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नसीरुद्दीन शाह को क्यों लोगों ने भेज दिया था पाकिस्तान का एयर टिकट?

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मैं वो हूं जो किसी के हाथ में तस्बीह देखकर शक करता है और मैं वह भी हूं जो आजकल दाढ़ी बढ़ाने और टोपी पहनने से घबराता है। बिजनेस के लिए दुकान खरीदता है तो सोचता है दुकान का नाम क्या रखूं? कहीं दंगे में मेरा नाम देख के मेरी दुकान ना जला दें। एक बेहद साधारण चेहरे वाले वो अभिनेता जिन्होंने अपने दमदार अभिनय से हिंदी फिल्म में एक अलग पहचान बनाई। के नैनो वाली ओपी [संगीत] भोली दिल तो बच्चा है [संगीत] थोड़ा कच्चा है रे भारतीय सिनेमा की आठ फिल्मों को एक खास मुकाम दिलाने वाले वो दिग्गज एक्टर जिन्हें 1980 के दौर में पैरेलल सिनेमा का भी एक्टर कहा जाने लगा था। एक छोटी सी अर्ज है। एक लफ्ज आप जितनी जल्दी भूल जाए उतना अच्छा होगा। बेचारा हमें मदद चाहिए तरस नहीं। पर फिर इन्होंने मेन स्ट्रीम फिल्मों में भी एंट्री मारी और कॉमेडी हो चाहे सीरियस रोल या फिर विलेन के खतरनाक किरदार सब में बराबर का रंग जमाया। इंसान की [संगीत] सबसे बड़ी गारंटी उसका अपना जमीर होता है। पुलिस वालों को जब वर्दी [संगीत] दी जाती है तो उनकी ईमानदारी की गारंटी कौन लेता है? लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म जगत के सबसे शानदार अभिनेताओं में से एक माने जाने वाले इस एक्टर का विवादों से चोली दामन का नाता रहा है। वेडनेसडे फिल्म की स्क्रिप्ट मेरी मेज पे कुछ 6 महीने पड़ी रही। सारे टेररिस्ट मुसलमान थे चारों। कोई नक्सल नहीं, कोई एलटीडीटी वाला नहीं, कोई माओवादी नहीं। चारों मुसलमान क्या आपको पता है कि यह अपनी बेबाक टिप्पणियों के चलते कई बार इंटरनेट पर जबरदस्त ट्रोल हुए और भारत से लेकर पाकिस्तान तक के लोगों के निशाने पर भी आ गए। और एक बार तो इन्हें पाकिस्तान के लोगों से माफी तक मांगनी पड़ गई। आप ठीक उसी तरह यह बात कर रहे हैं जिस तरह कुर्सी पर बैठा हुआ एक नेता अपनी जिद्द और शान के लिए हजारों लोगों को जंग की आग में धकेल देता है। क्या आप यकीन करेंगे कि इनके शब्दों के तीर से ना तो दिलीप कुमार बच सके और ना ही सुपरस्टार राजेश खन्ना।

ना इन्होंने अपने साथी कलाकार अनुपम खेर को बख्शा और ना ही अमिताभ बच्चन और भारत की मोदी सरकार को। मेरा अगर मुझ में हिम्मत होती तो मैं पूछता था फिर आप कैसे आ गए फिल्मों में अगर शरीफ खानदान के लोग नहीं आते बट मेरी हिम्मत नहीं हुई और फिर उन्होंने मुझे घर भिजवा दिया तो क्यों इतने काबिल कलाकार ने वक्त बेव अपने तीखे तेवरों और चुभो देने वाले बयानों से सबको नापे रखा और खुद को सिर्फ फिल्मों में अभिनय तक ही सीमित ना रखकर देश के गंभीर मुद्दों पर भी बेबाक राय दी बताएंगे और भी बहुत कुछ आप बने रहिए हमारे साथ जंगल में सिर्फ एक शेर होता है और शहर में सिर्फ एक खलीफा। बाकी जो होते हैं वह सिर्फ होते हैं। नमस्कार दोस्तों, मैं हूं प्रियंक वाजपेई और आप देख रहे हैं डार्क बॉलीवुड। दोस्तों, अब तो बताने की जरूरत नहीं है कि आज हम बात कर रहे हैं फेमस एक्टर नसीरुद्दीन शाह की। लेकिन इनकी कोई हम बायोग्राफी आपको नहीं बताएंगे बल्कि