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जानकी अम्मा के अंतिम संस्कार में क्यों बॉलीवुड से कोई नहीं आया?

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बजा रहा है मेरा हीरो हीरो दिल करके चोरी [संगीत] करे वाली तू मेरा वाला दोस्तों भारतीय संगीत जगत का एक और सबसे सुनहरा सबसे पवित्र और कभी ना लौटने वाला युग हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो गया है। अपनी जादुई, रूहानी और मखमली आवाज से पूरे छह दशकों तक करोड़ों अरबों दिलों की धड़कनों पर एक चित्र राज्य करने वाली नाइटिंगल ऑफ साउथ इंडिया यानी हम सबकी प्यारियस जानकी अम्मा अब इस दुनिया को छोड़कर भगवान के चरणों में विलीन हो चुकी हैं। कभी तू छलिया लगता है, कभी दीवाना [संगीत] लगता है, कभी अनाड़ी लगता है। 88 साल की उम्र में जब इस महान संगीत साधिका ने अपनी आखिरी सांस ली तो मानो संगीत का हर वो साज खून के आंसू रो पड़ा जिसे उन्होंने कभी अपनी पवित्र आवाज दी थी। लेकिन क्या आप जानते हैं दोस्तों कि जब मैसूर की इस पवित्र धरती पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ तो वहां क्या ऐतिहासिक नजारा था? रजनीकांत, चिरंजीवी, कमल हासन और थलपति, विजय जैसे साउथ के सबसे बड़े महासपरस्टार्स ने नम आंखों से क्या कहा? उनके इस आखिरी सफर की वह दिल को झकझोर देने वाली भावुक तस्वीरें देखकर आज हर एक सच्चे हिंदुस्तानी की आंख नम है।

अगर आप भी जानकी अम्मा के उन सदाबहार गानों के दीवाने हैं। उनके सुरों को भगवान का आशीर्वाद मानते हैं तो इस वीडियो को एक लाइक जरूर करें और नीचे कमेंट में उनके लिए दो शब्द जरूर लिखें। प्यार बिना [संगीत] चैन कहां रे प्यार बिना चैन कहां रे दिल में होता [संगीत] दोस्तों शनिवार को मैसूर के अपोलो अस्पताल में अचानक तबीयत बिगड़ने और इलाज के दौरान आए भयानक कार्डियक अरेस्ट की वजह से जानकी अम्मा का निधन हुआ। इस मनहूस खबर के आते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। जिसके बाद उनके पावन पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए मैसूर के महाराजा कॉलेज ग्राउंड में रखा गया था। जहां लाखों फैंस का हुजूम उमड़ पड़ा। रविवार शाम को पूरे कर्नाटक राजकीय सम्मान और पवित्र वैदिक रीति रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। लेकिन इस दौरान एक ऐसी अद्भुत और भावुक कर देने वाली घटना घटी जिसने इतिहास रच दिया। सदियों पुरानी परंपराओं को दरकिनार करते हुए जानकी अम्मा की पोती अप्सरा वैद्युला ने आगे बढ़कर उन्हें मुखाग्नि दी। इस भावुक दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर एक शख्स की आंखों से आंसुओं का समंदर बह निकला। कर्नाटक के डिप्टी सीएम शिवकुमार और पूर्व सीएम बसवराज बमई समेत पुलिस की पूरी टुकड़ी ने वहां मुस्तैद होकर राष्ट्रगान के साथ गन सैल्यूट यानी तोपों की सलामी देकर इस अमर कोकिला को अपनी अंतिम विदाई दी।

जानकी अम्मा के इस अचानक जाने से आज पूरी साउथ फिल्म इंडस्ट्री से लेकर बॉलीवुड तक गहरे सदमे में डूब गया है। सिनेमा और संगीत जगत के बड़े-बड़े दिग्गजों ने नम आंखों से उन्हें अपनी भावुक श्रद्धांजलि दी है। सबसे पहले बात करें भारतीय सिनेमा के थलाइवा यानी सुपरस्टार रजनीकांत की तो उन्होंने एक बेहद भावुक पोस्ट लिखते हुए कहा कि अपनी शहद जैसी मीठी आवाज से कई पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध करने वाली जानकी अम्मा का जाना भारतीय संगीत के इतिहास के लिए एक ऐसी अपूर्णीय क्षति है जिसे कभी कोई पूरा नहीं कर सकता। वह हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगी। वहीं दूसरी तरफ तेलुगु सिनेमा के मेगा स्टार चिरंजीवी ने अपनी फिल्मों के सुपरहिट गानों को याद करते हुए बेहद भारी मन से लिखा जानकी अम्मा सिर्फ एक गायिका नहीं थी। वह एक ऐसी जादुई फरिश्ता थी जो इंसानी भावनाओं को पल भर में संगीत में बदल देती थी। आज हमारे देश ने अपना सबसे बड़ा और अनमोल संगीत खजाना हमेशा के लिए खो दिया है। [चीखने की आवाज़] [संगीत] ऐसे दिलों का ऐसा बात यहीं खत्म नहीं होती दोस्तों कमल हासन साहब ने भी अपना गहरा दुख जताते हुए कहा कि उनकी गाई हुई अमर धुनें हमारे कानों और दिलों में हमेशा गूंजती रहेंगी। मां के इस निश्चल प्यार और ममता भरे सुरों को अब हम इस दुनिया में कहां ढूंढेंगे? इसके साथ ही सुपरस्टार और राजनेता थलपति विजय ने भी एक बहुत लंबा ऑफिशियल शोक संदेश जारी किया। उन्होंने लिखा कि जानकी अम्मा की अनूठी आवाज ने कई पीढ़ियों के बचपन और उनकी खूबसूरत यादों को संवारा है। उनका जाना एक पूरे स्वर्णिम युग का अंत है। इन सभी बड़े एक्टर्स के अलावा खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जानकी अम्मा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सुर सदियों तक भारत की मिट्टी में गूंजते रहेंगे।

