Cli

सोनम वांगचुक कैसे बने क्रोकरोच पार्टी का चेहरा? सच्चाई आई सामने

Uncategorized

आज सोनम वाकचुक ने कॉकरोच पार्टी के इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया या आप यह भी कह सकते हैं कि वह हिस्सा नहीं ले पाए। लेकिन इसके बावजूद भी सबसे ज्यादा चर्चा उन्हीं की हो रही है। इस समय सोनम वाकचुक दिल्ली के सबजंग अस्पताल में भर्ती हैं और पिछले 24 घंटे में सोनम वाकचुक कई बार अपना गोल पोस्ट शिफ्ट कर चुके हैं। आज उनकी चिट्ठी मेरे हाथ में है। पढ़कर सुनाऊंगा आपको। सोनम वाकचुक ने आज सोशल मीडिया पर अपनी तीन चिट्ठियां शेयर की हैं। सबसे जो उनकी जो नई चिट्ठी है उसमें उन्होंने लिखा कि उनकी भूख हड़ताल अभी जारी रहेगी। उन्होंने लिखा है। दूसरी चिट्ठी में उन्होंने लिखा कि वो पूरी तरह से स्वस्थ हैं और आज के संसद मार्च में वह हिस्सा लेना चाहते हैं और वह चाहते हैं कि पुलिस उन्हें अस्पताल से बाहर निकलने दे। तीसरी चिट्ठी में उन्होंने भूख हड़ताल को खत्म करने के लिए अपनी शर्तें बताई हैं और कहा है कि अगर सरकार या विपक्षी दलों के नेता उनसे मिलने आते हैं और उनकी शर्तें मान लेते हैं तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे। अब तीनों चिट्ठियां मैं आज उनकी लेकर आया हूं। पहली चिट्ठी यह मेरे हाथ में उनकी चिट्ठी है। देखिए यह शायद उन्होंने अपने हाथ से ही लिखी है जो आपकी स्क्रीन पर है। इसमें वो कहते हैं सीइंग द ब्रूटलिटी विद वि पीसफुल प्रोटेस्टिंग यूथ आर बीइंग डेल्ट विद आई हैव डिसाइडेड टू कंटिन्यू माय फास्ट अंटिल द यूथ लीडर्स आर अलाउड टू मीट दी पार्लियामेंटेरियंस एट दी संसद भवन और आई एम अलाउड टू मीट देम हियर एट द [संगीत] हॉस्पिटल। तो वह यह चाहते हैं कि अब जो नेता हैं पार्लियामेंटेरियंस से कहने का मतलब है जो सांसद हैं सांसद जो हैं वह आए वह मुझसे मिले और अगर वह यह कहेंगे कि हम आपका यह मुद्दा उठाने के लिए तैयार हैं तो फिर मैं अपनी अनशन समाप्त कर दूंगा।