उनकी चर्चा किसी और एपिसोड में होगी। आज बात होगी इनसे जुड़े विवादों की। चीज [संगीत] बड़ी हूं मस्तमस्त मैं चीज बड़ी हूं मस्त मैं चीज दोस्तों चलिए सबसे पहले बात करते हैं मुगलों पर दिए गए इनके बयान की तो अभिनेता नज़रुद्दीन शाह ने अपनी वेब सीरीज ताज डिवाइडेड बाय ब्लड के रिलीज से पहले मुगलों और उनकी बनाई गई इमारतों पर बात की। उन्होंने कहा कि इतिहास के बारे में लोगों के पास सही जानकारी और सही तर्क नहीं है। अगर मुगल साम्राज्य राक्षसी और विनाशकारी थे तो उनके द्वारा बनाए गए ताजमहल लाल किले कुतुब मीनार गिरा दें। हमें उनका महिमाम मंडन करने की जरूरत नहीं है और ना ही उन्हें बदनाम करने की भी जरूरत है। इन ईरान ही कॉल्ड एलेग्जेंडर वि टू हॉर्स स्पोकन ऑफ एस द डेविल। ही डिस्ट्रपुलस ही डिस्ट्रड ऑल द ट्रेजर्स दैट वर देर। वहीं नसीरुद्दीन शाह ने अपने साथी कलाकार रहे अनुपम खेर को भी एक बार जमकर घेर लिया और उन्हें जोकर तक कह दिया। दरअसल सीएए और एनआरसी को लेकर जारी विवाद के बीच कुछ दिनों पहले नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि अनुपम खेर Twitter पर हैं। मैं Twitter पर नहीं हूं। यह लोग जो Twitter पर हैं, मैं उम्मीद करता हूं वो अपना मन बना चुके हैं कि उन्हें किस चीज पर विश्वास है। अनुपम खेर जैसे किसी जोकर व्यक्ति को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। लाइक अनुपम खेर हैज़ बीन वैरी वोकल ही इज़ आई आई आई डोंट थिंक ही नीड्स टू बी टेकन सीरियसली ही इज अ क्लाउन। ही एनी नंबर ऑफ़ ह कंटेंपररी फ्रॉम एनएसडी एंड एफडीआई कैन अटेस्ट टू ह साइकोफेंटिक नेचर। तो उधर अनुपम खेर ने भी इन्हें करारा जवाब देते हुए कहा कि नसीर फ्रस्ट्रेटेड हैं। यह उनका नहीं बल्कि वह जिस पदार्थ का सेवन करते हैं, उसका दोष है।

आपने अपनी पूरी जिंदगी फ्रस्ट्रेशन में गुजारी है। बरसों से आप जिन पदार्थों का सेवन करते हैं, उनकी वजह से क्या सही है और क्या गलत है, आपको इसका अंतर ही नहीं पता लगता। चलिए अब आपको बताते हैं लव जिहाद पर नसीर साहब के बयान। दरअसल जब देश में लव जिहाद शब्द पर खूब चर्चा चल रही थी तो इस पर भी नसीरुद्दीन शाह ने अपना बयान देकर इसकी कड़ी निंदा की। नसीर साहब ने कहा कि लव जिहाद के नाम पर कई युवा लड़कों को परेशान किया जा रहा है। लव जिहाद के नाम पर जो तमाशा चल रहा है इससे समाज को बांटा जा रहा है। लव जिहाद शब्द का जिसने आगाज किया उसे उसके बारे में कुछ भी नहीं पता है। इस बात पर कोई यकीन नहीं करेगा कि एक दिन देश में मुस्लिमों की आबादी हिंदुओं से ज्यादा हो जाएगी। तो लव जिहाद पर इनके इस बयान की कई संगठनों और लोगों ने खूब आलोचना की और इन्हें सोशल मीडिया पर खूब खरी-खोटी भी सुनाई। देश में जब भी कोई बड़ा मामला सामने आता है तो जहां उन पर सीधी टिप्पणी करने से बाकी बॉलीवुड स्टार्स कतराते हैं वहीं नज़रुद्दीन शाह खुलकर बोलते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया जब बुलंदशहर हिंसा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी इन्होंने बेबाकी से अपनी बात रखी। नसीरुद्दीन शाह ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा इस देश में कानून को हाथ में लेने की खुली