क्या आपको पुणे का चेतन अग्रवाल हत्याकांड याद है? एक सुनसान पहाड़ी, विश्वास और फिर अचानक मौत। उस केस ने पूरे देश को झकझोर दिया था। लेकिन अब मुंबई से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर लोगों को उसी घटना की याद आने लगी है।
फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार मरने वाला लड़का नहीं बल्कि एक नाबालिग लड़की है। जिस लड़के पर उसने सबसे ज्यादा भरोसा किया, उसी ने उसे मिलने के लिए बुलाया, साथ में बैठकर बिरयानी खाई, घंटों बातें की और फिर उसका गला बार दिया। इतना ही नहीं हत्या के बाद वो लड़की के घर भी पहुंच जाता है। परिवार के सामने ऐसे बैठा मानो उसे कुछ पता ना हो। लेकिन एक साधारण सी कॉलेज की नोटबुक ने ये पूरी कहानी बदल दी।
ने सिर्फ 24 घंटे के भीतर इस ब्लाइंड मर्डर केस की गुत्थी सुलझाई और कैसे एक मामूली सुराग हत्यारे तक पहुंच गया। चलिए आपको बताते हैं ये पूरी कहानी। नमस्कार, मैं हूं आपके साथ जया मिश्रा। मुंबई के कांदिवली पूर्व के समता नगर इलाके में रहने वाली एक नाबालिग छात्रा कॉलेज जाती है। उसी दोस्त जिसके भरोसे पर वो उसके साथ घूमने गई थी, उसी ने उसकी जान ले ली। उसकी दोस्ती एक सूरज मारुति वाघमारे नाम के युवक से होती है। बॉय वो निकलता है।
धीरे-धीरे दोनों का रिश्ता प्रेम संबंध में बदल जाता है। लेकिन कुछ समय के बाद रिश्ते में शक ने जगह बना ली। मुताबिक सूरज को लगता था कि उसकी प्रेमिका दूसरे लड़कों से बात करती है। दूसरी तरफ लड़की लगातार शादी की बातें करती थी लड़के से, उस पर दबाव बनाती थी। लेकिन सूरज अभी शादी नहीं करना चाहता था। रिश्ता अब प्यार से ज्यादा तनाव में बदल चुका था और यहीं उसने एक खतरनाक फैसला ले लिया। गुरुवार का दिन था।
सूरज ने लड़की को दामू नगर की लव डोंगर पहाड़ी पर मिलने के लिए बुलाया था। लड़की बिना किसी डर के वहां पर पहुंचती है। दोनों ने साथ में बैठकर वहां पर बिरयानी खाई, घंटों बातें की और सब कुछ बिल्कुल सामान्य लग रहा था। लेकिन दोपहर करीब 3:00 बजे सूरज ने अचानक धारदार हथियार निकाला। लड़की के गले पर लगातार कई बार वार करता रहा जब तक उसकी सांसे नहीं थम गई। हत्या के बाद उसने लड़की का मोबाइल फोन बंद किया, उसका बैग उठाया और आराम से वह अपने घर लौट जाता है।
लेकिन कहानी यह यहीं पर खत्म नहीं होती है। शाम को वह लड़की के परिवार के पास पहुंचता है और ऐसे व्यवहार करता है, ऐसे रिएक्ट करता है जैसे उसे कुछ नहीं पता। यही अभिनय शायद उसे बचा लेता। पुलिस को वह छोटा सा सुराग अगर नहीं मिलता तो शायद सूरज बच सकता था। अगली सुबह राहगीरों ने दामू नगर की पहाड़ी पर खून से लथपथ शव देखा। पुलिस मौके पर पहुंचती है। पूरे इलाके को सील कर दिया जाता है। फॉरेंसिक टीम ने हर छोटे-बड़े सबूत जुटाने शुरू किए और इस दौरान एक नोटबुक मिलती है। उसके अंदर कॉलेज का एक प्रश्न पत्र रखा हुआ था।
में यह बेहद मामूली चीज लग रही थी। लेकिन यही पुलिस की सबसे बड़ी ताकत बन गई। उस कॉलेज पहुंची जहां पता चला कि एक छात्रा गुरुवार से गायब है। इसके बाद पुलिस उसके घर पहुंचती है। परिजनों ने फोटो देखकर शिनाख्त भी कर ली। शव की पहचान कर ली जाती है। अब पुलिस के पास पीड़िता की पहचान थी और अगला कदम था उसके आखिरी संपर्कों की जांच, तकनीकी जांच, मोबाइल का लोकेशन, खुफिया जानकारी और लोगों से पूछताछ।
हर सुराग बार-बार एक ही नाम की ओर इशारा कर रहा था। सूरज मारुति वाघमारे। पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। शुरुआत में तो उसने खुद को निर्दोष बता दिया, बहुत सारी कहानियां बताई। लेकिन लगातार पुलिस पूछताछ करती रही। जब वह टूट गया तो उसने हत्या की बात स्वीकार कर ली। पुलिस के अनुसार उसका कहना था कि उसे प्रेमिका के दोस्तों के साथ उसका मेलजोल पसंद नहीं था। उसे शक था अपनी प्रेमिका पर। दबाव उसकी प्रेमिका लगातार उस पर बना रही थी जिससे वह परेशान रहता था और इसी वजह से उसने की योजना तैयार कर ली।
24 घंटे के भीतर पुलिस ने इस पूरे केस का खुलासा भी कर दिया। मामले को आप गौर से देखें तो कई लोगों को पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की याद आ जाती है और यह स्वाभाविक भी है। में भरोसे का रिश्ता था। सुनसान जगह चुनी गई और आरोप है कि करीबी व्यक्ति ने ही जान ले ली। हालांकि दोनों मामलों की परिस्थितियां और जांच अलग-अलग लेवल पर हो रही है। इसीलिए उन्हें कानूनी रूप से एक जैसा नहीं माना जा सकता। बात दोनों घटनाओं में साफ दिखती है कि जब रिश्तों में बातचीत की जगह शक आ जाए की जगह हिंसा ले लेती है तो उसका अंत अक्सर बेहद दर्दनाक होता है। फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है। आगे की जांच जारी है और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही दोष तय होगा।
का कहना है कि 24 घंटे के अंदर इस पूरे मामले का खुलासा करना एक बड़ी उपलब्धि है। लेकिन देखना होगा कि अदालत में क्या साक्ष्य रखे जाते हैं जो तकनीकी साक्ष्य हैं वह कितने ताकतवर साबित वहां पर होते हैं और सूरज को किस तरीके की सजा मिलती है। यह सब कुछ अदालत के फैसले पर निर्भर करता है।