दोस्तों क्या आप जानते हैं बॉलीवुड के चॉकलेटी हीरो ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा में खुद स्वीकार किया था कि उन्होंने एक बड़ा फिल्म अवार्ड पैसों से हासिल किया था। क्या आपको पता है कि उनके पिता राज कपूर के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर पर बिना किसी झिझक के उन्होंने खुलकर लिखा था। और क्या सच में अमिताभ बच्चन के साथ उनके सालों तक कोल्ड वॉर चली। आज हम बात करेंगे ऋषि कपूर की उस किताब की जिसने रिलीज होते ही बॉलीवुड में हलचल मचा दी। नमस्कार आप सुन रहे हैं बॉलीवुड किस्से और मैं हूं आपके साथ अंशु वर्मा। साल 2017 में प्रकर्शित हुई उनकी आत्मकथा खुल्लम खुल्ला ऋषि कपूर अनसेंसर्ड सिर्फ एक किताब नहीं थी बल्कि एक ऐसे सुपरस्टार की विवाहक कहानी थी जिसने अपनी गलतियों, रिश्ते, सफलताओं और असफलताओं सब पर बिना किसी पर्दे के बात की थी। आइए जानते हैं उस पूरी किताब के बारे में। आमतौर पर कोई भी बेटा अपने पिता की निजी जिंदगी पर सार्वजनिक रूप से बात करने से बचता है। लेकिन ऋषि कपूर अलग थे। उन्होंने अपनी किताब में पूरी ईमानदारी से लिखा कि उनके पिता महान फिल्मकार राज कपूर थे और उनका अभिनेत्री नरगिस के साथ रिश्ता रहा था। ऋषि बताते हैं कि उस समय वे बेहद छोटे थे इसलिए उन्हें [संगीत] उस रिश्ते का ज्यादा एहसास नहीं हुआ। लेकिन बाद में जब राज कपूर का नाम अभिनेत्री वैजयंती माला के साथ जुड़ा तब परिवार पर उसका पूरा असर साफ दिखाई दिया। ऋषि कपूर लिखते हैं कि उनकी मां कृष्णा कपूर बच्चों को लेकर घर छोड़कर मरीन ड्राइव स्थित नटराज होटल चली गई थी। बाद में वे चित्रकूट में रहने लगीं और राज कपूर ने परिवार को मनाने के लिए काफी कोशिशें की। लेकिन कृष्णा कपूर तब तक वापस नहीं लौटी जब तक उन्होंने वो रिश्ता खत्म नहीं कर दिया।
यह स्वीकृत [नाक से की जाने वाली आवाज़] उस दौर के काफी चर्चे का विषय बन चुका था। वहीं ऋषि कपूर ने अपनी पहली मोहब्बत का जिक्र बेहद भावुक अंदाज में किया था। उन्होंने बताया कि उनकी पहली गंभीर गर्लफ्रेंड यासमीन नाम की एक पारसी लड़की थी। दोनों का रिश्ता फिल्म बॉबी बनने के पहले शुरू हुआ था। था। लेकिन 1973 में बॉबी रिलीज होने के बाद [संगीत] एक फिल्मी मैगजीन में ऋषि कपूर और डिंपल कपाडिया के कथित रोमांस की खबरें छपी थी। वहीं दिलचस्प बात यह है कि उस समय तक डिंपल सुपरस्टार राजेश खन्ना से शादी कर चुकी थी। वहीं ऋषि कपूर के अनुसार उस खबर का डिंपल पर तो कोई असर नहीं पड़ा लेकिन यासमीन ने इसे सच मान लिया। उन्होंने रिश्ता खत्म कर दिया और यहीं ऋषि ने उन्हें मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह वापस नहीं लौटी।
किताब में एक और दिलचस्प किस्सा मिलता है। ऋषि कपूर बताते हैं कि यासमीन ने उन्हें [संगीत] एक साधारण सी अंगूठी दी थी। वहीं बॉबी की शूटिंग के दौरान डिंपल कपाड़िया वो अंगूठी अक्सर पहन लिया करती थी। [संगीत] धीरे-धीरे वो अंगूठी उन्हीं के पास रह गई और जब राजेश खन्ना ने डिंपल को प्रपोज किया तो उनकी नजर उस अंगूठी पर पड़ी। व ऋषि कपूर के अनुसार राजेश खन्ना ने वह अंगूठी निकालकर समुद्र में फेंक दी थी। हालांकि मीडिया ने इसे ऋषि कपूर और डिंपल की प्रेम कहानी से जोड़ दिया लेकिन ऋषि कपूर ने साफ लिखा कि उन्होंने कभी डिंपल से प्रेम नहीं किया और ना ही वे उनके प्रति आकर्षित थे। [संगीत] वहीं ऋषि कपूर ने अपनी किताब में अमिताभ बच्चन को लेकर भी कुछ वैवाहिक बातें लिखी। उनका मानना था कि 1970 के दशक में अधिकतर बड़ी [संगीत] फिल्मों की पटकथा अमिताभ बच्चन को ध्यान में रखकर लिखी जाती थी। फिल्म हिट होने पर पूरा श्रेय भी अक्सर अमिताभ बच्चन को ही मिल जाता था। जबकि दूसरे कलाकारों ने भी उतनी ही मेहनत की होती थी। ऋषि कपूर ने यह भी लिखा कि उन्हें लगता था कि अमिताभ ने कभी अपने सहकलाकारों को उतना श्रेय नहीं दिया जिससे वह हकदार थे।
