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एक App ने लाखों की जिंदगी कर दी खराब !200 करोड़ का घिनौना खेल !

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ये ऐप के थ्रू एक एपीके फाइल डाउनलोड हो। आपका बैंक अकाउंट डिटेल्स, आपके कांटेक्ट लिस्ट, आपके फोटो गैलरी, आपके ईमेल अकाउंट, आपके Gmail, मैसेज सब कुछ कॉम्प्रोमाइज हो जा। कहते हैं कि सावधानी हटी और दुर्घटना घटी।

लेकिन आज के इस खौफनाक डिजिटल दौर में कुछ लोगों के साथ सावधानी हटने पर सिर्फ दुर्घटना ही नहीं घटती बल्कि सरेआम इज्जत भी लूट ली जाती है और पूरी जिंदगी भी पल भर में तबाह हो जाती है। इसलिए आज खबर शुरू करने से पहले हम आपको एक बहुत बड़ी बहुत गंभीर और बेहद जरूरी चेतावनी दे रहे हैं कि अगर आपने अपने मोबाइल फोन में कोई भी अनजान ऐप डाउनलोड कर रखा है तो उसे तुरंत डिलीट कर दीजिए। वरना अगला नंबर आपका हो सकता है।

अचानक आपके फोन पर एक बेहद लुभावना विज्ञापन आता है कि महज कुछ ही मिनटों में बिना किसी कागजी झंझट के आपके सीधे बैंक खाते में ₹15,000 ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। अपनी किसी छोटी-मोटी जरूरत या मजबूरी के चलते आप बिना सोचे समझे उस मस्त मनी नाम के ऐप को इंस्टॉल कर लेते हैं और बस उसी पर आप मौत के उस कुएं में कूद जाते हैं जहां से वापस लौटने का कोई रास्ता नहीं।

यह कोई मामूली धोखाधड़ी नहीं है। बल्कि देश के कोने-कोने में रहने वाले करीब 5 लाख बेगुनाह लोग इस खूनी ऐप के जाल में फंसकर अपनी जिंदगी नर्क बना चुके हैं। और जब पुलिस तक इस ऐप की जानकारी पहुंची नागपुर पुलिस की साइबर सेल ने जब इस घोटाले का पर्दाफाश किया तो पूरे देश की सुरक्षा एजेंसियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। क्योंकि इस मस्ट मनी ऐप के जरिए मासूम जनता की जेब से पूरे ₹200 करोड़ की डिजिटल डकैती डाली जा चुकी है।

जब नागपुर पुलिस की जांबाज टीम ने इस इंटरनेशनल साइबर सिंडिकेट के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया तो डिजिटल सबूतों का पीछा करते हुए पुलिस सीधे मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल जा पहुंची। वहां पुलिस ने दबिश देकर एक ऐसे मास्टरमाइंड को बेड़ियों में जकड़ा जिसकी हकीकत जानकर आप सन रह जाएंगे। पुलिस के हत्ते चढ़ाए यह अपराधी कोई मामूली अपराधी नहीं बल्कि कंप्यूटर कोडिंग का एक्सपर्ट एक पढ़ा लिखा सॉफ्टवेयर इंजीनियर कामिल सिद्दीकी है.

इस शातिर इंजीनियर ने अपनी पढ़ाई का इस्तेमाल देश के विकास में नहीं बल्कि 5 लाख परिवारों के घरों में आग लगाने के लिए एक ऐसा खौफनाक सॉफ्टवेयर तैयार करने में किया है जो किसी की भी पकड़ में ना आए। सोशल मीडिया के हर कोने पर इस ऐप का ऐसा आक्रामक और जादुई प्रचार किया जाता था कि सीधे साधे लोग तुरंत इसके झांसे में आ जाते हैं।

जैसे ही लोग लोन के चक्कर में इस ऐप को अलऊ करते या इंस्टॉल बटन दबाते यह ऐप एक सेकंड के भीतर आपके फोन का पूरा एक्सेस आपकी पर्सनल गैलरी की प्राइवेट तस्वीरें आपकी पूरी कांटेक्ट लिस्ट, आपके मैसेज और आपकी हर एक गुप्त जानकारी को अपने सर्वर पर हैक कर लेता है।

