यह कोई रोल मॉडल है? किसी भी बात पर कुछ भी मजाक में कुछ भी कहते हैं, लोग ठहाका लगाते हैं। यह कोई यूथ आइकॉन है। यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना को तगड़ी फटकार लगाई। जुर्माना भी लगाया। यह भी कहा कि अगर तय समय से जुर्माना नहीं भरा गया तो ये जो अमाउंट है ना इसके आगे एक जीरो और बढ़ जाएगा। और इस पूरी फटकार में इस जुर्माने में सुप्रीम कोर्ट की डांट में सिर्फ समय रहना शामिल नहीं थे। उनके अलावा भी कुछ इन्फ्लुएंसर्स थे, कंटेंट क्रिएटर्स थे।
यह पूरा मामला क्या है? कौन सा वह असंवेदनशील बयान था जिसको मजाक के नाम पर समय रैना ने सामने रखा और अब सुप्रीम कोर्ट की डांट पड़ी बताएंगी ऋतू। जी आज फिर से अपडेट आया है मतलब 14 जुलाई को बार एंड बेंच के मुताबिक हम ये चीज कोट कर रहे हैं कि जो कि एक लीगल वेबसाइट है वहां पर ये देखा गया कि जो समय रहना है उनका फिर से इंडियास गॉट लेटन सीजन टू आया है। बट ये जो केस है ये 2025 के सिलसिले में है। तो ये क्लेरिटी मिलनी चाहिए। तो ये जो पूरा मामला है यह पर्सन विद डिसेबिलिटीज को लेकर है कि वहां पर एक इंफॉर्मेशन आई है कि उन्होंने पर्सन विद डिसेबिलिटीज के लोगों का मजाक उड़ाया है और इसमें यह भी दिया गया है कि जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रही थी तब उन पे यह निर्देश जारी किए गए थे कि आप महीने में दो बार जो
पर्सन विद डिसेबिलिटीज के जो लोग हैं उनको बुलाकर उनके साथ कनेक्ट होइए। अपने शो पर बुलाइए। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया जिसके वजह से हम देखते हैं कि उनके ऊपर ₹ लाख का फाइन लगाया गया है। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस मोहन्ना की बेंच ने इस चीज को इस निर्देश को दिया है। और जैसा कि हमने बताया इस पूरे मामले में कोर्ट ने समय रैना के साथी कॉमेडियन विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर इन सबको भी फटकार लगाई है। और यह पूरा मामला अगर आपको एक समराइज करके बताएं तो स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी इस मेडिकल कंडीशन से पीड़ित जो लोग हैं उनका मजाक उड़ाया गया था इंडियास गॉड लेटेंट जो ऋतु ने बताया सीजन वन में और उसी को लेकर बेशक वो एक असंवेदनशील टिप्पणी थी और वो कोई मजाक का विषय नहीं था जिस पर सब लोग वहां बैठकर हंसे और इसी पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा था कि आप इस मेडिकल कंडीशन से जो लोग पीड़ित हैं उनसे मिलेंगे उनकी मदद करेंगे यह सब भी समय ने नहीं किया कोर्ट ने कहा है कि समय रहना घूम-घूम कर तमाम शहरों में, तमाम देशों में शोज़ कर रहे हैं। लेकिन उनके पास इतना समय नहीं है कि इस मेडिकल कंडीशन से जो लोग पीड़ित हैं, हमने कहा भी था कि आप उनसे जाकर मिलिए तब भी वो नहीं जाकर मिले। इस पर और भी ज्यादा सख्त रुख रुख सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया है।
एक बार यह भी बता दीजिए ऋतू कि स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी ये बीमारी होती क्या है? ये मेडिकल कंडीशन क्या है? यह एक रेयर जेनेटिक डिसऑर्डर है जो कि कई केसेस में ऐसा होता है कि जन्म से ही जो जींस हैं उसमें कोई प्रॉब्लम्स आने लग जाती है जिसमें दो चीज अफेक्ट होते हैं। एक स्पाइनल कॉर्ड और दूसरा ब्रेन स्टॉर्म। और इन दोनों ये दोनों जो चीजें हैं वो शरीर के मसल्स को कंट्रोल करती हैं। तो जब ये दोनों चीजें अफेक्ट होती हैं तो शरीर के जो मसल्स होते हैं वो काफी कमजोर होने लग जाते हैं और धीरे-धीरे खराब होने लग जाते हैं। जिसकी वजह से क्या होता है कि व्यक्ति को चलने में, रेंगने में, ठीक से खाना निगलने में परेशानी होती है और इसका जो इलाज है वह काफी महंगा आता है। उसी से रिलेटेड कुछ ऐसे उनके बयान आए थे जिसकी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने उनको फटकार लगाई है
और उन पे आर्थिक जुर्माना भी लगाया है और एक ऑर्गेनाइजेशन एसएमए ने इस चीज पे ऑब्जेक्शन रेज किया है। साथ ही साथ जो सॉललीिसिटर जनरल ऑफ इंडिया है तुषार मेहता ने भी बोला जो उनका करंट शो आया है कि वो शो पर नींबू मिर्ची तो टांगते हैं और ये बार-बार कहते हैं कहीं मेरा शो बंद ना हो जाए। तो इनडायरेक्टली वो गवर्नमेंट को भी इस तरीके से टारगेट करते हैं। लेकिन उनको इस बात की सुध नहीं है कि जिस लोगों का उन्होंने मजाक उड़ाया था उनकी भी सुध ली जाए। जी ठीक ये सारी बातें हैं जो सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और उनके साथी जो इन्फ्लुएंसर्स कॉन्ट्रगट उनसे कही। ये भी कहा कि समय रैना ने कोर्ट को बेवकूफ बनाया है। गलत बयान दिए हैं कोर्ट के सामने और गलत भरोसा दिया है। तो ये अभी तक के वो इंस्ट्रक्शंस हैं जो सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं। अब देखना होगा कि समय रैना इन इंस्ट्रक्शंस को फॉलो करते हैं या नहीं। इस पर भी हमारी नजर रहेगी। जो अपडेट आएगी आपको बताएंगे। देखते रहिए ललन टॉप सिनेमा।