छूट मिल गई है। कोई भी कहीं भी कभी भी किसी को भी मार देता है और कोई कुछ नहीं करता है। मुझे इस बात से डर लगता है कि अगर कहीं मेरे बच्चों को भीड़ ने घेर लिया और उनसे पूछा जाए कि तुम हिंदू हो या मुसलमान मेरे बच्चों के पास इसका कोई जवाब नहीं होगा और उसके बाद भीड़ कुछ भी कर सकती है। दरअसल नसीर साहब की पत्नी हिंदू हैं और इनका कहना था कि हमारे बच्चों को हिंदू मुस्लिम दोनों धर्मों को मानने की आजादी दी गई है तो वह किसी एक धर्म के नहीं है बल्कि सिर्फ एक अच्छे इंसान हैं। खैर इनके इस बयान की जहां एक बड़े वर्ग ने खूब निंदा की तो कुछ लोगों नेट भी किया। दो खेमे में बटे लोगों में से कुछ ने इन्हें पाकिस्तान जाने की सलाह दे दी तो कुछ भड़के लोगों ने इनके एड्रेस पर बकायदा पाकिस्तान का एयर टिकट भी बेच दिया। पर नरसी साहब अपनी बात पर अड़े रहे। फिक्र मुझे होती है अपने बच्चों के बारे में क्योंकि कल को उन्हें कोई अगर एक एक भीड़ ने घेर लिया कि तुम हिंदू हो या मुसलमान तो उनके पास तो कोई जवाब ही नहीं होगा। लेकिन इन्हें बार-बार कई मुद्दों पर पाकिस्तान जाने की सलाह देने वालों को शायद यह पता नहीं था कि यह तो पाकिस्तान भी नहीं जा सकते क्योंकि कई बार वहां के लोगों को भी इन्होंने नाराज कर दिया है। दरअसल अभिनेता नसीरुद्दीन शाह सिंधी भाषा पर आपत्तिजनक बयान देकर पाकिस्तान में भी फंस चुके थे और बाद में इनको माफी भी मांगनी पड़ी। हुआ यह कि इन्होंने सिंधी भाषा को लेकर बयान देते हुए कहा कि पाकिस्तान में सिंधी भाषा अब नहीं बोली जाती है। इस बात पर सिंधी भाषी भड़क गए थे। फिर तो नसीरुद्दीन शाह की सोशल मीडिया पर खूब आलोचना हो गई। खुद को फंसता देखकर बाद में नसीरुद्दीन शाह ने अपने Facebook पोस्ट पर लिखा मैं पाकिस्तान की पूरी सिंधी भाषी आबादी से माफी मांगता हूं जो मुझे लगता है मेरी गलत राय से वो बहुत आहत हैं। इस माफी पर जहां कई पाकिस्तानियों ने इन्हें सराहा तो कुछ ने उल्टी प्रतिक्रिया दी। दूसरी ओर इन्हें भारत में भी मराठी भाषा को फारसी से जोड़ने वाली बात पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। ऐसा नहीं है कि नसीरुद्दीन शाह सिर्फ एक वर्ग के लोगों के खिलाफ ही बोलते हैं। इनके निशाने पर कई बार इनकी अपनी कम्युनिटी के लोग भी आ चुके हैं। बार-बार आलोचनाओं का शिकार होने वाले नसीरुद्दीन शाह की उस वक्त अचानक तारीफ होने लगी जब इन्होंने एक गंभीर मसले पर भारत में रहने वाले मुस्लिमों की जमकर क्लास लगा दी।

दरअसल नसीरुद्दीन शाह ने सितंबर 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने का जश्न मना रहे भारतीय मुसलमानों के एक वर्ग को जमकर लताड़ लगाई और कहा कि यह चिंता का विषय है। बता दें कि तालिबान ने अफगानिस्तान में सरकार को बेदखल कर दिया था और काबुल पर कब्जा करने के बाद देश का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था। इसके बाद भारत में भी कुछ मुसलमान इनकी खुशी मना रहे थे और तालिबान को सपोर्ट कर रहे थे। इन्हीं लोगों पर नसीरुद्दीन शाह ने नाराजगी जताई और एक वीडियो जारी कर कहा अफगानिस्तान में तालिबान का दोबारा हुकूमत पा लेना दुनिया भर के लिए फिक्र का बायस है। इससे कम खतरनाक नहीं है