इसके बाद आपको 15,000 का मामूली लोन तो दे दिया जाता है लेकिन इस चंद रुपयों के बदले यह जालिम गिरोह आपसे 25,000 से लेकर ₹00 तक की जबरन वसूली शुरू कर देता है। तो इस खबर को हमारी चेतावनी को हल्के में बिल्कुल मत लीजिएगा क्योंकि अगर किसी पीड़ित ने पैसे देने से मना किया या थोड़ी भी देरी की तो यह गैंग अपनी असली औकात पर आ जाता है। इसके बाद शुरू होता था.

डिजिटल ब्लैकमेलिंग का वो गंदा खेल जो किसी भी शरीफ इंसान को जीते जी मारते। पीड़ितों की निजी और पारिवारिक तस्वीरों को अश्लील तरीके से माफ करना। उनके रिश्तेदारों, दोस्तों, बहनों और दफ्तर के बॉस को फोन करके उन्हें बदनाम करना और समाज के चौराहे पर उनकी इज्जत को नीलाम करने की धमकियां देना यह इस खूंखार सिंडिकेट का रोज का धंधा था। एक लेडी हमारे पास आई जिसने एक मस्त मनी करके ऐप डाउनलोड किया था। वो ऐप डाउनलोड करने के बाद उसने स्माल टिकट साइज लोन एक ₹00 का लिया था। वो 20,000 का लोन लेने के बाद उसने वो परत एक 7 दिन के अंदर ₹26,000 परत किए।

पैसे वापस करने के बाद ऐसा निष्पन्न हुआ कि उसका फोन जो है वो कॉम्प्रोमाइज किया गया। फोन कॉम्प्रोमाइज होने के बाद उसकी जो फोटो थी उसकी गैलरी में उसका एक्सेस लेके उसको मॉर्फ किया गया और उसकी कांटेक्ट लिस्ट के साथ शेयर करके उसको ब्लैकमेल किया गया। जैसे ही ये इंफॉर्मेशन हमारे साइबर पुलिस स्टेशन में आई हमने इसको तुरंत कॉग्निजेंस लेके एक अपराध दाखिल किया।

ऑफेंस रजिस्टर होने के बाद ऐसा निष्पन्न हुआ कि एक तरीके का सेक्सटॉशन का ऑफेंस है और ये जो ऐप है इसके बहुत ज्यादा डाउनलोड्स है जिसका पूरा का पूरा एक सिंडिकेट चलाया जा रहा है लोगों का पैसा कंट्रोल करने के लिए वो करने के बाद हमने अपनी टीम लगा के इसका पूरा का पूरा टेक्निकल एनालिसिस किया। अब कैसे इन शातिरों का खुलासा हुआ? कैसे ये लोग पकड़े गए?

चलिए यह भी बताते हैं। दरअसल नागपुर के दो लोगों ने हिम्मत जुटाई और मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। तब जाकर इस काले साम्राज्य के अंत की शुरुआत हुई। पुलिस के जब इलेक्ट्रॉनिक सबूतों और बैंक खातों के डिजिटल फुटप्रिंट्स को खंगालना शुरू किया तो कड़ जुटती गई और भोपाल में छुपा बैठा कामिल सिद्दीकी सलाखों के पीछे पहुंच गया। लेकिन पुलिस का साफ कहना है कि यह तो सिर्फ इस विशाल काय अजगर का एक मोहरा है। यह पूरा का पूरा एक बेहद खतरनाक संगठित गिरोह है जिसका नेटवर्क देश के बाहर तक फैला हुआ है। पूरा टेक्निकल एनालिसिस किया।

टेक्निकल एनालिसिस में ऐसा निष्पन्न हुआ कि यह ऐप के थ्रू एक एपीके फाइल डाउनलोड हो रहा है फोन में। फोन कॉम्प्रोमाइज हो रहा है और उससे आपकी प्राइवेट और पर्सनल इनेशन जो है जो कि आपका बैंक अकाउंट डिटेल्स, आपके कांटेक्ट लिस्ट, आपके फोटो गैलरी, आपके मेल अकाउंट्स, आपके Gmail, मैसेजेस सब कुछ कॉम्प्रोमाइज हो जा रहा है। जिसका यूज़ करके साइबर फ्रॉड किया जा रहा है। ऐसा पता होने के बाद हमने पूरा का पूरा टेक्निकल एनालिसिस चालू किया। एक टीम का गठन करके।