यही उसकी व्यक्तिगत राय थी जिससे उस समय काफी बहस छेड़ दी गई। ऋषि कपूर अपने कपड़ों और लुक को लेकर बेहद सजग रहते थे। वे अक्सर अपने कॉस्ट्यूम खुद खरीदते और अपने किरदार का स्टाइल भी खुद तय करते थे। लेकिन एक बार यही आदत उनके लिए शर्मिंदगीगी का कारण बन गई। दरअसल फिल्म जहरीला इंसान के लिए एक वे बेसत से एक चमकदार काले ट्राउजर खरीद कर लाए थे। उन्हें वह बेहद पसंद आई थी। लेकिन ओ हसीना गाने की शूटिंग के दौरान ड्रेसमैन ने उन्हें बताया कि उस ट्राउज़ की जिप सामने नहीं बल्कि साइड में है। यानी वह महिलाओं की ट्राउज़ थी। यानी वह महिलाओं की ट्राउज़ थी। ऋषि कपूर लिखते हैं कि यह सुनकर उन्हें बहुत शर्मिंदगीगी [संगीत] महसूस हुई। बॉबी की जबरदस्त सफलता के बाद ऋषि कपूर को उम्मीद थी कि उनकी हर फिल्म सुपरहिट होगी। लेकिन ऐसा नहीं था। [संगीत] लगातार कई फिल्में असफल रही और उसी दौरान उनकी शादी नीतू सिंह से हुई। वहीं अपनी किताब में ऋषि कपूर ने स्वीकार किया कि वह डिप्रेशन में चले गए थे और वह अपनी असफलताओं का गुस्सा नीतू सिंह पर निकालने लगे थे। उस समय नीतू सिंह गर्भवती थी और उनकी कोख में बेटी रिद्धिमा थी। ऋषि कपूर लिखते हैं कि नीतू सिंह के धैर्य, प्यार और भावनात्मक सहारे ने उन्हें उ
स कठिन दौर से बाहर निकालने में [संगीत] सबसे बड़ी मदद की थी। किताबों का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा शायद यही था कि ऋषि कपूर बताते हैं कि फिल्म कभी-कभी की शूटिंग के दौरान उनकी और अमिताभ बच्चन की ज्यादा बातचीत नहीं होती थी। उन्हें लगता था कि अमिताभ शायद इस बात से नाराज थे कि फिल्म बॉबी के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। जबकि जंजीर के लिए अमिताभ खुद को असली हकदार मानते थे। लेकिन इससे भी बड़ा खुलासा तब हुआ जब ऋषि कपूर ने स्वीकार किया कि उन्होंने वह पुरस्कार वास्तव में जीता नहीं था।
[संगीत] उन्होंने लिखा कि पीआरओ ने उनसे कहा था कि अगर वह ₹30,000 दे तो उन्हें अवार्ड मिल जाएगा। और ऋषि कपूर लिखते हैं कि उन्होंने वह रकम दे दी और उन्हें पुरस्कार मिल गया। बाद में उन्होंने इस फैसले पर अफसोस जताते हुए लिखा कि वे उस समय अनुभवहीन थे और [संगीत] किसी से बहकावे में आसानी से आ जाते थे। वह स्वीकारित बॉलीवुड की सबसे चर्चित आत्मस्वीकृतियों में से एक मानी जाती है। व ऋषि कपूर सिर्फ एक बेहतरीन अभिनेता ही नहीं थे बल्कि एक ऐसे इंसान थे जिन्होंने अपनी कमजोरियों को छिपाने की बजाय दुनिया के सामने स्वीकार किया। [संगीत] शायद यही वजह थी कि उनकी आत्मकथा आज भी बॉलीवुड के सबसे ईमानदार और विवाह किताबों में गिनी जाती है। उनकी जिंदगी हमें यह सिखाती है कि इंसान की गलतियां हो सकती हैं। लेकिन उन्हें स्वीकार करने का साहस बहुत कम लोगों में होता है। दोस्तों फिलहाल इस पॉडकास्ट में इतना ही। ऐसे और भी पडकास्ट के लिए बने रह हमारे चैनल के साथ।