काजल की गोरी राज शुरू होंग [संगीत] हो जा रहा है। जानकी अम्मा का अंतिम सफर तो पूरा हो गया लेकिन उनके जाने के बाद आज भारतीय संगीत जगत के गलियारों में कुछ ऐसे सुलगते हुए सवाल खड़े हो गए हैं। जिन्होंने दिल्ली के सियासी दरबार से लेकर मुंबई की माया नगरी तक को हिला कर रख दिया है। आज सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनलों की डिबेट्स तक में सिर्फ तीन ही सवाल गूंज रहे हैं। और इन सवालों का जवाब ढूंढना आज हर एक सच्चे कला प्रेमी के लिए बहुत जरूरी हो गया है। तो चलिए दोस्तों आज इन सुलगते हुए सवालों की पूरी हकीकत से पर्दा उठाते हैं। सवाल नंबर एक क्या सच में साउथ के कलाकारों के साथ होती है सौतेली नाइंसाफी? आज पहला और सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सच में हमारे देश में साउथ यानी दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों के साथ सौतेला व्यवहार होता है? क्या सच में उनके साथ नाइंसाफी की जाती है?

अगर हम इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो यह बात पूरी तरह से साफ हो जाती है। दशकों से यह देखा गया है कि जो पहचान जो नेशनल [गला साफ़ करने की आवाज़] मीडिया कवरेज और जो सम्मान मुंबई के बॉलीवुड कलाकारों को पल भर में मिल जाता है। वही सम्मान पाने के लिए साउथ के दिग्गज से दिग्गज कलाकारों को अपनी पूरी जिंदगी खपानी पड़ती है। महान गायक स्वर्गीय एसपी बाला सुब्रमण्यम यशुदास और खुद हमारी जानकी अम्मा जैसी महान प्रतिभाओं ने जितना काम किया है उसकी तुलना में उन्हें वह राष्ट्रीय दर्जा मिलने में दशकों का वक्त लग गया। क्या दिल्ली की सरकारों की नजरें सिर्फ मुंबई और उत्तर भारत के कलाकारों पर ही टिकी रहती हैं? क्या वाकई साउथ की कला को हमेशा दोयम दर्जे का समझा जाता रहा है। जानकी अम्मा ने जब साल 2013 में पद्म भूषण को लात मारी थी तो उन्होंने इसी गहरे दर्द को पूरी दुनिया के सामने बेबाक होकर रखा था। यह एक ऐसा सच है दोस्तों जिससे आज कोई भी आंखें नहीं मूंद सकता। सवाल नंबर दो 500 गानों के बाद भी पद्मश्री के लिए इतना लंबा इंतजार क्यों? अब आते हैं उस दूसरे सबसे बड़े और हैरान कर देने वाले सवाल पर। जरा ठंडे दिमाग से सोचिए दोस्तों। जिस गायिका ने अपने जीवन के 60 साल संगीत को दिए।

जिसने 25 अलग-अलग भाषाओं में करीब 5000 से ज्यादा गाने गाए। एक ऐसी आवाज जिसने हर उम्र के किरदार को अपनी सांसों से सींचा। उस महान गायिका को देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान यानी पद्मश्री के लिए भी सालों साल इंतजार क्यों करना पड़ा? आखिर क्यों हमारी सरकारों की फाइलें इतनी सुस्त चलती हैं? क्या यही वजह नहीं थी कि जब साल 2013 में आकर सरकार को अचानक उनकी याद आई और उन्हें पद्म भूषण देने की घोषणा की गई तो जानकी अम्मा के सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने साफ कह दिया कि अब बहुत देर हो चुकी है। इस अवार्ड का मेरे लिए अब कोई मतलब नहीं है। दोस्तों, यह किसी सम्मान को ठुकराना नहीं था बल्कि यह उस सिस्टम के मुंह पर एक तगड़ा तमाचा था जो उम्र ढल जाने के बाद कलाकारों को खैरात की तरह अवार्ड बांटता है। सवाल नंबर तीन क्या अब उनके जाने के बाद सरकार देगी उन्हें भारत रत्न? प्यार बिना चैन [संगीत] कहां रे प्यार बिना चैन कहां रे दिल में हो [संगीत] आपको जानकी अम्मा का गाया हुआ कौन सा गाना सबसे ज्यादा पसंद है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपने दिल की बात लिखकर जानकी अम्मा आखिर विदाई जरूर दें।

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