नमस्कार दोस्तों, एक बार फिर आप सभी का स्वागत है मनोज फिल्मी पडकास्ट में। अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहते हैं। ब्लॉग भी नियमित लिखते हैं। मगर कई समसामयिक मुद्दों पर वह चुप रहना पसंद करते हैं। इसे लेकर हाल ही में परेश रावल ने बात की। दोस्तों वीडियो में आगे बढ़ने से पहले प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन को जरूर प्रेस कर दीजिएगा। तो चलिए दोस्तों वीडियो को शुरू करते हैं। अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर खूब सक्रिय रहते हैं। ब्लॉग रोजाना लिखते हैं। मगर सोशल मीडिया प्लेटफार्म या [संगीत] अन्य सार्वजनिक मंचों पर वो तमाम मुद्दों
पर अपनी राय रखने से बचते हैं। सोशल मीडिया पर अगर वह कुछ लिखते हैं तो काफी क्रिप्टिक अंदाज में लिखते हैं। इसकी वजह क्या है? इसका खुलासा तो कभी अमिताभ बच्चन ने नहीं किया। मगर हाल ही में परेश रावल इस विषय पर बात करते दिखे। दरअसल अमिताभ बच्चन एक्स पर कभी अपनी राय जाहिर भी करते हैं तो काफी घुमा फिराकर या कम शब्दों में लिखते हैं। कई बार उन्हें अपने विचार बताने से खुद को रोकते हुए भी देखा गया है। हाल ही में बिग बी के
एक पोस्ट से अटकलें तेज हुई जिसमें लिखा गया था कि कुछ कहना चाहता था लेकिन सोचा नहीं यह मत कहो। अमिताभ बच्चन ने इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा लेकिन उनके इस मैसेज पर इंटरनेट पर खूब चर्चा हुई। अब परेश रावल ने शहंशाह के मन की स्थिति और कई बार अपनी राय जाहिर करने से खुद को रोकने के संभावित कारणों पर बात की है। परेश रावल ने विक्की लालवानी के साथ एक इंटरव्यू में कहा, लोग डरे हुए हैं। उन्हें उत्पीड़न का डर है। पहले कुछ लोग बिना किसी झिझक के अपनी बात कहते थे। अगर आप गौर करें तो समय के साथ ऐसे लोगों की संख्या भी कम हो गई है।
परेश रावल ने अमिताभ बच्चन के राजनीतिक सफर और इतने वर्षों में आई चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि इस उम्र में वह क्या करेंगे। उन्होंने देखा है कि वीपी सिंह वाले मामले के बाद लोगों ने उनकी कितनी आलोचना की थी। अगर सत्ता आपके पीछे पड़ जाए तो यह आपकी [संगीत] जिंदगी बर्बाद कर सकती है। उन्हें नहीं पता कि उन्हें किन-किन चीजों से गुजरना पड़ा। उन्हें बहुत [संगीत] तकलीफ उठानी पड़ी। परेश रावल ने आगे कहा कि अमिताभ बच्चन झगड़ों में यकीन नहीं करते। उन्हें इंसान की पसंद है। वो हाथ [संगीत] जोड़कर वहीं पर बहस खत्म कर देते हैं। बहुत से लोग इसे कमजोरी समझते हैं। उन्हें [संगीत] अपने आसपास लड़ाई झगड़े, जहरीली बातें या नेगेटिविटी पसंद [संगीत] नहीं है। परेश रावल ने अपने भी पॉलिटिकल करियर के बारे में बात की और साफ किया [संगीत] कि आम धारणा के उलट सांसद के तौर पर उनके कार्यकाल ने उनके एक्टिंग के काम को सीमित नहीं किया। परेश रावल 2014 [संगीत] में अहमदाबाद ईस्ट से बीजेपी सांसद के तौर पर राजनीति में आए थे। एक [संगीत] कार्यकाल पूरा करने के बाद उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव ना लड़ने का फैसला किया। [संगीत] उन वर्षों में फिल्मों में उनकी मौजूदगी कम हो गई। जिससे कई लोगों को लगा कि राजनीति
[संगीत] ने उनके एक्टिंग करियर पर असर डाला है। हालांकि परेश रावल ने इन दावों को नकार दिया। अभिनेता का [संगीत] कहना है कि मेरे फिल्में करने में राजनीति की कभी कोई भूमिका नहीं रही। फिल्मों की संख्या इसलिए [संगीत] कम हुई क्योंकि मैंने उन्हें करने से मना कर दिया था। मैं मना करना [संगीत] शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूं। रिजेक्ट का नहीं। कई बार मुझे स्क्रिप्ट या कहानियों [संगीत] में कोई खास बात नहीं लगती। उन्होंने आगे बताया कि संसद और फिल्मों के बीच तालमेल बिठाना कभी [संगीत] कोई चुनौती नहीं थी। उन्होंने कहा कि एक राजनेता होने के बावजूद मेरे पास फिल्में करने के लिए काफी [संगीत] समय था। संसद साल में लगभग 110 दिन चलती है। फिर भी मेरे [संगीत] पास अपने लिए करीब 265 दिन होते थे। मैंने अपने थिएटर्स को भी कम कर दिए थे। तो दोस्तों, आज का [संगीत] यह वीडियो यहीं समाप्त करते हैं। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए आप सभी [संगीत] को टाटा बाय-ब टेक केयर।