अमर बनना था और हो गई गंभीर बीमारी। यह है दुनिया का सबसे खतरनाक केस। सेहत पर 19 करोड़ खर्च करने वाले को अब एक जानलेवा बीमारी हो गई है। [संगीत] $ मिलियन सिर्फ अपनी हेल्थ पर खर्च करने वाला आज एक सीरियस बीमारी से जूझ रहा है।
केस ब्रायन जॉनसन का। नमस्कार मेरा नाम है श्वेता शर्मा और ब्रायन जॉनसन वो अमेरिकी एंटरप्रेन्योर जो हर साल एजिंग को धीमा करने की कोशिश में लाखों डॉलर खर्च करने के लिए [संगीत] दुनिया भर में मशहूर है। अब एक बिल्कुल अलग तरह की हेल्थ बैटल का सामना कर रहे हैं। डोंट डाई लोंगिटिविटी मूवमेंट के पीछे खड़े जॉनसन ने खुलासा किया कि उन्हें ऑटोइ्यून गैस्ट्राइटिस नाम का एक इनक्यूरेबल कंडीशन का पता चला है। जिसमें शरीर का अपना इम्यून सिस्टम ही स्टमक लाइनिंग पर हमला करने लगता है। यानी अंदर से पेट की लाइनिंग को खाने लग जाता है। 48 वर्षीय जॉनसन ने बताया कि यह डायग्नोसिस कई सालों से लगातार लो आयन लेवल्स रहने के बाद सामने आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कंडीशन एक दशक से भी ज्यादा [संगीत] समय तक डिटेक्ट नहीं हो पाई क्योंकि यह अक्सर बिना किसी स्पष्ट सिम्टम के चुपचाप विकसित होती रहती है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में जॉनसन ने लिखा माय स्टमक इज ईटिंग इटसेल्फ यानी मेरा पेट खुद को अंदर से खा रहा है। और तो और उन्होंने बताया कि यह बीमारी स्टमक के एसिड प्रोड्यूसिंग सेल्स को निशाना बनाती है। ऑटोइ्यून गैस्ट्राइटिस को एक क्रॉनिक ऑटोइ्यून डिसऑर्डर माना जाता है जो आयन डेफिशिएंसी, एनीमिया, विटामिन डेफिशिएंसीज और समय [संगीत] के साथ स्टमक कैंसर का रिस्क भी बढ़ा सकता है। अगर समय रहते इसका पता ना चले और मॉनिटरिंग ना की जाए। डॉक्टर्स ने ब्लड टेस्ट, एंटीबॉडी [संगीत] चेकक्स और स्टमक बायोप्सीस के जरिए इस बीमारी की पुष्टि की। यह डायग्नोसिस तब हुआ जब जॉनसन ने अपनी मेडिकल टीम बदली और ज्यादा डिटेल्ड टेस्टिंग [संगीत] करवाई। इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जॉनसन की पब्लिक इमेज और उनकी डायग्नोसिस के बीच बड़ा कंट्राडिक्शन है। उन्होंने एक्सट्रीम हेल्थ ट्रैकिंग, डिसिप्लिन रूटीन और एक महंगे एंटी एजिंग प्रोग्राम के दम पर अपनी पहचान बनाई है। जिस पर कथित तौर पर वो हर साल लगभग $ मिलियन यानी तकरीबन ₹1 करोड़ खर्च करते हैं। लेकिन इतनी इंटेंसिव मॉनिटरिंग के बावजूद भी यह ऑटोइ्यून कंडीशन कई वर्षों तक डिटेक्ट नहीं हो सकी। जॉनसन ने कहा कि यह खबर परेशान करने वाली जरूर है लेकिन हार मानने की वजह नहीं है। उनका कहना है कि वह इस कंडीशन को सिर्फ मैनेज करने तक सीमित नहीं रखेंगे बल्कि [संगीत] इसका गहराई से अध्ययन करेंगे और क्योर तलाशने की कोशिश भी करेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने रिस्चरर्स और डॉक्टर्स के साथ मिलकर डिजीज मार्कर्स को ट्रैक करना और तो और भविष्य के संभावित ट्रीटमेंट्स पर काम शुरू कर दिया है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि इनमें से कई अप्रोचेस अभी भी एक्सपेरिमेंटल है और अप्रूव्ड ट्रीटमेंट्स नहीं है। इस डायग्नोसिस ने इस बात पर भी व्यापक चर्चा छेड़ दी है कि ऑटोइ्यून डिजीजसेस कितनी साइलेंट हो सकती हैं और सिर्फ हेल्दी महसूस करना इस बात की गारंटी नहीं है कि शरीर वास्तव में हेल्दी भी है। खुद जॉनसन ने कहा है द एब्सेंस ऑफ सिम्टम्स इज नॉट द प्रेजेंस ऑफ हेल्थ। माना जा रहा है कि उनका यह संदेश बायो हैकिंग और लोंगिटिविटी कम्युनिटी से कहीं [संगीत] आगे तक असर छोड़ सकता है। फिलहाल जॉनसन का कहना है कि ट्रीटमेंट के जरिए उनके आयन लेवल्स को सामान्य कर दिया गया है। लेकिन उन्हें पूरी जिंदगी मॉनिटरिंग करानी होगी। और जिस व्यक्ति का लक्ष्य लंबे समय से एजिंग को हराना रहा है, अमर बनना रहा है, उसकी यह डायग्नोसिस इस [संगीत] बात की याद दिलाती है कि सबसे केयरफुली ऑप्टिमाइज लाइफस्टाइल भी हर हेल्थ रिस्क को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता। यह है बीपी लाइफ। मेरा नाम है श्वेता शर्मा। [संगीत]