हिंदुस्तानी मुसलमानों के कुछ तबकों का उन वैशियों की वापसी पर जश्न मनाना। [संगीत] नसीरुद्दीन शाह ने हाल ही में रिलीज फिल्म द केरला स्टोरी को लेकर भी स्टेटमेंट दिया और असल में फिल्म की सक्सेस पर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि लोग द केरला स्टोरी देखने के लिए सिनेमाघर जा रहे हैं। मैंने यह फिल्म नहीं देखी है। मैं इसे देखने का इरादा भी नहीं रखता हूं क्योंकि इस मैंने इसके बारे में काफी कुछ पढ़ लिया है। आगे इसी कॉन्टेक्स्ट में बात करते हुए नसीरुद्दीन शाह ने मोदी सरकार को भी जमकर घेरा और कहा कि यह खतरनाक ट्रेंड है। इसमें कोई शक नहीं है। हम लोग नाजी जर्मनी की तरफ बढ़ रहे हैं। जहां हिटलर के समय में सुप्रीम नेता के जरिए फिल्म मेकर्स को अपॉइंट किया जाता था। ताकि वह अपनी फिल्मों में सरकार की तारीफों के पुल बांधे और उन्होंने देशवासियों के लिए क्या किया है यह सब दिखाएं। यहूदी समुदाय को नीचा दिखाया जाता था। जर्मनी के कई दिग्गज फिल्म मेकर्स ने देश छोड़ दिया था और हॉलीवुड चले गए थे। वहां जाकर फिल्में बनाई। यहां इंडिया में भी अब यही चीजें हो रही हैं। या तो सही की तरफ रहे या न्यूट्रल रहे या फिर सत्ता समर्थक। वी सीम टू बी हेडिंग द वे ऑफ़ नाज़ जर्मनी वेयर इन हिटलर्स टाइम फिल्म मेकर्स वर कोऑप्टेड अटेम्प्टेड टू बी कोऑप्टेड बाय बाय द सुप्रीम लीडर एक्टर नसीरुद्दीन शाह ने साल 2022 में आई निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की फिल्म द कश्मीर फाइल्स की भी काफी आलोचना की। उन्होंने इस फिल्म को कश्मीरी हिंदुओं द्वारा झेले गए दर्द और पीड़ा का फिक्शनल वर्जन बताया। एक टीवी चैनल को दिए गए अपने इंटरव्यू के दौरान नसीरुद्दीन शाह ने यह भी कहा, सरकार कश्मीरी हिंदुओं की सुरक्षा और पुनर्वाद सुनिश्चित करने की बजाय इसे बढ़ावा दे रही है। द केरला स्टोरी एक प्रोपोगेंडा है। अब मुसलमानों से नफरत करना एक फैशन बन गया है। हाल ही में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने एक मीडिया संस्थान को दिए गए अपने एक इंटरव्यू में बिना द कश्मीर फाइल्स और द केरला स्टोरी का नाम लेते हुए कहा कि सत्ताधारी पक्ष कला के जरिए एक छिपा हुआ एजेंडा चला रहे हैं। लोगों के दिमाग में इस तरह की फिल्मों के जरिए मुसलमानों के खिलाफ नफरत भरी जा रही है। आज के समय में यह बहुत ही डरावना है। हम धर्मनिरपेक्ष होने और लोकतंत्र की बात करते हैं तो आप हर चीज में धर्म का परिचय क्यों दे रहे हैं? अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के नए संसद के उद्घाटन समारोह पर भी उन्होंने तंज कसा और इसकी तुलना स्मारक से कर दी। उन्होंने इसके उद्घाटन समारोह पर सवाल करते हुए कहा कि नए संसद भवन की इमारत की जरूरत इसलिए थी क्योंकि पुरानी इमारत 100 साल पुरानी थी। लेकिन क्या ऐसे उद्घाटन समारोह की जरूरत थी? इसी तरह साल 2015 में नसीरुद्दीन शाह लाहौर लिटरली फेस्टिवल में अपने संस्करण और फिर वनडे को प्रमोट करने के लिए पाकिस्तान गए थे। कार्यक्रम स्थल पर मीडिया को संबोधित करते हुए नसीरुद्दीन ने दोनों देशों के बीच दुश्मनी के बारे में बात करते हुए कहा कि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से