टीम में पूरा का पूरा काम हमारे कुछ अधिकारी और कर्मचारियों ने मिलकर किया। वो करने के बाद हमारे को एक लीड मिला। वो लीड मिलने के बेसिस पे हमने अपनी एक टीम को एमपी भोपाल भेजा। वहां जाने के बाद जो मुख्य आरोपी था जिसने ये ऐप बनाया था उसको हमने अटक किया। उसके पास से कुछ मोबाइल फस लैपटॉप्स वगैरह सीज किए गए। जिसके बेसिस पे हमारे को ऐसा निष्पन्न हुआ कि ये पूरा का पूरा ऐप जो है उसके द्वारा डेवलप किया गया। उसके बयान वगैरह नंद करने के बाद ऐसा पता चला कि उसको तीन चार लोगों ने मिलके एक टेलीग्राम प्लेटफार्म पे बनाया था और उसका वहां पर पूरे देश भर में किया जा रहा है। उसके बेसिस पे लोगों के साथ ऑलमोस्ट 5 लाख प्लस इस ऐप के डाउनलोड्स हैं। जिसमें से 3 लाख कुछ लोगों ने इसको अनइंस्टॉल किया है। बट लाख लोगों के पास आज भी ये ऐप इंस्टॉल्ड है।

अगर हम एवरेज भी देखें तो इसके अंदर ऑलमोस्ट 200 सीआर प्लस का फ्रॉड ऐसा हमें आज की डेट में अपेक्षित है। अब पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इस ऐप के पीछे असली आका कौन है? ठगी के यह ₹200 करोड़ किन-किन फर्जी बैंक खातों के जरिए कहां भेजे गए और इस पूरे काले धंधे में और कितने बड़े चेहरे शामिल हैं। इसीलिए हम आपको फिर से चेतावनी दे रहे हैं कि किसी भी अनजान लोन ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी आरबीआई से मान्यता की जांच जरूर करें और अपने फोन की गैलरी या कांटेक्ट लिस्ट की परमिशन देने से पहले हजार बार सोें क्योंकि आपका एक गलत क्लिक आपके पूरे परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को हमेशा के लिए जमींदोज कर सकता है और आपको इस खतरनाक डिजिटल के दलदल में धकेल सकता है।

जैसे कि इस ऐप ने किया। एक लेडी हमारे पास आई जिसने एक मस्त मनी करके ऐप डाउनलोड किया था। वो ऐप डाउनलोड करने के बाद उसने स्मॉल टिकट साइज लोन एक ₹00 का लिया था।

वो ₹00 का लोन लेने के बाद उसने वो परत एक 7 दिन के अंदर ₹26,000 परत किए। पैसे वापस करने के बाद ऐसा निष्पन्न हुआ कि उसका फोन जो है वो कॉम्प्रोमाइज किया गया। फोन कॉम्प्रोमाइज होने के बाद उसकी जो फोटो थी उसकी गैलरी में उसका एक्सेस लेके उसको मॉर्फ किया गया और उसकी कांटेक्ट लिस्ट के साथ शेयर करके उसको ब्लैकमेल किया गया।

जैसे ही ये इंफॉर्मेशन हमारे पुलिस स्टेशन में आई हमने इसको तुरंत कॉग्निजेंस लेके एक अपराध दाखिल किया। ऑफेंस रजिस्टर होने के बाद ऐसा निष्पन्न हुआ कि एक तरीके का सेक्सटॉशन का ऑफेंस है और ये जो ऐप है इसके बहुत ज्यादा डाउनलोड्स है जिसका पूरा का पूरा एक सिंडिकेट चलाया जा रहा है लोगों का पैसा कंट्रोल करने के लिए। वो करने के बाद हमने अपनी टीम लगा के इसका पूरा का पूरा टेक्निकल एनालिसिस किया।

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