दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपने बेबाक विचारों के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 2018 में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने देश के बदलते सामाजिक माहौल पर चिंता जताते हुए कहा था, “यह वह देश नहीं है जिसमें मैं बड़ा हुआ हूँ।” उनका कहना था कि उन्हें समाज में बढ़ती असहिष्णुता, सांप्रदायिक तनाव और नफरत भरी भाषा को लेकर चिंता महसूस होती है।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया और कहा कि एक नागरिक के रूप में उन्हें अपनी राय रखने का अधिकार है। वहीं कई लोगों ने उनकी टिप्पणी की आलोचना भी की और इसे देश की छवि के खिलाफ बताया।
बाद में नसीरुद्दीन शाह ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य देश की आलोचना करना नहीं था, बल्कि उन सामाजिक बदलावों पर चिंता व्यक्त करना था जिन्हें वे महसूस कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत से उनका गहरा लगाव है और वे चाहते हैं कि देश में आपसी सद्भाव और सहिष्णुता बनी रहे।