वो ऐसा कह रहे हैं। फिर वो यह भी कहते हैं कि आज मैं काफी ठीक महसूस कर रहा हूं। मेरा स्वास्थ्य जो है वह बिल्कुल ठीक है। [संगीत] आई रिक्वेस्ट यू टू काइंडली अलाउ मी टू लीव द हॉस्पिटल। और मैं वहां पर जाना चाहता हूं और प्रदर्शनकारियों के साथ इस प्रोटेस्ट में शामिल होना चाहता हूं। फिर एक और चिट्ठी है उनकी। वो यह कहते हैं कि गवर्नमेंट टेक्स अगर इफ द गवर्नमेंट टेक्स अकाउंटेबिलिटी ऑफ द रीसेंट फेलोर्स इन एजुकेशन सिस्टम पेपर लीक्स तो फिर मैं इसे तैयार हूं। अपना अनशन को वापस लेने के लिए और या फिर पार्लियामेंट में जो ऑनरेबल एमपीज हैं और लीडर्स ऑफ वेरियस पार्टीज इफ दे अशोर अस कि हम इस मुद्दे को पार्लियामेंट में उठाएंगे तो फिर मैं अपना अनशन वापस करने के लिए तैयार हूं। तो इन तीनों चिट्ठियों में जो उन्होंने एक के बाद एक लिखी हैं हाल के दो दिनों में एक बात समझ में आती है कि कॉकरोच पार्टी और सोनम वाकचुक के बीच एक बहुत बड़ा कम्युनिकेशन गैप है और सोनम माकचुक लगातार अपना गोल पोस्ट शिफ्ट कर रहे हैं। अब देखिए कॉकरोच पार्टी के जो दो नेता हैं वह आज केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मिलकर आए हैं। उन्होंने जेपी नड्डा से बात की है और अपनी मांगों को कागज पर लिखकर बाकायदा एक मेमोरेंडम उन्हें दिया है। वो यह बात कर रहे हैं। वह सरकार से मिल भी चुके और सोनम वाकचुक जो हैं वो यह कह रहे हैं कि अगर एमपीज जो हैं वो अगर हम तक आ जाएंगे मुझसे मिलने आ जाएंगे और मुझे यह आश्वस्त करेंगे कि वह पार्लियामेंट में यह मुद्दा उठाएंगे तो फिर मैं अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दूंगा। अब देखिए यह जो पूरा आंदोलन हुआ था शुरू पहले यही लोग नेताओं को पानी पी पीकर कोसते [संगीत] थे। यह सारे लोग कहते थे कि हमारे देश के जो नेता हैं यह सब बेकार हैं। यह कोई काम नहीं करते। हमें नेताओं से बात ही नहीं करनी। और अब वापस आकर यह कह रहे हैं कि अगर नेता हमसे बात करने के लिए आएंगे चाहे किसी भी पार्टी के हो। अब तो वह यह कह रहे हैं कि विपक्षी नेता भी अगर हमारे पास आ जाएंगे तो हम यह अपना अनशन समाप्त कर देंगे। दिल्ली हाई कोर्ट में आज सोनम वांगचुक की पत्नी ने अपनी एक याचिका लगाई थी। उस पर सुनवाई हुई। सोनम वांगचुक की पत्नी ने उन्हें सबजिंग अस्पताल से एक प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की थी।

19 जुलाई को इस याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया था। इसके बाद इस फैसले को फिर से दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। जिस पर आज सुनवाई हुई और आज हाईकोर्ट ने सबदजंग अस्पताल को निर्देश दिया है कि वह सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट और हेल्थ बुलेटिन अब अदालत में दाखिल करें और अब इस मामले पर कल यानी 21 जुलाई को सुनवाई होगी। लेकिन आज हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक को कोई राहत नहीं दी और उनकी पत्नी ने जो बात कही थी वो भी उन्होंने नहीं मानी। 59 साल के सोनम वाकचुक को इस आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बनाने की कोशिश की गई। लेकिन वो लोगों में वो भरोसा नहीं जगा पा रहे हैं जो किसी आंदोलन की कामयाबी के लिए जरूरी होता है। और इसका कारण मैं आपको बताता हूं। कारण यह है कि सोनम वांगचुक इस आंदोलन के लिए एक इंपोर्टेड फेस है। यानी यह जो चेहरा है यह अभिजीत दीपके ने बाहर से उधार में लिया है। सोनम वांगचुक इस आंदोलन के साथ शुरुआत से जुड़े हुए नहीं थे। उनका इस पूरे आंदोलन से कोई लेना देना नहीं था। वह बाहर से आए थे। किसी भी आंदोलन की सफलता के लिए जरूरी होता है कि उस आंदोलन को शुरुआत करने वाले जो लोग हैं, वह उस मुद्दे से पहले दिन से जुड़े हुए हो। तभी लोगों में भरोसा आता है। लेकिन सोनम वांगचुक इस आंदोलन में बाद में कूदे। सबसे बड़ी बात यह है कि कॉकरोच पार्टी का जो आंदोलन है, यह वह शुरू तो पहले ही कर चुके थे, लेकिन उनके पास भूख हड़ताल करने के लिए कोई ऐसा बड़ा चेहरा नहीं था। कई बार तो ऐसा लगता है कि [संगीत] यह भूख हड़ताल करने के लिए वो सोनम वांगचुक को लेकर आए ताकि उनका आंदोलन जो है वो एक प्रकार से आगे बढ़े। उन्हें एक बहुत ही विश्वसनीय चेहरे की आवश्यकता थी। एक क्रेडिबल फेस उन्हें चाहिए था और ऐसा फेस जो 20 दिन तक बिना खाए पिए रह सके और वो चेहरा था सोनम वांगचुक। यानी एक प्रकार से उन्होंने जो भूख हड़ताल है यह जो भूख हड़ताल उनकी हो रही है यह जो चेहरा है इस भूख हड़ताल के पीछे यह असल में इस आंदोलन से जुड़ा हुआ था ही नहीं।