वाकिफ हुए बिना भारतीयों को यह विश्वास दिलाने के लिए ब्रेन वाश किया जा रहा है कि पाकिस्तान एक दुश्मन देश है। राजनेता जब चाहे रंग बदल लेंगे लेकिन दोनों देशों के कलाकारों को राजनीतिक दुश्मनी से परे रहना चाहिए। इनके इस बयान से भारत में कुछ लोगों और संगठनों ने इनकी खूब आलोचना की और शिवसेना ने एक बयान भी जारी कर कहा कि 2611 के पीड़ितों के करीब ही समझेंगे कि पाकिस्तान के खिलाफ इतनी नफरत क्यों है। इसी तरह नज़रुद्दीन शाह ने साल 2021 में हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद पर सवाल उठाते हुए कहा था कि हम 20 करोड़ लोग इतनी आसानी से हार नहीं मानेंगे। यह हमारी मातृभूमि है। हम यहीं के हैं। हमारा परिवार और पीढ़ियां यहीं की हैं। हम बुजुर्ग यहीं के हैं। यहीं की मिट्टी में पले बड़े हैं। हम अपने अधिकारियों के लिए लड़ेंगे। लेकिन धर्म संसद का यह मामला क्या था? चलिए यह भी आपको बता दें। दरअसल साधु संतों के इस धर्म संसद में एक वीडियो सामने आया था। जिसमें धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने, मुस्लिम प्रधानमंत्री ना बनने देने, मुस्लिम आबादी ना बढ़ने देने समेत धर्म की रक्षा के नाम पर विवादित भाषण देते हुए कई साधु संत दिखाई दे रहे थे। इस पर पुलिस में शिकायत की गई। प्रशासन ने कारवाई का भरोसा भी दिलाया था। इसी मुद्दे पर नसीरुद्दीन शाह ने भी अपना रिएक्शन दिया था। तो यह तो रहे कुछ राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक मुद्दे जिन पर नसीरुद्दीन शाह ने हमेशा खुलकर अपनी बात रखी। चलिए अब इससे थोड़ा अलग हटकर उनके उन बयानों की भी बात कर लेते हैं जिसके निशाने पर बड़े-बड़े एक्टर और दूसरी फिल्म हस्तियां भी रही। इनमें सबसे पहला नाम है

दिलीप कुमार का जिनको नसीरुद्दीन शाह ने कई बार अच्छे से लपेटा है और सवाल पूछा कि दिलीप साहब ने आज के जनरेशन के लिए किया क्या है? ना ही उन्होंने कोई अच्छी फिल्म बनाई और ना ही स्टूडेंट्स को एक्टिंग की ट्रेनिंग दी। सुनिए द लल्लन टॉप को दिए गए इंटरव्यू में इन्होंने क्या कहा था। अब यूसुफ साहब के इंतकाल के बाद मैंने उनके बारे में एक मजमून लिखा था जिसमें बहुत लोग खफा हुए। मुझे जो लगा मैंने कहा मैं उनका मतद्दा भी था और मैं उनसे कई तरह से मैं डिसपॉइंट भी हुआ। [संगीत] हिंदी सिनेमा के महानायक कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन के अभिनय की पूरी दुनिया कायल है। लेकिन नसीरुद्दीन शाह ने एक इंटरव्यू में अमिताभ के फिल्मी चॉइस पर ही सवाल उठा दिए और कहा कि वो एक अच्छे एक्टर हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन उन्होंने आज तक कोई अच्छी फिल्म नहीं दी है। लोग शायद अमिताभ बच्चन को भूल जाएं। शोले को मैं ग्रेट फिल्म नहीं मानता हूं। शोले मजेदार जरूर है लेकिन किसी भी एंगल से महान फिल्म तो नहीं है। साथ ही साल 2016 में एक इंटरव्यू के दौरान नसीरुद्दीन शाह ने दिवंगत सुपरस्टार राजेश खन्ना को औसत दर्जे का अभिनेता कहा और उन पर फिल्मों का स्तर गिराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 70 के दशक में फिल्मों में औसत दर्जे के लिए राजेश खन्ना जैसा गरीब अभिनेता जिम्मेदार था। इस पर