अगर कोई पूछे कि ज़ीरो से हीरो बनना किसे कहते हैं? तो उसका जवाब सिर्फ एक होगा। रॉकिंग स्टार यश। [संगीत] यह सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि एक ब्रांड बन चुका है। प्यार से फैंस इन्हें रॉकी भाई कह के बुलाते हैं और ऐसा हो भी क्यों ना? [संगीत] क्योंकि केजीएफ में रॉकी के किरदार को यश ने अपनी दमदार एक्टिंग से हमेशा के लिए अमर बना दिया। लेकिन जिस रॉकी भाई को आज आप देखते हैं एक वक्त था जब यही लड़का सिर्फ ₹300 जेब [संगीत] में लेकर बेंगलुरु पहुंचा था। ना कोई फिल्मी बैकग्राउंड ना कोई गॉड फादर सिर्फ [संगीत] एक सोच एक सपना और उस सपने को पूरे करने की जिद। सो इन दिस वीडियो वी गोना एक्सप्लेन सम नेवर नोन बिफोर फैक्ट्स अबाउट आवर वेरी ओन रॉकिंग स्टार यश।
यश का असली नाम नवीन कुमार गड़ा है। उनका जन्म कर्नाटक के हासन जिले में हुआ था। एक साधारण से परिवार में उनके पिता अरुण कुमार एक बस ड्राइवर थे और उनकी मां हाउसवाइफ। बोले तो भाई प्रॉपर कॉमन मैन फैमिली लेकिन यश के सपने बिल्कुल भी कॉमन नहीं [संगीत] थे। उन्हें बचपन से ही कैमरे के सामने खड़े होने का एक जुनून सा सवाल था। स्कूल के दिनों में उनकी पर्सनालिटी इतनी ज्यादा अलग हुआ करती थी कि टीचर्स मजाकमस्ती में उन्हें हीरो कह के बुलाया करते थे। स्टेज पर परफॉर्म करना, डायलॉगबाजी करना और लोगों का अटेंशन गैब करना यश ने बचपन में ही सीख लिया था। लेकिन अंग्रेजी में एक मुहावरा है ना लाइफ इज नॉट अ बेड ऑफ रोजेस। यश के सपनों का रास्ता आसान नहीं था। वो लड़का जो एक्टिंग सीखना चाहता था लेकिन उसकी जेब हर बार बस एक ही बात याद दिलाती थी।
अभी नहीं। घर की आर्थिक तंगी यश और उसके सपने के बीच में ना एक मतलब एक दीवार की तरह खड़ी हो गई थी। जो यश और उसके सपनों को बार-बार चैलेंज करती रहती थी। लेकिन वो कहते हैं ना जिंदगी और खाली पेट सब कुछ सिखा ही देता है। सपनों को पंख देने के लिए यश सिर्फ ₹300 लेकर बेंगलुरु पहुंच गए। नए शहर में ना कोई रहने का ठिकाना और ना कोई जान पहचान। कई दिनों तक छोटे-मोटे काम करके थिएटर जॉइन किया और ऑडिशंस के चक्कर लगाने शुरू कर दिए। रिजेक्शंस लगातार मिलते रहे। [संगीत] लेकिन उन्होंने घर जाने का फैसला नहीं लिया। यश कभी भी टीवी पर भी नहीं आना चाहते थे। लेकिन मजबूरी में क्या करें? यश को एक दिन हार मानकर टीवी का सहारा लेना पड़ा। लेकिन टीवी से जो भी कमाई होती यश उन पैसों को बचा लिया करते थे। और फिर उन्हीं पैसों को जो इनकम होती थी ना उसको कपड़े खरीदने, ग्रूमिंग [संगीत] और अपने लुक्स पर इन्वेस्ट कर दिया करते थे।
क्योंकि यश को ऐसा लगता था कि अगर ऑन स्क्रीन प्रेजेंस को स्ट्रांग रखना है तो खुद पर इन्वेस्ट भाई करनी पड़ेगी। वेल ही इज राइट। यश की स्ट्रांग स्क्रीन प्रेजेंस की वजह से उन्हें धीरे-धीरे कन्नड़ फिल्मों में काम मिलने लगा। उनकी कन्नड़ फिल्मों में एंट्री हो गई। ये फिल्में ठीक-ठाक चलने भी लगी। और धीरे-धीरे यश [संगीत] के स्टार बनने की गाड़ी भी पटरी पे आ गई। लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट तब आया जब रॉकी भाई ने केजीएफ का किरदार निभाया। यस। यश ने केजीएफ के रॉकी भाई को एक ऐसा रूप दिया जो किसी ने नहीं देखा था। रॉकी के किरदार ने नॉर्थ से साउथ तक भूचाल मचा दिया। केजीएफ चैप्टर वन और केजीएफ चैप्टर 2 [संगीत] ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड्स की बारिश कर दी और रातोंरात यश एक पैन इंडिया स्टार बन गए। यश का नाम आज इतना बड़ा बन चुका है कि जो लड़का कभी ₹300 लेकर बोर पहुंचा था, आज वो उसी शहर में 53 करोड़ का मालिक है। फिल्म्स, ब्रांड एंडोर्समेंट्स और बिजनेस इन्वेस्टमेंट से लगातार उनकी कमाई बढ़ती ही जा रही है। हालांकि ये जो नेटवर्थ के नंबर्स आप देख रहे हैं, यह डाटा Google पे मौजूद है। इस पर भाई फिलहाल रॉकी भाई ने ना कंफर्मेशन का थप्पा अभी [संगीत] तक तो नहीं लगाया है।
मगर हां, यश के कार कलेक्शन की अपडेट कंफर्म्ड है। रॉकिंग स्टार यश के गराज में Audi, Mercedes, Benz और Rang Rover जैसी स्वैंग की कार्स मौजूद हैं। यश की कहानी सिर्फ एक सुपरस्टार बनने की नहीं है। यह कहानी उस लड़के की है जिसने बस ड्राइवर के बेटे [संगीत] से लेकर पैन इंडिया आइकॉन तक का सफर तय किया है। ₹300 से शुरू हुई यह जर्नी आज करोड़ों की सफलता तक पहुंच चुकी है। आज करोड़ों की नेटवर्थ, लग्जरी कार्स और ग्लोबल फैन बेस के बावजूद यश की पहचान स्टारडम से नहीं बल्कि उनकी सादगी और मेहनत से होती है। फिलहाल फैंस की नजर इस वक्त यश के अपकमिंग प्रोजेक्ट टॉक्सिक पर टिकी हुई है। क्योंकि इस फिल्म में प्यार, जुनून और खून तीनों [संगीत] फैक्टर हैं। तो अब रॉकी भाई यानी कि यश इस बात का डायरेक्ट इशारा कर दिए हैं कि डैड इज होम मतलब है कि बॉक्स ऑफिस को एक बार फिर से वो कॉनकरर करने वाले हैं। तो कैसी लगी आपको रॉकिंग स्टार यश की यह सक्सेस स्टोरी हमें कमेंट्स में जरूर बताइएगा।