार को लेकर लोग क्या राय रखते हैं? योजनाएं जो सरकार दावा करती है जनजन की सरकार जनजन के द्वार क्या योजनाएं वाकई लोगों तक पहुंच रही है इस बात की पड़ताल करने के लिए एनएमएफ न्यूज़ लगातार ग्राउंड जीरो पर है। उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में जा रहा है। इसी बीच टिहरी में जब हम मौजूद थे तो ऐसे ही रास्ते में इसी रोड पर नकोट नाम का यह कस्बा हमें मिलता है।
यहां पर उनल जी से हमारी मुलाकात होती है जो एक दुकान चलाते हैं और उसी वक्त वो कुछ ऐसी बातें बता देते हैं। लगता है कि यह तो ग्राउंड रियलिटी है। यह ज़मीनी सच है जो आप तक पहुंचना चाहिए। और यह ज़मीनी सच डेमोग्राफ़ी चेंज से जुड़ा हुआ है। इसी नकोट कस्बे में कई पाइप जो कि अह पाइप लाइन बिछाई जाती है पानी की वो पाइप जो हैं वो चोरी कर लिए जाते हैं। 30 से 40 पाइप चोरी कर लिए जाते हैं। चोर मिलते हैं हरिद्वार में जहां से उनकी गिरफ्तारी होती है। यह कोई पहला मामला नहीं था। यहां के मंदिरों में चोरी का मामला आया। यहां एक औरत को भगा ले जाने का मामला सामने आया जिसमें एक मुस्लिम व्यक्ति बताया जा रहा है कि उसका वो बाहर से आया था। कैसे बहला फुसला कर उसको ले गया। सारी आपराधिक घटनाओं में बाहर के व्यक्तियों के संलिप्त होने का आरोप दावा जो है यहां के लोग कर रहे हैं और लोकल लेवल पर भी कई खामियां निकल कर के आती हैं कि स्थानीय स्तर पर भी इनका सत्यापन नहीं होता। बगैर सत्यापन के यह लोग यहां किराए पर भी मकान ले लेते हैं और यहां पर धंधा भी करने लग जाते हैं। जिससे कई सारी समस्याएं यहां के लोगों को झेलनी पड़ती है। नकोट सिर्फ एक उदाहरण है। मैं फिर दोहरा रहा हूं। ये एक छोटे से कस्बे की एक कहानी है जो हमने आप तक पहुंचाई है।
उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में खासकर पहाड़ों में इस तरह की कहानियां जो हैं आए दिन घट रही हैं। इस तरह की घटनाएं आए दिन घट रही हैं। कहीं पर कैमरा पहुंचता है कहीं पर नहीं। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि डेमोग्राफी चेंज पर काम करना उत्तराखंड में कितना जरूरी है और जो मौजूदा सरकार काम कर रही है वो कितना प्रासंगिक है। बहरहाल हमने जो तस्वीर थी वो आप तक पहुंचाने की कोशिश की है। आप इस पूरी घटना पर क्या राय रखते हैं? यह जो नकोट की कहानी