बॉलीवुड में जहाँ शादियाँ टूटना, बदलना और दोबारा घर बसाना एक आम बात मानी जाती है, वहीं एक चेहरा ऐसा भी है जिसने स्क्रीन पर तो हमेशा खूंखार विलेन के किरदार निभाए, लेकिन असल जिंदगी में प्यार और वफादारी की ऐसी मिसाल पेश की जो आज के दौर में दुर्लभ है। यह कहानी है एक्टर राहुल देव की।साल 2009 में जब उनकी पत्नी रीना का कैंसर के कारण निधन हुआ, तो राहुल देव के सामने दो रास्ते थे—या तो वो चमक-दमक वाली दुनिया में लौट जाते और नया जीवनसाथी चुन लेते, या फिर अपनी पत्नी की यादों के सहारे अपने 11 साल के बेटे सिद्धांत के लिए ‘मां और बाप’ दोनों बन जाते। उन्होंने दूसरा और सबसे कठिन रास्ता चुना।
मां और बाप की दोहरी भूमिका:एक अकेले पिता (Single Father) के लिए सबसे बड़ी चुनौती तब आती है जब बच्चे को उस ममता की जरूरत होती है जो सिर्फ एक मां ही दे सकती है। राहुल देव ने खुद एक इंटरव्यू में कुबूल किया था कि “एक मां की कमी को पूरा करना नामुमकिन है, लेकिन मैंने कोशिश की कि मेरे बेटे को कभी ये महसूस न हो कि वो अकेला है।” स्कूल के पीटीएम (PTM) से लेकर रसोई संभालने तक, उन्होंने हर काम खुद किया।
करियर का बलिदान (बॉलीवुड से दूरी):जिस समय राहुल देव का करियर ऊंचाइयों पर था, विलेन के तौर पर उनकी भारी डिमांड थी, ठीक उसी समय उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली। वजह? अगर वो शूटिंग के लिए हफ्तों बाहर रहते, तो उनका बेटा घर पर अकेला रह जाता। उन्होंने पैसों और शोहरत से ऊपर अपने बेटे के बचपन को चुना।
अकेलेपन से लड़ाई:अक्सर लोग भूल जाते हैं कि दिनभर की जिम्मेदारी के बाद जब रात होती है, तो वो अकेलापन कितना डरावना होता है। राहुल देव ने बॉलीवुड के ‘मल्टीपल मैरिज’ के ट्रेंड के बीच भी दोबारा शादी न करने का फैसला किया। उन्होंने अपनी दिवंगत पत्नी के प्रति अपने प्यार और सम्मान को कभी कम नहीं होने दिया।