राजेश खन्ना के प्रशंसकों और बेटी ट्विंकल खन्ना ने उनके सुपरस्टार पिता को बदनाम करने के लिए नसीरुद्दीन की भारी आलोचना की। हालांकि नसीरुद्दीन शाह ने सिर्फ सीनियर एक्टर्स को ही नहीं घेरा है बल्कि कई दफे नए एक्टर्स से भी कड़े सवाल पूछे हैं। साथ ही साथ फटकार भी लगाई है। इसमें बॉलीवुड इंडस्ट्री के तीनों खान भी शामिल हैं। नसीरुद्दीन शाह ने एक बार शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान पर निशाना साधते हुए कहा था कि ये तीनों सामाजिक, राजनीतिक मुद्दों पर बोलने के लिए स्टैंड नहीं लेते हैं। यह तीनों बॉलीवुड पर अब भी राज करते हैं। जाहिर है कि वो इस बात से चिंतित हैं कि उन्हें किस हद तक परेशान किया जाएगा। मैं उनके लिए नहीं बोल सकता लेकिन मैं कल्पना कर सकता हूं कि उनके पास खोने के लिए बहुत कुछ है। वहीं नज़रुद्दीन शाह के गुस्से से क्रिकेटर भी नहीं बच पाए और एक बार उन्होंने विराट कोहली पर भी विवादित टिप्पणी कर डाली। दरअसल विराट कोहली से जब एक फैन ने पूछा कि उन्हें ऑस्ट्रेलियाियाई बल्लेबाज पसंद है तो विराट ने उसे देश छोड़ने की सलाह दे डाली। इस बात पर नसीरुद्दीन शाह ने विराट कोहली की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें सबसे खराब व्यवहार वाला खिलाड़ी बताया। नसीरुद्दीन शाह ने कहा था कि विराट कोहली ना सिर्फ दुनिया के बेस्ट बैट्समैन हैं

बल्कि दुनिया के सबसे खराब व्यवहार करने वाले खिलाड़ी भी हैं। उनकी क्रिकेटिंग क्षमता उनके घमंड और बुरे व्यवहार के आगे फीकी पड़ जाती है। वैसे मेरा इरादा देश छोड़ने का नहीं है। दोस्तों साथ ही आपको यह भी बताते चले कि मार्च 2022 में चलचित्र नामक एक YouTube चैनल के साथ बातचीत के दौरान नसीरुद्दीन शाह ने यह खुलासा किया कि यह ओनोमेटोमोनिया नामक एक बीमारी से पीड़ित थे। इनके अनुसार इस स्थिति ने इन्हें अपने दिमाग में लगातार शब्दों और वाक्यांशों को सोचने पर मजबूर कर दिया था। कई बार ऐसा होता कि यह किसी एक मुद्दे पर ही घंटों सोचते रहते और सो भी नहीं पाते। खैर नसीरुद्दीन शाह के इन बयानों को लेकर इनकी अक्सर आलोचना होती ही रहती है। लेकिन फिर भी यह लगातार अपने मन की बात सार्वजनिक करते रहते हैं और कभी भी डर कर चुप नहीं होते। दोस्तों ये एक ऐसी फिल्मी हस्ती रहे हैं जिन्होंने कभी भी अपनी बात कहने से परहेज नहीं किया। चाहे वो किसी बड़े नेता, अभिनेता, किसी देश की कुप्रथा, देश की सरकार या धर्म, जाति का ही मुद्दा क्यों ना रहा हो। इन्होंने हमेशा बेबाकी और तर्क के साथ अपनी बात रखी और उस पर लगातार टिके रहे। हां, इसके लिए इन्हें आलोचनाओं, नफरतों और धमकियों का सामना जरूर करना पड़ा। तो कई बार तारीफें भी मिली। तो दोस्तों, आप इनके किस बयान को विवादास्पद मानते हैं या इसे गलत बयानी की कैटेगरी में रखते हैं? हमें कमेंट करके आप जरूर बताइएगा। अगर आप इनके इसी तरह के किसी बयान को अच्छे नजरिए से देखते हैं तो वह भी मेंशन करना मत भूलिएगा। तो चलिए दोस्तों फिलहाल आपसे इजाजत चाहता हूं। फिर मिलूंगा डार्क बॉलीवुड की किसी नई कहानी और नए एपिसोड में। मैं प्रियंक वाजपेयी हूं आपके साथ। शुक्रिया नमस्कार।

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