यानी आप कह सकते हैं कि यह भूख हड़ताल एक प्रकार से आउटसोर्स कर दी गई और यही कॉकरोच पार्टी की सबसे बड़ी गलती थी क्योंकि सोनम वांगचू कभी भी नीट पेपर लीक के मुद्दे से पहले से जुड़े हुए नहीं थे। उनकी जो छवि है वो तो लद्दाख की ऑटोनोमी के आंदोलन से जुड़ी रही है और काफी हद तक उनका जो पूरा आंदोलन रहा है वो लद्दाख तक सीमित रहा है। उन्होंने लद्दाख का मुद्दा उठाया है। जब कोई बड़ा चेहरा खुद किसी आंदोलन की शुरुआत करता है तो उसे लेकर जनता में भरोसा बनता है। लेकिन सोनम वांगचुक जो है यह बाहर से लाया गया एक चेहरा है। इसलिए वह आम लोगों में वह भरोसा पैदा नहीं कर पा रहे जो कि होना चाहिए था जैसा भरोसा अन्ना आंदोलन में अन्ना हजारे ने पैदा किया था। किसी भी आंदोलन की कामयाबी उसके मुद्दे या भूख हड़ताल से ज्यादा इस बात पर निर्भर करती है कि उस आंदोलन के सबसे बड़े चेहरे को लेकर लोग क्या सोचते हैं और यह एक बहुत बड़ी कमी अभिजीत दीपके की प्लानिंग में रह गई। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके [संगीत] ने आज अपनी भूख हड़ताल सिर्फ 48 घंटे में ही तोड़ दी।

जबकि 59 साल के सोनम माचुक इस समय भी भूख हड़ताल पर हैं और पिछले 23 दिन से वह अनशन पर हैं। अभिजीत दीपके सिर्फ 30 साल के हैं और दो दिन भूखे नहीं रह पाए। 48 घंटे में ही उन्होंने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी। अब सवाल यह है कि जब सोनम वाचुक इस समय अनशन पर हैं तो आखिर अभिजीत दीपके को अपनी भूख हड़ताल खत्म करने की इतनी जल्दबाजी क्या थी? आपको याद होगा मैं शुरुआत से ये बात कहता आ रहा हूं कि अभिजीत दीपके को भी सोनम वांगचुक के साथ भूख हड़ताल करनी चाहिए थी। सोनम वांगचुक की उम्र 59 साल हो चुकी है। उनके जिंदगी के साथ यह बहुत बड़ा रिस्क लिया है अभिजीत [संगीत] देवते ने। उन्हें खुद भूख हड़ताल करनी चाहिए थी। और जब सोनम वांछुक को पुलिस ले गई तो दबाव में उन्होंने अपनी भूख हड़ताल की घोषणा तो कर दी लेकिन वो इस भूख को 48 घंटे भी सह नहीं पाए और आज उन्होंने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। [संगीत] लेकिन इस समय अभिजीत दीपके वहां से गए नहीं हैं और जंतरमंतर के ही नजदीक एक और जगह पर वह अभी भी अपने विरोध प्रदर्शन पर बैठे हुए हैं। यह उनकी नई तस्वीरें हैं जो अभी आपकी स्क्रीन पर हैं। आप देखिए। कुछ नहीं हुआ जारी उसके बाद पुलिस ने कारवाई करके उनको आप सभी लोग

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *