Cli

चीन में क्यों नहीं होते CJP जैसे खतरनाक प्रदर्शन, अब यही करेगा भारत !

Uncategorized

भारत में आपको चीन की तारीफ करने वाले कई वामपंथी वायरस मिल जाएंगे। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। इसके बावजूद यह लोग भारत की तुलना चीन से करते हैं। लेकिन पहली बार चीन ने वह नायाब तरीका बताया है जिसे अगर भारत ने भी लागू कर दिया तो विदेशों में बैठे लोग भारत में प्रदर्शन नहीं करवा पाएंगे। क्योंकि चीन ने बताया है कि सीजेपी जैसे हुड़दंगियों का कैसे इलाज किया जाता है।

आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि प्रोटेस्ट, हिंसा, हड़ताल और सामाजिक अशांति की वजह से भारत की जीडीपी को सालाना 6 से 9% का नुकसान होता है। यह आंकड़े हर साल बदल सकते हैं। लेकिन दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के लिए 2 4% भी बहुत चिंताजनक है। दुनिया के कई देश तो सिर्फ एनजीओस के जरिए भारत की कई विकास परियोजनाओं को रुकवाने का काम करते हैं। उन्हें लटकाने और अटकाने का काम करते हैं।

लेकिन चीन ने एक बहुत ही शानदार रणनीति के जरिए फॉरेन फंडेड प्रदर्शनों को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। चीन ने तीन शानदार तरीकों से यह सफलता हासिल की है। इसके बारे में हम आपको इस वीडियो में बताएंगे। आपको याद होगा कि चीन ने जब यांग से नदी पर थ्री गॉर्जियस बांध बनवाया था तो लगभग 2 करोड़ पेड़ों को काट डाला था। लेकिन उस दौरान चीन में कोई प्रोटेस्ट नहीं हुआ। किसी ने काम को नहीं रोका।

यहां तक कि दुनिया में भी किसी ने चीन के उस प्रोजेक्ट का विरोध नहीं किया। लेकिन जब भारत कोई बांध बनाता है, न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाता है या कोई स्ट्रेटेजिक प्रोजेक्ट बनाता है तो कई एनजीओस प्रदर्शन करने उतर आते हैं। अदालतों में पीआईएल डालकर इन प्रोजेक्ट्स को अटकाया जाता है। उदाहरण के लिए आप मलक्का स्टेट के पास बन रहे ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को ही देख लीजिए। यह प्रोजेक्ट भारत की किस्मत बदलने वाला है। चीन को रणनीतिक चुनौती देने वाला है।

2012 में रूस की मदद से तमिलनाडु में कुडान गुलाम न्यूक्लियर पावर प्लांट का काम शुरू किया गया था। लेकिन कई एनजीओस ने पैसा लेकर इस प्रोजेक्ट को लटकवा दिया था। खुद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस पर चिंता जताई थी। जांच में पता चला कि अमेरिका ने भारत के कुछ एनजीओस को लिप्रेसी के मरीजों और दिव्यांग लोगों की भलाई का बहाना बनाकर जो पैसा दिया था, उसी पैसे का इस्तेमाल एनजीओस ने स्थानीय लोगों से प्रदर्शन करवाने के लिए किया। लेकिन चीन ने ऐसा क्या किया था कि वहां कोई प्रदर्शन नहीं हुआ।

आपको बता दें कि चीन में पिछले कुछ सालों में एनजीओस 7000 से घटकर 728 रह गए हैं। चीन ने तीन बड़े कानून पास करे। पहला था चैरिटी लॉ जिसके तहत चैरिटेबल संस्थाओं पर नकेल कसी गई। दूसरा था ओवरसीज एनजीओ लॉ इसके तहत विदेशी एनजीओस पर नकेल कसी गई। तीसरा था नेशनल सिक्योरिटी लॉ जिसके तहत सभी एनजीओस की कड़ी जांच की गई और पता लगाया गया कि यह एनजीओस चीन की सुरक्षा के लिए खतरा तो नहीं है।

चीन में एनजीओ के लिए पुलिस रजिस्ट्रेशन, गवर्नमेंट स्पॉनसरशिप और एनुअल फंडिंग एंड एक्टिविटी डिस्क्लोज़र अनिवार्य है। मगर भारत में अभी तक एनजीओस की नकेल कसने वाले कानून काफी कमजोर रहे। भारत में आज भी विदेशों से पैसा लेने वाले करीब 35,000 से ज्यादा एनजीओ हैं।

इन एनजीओस ने भारत के कई प्रोजेक्ट्स के खिलाफ विरोध किया। भारत की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने का काम किया। हालांकि अब भारत एफसीआरए कानून में बड़े बदलाव करने जा रहा है। संशोधन के बाद एफसीआरए यानी फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट के तहत विदेशों से जो फंडिंग आती है, उस फंडिंग के सोर्स की जानकारी अब एनजीओस को देनी पड़ेगी।

फंडिंग प्राप्त करने के लिए एसबीआई दिल्ली में अकाउंट खुलवाना पड़ेगा। यानी एनजीओस के पास विदेशों से आने वाले ₹1 का हिसाब अब रखा जाएगा। नए एफसीआरए कानून के तहत अब एनजीओस पैसे का इस्तेमाल धर्मांतरण के लिए नहीं करवा पाएंगे। अगर कोई मिशनरी संस्थान या एनजीओ गलत काम करता पकड़ा गया तो उसकी संपत्ति पर अब भारत सरकार का कब्जा होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *