क्या नीट पेपर लीक के खिलाफ उठी छात्रों की आवाज अब राजनीति के शोर में दबती जा रही है? क्या यह आंदोलन अब केवल शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग तक सीमित नहीं रहा बल्कि सियासी टकराव का केंद्र बन चुका है और आखिर ऐसा क्या हुआ है कि अस्पताल में भर्ती सोनम वांचुक की पत्नी गीतांजलि आगमों को राजनीतिक दलों से कहना पड़ रहा है कि अगर सच में वह छात्रों के साथ खड़ा होना चाहते हैं तो प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने के बजाय जंतरमंतर पर पहुंचिए।
जहां छात्र पिछले कई दिनों से न्याय की उम्मीद में बैठे हैं। आखिर उनके इस बयान के क्या मायने हैं? क्या आंदोलन की दिशा बदल रही है या यह केवल राजनीति पर उठाया गया एक बड़ा सवाल है? आइए समझते हैं पूरे घटनाक्रम को। नमस्कार, मैं हूं आपके साथ गरिमा शर्मा और आप देख रहे हैं india.com। दरअसल दिल्ली के जंतरमंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी का आंदोलन लगातार 34वें दिन से जारी है। सरकार बातचीत का दावा कर रही है। सीजेपी सरकार पर समय बर्बाद करने का आरोप लगा रही है।
दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हो चुकी है और दूसरी ओर अस्पताल में भर्ती सोनम वाजुक की पत्नी ने आंदोलन को लेकर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर उन्होंने क्या कहा है? सरकार और सीजेपी के बीच बातचीत क्यों नहीं हो पा रही है और अब इस पूरे आंदोलन का अगला पड़ाव क्या होगा? इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा सोनम वांछुक की पत्नी गीतांजलि आगमों के बयान की हो रही है। उन्होंने कहा है कि छात्रों को अपराधियों की तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि अगर राजनीतिक दल वास्तव में छात्रों के साथ खड़े होना चाहते हैं तो उन्हें केवल राजनीतिक प्रदर्शन करने के बजाय जंतरमंतर पहुंचकर छात्रों के बीच बैठना चाहिए। गीतांजलि आगमू ने यह भी कहा है कि छात्रों की आवाज को राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
यह आंदोलन किसी पार्टी का नहीं बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य का सवाल है। इसी बीच केंद्र सरकार की ओर से भी बड़ा बयान सामने आया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि सरकार किसी भी समय सीजेपी से बातचीत के लिए तैयार है। उनके मुताबिक पिछले 24 घंटे में चार बार सीजेपी को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास या कार्यालय में बातचीत का निमंत्रण भेजा गया है। लेकिन सीजेपी ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया है। सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में बातचीत चाहती है तो उसे जंतरमंतर पर ही आना चाहिए या किसी न्यूट्रल जगह पर बातचीत करनी चाहिए।
उनका कहना है कि वह किसी मंत्री के घर या कार्यालय बातचीत के लिए नहीं जाएंगे। उधर प्रदर्शन का असर अब राजनीति की सामान्य जिंदगी पर भी दिखाई देने लगी है। सुरक्षा व्यवस्था के चलते दिल्ली मेट्रो के 17 स्टेशंस लगातार दूसरे दिन भी बंद रहे। बाद में झंडेवाला मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिया गया जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
वहीं दूसरी तरफ दिल्ली हाई कोर्ट में सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई होनी है। याचिका में दावा किया गया है कि लंबे समय से चल रहे प्रदर्शन के कारण आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल इस पूरे आंदोलन में कई तस्वीरें एक साथ दिखाई दे रही हैं। एक तरफ सरकार कह रही है कि बातचीत के दरवाजे खुले हैं। दूसरी तरफ सीजेपी का कहना है कि बातचीत बराबरी के मंच पर ही होगी। वहीं अस्पताल में भर्ती सोनम वानचुक की पत्नी का कहना है कि इस पूरे मुद्दे को राजनीतिक लाभ का माध्यम बनाया जा रहा है जो कि नहीं करना चाहिए और सबसे पहले छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है क्या सरकार और सीजेपी के बीच बातचीत का कोई रास्ता निकलेगा? क्या हाईकोर्ट की सुनवाई इस आंदोलन की दिशा को बदल सकती है? और सबसे अहम क्या लाखों छात्रों की चिंता आखिरकार किसी ठोस फैसले तक पहुंचेगी।