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सोनम वांगचुक ने बताया कब- कैसे तोड़ेंगे अनशन? रखी ये शर्तें

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क्या सोनम वांगचुक का लंबा चला भूख हड़ताल आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है या यह सरकार और विपक्ष के बीच नई राजनीतिक बहस की शुरुआत बनेगा क्या सरकार उनकी शर्तें मानेगी या आंदोलन और तेज होगा? संसद सत्र शुरू होते ही आखिर ऐसा क्या हुआ कि वांगचुक ने अनशन खत्म करने की बात कह दी। दरअसल करीब तीन हफ्तों से जारी भूख हड़ताल के बीच संसद के मानसून सत्र के पहले दिन वांगचुक ने अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे अनशन समाप्त करने के लिए तैयार [संगीत] हैं। लेकिन इसके लिए सरकार और राजनीतिक दलों के सामने तीन अहम शर्तें रखी हैं।

वहीं उनकी पत्नी गीतांजलि आगंगमो ने भी आंदोलन और अस्पताल में चल रहे घटनाक्रम को लेकर अपनी बात रखी है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन शर्तों में से कोई पूरी होगी या फिर यह आंदोलन नए मोड़ पर पहुंच जाएगा। दरअसल सोनम वांशु ने अपने समर्थकों के नाम लिखे संदेश [संगीत] में कहा कि उन्होंने पहले ही तय किया था कि 20 जुलाई को अनशन समाप्त करेंगे। [संगीत] लेकिन ऐसा तभी होगा जब उनकी बताई गई तीन शर्तों में से कोई एक पूरी हो [संगीत] जाए। पहली शर्त के अनुसार केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल के वर्षों में सामने आई गंभीर खामियों विशेष रूप से पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार करें। उनका कहना है

कि जवाबदेही तय किए बिना छात्रों का भरोसा बहाल नहीं हो सकता। दूसरी शर्त यह है कि अगर वो और कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी का नेतृत्व संसद तक पहुंचता है और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद यह भरोसा दिलाते हैं कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को संसद में गंभीरता से उठाया जाएगा तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे। तीसरी स्थिति में अगर स्वास्थ्य कारणों या किसी अन्य वजह से उनके लिए ऐसा करना संभव [संगीत] नहीं होता तो अलग-अलग दलों के सांसद सफदरगंज अस्पताल पहुंचकर यही आश्वासन दें कि संसद में इन मुद्दों पर आवाज उठाई जाएगी। अपने पत्र के अंत में सोनम वांशुक ने दावा किया

कि उन्हें सफदरगंज अस्पताल में गैरकानूनी तरीके से रोका गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी आवाजाही लोगों से मिलने, अपनी बात रखने और संवाद करने की स्वतंत्रता [संगीत] पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अलग रुख सामने आया है। वहीं सोनम वांशु की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने भी आंदोलन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया [संगीत] दी। उन्होंने कहा कि अगर राजनीतिक दल और सांसद यह भरोसा दें कि शिक्षा व्यवस्था [संगीत] में जवाबदेही का मुद्दा संसद में मजबूती से उठाया जाएगा तो सोनम अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार [संगीत] हैं। वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल राहत देने से इंकार करते हुए कहा फिलहाल वांगशु की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए मेडिकल बोर्ड की राय महत्वपूर्ण होगी। अदालत ने सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और मामले की अगली सुनवाई तय तारीख पर होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी निर्णय में मरीज की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

उधर जंतरमंतर पर प्रदर्शन जारी है। कॉकरोच जनता पार्टी ने संसद मार्च का आह्वान किया है। जबकि पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में समर्थक आंदोलन स्थल पर डटे हुए [संगीत] हैं। संसद का मानसून सत्र शुरू होने के साथ इस मुद्दे के राजनीतिक रूप लेने की संभावना भी बढ़ गई है। वहीं सोनम वांछुक ने साफ कर दिया है कि उनका उद्देश्य केवल अनशन खत्म करना नहीं बल्कि [संगीत] शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है [संगीत] कि सरकार, विपक्ष और संसद इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या उनकी [संगीत] तीन शर्तों में से कोई एक पूरी होगी और अनशन समाप्त होगा या फिर यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा। अभी यही सवाल फिलहाल सबसे अहम बना हुआ है।

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